यादें पचमढ़ी की भाग 2 : जब अप्सराओं और महादेव की खोज में छानी हमने जंगलों और गुफाओं की खाक़..!

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इस यात्रा वृत्तांत के पिछले भाग में आपने पढ़ा कि कैसे राँची से रेल यात्रा प्रारंभ कर हम सब नागपुर पहुँचे। नागपुर में दीक्षा…

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क्या आपके शहर के कार्यालयों की चारदीवारी इतनी सुंदर है ?

क्या आपके शहर के कार्यालयों की चारदीवारी इतनी सुंदर है ?

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भारतीय शहरों में आम तौर पर सरकारी चारदीवारियों को उनके अपने वास्तविक रंगों में कायम रख पाना एक टेढ़ी खीर है। राजनैतिक दलों के…

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आइए ले चलें आपको नए पटना से पटना साहेब के सफ़र पर

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गुरुद्वारे के सामने की सड़क तो उतनी ही संकरी है पर राहत की बात ये हे कि गुरुद्वारे के प्रांगण में गाड़ी रखने की विशाल जगह है। गुरुद्वारे के ठीक सामने रुमालों की दुकान है इसलिए अगर सर पर साफा बाँधने के लिए गर कोई कपड़ा ना भी लाएँ हों तो कोई बात नहीं।

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जादू मानसून का :  जब छत्तीसगढ़ ने ओढ़ी धानी चुनरिया !

जादू मानसून का : जब छत्तीसगढ़ ने ओढ़ी धानी चुनरिया !

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भिलाई से रायपुर होती हुई जैसे ही ट्रेन बिलासपुर की ओर बढ़ी बारिश में भीगे छत्तीसगढ़ के हरे भरे नज़ारों को देखकर सच कहूँ तो मन तृप्त हो गया। मानसून के समय चित्र लेने में सबसे ज्यादा आनंद तब आता है जब हरे भरे धान के खेतों के ऊपर काले मेघों का साया ऍसा हो कि उसके बीच से सूरज की रोशनी छन छन कर हरी भरी वनस्पति पर पड़ रही हो। यक़ीन मानिए जब ये तीनों बातें साथ होती हैं तो मानसूनी चित्र , चित्र नहीं रह जाते बल्कि मानसूनी मैजिक (Monsoon Magic) हो जाते हैं। तो चलिए जनाब आपको ले चलते हैं मानसून के इस जादुई तिलिस्मी संसार में । ज़रा देखूँ तो आप इसके जादू से सम्मोहित होने से कैसे बच पाते हैं ?

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गौरी से वो मुलाकात व इकाकुला का हसीन समुद्र तट !

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आज की इस कड़ी में आपकी मुलाकात कराएँगे गौरी और उसके एकाकी जीवन से। साथ ही ले चलेंगे आपको इकाकुला के खूबसूरत समुद्र तट पर। साथ ही होगी भितरकनिका से जुड़ी यात्रा संबंधित कुछ महत्त्वपूर्ण जानकारी।

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