आस्था और सुन्दरता का संगम – स्वर्ण मंदिर अमृतसर

By

आप को बता दू की अगर बॉर्डर देखने का मन हो तो सुबह या 12/1 बजे तक भीड़ बढ़ने से पहले हो आये ताकि इत्मीनान से देख सके और हो सकता है पाकिस्तानी रेंजर आपको चाय पानी पूछ ले…साधारण दिनों में बॉर्डर पे आपसी भाईचारा और मित्रता का माहौल रहता है दोनों और के सैनिको के मध्य..बातचीत हंसी मजाक..चलता रहता है.

Read More

Mahabalipuram – ‘The Maha Destination’

By

The boat jetty/flight of steps and the miniature shrine and the Varaha sculpture at the basement of the Shore Temple, which were discovered by the ASI between 1990 and 1993, were flooded. Controversies and debates among the archaeologists and historians still persist on the existence of similar structures, submerged into the sea.

Read More

My Experience of Vaishno Devi, Ardhkumari Gufa and Shivkhori

By

Just opposite to “Bhaint Shop”, there is cloak room 1. This is less crowded but a little far from bhawan. Due to less crowd, we preferred that and deposited all our luggage, belt and shoes in that cloak room. Would like to remind, you will need to show your yatra slip over here to obtain cloak room. Another 2 cloak rooms (2 and 3) are near bhawan but are overcrowded. There is not much distance between cloak room 1 and 2 & 3.

Read More

Delhi Jodhpur Road Review

By

Roads till Beawar are in reasonable condition; wide and smooth. There are two issues here, though. First, there are at least three (if I remember correctly) railway crossings which tend to create bottlenecks and hold up the infinite traffic when the gates are closed (and also when gates are open! thanks to long, narrow passages leading into and away from the railway phatak). Second, this stretch passes through industrialised areas including the marble quarries of Kishangarh.

Read More

वाह ताज – खूबसूरती और प्रेम का अनोखा संगम

By

सुबह सुबह साड़े पांच बजे नींद खुल गयी एवं पत्नी का मूड एक बार फिर ताज देखने का हुआ…हलकी ठण्ड में पैदल ही पहुच गये और आश्चर्यचकित हो के देखते क्या है की सिर्फ हम गिने चुने दो चार भारतीय थे और लगभग पांच सात सौ की संख्या में विदेशी पर्यटक…हर देश के …कही से इंग्लिश भाषा सुनाई दे रही थी तो कही कोई गाइड स्पेनिश या जर्मन भाषा में इन पर्यटकों से बात कर रहा था…पता चला की लगभग सभी विदेशी सुबह ही यहाँ आते है भारतीय भीड़ से दूर और ये सुझाव उन्हें गाइड और होटल वाले देते है…पिछले दिन भी विदेशी पर्यटक काफी थे पर आज ऐसा लगा की हम लोग विदेश घुमने आये है …इतने अधिक विदेशी एक साथ एक ही जगह पे भारत में कही नही देखने को मिलते..

Read More

पुष्कर की यात्रा : कबीरा मन निरमल भया….

By

न्दिर से बाहर आ जायो तो ये शहर वही है, जिसका तिलिस्म आपको चुम्बक की तरह से अपनी और आकर्षित करता है | शहर की आबो-हवा मस्त, गलियाँ मस्त, जगह-जगह आवारा घूमती गायें मस्त और सबसे मस्त और फक्कड़ तबियत लिये हैं इस शहर के आम जन और साधू | हर मत, सम्प्रदाय के साधू आपको पुष्कर की गलियों में मिल जायेंगे, हाँ, ये बात अलग है कि असली कौन है और फर्जी कौन इसकी परख आसान नही | मोटे तौर पर सबकी निगाह फिरंगियों पर होती है और फिर फिरंगी भी बड़े मस्त भाव से महीनो इनके साथ ही घूमते रहते हैं, पता नही भारतीय दर्शन के बारे में कितना वो जान पाते होंगे या कितना ये बाबा लोग उन्हें समझा पाते होंगे पर इन्हें देखकर तो पहली नज़र में कुछ यूँ लगता है जैसे गुरु और भक्त दोनों ही भक्ति के किसी ऐसे रस में लींन हैं जिसकी थाह पाना आसान नही, जी हाँ पुष्कर इस के लिए भी जाना जाता है | वैसे, ये बाबा लोग अपने इन फिरंगी भक्तों पर अपना पूरा अधिकार रखते हैं और आपको इन से घुलने-मिलने नही देते |

इस शहर की धार्मिकता, और आध्यात्मिकता के इस बेझोड़ और आलौकिक रस में डूबे-डूबे से आप आगे बढ़तें हैं तो घाट के दूसरी तरफ ही गुरु नानक और गुरु गोबिंद सिंह जी की पुष्कर यात्रा की याद में बना ये शानदार गुरुद्वारा है, पुष्कर में आकर इस गुरूद्वारे के भी दर्शन ! और ऊपर से लंगर का समय ! लगता है ऊपर जरुर कोई मुस्करा कर अपना आशीर्वाद हम पर बरसा रहा है…ज़हे नसीब !!!

Read More

Kasauli Chalein !!!!

By

We ended our first day at the Gilbert’s Trail and headed towards our hotel. Though our hotel was a little away from the main town, but it had lovely location and views. We spent some quality time walking on the pathway leading to the main road, we did countless round of walking but none of us felt anything called tiredness, and at the passageway we made some moments which will be cherished throughout our lives.

Read More

पार्वती घाटी (कुल्लू) में एकल (solo) घुमक्कड़ी — तोष, कसोल और छलाल

By

कसोल से लगभग दो किलोमीटर दूर छलाल गांव तक इस पुल को पार करने के बाद केवल पैदल ही जाया जा सकता है. छलाल गांव में जाने वाला रास्ता पार्वती नदी के किनारे है. रास्ते के एक ओर पार्वती नदी के जल का मधुर स्वर पूरे रास्ते आपके कानों से टकराता रहता है. और दूसरी ओर ऊँचे पर्वत इस मार्ग को मनोहारी बना देते है. देवदार के घने वृक्षों से होकर छलाल गांव तक की पदयात्रा का अनुभव अपने आप में अनूठा है.
छलाल गांव में पहुँचने पर शाम हो चुकी थी. रात्रि विश्राम के लिए छलाल में रूककर अगले दिन आगे की यात्रा का निर्णय लिया.

Read More

नव वर्ष और गोवा

By

यहाँ मैं ये अवश्य बताना चाहूँगा की यूथ हॉस्टल द्वारा आयोजित ये कार्यक्रम इतना सुनियोजित सुसंगठित एवं व्यवस्थित होता है की इसमें आप किसी तरह की कमी नहीं निकाल सकते..स्वादिष्ट नाश्ता शुद्ध शाकाहारी भोजन…इतने न्यून राशि में नव वर्ष को गोवा जैसी अत्यंत महँगी जगह पे आना साधारण मध्य वर्गीय के लिए बहुत मुश्किल के किन्तु इस आयोजन में ये खर्च न्यून से भी न्यूनतम है..इसके लिए आयोजनकर्ता यूथ हॉस्टल वन्दनीय है जिसमे सभी कार्यकर्त्ता वोलेंटियर होते है जो अपने कार्यस्थल से छुट्टी ले के इस 20/25 दिन के आयोजन को सफल बनाते है.

Read More