Bhimtal→Amazing Lake with Island & Naukuchiatal→Nine Cornered Lake (सुहाना सफ़र कुमाऊँ का…4)

October 21, 2012 By:

Table of contents for सुहाना सफ़र कुमाऊँ का

  1. Train Travel to Popular Hill Station → Nainital (सुहाना सफ़र कुमाऊँ का…..1)
  2. Nainital → Glittering Jewel in the Himalayan Mountains (सुहाना सफ़र कुमाऊँ का….2)
  3. Nainital→ Beautiful view point of the city (सुहाना सफ़र कुमाऊँ का….3)
  4. Bhimtal→Amazing Lake with Island & Naukuchiatal→Nine Cornered Lake (सुहाना सफ़र कुमाऊँ का…4)
  5. Sattal→Most Beautiful Lake of Kumaun (सुहाना सफ़र कुमाऊँ का…..5)
  6. Nainital → Shri Nainadevi Temple & Shri Kainchi Dham Temple (सुहाना सफ़र कुमाऊँ का…..6 )
  7. Ranikhet → Himalaya’s beautiful Hill Station (सुहाना सफ़र कुमाऊँ का…..7)
  8. Kausani → A Hill Town with Rich Natural Beauty (सुहाना सफ़र कुमाऊँ का…..8)
  9. Baijnath (Uttrakhand)→Most Ancient Temples of Lord Shiva (सुहाना सफ़र कुमाऊँ का…..9)
  10. Patal Bhuvneshwar → A amazing holy cave in the lap of Himalaya (सुहाना सफ़र कुमाऊँ का….10)
  11. Jageshwar (Jyotirling) → An Ancient Temple group nearby Almora (सुहाना सफ़र कुमाऊँ का…..11)
  12. Nainital→Round of Beautiful Naini Lake (सुहाना सफ़र कुमाऊँ का…..12)

आप लोगो ने मेरा पिछला लेख (सुहाना सफ़र कुमाऊँ का…..3) तो पढ़ा ही होगा, जिसमे मैंने नैनीताल के मुख्य स्थलों की सैर का वर्णन किया था । महान हिमालय पर्वत श्रृंखला में स्थित नैनीताल को प्रकृति ने हरी-भरी, नयनाभिराम वादियों के अलावा नैनीताल में और उसके आसपास के कई जगह पर और भी मीठे पानी की सुन्दर झीले प्रदान की हैं, इन्ही झीलों के अधिकता के कारण नैनीताल को “झीलों की नगरी” या “सरोवर नगरी” भी कहा जाता हैं । नैनीताल परिक्षेत्र में पहाड़ों के बीच सुन्दर वादियों में स्थित झीलों का भ्रमण किये बिना नैनीताल की यात्रा लगभग अधूरी ही रहती हैं । अब अपनी इस कुमाऊँ की श्रृंखला को आगे अग्रसर करते हुए आज की इस लेख में आपको ले चलता हूँ, नैनीताल के आसपास के इलाके में स्थित अदभुत और मन को आत्मविभोर करने वाली प्रकृति की गोद में बसी → झीलों की सैर पर ।

हिमालय दर्शन के बाद हमारा अगला गंतव्य स्थल भीमताल झील था । दोपहर के साढ़े तीन का समय हो रहा था, और इस समय हम लोग तल्लीताल के चौराहे पर पहुँच गए थे । यहाँ से भीमताल जाने के लिए टैक्सी चालक ने कार को बांयी तरफ के भोवाली वाले रास्ते पर ले लिया । यह रास्ता भी काफी साफ़-सुधरा, गड्डे रहित सपाट सड़क, सड़क के किनारे परिवहन संबंधी चिन्हो का उपयोग और साथ में वादियों के खूबसूरत नजारो से भरा पड़ा था ।

Road Map From Nainital To Bhimtal Distance→21KM Approx (यह हैं नैनीताल से भीमताल तक का रास्ता भोवाली से होते हुए )


हम लोग करीब आधा घंटा में भोवाली पहुँच गए । भोवाली क़स्बा, नैनीताल से भीमताल, नौकुचियाताल, सातताल, अल्मोड़ा, मुक्तेश्वर और भी अन्य स्थल जाते समय एक जगह सड़क संधि (As a Road Junction) के रूप में रास्ते में पड़ता हैं । नैनीताल से इसकी दूरी लगभग 11 किमी० हैं और यह एक नैनीताल जिले के अंतर्गत एक पहाड़ी क़स्बा हैं । भोवाली मुख्तय अपने फलो के बाग, फलो की मंडी और टी.बी. के अस्पताल के लिए प्रसिद्ध हैं । भोवाली से परिवहन के अधिकता (वाहनों के आवागमन) के कारण यहाँ पर खाने-पीने का काफी बड़ा अच्छा-खासा बाजार व्यवस्थित हैं । भोवाली में स्थानीय मिठाई जैसे बाल मिठाई, उत्तराखंडी ताजा फल, स्वादिष्ट आचार आदि कुछ यहाँ के बाजारों में उपलब्ध हैं ।

कुछ मिनिट भोवाली में रुकने के बाद अपनी यात्रा को जारी रखते हुए, भीमताल वाले रास्ते पर चलते रहे । भीमताल पहुँचने से कुछ किलोमीटर पहले ही एक बेरियर पर पुलिस ने हमारी गाड़ी रोकी और कहा, “आप लोग इस दाई तरफ के बाईपास वाले रास्ते से जाइए, यहाँ पर एकमार्गीय (One-Way Traffic) व्यवस्था लागू हैं “। भीमताल के बाईपास वाले रास्ते से चलते हुए कुछ समय बाद झील दिखना शुरू हो गयी । इसी झील के किनारे बनी सड़क से चलते और झील देखने का आनन्द लेते हुए होते हुए, भीमताल झील के मुख्य स्थल भीमताल बांध और भीमेश्वर मंदिर के रास्ते के पास डाट नाम के स्थान पर पहुँच गए । इसी स्थान से आगे एक बाए तरफ का एक रास्ता नौकुचिया ताल को जाता हैं ।

भीमताल झील (Bhimtal Lake) की सैर

नैनीताल परिक्षेत्र में भीमताल झील एक प्रसिद्ध जगह हैं, जिसके बारे में पहले भी कई बार लिखा जा चुका हैं । फिर भी मैं आपको अपनी भीमताल यात्रा का वर्णन अपने शब्दों में यहाँ पर कर रहा हूँ ।

टैक्सी चालक ने टैक्सी को कार पार्किंग में लगाने के लिए बीस रूपये पार्किंग शुल्क का भुगतान करके कार को झील की तरफ रोक दिया । कार से उतरने के बाद सबसे पहले झील का दर्शन किये गए । हरे-भरे सुन्दर और प्राचीन पहाड़ी घाटियों के बीच स्थित भीमताल झील नैनीताल और कुमाऊँ क्षेत्र के सबसे बड़ी झील हैं । यह नैनीताल से करीब 21 किलोमीटर और काठगोदाम से 20 किलोमीटर दूर हैं, जो एक सड़क मार्ग द्वारा अच्छी तरह जुड़ा हुआ हैं । भीमताल झील एक त्रिभुजाकार की झील हैं, जो समुंद्रतल करीब 1370 मीटर की ऊँचाई पर स्थित हैं । नैनीताल झील की तरह भीमताल के एक तरफ के कोने को तल्लीताल और दूसरे कोने को मल्लीताल कहते हैं, जो झील के चारों तरफ किनारे-किनारे सड़क मार्ग से जुड़ा हुआ हैं, जिसे गाड़ी से या पैदल चलकर झील का पूरा चक्कर लगाया जा सकता हैं । यदि लम्बाई चौड़ाई की बात करे तो यह झील अधिकतम 1674 मीटर लंबी, 447 मीटर चौड़ी और 40 मीटर तक गहरी हैं । झील की आसपास भीमताल नगर काफी विकसित और जरुरी सुविधाये से परिपूर्ण हैं या फिर यह कह सकते है कि किसी छोटे शहर जैसी सभी सुविधाये यहाँ पर उपलब्ध हैं ।

Beautiful View of Bhimtal with Island (यह भीमताल का मनोरम और मनभावन नजारा…पर झील में जरा पानी कम नजर आ रहा था )

यहाँ से झील का नजारा बड़ा ही खूबसूरत नजर आ रहा था और उस पर बीच में बना टापू (Bhimtal Island) तो सोने पे सुहागा जैसा काम कर रहा था । जो चारों ओर से झील के पानी से घिरा हुआ हैं । इस टापू पर कुछ बड़े-बड़े पेड़ लगे होने के कारण यह दूर से और भी सुन्दर नजर आता हैं । इस टापू पर नाव से किराये (आने और जाने) का भुगतान करके जाया जा सकता हैं, टापू पर जाने से पहले नाव के किराये का मोलभाव जरुर कर लेना चाहिये । पहले इस टापू पर पेड़ो की छाँव में एक रेस्तरा हुआ करता था, इस टापू पर मैं अपनी सबसे पहले की यात्रा में जा चुका हूँ और यहाँ के रेस्तरा में मशहूर कड़ी-चावल का स्वाद में ले चुका हूँ । पर झील में रेस्तरा के द्वारा गंदगी फैलाए जाने के कारण इस टापू पर रेस्तरा की जगह एक मछलीघर (Aquarium) बना दिया गया । इस मछलीघर में विभिन्न प्रजातियों की मछलियों को देखने के लिए प्रति व्यक्ति शुल्क अदा करना होता हैं । समय की कमी के कारण हम लोग झील के बीच बने टापू पर नहीं गए थे तो हम लोगो को मछलीघर और नाव के किराए का कोई अनुमान नहीं हैं ।

झील का पानी चारों तरफ की पहाड़ों की हरियाली के कारण हरे रंग का और कही-कही आकाश के प्रतिबिम्ब के कारण नीले रंग का प्रतीत हो रहा था । इस समय झील में पानी की मात्रा थोड़ी कम नजर आ रही थी, जिससे झील के किनारे सूख गए थे और यहाँ के स्थानीय बच्चो ने इसे अपना खेल का मैदान बना रखा था । पार्किंग के पास कई खाने-पीने और अन्य सामान की दुकाने और झील की तरफ चाट-भल्ले, पानी-पूरी, नीबू पानी और जग प्रसिद्ध मैगी आदि के कई सारी ढेले लगी हुयी थी । बच्चो को थोड़ी भूंख लग रही थी सो उनकी सुविधानुसार उनको वहाँ से खिलाया-पिलाया गया, साथ में हम लोगो ने भी कुछ चाट का स्वाद ले ही लिया ।

A water flow (Gola River) from Bhimtal Lake Dam (बांध से निकलती हुई गोला नदी जो आगे जाकर गार्गी नदी में मिल जाता हैं )

इस झील के किनारे भीमेश्वर मंदिर के पास एक बांध बना हुआ हैं । अल्पाहार करने के पश्चात झील को निहारते हुए हम लोग भीमताल बांध के ठीक ऊपर आ गए । इस बांध से निकलने वाले पानी से एक छोटी सी “गोला ” नाम की नदी की शुरुआत होती हैं और यह नदी आगे जाकर काठगोदाम से होकर जाने वाली “गार्गी नदी” में जाकर मिल जाती हैं । इस समय बांध का दरवाजा खुला हुआ था और तेजी से दुधिया रंग सा प्रतीत होना पानी बड़ी तेजी से नीचे गिरता चला जा रहा था, जो हमे काफी अच्छा लगा । यह जानकार और भी अच्छा लगा की यह गोला नदी का उद्गम भी हैं । बाँध के ऊपर पुल से झील की तरफ झाँकने पर पानी में तैर रही मछलियाँ बड़ी ही प्यारी लग रही थी, झील के बीच में उभरा टापू और झील के दूसरे छोर पर घर, होटल, पहाड़ आदि कुछ मन को प्रसन्नचित्त कर रहे थे । बांध के ऊपर पुल (काफी कम चौड़ाई का) से होते हुए कुछ कदम चलने के बाद हम लोग भीमताल के किनारे यहाँ के प्रसिद्ध प्राचीन भीमेश्वर मंदिर में पहुँच गए ।

A Peepal Tree in Bhimeshwar Temple at BhimTal Lake (प्राचीन अदभुत पीपल का पेड़, जिस पर हैं और भी दूसरे पेड़ का वास, भीमेश्वर मंदिर)

यह मंदिर मुख्यतः भगवान शिव का मंदिर हैं । कहाँ जाता हैं कि इस मंदिर का निर्माण काल महाभारत काल के समय का हैं । इस मंदिर और झील के पीछे एक कथा प्रचलित हैं, जो इस प्रकार हैं । अपने वनवास काल में पांडव विचरण करते हुए इस स्थान पर आये थे, जब उन्हें प्यास लगी तो कही भी उन्हें पानी नहीं मिला । पांडवो में भीम सबसे बलशाली और विशाल आकार के थे, पानी प्राप्ति के ले लिए भीम ने इस स्थान पर अपनी गदा से जमीन पर जोर से प्रहार किया तो जमीन से एक जलधारा फूट पड़ी । तभी से यहाँ पर एक विशाल झील का निर्माण हुआ । इस झील का नाम या तो इसके बड़े आकार के कारण या फिर पांडव भीम के द्वारा निर्माण किया जाने के कारण ” भीमताल ” कहा जाता हैं । पांडवो ने अपने वनवास काल का कुछ वक्त इस स्थान पर रहकर बिताया था और पूजा पाठ के लिए यहाँ पर झील के किनारे भगवान शिवजी का एक मंदिर का निर्माण भी किया, जिसे आजकल भीमेश्वर मंदिर के नाम से जानते हैं । इस मंदिर में भगवान शिवजी एक शिवलिंग के रूप में विराजमान हैं ।

अपने जूते-चप्पल स्टैंड पर रखने के बाद और कुछ सीड़िया नीचे उतरने के बाद मंदिर के प्रांगण में पहुँच जाते हैं । मंदिर में इस समय सफाई कार्य चल रहा था और कुछ लोग ही मंदिर में दर्शन हेतु आये हुए थे । मंदिर में प्राचीन दिव्य शिवलिंग और अन्य देवी-देवताओ के हमने दर्शन किये और उनकी प्रार्थना की । मंदिर के आँगन में एक प्राचीन पीपल का वृक्ष लगा हुआ था । पुजारी जी बता रहे थे की यह एक प्राचीन और चमत्कारिक वृक्ष हैं । इसमें पीपल के पत्तों के साथ-साथ और भी अन्य पेड़ के पत्ते भी उगे हुए हैं । हमने ध्यान से पेड़ का निरीक्षण किया और हमने एक दो फोटो उस पेड़ के ले लिए ।

Beautiful White duck at BhimTal Lake (इन बत्तखो को देखकर बच्चे बड़े खुश हुए और फोटो लेने को कहा )

कुछ समय मंदिर में बिताने के बाद उसी रास्ते से वापिस हो लिए । हम लोगो ने कुछ फोटो भीमताल बांध के ऊपर बने सुन्दर प्लेटफार्म पर लिए और आगे चलते रहे । जब पुल से गुजर रहे तब झील के सूखे स्थल पर कुछ सफ़ेद रंग की सुन्दर बत्तखो का झुण्ड टहलता हुया चला जा रहा था । बत्तखे जोर-जोर से अपनी आवाज में शोर मचा रही थी । बत्तखो को देखना और उनका चिल्लाना यह हमारे बच्चो के लिए बड़े ही कौतहूल का विषय था, सो वह उन बत्तखो के झुण्ड को बड़े ही उत्साहपूर्वक देख खुश हो रहे थे । हमने भी ऊपर से ही कैमरे को नजदीक करके उनका बत्तखो का फोटो लिया और फिर हम लोग अपने रास्ते आगे बढ़ गए ।

भीमताल झील के अच्छे से दर्शन करने के पश्चात समय के मूल्य को समझते हुए, हम लोग जल्द ही टैक्सी में बैठकर पार्किग के पास से ही बाये वाले रास्ते से होते हुए अपने अगले गंतव्य स्थल नौकुचियाताल की तरफ कूच कर गए ।

Road Map From Bhimtal to NaukuchiaTal → 5KM (भीमताल से नौकुचिया ताल का एक सड़क नक्शा )

नौकुचियाताल झील (NaukuchiaTal Lake) की सैर

पहाड़ों के हरे-भरे सीढ़ीदार खेत और हरियाली से घिरे बलखाती पक्की सड़क मार्ग से होते हुए, हम लोगो को कुछ मिनिटो के सफ़र के बाद शांत वातावरण में चारों से हरी-भरी पहाड़ियों से घिरे नौकुचियाताल के दर्शन हो ही जाते हैं । भीमताल से नौकुचिया ताल करीब पांच किलोमीटर और नैनीताल से करीब 26 किमी० दूर स्थित हैं । भीमताल से नौकुचियाताल के बीच रास्ते में एक दो गाँव भी पड़ते हैं, जहाँ पर हरे-भरे खेतों के द्रश्य ही नजर आते हैं ।

हमारे टैक्सी चालक ने कार को झील की शुरुआत में झील से सटे एक छोटे कमल के तालाब के पास बोट स्टैंड पर पर रोकना चाहा तो हमने कहा की,”वो सामने झील के दूसरे किनारे पर स्थित बोट स्टैंड नजर आ रहा हैं, न ! वहाँ पर ले चलो “। चालक ने कहा कि,”वो जगह यहाँ से एक किमी० दूर हैं, और बोट तो आपको यहाँ भी मिल जायेगी “। पर हमने कहा कि,”हमे तो वही ही जाना हैं, आप हमे वहाँ ले चलो “। हमारे कहते हैं चालक झील की किनारे के सुन्दर सड़क मार्ग से होते हुए चल दिया और हम भी सड़क मार्ग से सुन्दर झील का अवलोकन करते हुए चले जा रहे थे ।

Boat Stand at Beautiful NaukuchiaTal (यह रंग-बिरंगी, मन को मोहती बोटो का स्टैंड , नौकुचिया ताल )

नौकुचिया मार्ग से चलते हुए, हम लोग इस सड़क के मार्ग के अंतिम बिंदु तक पहुँच जाते हैं, क्योंकि इससे आगे कोई रास्ता नहीं था । झील के किनारे स्थित इस स्थान पर टैक्सी स्टैंड और एक छोटा सा बाजार जिसमे कई खाने-पीने रेस्तरा, फोटोग्राफी की दुकाने, रोजमर्रा के सामन की दुकाने, शायद ठहरने के लिए होटल और झील में विचरने के लिए एक बोट स्टैंड की व्यवस्था हैं । कार से उतरने के पश्चात हम लोग सीधे झील की दक्षिणी किनारे के बोट स्टैंड पहुंचे, यहाँ से पहाड़ों के बीच शांत वातावरण में मौजूद झील को काफी बड़े भाग में दर्शन करना अपने आप में एक निराला और अदभुत अहसास उत्पन्न करा रहा था । पानी से लबालब भरी झील में ठंडी हवा के चलने से उत्पन्न हल्की लहरे और झील के परिपेक्ष की पहाड़िया झील की सुंदरता में चार-चाँद लगा रही थी । झील के पानी में दूर-दूर तक तैरती रंग-बिरंगी नावे एक मोहक द्रश्य उत्पन्न कर रही थी, जैसे कि किसी ने नीले कागज पर तरह-तरह की रंग-बिरंगी बूंदे डाल दी हो । यहाँ का मौसम बड़ा ही सुहावना था, चिड़ियों के चरचराहट और बहुत ही कम आधुनिकी निर्माण के कारण यह झील को लगभग अपने प्राकृतिक परिवेश में देखना एक सुखद एहसास दे रहा था । कुल मिलाकर यहाँ से नौकुचियाताल का दिलखुश के साथ-साथ मनखुश द्रश्य दिखाई देता रहा था ।

Beautiful Naukuchiatal from Boat Stand (नौकुचियाताल का नयनाभिराम द्रश्य)

समुंदतल से नौकुचियाताल ऊँचाई 1290 मीटर हैं, जो कि भीमताल के मुकाबले कुछ कम है । इस झील की लम्बाई एक किलोमीटर के आसपास, चौड़ाई करीब आधा किलोमीटर से ज्यादा और गहराई 40 मीटर से भी अधिक है । इस झील का आकार अपने आप में विशिष्ठ प्रकार हैं, वो ऐसे की झील के पूरे नौ कोने हैं, इन्ही नौ कोने के कारण इस झील को नौकुचियाताल के नाम से जाना जाता हैं । पौराणिक किद्वंती और यहाँ के स्थानीय लोगो के अनुसार कहते कि जो इस झील के पूरे नौ कोने एक बार में देख लेता हैं, उसे मोक्ष की प्राप्ति होती हैं । खैर इस किद्वंती से हमारा कोई लेना देना नहीं हम तो झील के मनोरम नजारे का लुफ्त लेने आये हुए थे । वैसे हमे तो चार या पांच कोने से ज्यादा एक बार में नजर आ रहे थे ।

कुमाऊँ की सर्वाधिक गहरी झील होने का कारण झील के पानी का रंग नीला नजर आ रहा था । यह रहस्मयी झील चारों तरफ के सुन्दर और घने पेड़-पौधों से लदे पहाड़ियों से घिरा होने के कारण अत्यंत नयनाभिराम नजर आती थी और कही-कही झील के पानी स्पर्श करती हुई झील के किनारे के पेड़ो की डालिया और पत्तिया एक खूबसूरत द्रश्य उजागर कर रही थी । यहाँ झील के आसपास देशी-विदेशी पंक्षी झील के पानी में कलरव करते और विचरण करते देखना एक अपने आप में अदभुत अनुभव होता है । झील के आसपास के शांत वातावरण में कुछ समय बिताने और रहने के लिए कुछ अच्छे होटलों और रेस्तराओ की अच्छी व्यवस्था भी थी ।

Scenic View of NukuchiaTal Lake (बड़े अच्छे लगते हैं ! यह झील और पहाड़ )

नौकुचियाताल क्षेत्र में झील और उसके आसपास मनोरंजन करने हेतु यहाँ पर तरह-तरह की आकार की पैडल बोट, चप्पू से खेने वाली आरामदायक नौका से नौकायन, झील के पानी में जोर्बिंग (Water Zorbing एक प्लास्टिक का बड़ा सा घेरा, जिसका आकार बेलनाकार हैं और उसे हवा की साहयता से से फुलाया जाता हैं, फिर इसके बीच में मनोरंजन करने वाले व्यक्ति को सुरक्षा से बांधकर पानी में तेजी घुमाया जाता हैं ।), झील में पैरासेलिंग, पहाड़ से पैराग्लाइडिंग, जंगल ट्रेकिंग आदि की अच्छी व्यवस्था थी ।

बोट स्टैंड पर हम लोग झील का नजारा ले रहे थे और हमारे बच्चे झील में तैरती सुन्दर नावों के देखकर मचल उठे और झील में नाव से सैर करने की जिद करने लगे । बच्चो की बात सुनकर हमने नाव से सैर करने के लिए मूल्य जानने के लिए अपनी निगाहें इधर-उधर डाली तो एक एक बोर्ड हमे दीवार पर लगा मिला जिस पर से हमे सभी प्रकार के नावों के मूल्य घंटे के हिसाब से ज्ञात हो गए । पैडल बोट हमे खुद चलाने होती है सो हमने चप्पू से चलने वाली नौका (शिकारा) से ही नौकायन कर आनन्द लेने का निश्चय किया । नाव को बुक कराने के लिए हम लोग वहाँ पर बैठे एक व्यक्ति के पास पहुंचे जो सभी नावों का लेखा-झोका एक कॉपी में कर रहा था । हमने उससे एक चप्पू वाली नाव से सैर करने के लिए कहा तो उसने एक आदमी (नाविक) को बुलाकर बात करने को कहा । हमारे पास समय अधिक नहीं था सो हमने उस नाविक से झील में आधा घंटे के लिए सैर को कहा । चप्पू वाली नाव से सैर के एक घंटे के पांच सो रूपये और आधा घंटे के ढाई सो रूपये थे और कोई मोलभाव भी नहीं किया उसने । खैर उसने एक नौका बोट स्टैंड पर लगाकर हम सबको सावधानी पूर्वक उसमे बैठा दिया । हमाने बच्चे उस नाम में चढ़ने से इंकार करने लगे, पर बच्चे तो बच्चे हैं उन्हें तो हंस के आकार वाली पैडल बोट में जो बैठना था । किसी तरह से समझा बुझा कर उस नाव में बैठाया और जब नाव झील के पानी में डगमगाते और चप्पुओ से छप-छप आवाज करते हुए चली तब बच्चो के चेहरे के मुस्कान भी बढ़ गयी ।

NaukuchiaTal during Boating (पानी को छूते हुए झील किनारे के पेड़ के पत्ते एक अलग ही द्रश्य उत्पन्न कर देते हैं )

नौका काफी आरामदायक और सुन्दर थी । सामने व नाव की दोनो तरफ बैठने के लिए गद्दीदार सीटे थी, नाविक नाव को झील के किनारे से खेते हुए ले जा रहा था । नाव से सैर करते हुए हमे झील के किनारे का जन-जीवन नज़र आ रहा था वहाँ रहने वाले कुछ लोगो का अपना निजी किनारा था और वो लोग झील के किनारे टेवल-कुर्सी डाल कर शाम के चाय-नाश्ते के आनन्द अपने परिवार वालो के साथ ले रहे थे । झील के किनारे के ऊपर के पहाड़ पर घने पेड़ो के बीच कुछ पुराने होटल, घर भी नजर आ रहे थे । सैर करते हुए हमे झील पर एक बड़ा सा झुका हुआ पेड़ छोटी पत्तियों वाला झील के काफी भाग तक पानी को छूता हुआ दिखा, हमारे नाविक ने अपनी नाव को उसी पेड़ के अंदर की खाली जगह से होते हुए गुजारा तो हमको एक बहुत खूबसूरत अहसास हुआ ।

Boat Stand from Nukauchiatal during Boating (झील से दिखता सुन्दर बोट स्टैंड और दाए हाथ पर नजर आता पानी का जोर्बिंग)

A beautiful view from NaukuchiaTal ( बोट स्टैंड से नौकुचियाताल का एक और द्रश्य )

नाव से झील सैर करते हुए हम लोगो को बड़ा ही शांति का अहसास हुआ केवल नाव चलाने वाले चप्पू और पानी की आवाज आ रही थी । मौसम बहुत सुहावना था और झील के बीच चलती ठंडी हवा का साथ उसे और भी रूमानी बना रहा था । पता ही नहीं चला कि नाव से झील की सैर करते हुए और कुदरत के नजारे का आनन्द लेते हुए हमारा आधा घंटा कब बीत गया । अब समय था बोट स्टैंड पर लौटने का नाविक ने अपनी नाव का रुख बोट स्टैंड के तरफ वापिस मोड़ लिया । कुछ ही मिनटों में हम लोग बोट स्टैंड पर पहुँचकर उस नाविक का हिसाब किया और उसके मेहनताने के रूपये 250/-शुक्ल प्रेम सहित अदा कर दिया ।

My Children Anshita & Akshat at Swan Style Pedal Boat (यह सुन्दर नावे जो झील की सुंदरता को दुगना करती हैं )

नाव से उतरने के बाद हमारे बच्चो को किनारे पर हंस कि आकार कि बोट लगी मिल गयी तो फटाफट से वो लोग उस पर चढ़ गए और कहने लगे हमारा एक फोटो खीच दो । खैर उस बोट में बैठकर उनका फोटो लिया तभी हमारा टैक्सी चालक हमे ढूढते हुए वहाँ आ पंहुचा और समय का हवाला देते हुए चलने को कहने लगा । दो चार मिनिट इधर-उधर टहलने और बच्चो को खाने-पीने का सामान दिलाने के बाद हम लोग अपनी टैक्सी की तरफ चल दिए ।

अब इस लेख को यही विराम समय हो गया हैं । जल्द ही अपनी इस “कुमाऊँ श्रृंखला” के अगले यात्रा लेख के नई कड़ी में अपने अनुभव के साथ आपके समक्ष प्रस्तुत करूँगा । अगले लेख में आप लोगो को शहर के बाहर स्थित और भी अन्य झीलों की सफ़र पर ले चलूँगा । अगले लेख तक के लिए आप सभी पाठकों को धन्यवाद और राम -राम ! वन्देमातरम

क्रमशः …………….

About Ritesh Gupta

Ritesh Gupta has written 27 posts at Ghumakkar.

Hello Friends, " जो सफ़र की शुरुआत करते हैं, वो ही मंजिल को पार करते हैं, बस एक बार चलने का हौसला रखिये, आप जैसे मुसाफिरों का तो रास्ते भी इंतज़ार करते हैं !! " My email id → [email protected] : My Name is Ritesh K. Gupta. My Home Town is AGRA (U.P.) By profession, I am computer expert in Applications and Accounting and by heart a traveler. Traveling is good for Health and refreshing Mind. Hindi is our National language and I like to Write and read in Hindi.

Getaway Jungle Camp

24 Responses to “Bhimtal→Amazing Lake with Island & Naukuchiatal→Nine Cornered Lake (सुहाना सफ़र कुमाऊँ का…4)”


  1. Wonderful Travelogue Ritesh,

    Both the places I have seen in many posts , But More and More you see , more and more you love it. One day I will definitely visit all these places.

    Thanks for posting . Keep Travelling and Keep Posting.

  2. रूपकुंड की यात्रा का सबसे पहला पडाव मैने भीमताल , सातताल और नौकुचियाताल में किया तो पिछले रविवार की यादे ताजा हो गयी
    आभार इस लेख के लिये

  3. ashok sharma says:

    nice post.both the lakes are superb.good pics.

  4. बहुत खूब, बहुत सुन्दर….जय माता की , वन्देमातरम….

  5. Nandan Jha says:

    रीतेश जी, भीमताल और नौकुचिया ताल का बढ़िया विवरण | शुरू में ऐसा लगा की आप सातताल, गरुड़ ताल भी शामिल करेंगे इस पोस्ट में पर भीम और नौकुचिया ने ही पूरा समां बाँध दिया | जय हिन्द |

    @ Vishal – When you do plan to visit Kumaon, do not forget to give me a call.

    • Ritesh Gupta says:

      नंदन जी….

      लेख पर प्रतिक्रिया के लिए आभार…..| सोच तो रहा था की सातताल भी इस में शामिल कर दूँ पर यही पोस्ट 3500 शब्दों से ऊपर पहुँच गयी तो सोचा की इसे अब अगले लेख में डालूँगा…..|

      जय हिंद…

      धन्यवाद

  6. Mahesh Semwal says:

    भावाली नानिताल से काफ़ी ज़यादा शांत जगह है इस लिए हम भावाली में रुकना पसंद करते हैं बज़ाए नानिताल के |
    वेसे अब तो कोई तंगी नही है , नंदन जी का गेस्ट हाउस है , हम लोगों को तो स्पेशल डिसकाउंट मिल ही जाएगा :-)

    • Ritesh Gupta says:

      सही कहा आपने….नैनीताल के मुकाबले भवाली काफी शांत जगह हैं….| यह सुनकर काफी अच्छा लगा की नंदन जी गेस्ट हॉउस भवाली में हैं…..डिस्काउंट के बारे में तो भाई नंदन जी रौशनी डाल सकते हैं…|
      धन्यवाद

      • Nandan Jha says:

        महेश जी का बड़प्पन है | कोई गेस्ट हाउस नहीं है, एक छोटी सी कुटिया है जो की मेरी धर्म-पत्नी के अधिकार में है | हेहे | कभी उस तरफ जाएँ तो चाय, शरबत के लिए न्योता है | अगर अग्रिम जानकारी हो एक दो रात बिताने के लिए निमंत्रण है|

        • Ritesh Gupta says:

          नंदन जी….
          आपका बहुत-बहुत धन्यवाद चाय शरबत के न्योता के लिए…..|
          अगली बार उस तरफ गए जरुर जायेगे आपकी छोटी सी कुटिया में ….. |

  7. Vipin says:

    बहुत खुबसूरत यात्रा वृतांत, रितेश भाई. नौकुचिया ताल की एक फोटो (ऊपर से तीसरी) ने मुझे हिमाचल की एक झील कुंत भ्योग की याद दिला दी, जो बिलकुल इस फोटो की फोटोकॉपी लगती है…:)… झीलों से मुझे खासा लगाव है लेकिन उत्तरांचली होते हुए भी मैं आज तक इस क्षेत्र से अछूता रहा हूँ…यहाँ ले जाने के लिए शुक्रिया…

    • Ritesh Gupta says:

      आपका बहुत-बहुत धन्यवाद विपिन भाई.
      हिमाचल की एक झील कुंत भ्योग. यह हिमाचल में कहाँ हैं…विपिन भाई….| जरा इसका विवरण दीजिए….|
      धन्यवाद….

  8. Nirdesh says:

    Hi Ritesh,

    Nice post and pictures.

    Someday will take this route.

    Nirdesh

  9. D.L.Narayan says:

    Hi Ritesh, thanks for taking us for a ride on these lovely lakes. As always, very descriptive and accompanied by beautiful images. Especially liked the swan shaped fibreglass boats; have never seen such boats anywhere else.

  10. नौकुचियाताल झील बहुत ही सुंदर दिख रही है, बहुत सुंदर फोटो हैं.

  11. विशेष रूप से इस पोस्ट में शामिल छायाचित्रों की प्रशंसा करना चाहूँगा। वर्णन तो हमेशा की तरह बेजोड़ है ही, लेकिन तस्वीरें …….माशा अल्लाह, एक से बढ़कर एक हैं।

    • Ritesh Gupta says:

      मुकेश जी….
      सुन्दर शब्दों में प्रशंसा से युक्त टिप्पणी के लिए आपका बहुत बहुत आभार..! आपके लेख के छायाचित्र पसंद आये उसके ले भी धन्यवाद



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