About : Manish Kumar

Full Name Manish Kumar

I owe my ‘Musafir’ tag to my father who is an avid travel enthusiast. Travelling to new places always gives me a new high which I try to reflect in my travel writings. Apart from travel I am an ardent follower of Indian music & literature and regularly blog about them at 'Ek Shaam Mere Naam'.

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Total Number of travel stories by Manish Kumar at Ghumakkar (24)
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2012-10-23 / Comments (24)

जादू मानसून का : जब छत्तीसगढ़ ने ओढ़ी धानी चुनरिया !

भिलाई से रायपुर होती हुई जैसे ही ट्रेन बिलासपुर की ओर बढ़ी बारिश में भीगे छत्तीसगढ़ के हरे भरे नज़ारों को देखकर सच कहूँ तो मन तृप्त हो गया। मानसून के समय चित्र लेने में सबसे ज्यादा आनंद तब आता है जब हरे भरे धान के खेतों के ऊपर काले मेघों का साया ऍसा हो कि उसके बीच से सूरज की रोशनी छन छन कर हरी भरी वनस्पति पर पड़ रही हो। यक़ीन मानिए जब ये तीनों बातें साथ होती हैं तो मानसूनी चित्र , चित्र नहीं रह जाते बल्कि मानसूनी मैजिक (Monsoon Magic) हो जाते हैं। तो चलिए जनाब आपको ले चलते हैं मानसून के इस जादुई तिलिस्मी संसार में । ज़रा देखूँ तो आप इसके जादू से सम्मोहित होने से कैसे बच पाते हैं ?

गौरी से वो मुलाकात व इकाकुला का हसीन समुद्र तट !

आज की इस कड़ी में आपकी मुलाकात कराएँगे गौरी और उसके एकाकी जीवन से। साथ ही ले चलेंगे आपको इकाकुला के खूबसूरत समुद्र तट पर। साथ ही होगी भितरकनिका से जुड़ी यात्रा संबंधित कुछ महत्त्वपूर्ण जानकारी।

डाँगमाल के मैनग्रोव जंगलों के विचरण में बीती वो सुबह…..

मैनग्रोव के जंगल दलदली और नमकीन पानी वाले दुष्कर इलाके में अपने आपको किस तरह पोषित पल्लवित करते हैं ये तथ्य भी बेहद दिलचस्प है। अपना भोजन बनाने के लिए मैनग्रोव को भी फ्री आक्सीजन एवम् खनिज लवणों की आवश्यकता होती है। चूंकि ये पानी में हमेशा डूबी दलदली जमीन में पलते हैं इसलिए इन्हें भूमि से ना तो आक्सीजन मिल पाती है और ना ही खनिज लवण। पर प्रकृति की लीला देखिए जो जड़े अन्य पौधों में जमीन की गहराइयों में भोजन बनाने के लिए फैल जाती हैं वही मैनग्रोव में ऊपर की ओर बरछी के आकार में बढ़ती हैं। इनकी ऊंचाई 30 सेमी से लेकर 3 मीटर तक हो सकती है। जड़ की बाहरी सतह में अनेक छिद्र बने होते हैं जो हवा से आक्सीजन लेते हैं और नमकीन जल में घुले सोडियम लवणों से मैनग्रोव को छुटकारा दिलाते हैं। मैनग्रोव की पत्तियों की संरचना भी ऍसी होती है जो सोडियम लवण रहित जल को जल्द ही वाष्पीकृत नहीं होने देती।

नज़ारे भितरकनिका के : मैनग्रोव के जंगल, नौका विहार और पक्षियों की दुनिया !

आइए चलें भुवनेश्वर से भितरकनिका के सफ़र पर…

सफ़र सिक्किम का समापन किश्त :गंगटोक और वापसी की भागादौड़ी !

सिक्किम त्रासदी : कुछ फुटकर यादें…

सफ़र सिक्किम का भाग 8 : फूलों की तरह लब खोल कभी, खुशबू की जुबाँ में बोल कभी…

सफर सिक्किम का भाग 7 : बर्फ की वादियाँ , छान्गू झील और कथा बाबा हरभजन सिंह की !

सफ़र सिक्किम का भाग 6 : फूलों की घाटी यूमथांग !

सफ़र सिक्किम का भाग 5 : चोपटा घाटी और लाचुंग की वो निराली सुबह..

सफ़र सिक्किम का भाग 4 : वो तेज़ हवा, बेहोशी और गुरुडांगमार झील…

सफ़र सिक्किम का भाग 3 : लाचेन..थांगू और उससे आगे

सफ़र सिक्किम का भाग 2 : ताशी विउ प्वाइंट से तीस्ता के जन्म स्थान तक

सफ़र सिक्किम का भाग 1 : सिलिगुड़ी के जंगल और वो बलखाती नदी…

आइए आज आपको ले चलें दिल्ली हवाई अड्डे के टर्मिनल 3 के सफ़र पर…

आइए ले चलें आपको नए पटना से पटना साहेब के सफ़र पर

यादें पचमढ़ी की भाग 4: धूपगढ़ -ढलता सूरज आती शाम !

यादें पचमढ़ी की भाग 3 : डचेश फॉल और वो नीचे गिरते पत्थर….

यादें पचमढ़ी की भाग 2 : जब अप्सराओं और महादेव की खोज में छानी हमने जंगलों और गुफाओं की खाक़..!