वाटरटन नेशनल पार्क और यु.एस. बोर्डर (भाग २) |
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- वाटरटन नेशनल पार्क और यु.एस. बोर्डर (भाग १)
- वाटरटन नेशनल पार्क और यु.एस. बोर्डर (भाग २)
पार्क की सुबह बहुत खूबसूरत थी. हिरण जैसे दो प्राणी घूम रहे थे. सुबह उठ कर एक चक्कर गांव का लगाता हूँ. एक दुकान खुली देख कर अंदर काफी लेने जाता हूँ, साथ ही खाने के लिए एक पेस्ट्री ले लेता हूँ. यह दुकान वाला बहुत सामान बेच रहा था. काफी, ब्रेड चोकलेट, और बहुत सा सामान. पेट्रोल पम्प भी इस दुकान वाले का ही था. साथ में साइकल भी किराये पर दे रहा था. एक साइकल का एक घंटे का किराया १० डॉलर, और हेल्मट के १० डॉलर अलग से. साथ में मोटर बाइक भी किराये के लिए थे. एक साहिब तो अमरीका से अपनी कार पर साइकल बांध कर लाए थे. जहाँ दिल करे मियां, बीवी साइकल की सवारी का आनंद लें. इस गांव की आबादी ५०० लोगों की है, और लाखों लोग हर साल घूमने आते हैं. 6 दिसम्बर 1995 को, वाटरटन ग्लेशियर अंतर्राष्ट्रीय शांति पार्क आधिकारिक तौर पर नामित किया गया था यूनेस्को विश्व विरासत स्थल के र्रूप में इसे मान्यता मिली हुई है, बहुत से भाई अपनी पोस्ट में फूल की फोटो लगाते हैं, मैं भी एक फूल की फोटो लगा रहा हूँ, जो होटल में से ली है.
रेड रोक केन्यन का इतिहास बिलियन साल का है. होटल वाले से रास्ता पूछा, बता रहा था, एक बोर्ड पर लिखा होगा, बाएँ मुड जाना. पर बोर्ड के पास नदी वह रही थी, अब नदी का दायाँ या बाएँ, नदी के दाहिने किनारे चले जाते हैं, पर एक सड़क बाएं किनारे भी जा रही थी, काफी आगे जाने पर एक जगह, कार वाले से पूछा, उसने बताया थोड़ी दूर ही है, सीधे चलते रहो. रेड रोक केन्यन का बोर्ड दिखाई देता है. कार पार्किंग, वाशरूम बने हुए हैं, पर पार्किंग फुल थी. गाड़ी मोड़ कर सड़क के किनारे लगा देते हैं. एक बोर्ड पर इतिहास लिखा है, एक फोटो आप की जानकारी के लिए भी लगा देता हूँ, पर करोड साल पढ़ कर दिमाग घूम जाता है. एक छोटी नदी वह रही थी. चट्टानों का रंग लाल था, एक पुल भी नदी के ऊपर बना हुआ था. यह नदी के किनारे कुछ किमी का ट्रैक बना है. काफी लोग नदी के अंदर चट्टानों पर बेठे थे, फोटो खींचे जा रहे थे, बड़े बड़े पहाड दिखाई दे रहे थे, काफी चहल पहल थी. कुछ लोग साइकल पर भी आये थे. मौसम काफी खुश गवार था. हमने भी कुछ घंटे बिताने के बाद यु.एस. बोर्डर के लिए कार में चल पड़ते हैं. दूरी कोई ३० किमी होगी.
सड़क के किनारे बहुत से पेड़, काफी सुंदर लग रहे थे. चेक पोस्ट पर पहुँच कर पार्किंग में कार खड़ी कर देते हैं, एक और भारतीय परिवार भी वहाँ घूम रहा था, देख कर अच्छा लगा. मन में एक डर, सभी की फोटो आई डी ले कर चेक पोस्ट पर बात की. संतरी जी बोले कोई रूकावट नहीं है, आप यु.एस. की पोस्ट तक जा सकते हैं, पर कभी कभार गार्ड, लोगों के जाने से गुस्सा हो जाते हैं, अगर आप को बोर्डर पार करना तो ठीक, नहीं तो उनके काम में खलल पड़ता है. मुझे वचपन में वाघा बोर्डर का विजिट याद आ गया. कई दिन पहले माता जी, पिता जी ने समझाना शुरू कर दिया था, नो मैंस लैंड ….. पर यहाँ ऐसी कोई बात नहीं थी.
यह आप इंटर नेशनल बोर्डर की बुर्जी देख सकते हैं, एक सीध में पेड़ काट देने के कारण हरी घास की मीलों लंबी लाइन दिख रही है. संसार में कितने देश हैं, और बोर्डर के नाम पर कितना प्राकृति का नुकसान होता है. बुर्जी पर यह लाल सा लगा देखा, मन किया इसे साफ़ कर दूं , पर अचानक बोट पर कमेंटेटर के शब्द याद आ गए, यह फंगस है, जीवन. एक पथर पर कैसे भगवान इस की रक्षा कर रहा है, और मैं कितना अनर्थ करने वाला था.
यु.एस. स्वागत बोर्ड और सामने कार यु.एस. में प्रवेश के लिए खड़ी है, कोई सैनिक दिखाई नहीं दिए. यु.एस. स्वागत बोर्ड और यु.एस. झंडा बता रहा था, दुनिया का सब से शक्तिशाली मुल्क यहाँ से शुरू होता है. कार की चेक्किंग कुछ मिन्ट में कर के जाने की अनुमति दे रहे थे. दूसरी तरफ कैनेडा वाले संतरी जी सिर्फ पासपोर्ट देख कर कारों को कैनेडा भेज रहे थे, कोई चेकिंग नहीं, सोचते होंगे जब US से कार चेक हो कर आई है तो क्यों लोगों का समय खराब करें. हम लोगों से तो कोई बात ही नहीं पूछी. हम भी घूम फिर कर वापसी शुरू कर देते हैं. अल्बर्टा का स्वागती बोर्ड हमारा स्वागत करता है. मीलों लंबे सरसों के खेत रास्ते में दीखते हैं. प्राकृति का तो खूब आनंद ले लिया, अब मानव निर्मित कैलगरी टॉवर पर जाने का विचार बनता हैं. जवानी में अहमदाबाद में टॉवर के बारे में सुना था, अंदर घूमता हुआ रेस्तरां है, पर उस समय पैसा बड़ी चीज थी, अंदर जाना नहीं हुआ था.
३०० किमी के बाद कैलगरी शहर पहुँच जाते हैं. लाल रंग वाला कैलगरी टॉवर 191 मीटर (626 फीट) ऊँचा है, इसे यह 30 जून, 1968 को कैलगरी में सबसे ऊँची संरचना के रूप में जनता के लिए खोला गया था, उस समय यह जरुर लोगों के लिए कोत्हुल रहा होगा, पर अब इसके पास ही काफी ऊँची इमारतें हैं. १५ डॉलर का टिकेट ले कर लिफ्ट के पास पहुँच जाते हैं, लिफ्ट को रंग बिरंगे हैट से सजाया गया है कुछ ही मिन्ट में टॉवर की उपरी मजिल में प्रवेश कर जातें हैं .
टॉवर से शहर का सुंदर द्रश्य दिखाई देता है. ३६० डिग्री के दायरे में कांच लगा हुआ है, शहर का हर कोना देखा जा सकता है. फर्श के सिरे पर भी कांच लगा है, जहाँ खड़े हो कर सीधा नीचे दीखता है. कई लोग तो उस पर पैर रखने से घबरा रहे थे, पर बहुत से उस पर चहल कदमी कर रहे थे. अंदर रेस्तरां बना हुआ है, खाने पीने का लुत्फ़ भी लिया जा सकता है. चारों तरफ दूरबीन लगी हैं, पर मुझे दूरबीन से ज्यादा सीधे देखना अच्छा लगता है.
कुछ टाइम बिताने के बाद वापसी के लिए चल पड़ते हैं. सड़क पर ज्यादा रश नहीं था. पांच घंटे की ड्राइव के बाद ३५० किमी घर पहुँच जाते हैं.
यह यात्रा ७ जुलाई २०१२ की है.
जय श्री राम


































शर्मा जी यह यात्रा भी खूब रही
आज का सबसे जोरदार फोटो बार्डर की घास वाली लाइन वाला रहा, एक देखो अपने बार्डर हजार किमी तक तार ही तार
जाट देवता,
बहुत बहुत धन्यवाद
शर्मा जी, … कितना फर्क है हमारे यहाँ बाघा बोर्डर पार करते ही पाक जेल में . वाह बोर्डर लाइन
बचपन की याद ताजा कर दी जब हम भी किराये पर साइकिल लिया करते थे
रेड रोक के पत्थर काफी खतरनाक लग रहे हैं
ऊपर से देखने पर भारत में छत पर कबाड़ नजर आता है
सर्वेश जी,
सही कहा आपने वाघा बोर्डर तो हिमत वाला ही पार कर सकता है
धन्यवाद
सुरिंदर जी सुंदर लेख, सुंदर छायाचित्र, सुंदर विचार इस के लिए मेरी और से यह सुंदर टिप्पणी|
राज जी,
सुंदर टिप्पणी के लिए बहुत बहुत
धन्यवाद
सही कहा वशिष्ट जी , हमारे यहां के पार्क में और और वहां के पार्को में देखभाल और सफाई का फर्क साफ दिखायी देता है । शर्मा जी नदी के पत्थरो का रंग बडा सुंदर दिखायी दे रहा है पीले फूलो का फोटो शायद चलती गाडी से लिया है । कुल मिलाकर आज अपने एक बहुत ही अच्छी जगह के दर्शन कराये । बस ऐसे ही अपना शहर घुमाते रहिये तो काफी जानकारी हो जायेगी
दूर देश में कोई अपना मिल जाये तो बडा अच्छा लगता है वहां तो आप ये भी बाद में पूछोगे कि कौन से राज्य के हो
मनु जी,
फुल का फोटो चलती कार से लिया है स्पोर्ट मोड का खयाल नहीं रहा. उत्साह वर्धन के लिए धन्यवाद
जय श्री राम
अच्छा विवरण और अच्छे फोटो. बोर्डर का फंदा यहाँ का सबसे अनोखा लगा.
विशाल जी,
पोस्ट पसंद करने का धन्यवाद
Great post, Surinder. Lovely pictures too, especially of wild deer eating grass near human habitations. It was heartwarming to see a border marked by a series of pillars and not by miles of electrified fences. Hopefully, on the auspicious occasion of our Independence Day, I hope and wish for a day when all international borders can only be seen on maps.
D.L.
Thanks a lot for your kind words. Right now it is just imagine all international borders can only be seen on maps. May be true one day
Nice pics.
Anything special with that lift door?
Thanks a lot for your comment. Lift may be attractive in 1970, but now only three Hat and a Barrol.
Oh, barrel.
What does that signify?
None, to attract people, this old useless put there. May be they have story or theme behind it.
सुरिंदर जी…राम राम…..!
आपने हमें कनाडा और अमेरिका के बोर्डर वहाँ के परिवेश, स्थल के बारे अच्छे बताया ….| फोटो बहुत सुन्दर और नयनाभिराम लगे….
धन्यवाद…
Thanks Ritesh,
धन्यवाद , सुरिंदर जी… आपके माध्यम से कनाडा को एक भारतीय की दृष्टि से देखने का मौका मिला | विस्तृत विवरण व सुन्दर फोटोस !!
Thanks a lot
शर्मा जी,
हमेशा की तरह चित्र बहुत सुन्दर लगे. वर्णन भी ठीक ही था. चलिए आपके प्रयासों से हम घर बैठे कनाडा की सैर कर रहे हैं. अब कहाँ लेकर जा रहे हैं?
मुकेश जी,
आप को यह पसंद आया, बहुत बहुत धन्यवाद . वर्णन के लिए कहना चाहूँगा, इतने साल से यहाँ रह रहा हूँ तो आप वोह रोमांच नहीं पाएंगे, जो एक नया मुसाफिर दुसरे देश से आ कर वर्णन करता है. नए लोग विदेश ऐसे पर्स्तुत करते हैं, जैसे पारी लोक की कथा हो. पर मेरे लिए पहले सूरज भारत में उगता है, फिर यहाँ आता है, प्रक्रिति सब जगह एक जैसी सुंदर है, यहाँ विदेश में लोगों का रंग गोरा जरुर है, पर दिल शायद इतना अच्छा नहीं है. अगर आप चाहें तो आप के यहाँ एक मेले में ले कर चलूँगा
Vey good description sirji… red canyon foto is awesome. you can make some of such beautiful fotos in the end giving them big size, for a treat to the eyes
Dear SS,
We were waiting you on Ghumakkar. Thanks a lot for your suggestion.
फोटो बहुत ही अच्छे हैं. सरसों के खेत वाला फोटो तो बहुत ही सुंदर लग रहा है. आपकी पोस्ट के द्वारा घर बैठे ही विदेश के दर्शन हो रहे हैं.
ऐसे मीलों लम्बे सरसों के खेत आप पंजाब में फरवरी मार्च में देख सकते हैं. पोस्ट पसंद करने का बहुत बहुत शुक्रिया
Surinderji,
पोस्ट और तस्वीर, दोनों ही नायाब है.
सीमा का वर्णन और वाघा बोर्डर की तुलना interesting है.
वैसे, इन फिरंगी देशों को दिखावट (सच्ची और बनावटी, दोनों लहजो से ) के लिए full marks देने होंगे.
आपके मनोरम व्याख्यान इन जगहों को और भी लुभावना बना देते है.
Thanks, Auro.
आप के इन सुंदर शब्दों के लिए बहुत बहुत धन्यवाद
बिलकुल स्पष्ट और चमकीले फोटो है , एक गज़ब का साफ़-पन | धन्वायद शर्मा जी इन चित्रों और सैर के लिए | मुझे आपक फोटो पर लगा वाटरमार्क बहुत ही सुश्री लगा, खास कर बस वाली फोटो में तो बहुत ही बढ़िया | मेले के इंतज़ार में |
Hi Nandan,
Thanks a lot for appriciation. For watermark and Photo resize Picasa is good software. It is free and in just one clik I resize 640 and watermark thirty Photos.
बहुत ही बढ़िया रहा शर्मा जी ..आपको ज्वाइन कैसे करू ???
दर्शन जी ,
क्लीक ऑन ज्वाइन घुमकड़ और आप अपनी एक पोस्ट सबमिट कर दें, और फोटो ईमेल से घुमकड़ टीम को भेज दें . घुमकड़ पर दुनिया भर के बहतन लोग अपनी रचनाएं भेजेते और पढ़ते हैं . आप का पोस्ट पढ़ने का बहुत धन्यवाद .
घुमकड़ पर दुनिया भर के बहतरीन लोग अपनी रचनाएं भेजते और पढ़ते हैं
और उन बेहतरीन लेखकों में सुरिंन्द्र शर्मा भी हैं….जो घुमक्कड़ पर बेहतरीन लेख लिख रहे हैं.
सबसे पहले आपका मेरी ब्लॉग पर आने के लिए धन्यवाद!
आपने हमें बहुत ही जीवंत तस्वीरों के साथ एक भारतीय के मन की विश्व बंधुत्व भावना से भरपूर कनाडा और अमेरिका के बोर्डर और वहाँ के परिवेश आदि के के बारे बहुत अच्छे बताया, पढ़कर लगा काश हम ही कभी अपने घर-दफ्तर से फुर्सत होकर देश विदेश घूम पाते..
खैर इस सुन्दर नयनाभिराम प्रस्तुति के लिए आभार
सधन्यवाद!
कविता जी,
आप के इतने प्रोत्साहन के लिए बहुत बहुत धन्यवाद
वाह अच्छा लगा आपके साथ घूम कर.
Thanks Kajal
बहुत सुक्रिया आपका …कम से कम इसी बहाने हमें भी कनाडा को एक भारतीयता की दृष्टि से देखने का सुअवसर मिला ..बहुत सुन्दर फोटोस देखकर मन रम गया ….
एक बार फिर से देखने चली आये ..बच्चों को देखा रही थी …
Thanks Kavita