सुहाना सफ़र और आप

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मैंने घुमक्कड़ पर रूचि लेना अभी कुछ समय पहले ही शुरू किया है अतः आप लोग मुझे घुमक्कड़ परिवार की नयी सदस्य कह सकते हैं. मेरे हसबेंड श्री मुकेश भालसे इस अंतरजाल (वेबसाइट ) से पहले से ही यात्रा वृत्तान्त लेखक के रूप में जुड़े हैं एवं उनकी घुमक्कड़ डोट कॉम के प्रति प्रेम तथा निष्ठा देखकर मैं भी धीरे धीरे इस सम्मानजनक मंच से जुड़ गई तथा अब तो यह स्थिति है की पूजा पाठ के बाद दैनिक कार्यों की शुरुआत घुमक्कड़ के साथ ही होती है. अगर मैं यह कहूँ की घुमक्कड़ हमारे परिवार का एक चहेता सदस्य है तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी.

मैं अपने परिवार के साथ वर्ष में एक या एक से अधिक बार (मुख्यतः धार्मिक स्थान पर) घुमक्कड़ी कर ही लेती हूँ, इन यात्राओं में हमें बहुत से खट्टे मीठे अनुभव होते हैं तथा हर यात्रा हमें कुछ नया सिखा जाती है, अपनी यात्राओं के इन्ही खट्टे मीठे अनुभवों से प्राप्त कुछ महत्वपूर्ण बिन्दुओं को कलमबद्ध करके आज में आपलोगों को प्रस्तुत कर रही हूँ, आशा है की यह जानकारी साथी घुमक्कड़ों के लिए लाभदायक सिद्ध होगी, अगर ऐसा होता है तो मैं समझूंगी की मेरा प्रयास अर्थपूर्ण रहा.
यात्रा शुरू करने से पहले यात्रा सम्बंधित निम्नलिखित सभी महत्वपूर्ण पहलुओं पर गौर कर लें ताकि आपका सफ़र उर्दू वाला सफ़र ही रहे, अंग्रेजी वाला सफ़र (suffer) न बन जाए.

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यात्रा: कभी ख़ुशी कभी ग़म

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औंढा में हमसे अपेक्षाकृत ज्यादा पैसे खर्च हो गए, और अंततः हमारी जेब पूरी तरह से खाली हो गई, लेकिन हमें पूरा विश्वास था की तहसील प्लेस है, इतना बड़ा तीर्थ स्थान है, रोजाना देश के कोने कोने से पर्यटक आते हैं एकाध ए.टी.एम. तो होगा ही….लेकिन जब हम बस स्टॉप पर आये और हमने ए.टी.एम. का पता किया तो हमारे होश फाख्ता हो गए पता चला की औंढा में एक भी ए.टी.एम. नहीं है, हमें औंढा से परली जाना था जो की लगभग साढ़े तीन घंटे का रास्ता था, हमारे पास सिर्फ दो सौ रुपये थे और बस का किराया था 300 रुपये लेकिन हम हिम्मत करके बस में बैठ गए क्योंकि फिर परली के लिए बस कुछ घंटों के बाद ही थी.

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