Train Travel to Popular Hill Station → Nainital (सुहाना सफ़र कुमाऊँ का…..1)

August 12, 2012 By:

Table of contents for सुहाना सफ़र कुमाऊँ का

  1. Train Travel to Popular Hill Station → Nainital (सुहाना सफ़र कुमाऊँ का…..1)
  2. Nainital → Glittering Jewel in the Himalayan Mountains (सुहाना सफ़र कुमाऊँ का….2)
  3. Nainital→ Beautiful view point of the city (सुहाना सफ़र कुमाऊँ का….3)
  4. Bhimtal→Amazing Lake with Island & Naukuchiatal→Nine Cornered Lake (सुहाना सफ़र कुमाऊँ का…4)
  5. Sattal→Most Beautiful Lake of Kumaun (सुहाना सफ़र कुमाऊँ का…..5)
  6. Nainital → Shri Nainadevi Temple & Shri Kainchi Dham Temple (सुहाना सफ़र कुमाऊँ का…..6 )
  7. Ranikhet → Himalaya’s beautiful Hill Station (सुहाना सफ़र कुमाऊँ का…..7)
  8. Kausani → A Hill Town with Rich Natural Beauty (सुहाना सफ़र कुमाऊँ का…..8)
  9. Baijnath (Uttrakhand)→Most Ancient Temples of Lord Shiva (सुहाना सफ़र कुमाऊँ का…..9)
  10. Patal Bhuvneshwar → A amazing holy cave in the lap of Himalaya (सुहाना सफ़र कुमाऊँ का….10)
  11. Jageshwar (Jyotirling) → An Ancient Temple group nearby Almora (सुहाना सफ़र कुमाऊँ का…..11)
  12. Nainital→Round of Beautiful Naini Lake (सुहाना सफ़र कुमाऊँ का…..12)

नमस्कार मित्रों ! अपनी पिछ्ली श्रृंखला ” सुहाना सफ़र मनाली का “  (The Featured Story for the Month of July 2012) के समापन के बाद आज मैं एक नई श्रृंखला शुरू करने जा रहा हूँ → ” सुहाना सफ़र कुमाऊँ का ” । जैसा की हम जानते हैं कि भारत का सत्ताईसवाँ राज्य देवभूमि उत्तराखंड भारत के सबसे खूबसूरत और प्रकृति संपन्न राज्यों में एक हैं और प्रकृति में इसे अपने हाथो से बखूबी सवारा और संजोया हैं, या फिर यह कह लो कि उत्तराखंड में आकर हम लोगो को प्रकृति के विराट स्वरूप के दर्शन हो जाते हैं । उत्तराखंड राज्य को मंडल के आधार पर दो भागो में विभक्त किया गया हैं, पहला गढ़वाल और दूसरा कुमाऊँ । गढ़वाल मंडल में सात (देहरादून, उत्तरकाशी, हरिद्वार, रुद्रप्रयाग, चमोली, पौड़ी और टिहरी जिले) और कुमाऊँ मंडल में छह (नैनीताल, अलमोड़ा, पित्थौरागढ़, चम्पावत, उधमसिंह नगर और बागेश्वर जिले) जिले आते हैं । इस नई श्रृंखला में आपको अपने द्वारा की गयी उत्तराखंड के कुमाऊँ मंडल कुछ जगहों की यात्रा के बारे में अपना अनुभव कुछ कड़ियों के माध्यम से प्रस्तुत करूँगा । वैसे नैनीताल के बारे में घुमक्कड़ पर पहले भी कई बार लिखा जा चुका फिर भी आज की इस कड़ी में, मैं आप लोगो को ले चलता हूँ → ” दिल्ली से काठगोदाम की रेल यात्रा और काठगोदाम से नैनीताल की टैक्सी यात्रा “ पर ।

पेड़ पौधे के साये से नैनी झील का रूप ही निराला दिखता हैं………

Glimpse of beautiful Naini Lake ( मन आत्मविभोर करती पहाड़ों बीच स्थित मनोहारी नैनी झील )


हमेशा की तरह गर्मियों के मौसम में जब सूर्य देव अपनी प्रचंड गर्मी से डराने लगते हैं तो तब मन करता हैं कि मैंदान छोड़कर भाग जाऊ और कुछ दिनों के लिए किसी ठंडी जगह पर शरण ले ली जाये, ऊपर से बच्चो की गर्मियों की छुट्टिया और किसी ठंडी जगह छुट्टिया बिताने के लिए बच्चो का बहुत मन था । हमारे मन में भी घुमक्कड़ी के कीड़े ने बुल-बुलाना शुरू कर दिया तो तुरंत ही मैंने अपना विचार घूमने का बनाया और साथ चलने के लिए नोयडा रहने वाले अपने छोटे भाई अनुज से बात भी की और वह तुरंत अपने परिवार सहित चलने को तैयार हो गया । इस बार हमारा विचार किसी टैक्सी या कार से न जाकर रेलगाड़ी से जाने का था । अब हमेशा की तरह वो ही पहला सवाल कि “कब जाया जाए?” तो जाने की दिनांक को तय किया गया 24-जून-2012 को और दूसरा सवाल कि “कहाँ जाया जाये?” तो सोचा कि इस बार हिमाचल प्रदेश के खूबसूरत हिल स्टेशन “डलहौजी” चलते हैं और पठानकोट तक रेलवे के वेबसाइट (www.irctc.co.in) पर ट्रेन में आरक्षण की जाँच की तो पाया अग्रिम आरक्षण निश्चित दिन और उसी दिन के आसपास की अन्य दिनों में भी उपलब्ध नहीं था । इस बार हमने अपना सारा ध्यान उत्तराखंड के कुमायूं की तरफ कर दिया और “काठगोदाम” तक के लिए ट्रेन में आरक्षण की जाँच की तो उक्त तिथि को हम लोगो को “रानीखेत एक्सप्रेस”के शयनयान श्रेणी में पुरानी दिल्ली स्टेशन से पांच सीटें उपलब्ध हो गयी और फटाफट आरक्षण करा दिया और बेसब्री से यात्रा के दिन की प्रतीक्षा करने लगे । वैसे नैनीताल मैं पहले भी दो बार आगरा से सीधे कुमाऊँ एक्सप्रेस से जा चुका हूँ, अब यह ट्रेन आमान परिवर्तन के कारण आगरा से कई सालो से बंद पड़ी हैं । इस बार हमने नैनीताल में कम और उसके आसपास की जगहो को अधिक घूमने का कार्यक्रम बनाया था, जिन्हें हमने आज तक नहीं घूमा था ।

24-जून-2012 कि सुबह के पौने छह बजे हम लोग (मैं मेरा परिवार) आगरा से दिल्ली-नोयडा के लिए चल दिए । सबसे पहले हम लोग आगरा के भगवान टाकीज चौराहे पर पहुचे और वहाँ पर हम लोगो को उत्तरप्रदेश परिवहन की बस दिल्ली (सराय-काले-खां) के लिए खड़ी मिल गई । हम लोगो के बस में सवार होने के बाद ठीक 6:15 पर बस वहाँ से दिल्ली के लिए रवाना हो गयी । आगरा से दिल्ली-नोयडा तक सफ़र का वर्णन मैं अपने एक पिछले लेख “Agra to Manali Via Noida/Delhi by Car” में कर चुका हूँ, जिसे आप लिकं पर क्लीक करके पढ़ सकते हैं । बस चालक ने इस 200 किमी० के सफ़र में कही भी बस को विश्राम करने के लिए नहीं रोका और हम लोग काफी कम समय में सफ़र तय करके दिल्ली के सराय-काले-खां और फिर लोकल बस से 11:30 बजे की आसपास हम लोग नोयडा स्थित अपने छोटे भाई के आवास पर पहुँच जाते हैं ।

रात को लगभग सवा नौ बजे के आसपास हम लोग खाना खाकर और कुछ खाना रास्ते के लिए पैक करके पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन के लिए चल दिए । सबसे पहले हम लोग ऑटो से नोयडा के सेक्टर 16 के मेट्रो स्टेशन पहुंचे, काउंटर से चांदनीचौक के लिए मेट्रो के टिकट ख़रीदे, एक टिकिट रु०19/- मूल्य का था । मेट्रो में सवार होकर हम लोग राजीव चौक पहुंचे और वहाँ लाइन बदल कर दूसरी मेट्रो से हम लोग 10:15 बजे के आसपास तक चांदनीचौक पहुँच गए । पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन चांदनीचौक मेट्रो स्टेशन से अंदर के रास्ते से कुछ कदम की ही दूरी पर था । स्टेशन पहुँचने पर मालूम किया तो पता चला कि रानीखेत एक्सप्रेस प्लेटफार्म न०12 पर अपने निर्धारित समय 10:40 से दस मिनिट लेट आएगी, अब आप सोच रहे होगे कि गाड़ी जब बनती यहाँ से तो लेट का क्या मतलब तो आपको बता दूँ की यह गाड़ी अजमेर से आती हैं और फिर यहाँ से दुबारा बनकर काठगोदाम के लिए चलती हैं । अभी समय काफी था सो हम लोग आराम से अपना सामान लेकर ओवरब्रिज के रास्ते से प्लेटफार्म न०12 पहुँच गए । इस समय प्लेटफार्म पर बहुत अधिक भीड़ थी, मुश्किल से अपना सामान एक खाली जगह देखकर टिकाया और गाड़ी कि प्रतीक्षा में स्टेशन पर टहलते रहे थे । हमारी भारतीय रेलवे में अक्सर होता रहता हैं, कि एन वक्त पर गाड़ी का प्लेटफार्म बदल दिया जाता हैं और फिर यात्रीगण अपना सारा सामान समेटकर कर दूसरी प्लेटफार्म की ओर भागता हैं । ऐसा ही कुछ हमारी प्रतीक्षारत ट्रेन के लिए भी उदघोष हुआ कि, “यात्रीगण कृपया ध्यान दे, पुरानी दिल्ली से चलकर मुरादाबाद, रामपुर के रास्ते काठगोदाम जाने वाली गाड़ी संख्या 15013 रानीखेत एक्सप्रेस प्लेटफार्म न०12 के स्थान पर अब प्लेटफार्म न०13 आएगी,आपको हुई इस असुविधा के लिए हमे खेद हैं”। हमारे साथ गनीमत यह रही की प्लेटफार्म न०12 और 13 एक ही पर थे, बस हम लोगों ने फटाफट अपना सारा सामान समेटकर प्लेटफार्म न०13 पहुँच गए ।

Ranikhet Express at Platfrom No. 13, Old Delhi Railway Station (रानीखेत एक्सप्रेस)

प्लेटफार्म पर खड़ी रानीखेत एक्सप्रेस

रानीखेत एक्सप्रेस 10:50 बजकर प्लेटफार्म पर आ गयी और हम लोग अपना सही डिब्बा ढुंढने के बाद अपनी आरक्षित सीट पर बैठ गए । ट्रेन के अंदर बहुत गर्मी थी, पर दस मिनिट के पश्चात गाड़ी ने धीरे-धीरे स्टेशन से सरकते हुए गति पकड़ ली, तभी ट्रेन की खिड़की ठंडी हवा का आवागमन शुरू हुआ । गाड़ी चलते ही हम लोगो ने अपना सारा सामान सीट के नीचे लगा दिया और एक चैन से लॉक कर दिया । थोड़ी देर बाद बच्चो भूख लगी तो उन्हे खाना खिलाकर कर हम लोग रेल यात्रा का आनन्द लेते रहे, हमारे दोनों बच्चे सबसे ऊपर की सीट पर पहुँच गए । कुछ देर बाद टी.टी टिकिट चेक करने आ गया, टिकिट मेरे छोटे भाई के मोबाइल में SMS रूप में थी और उसने इस SMS से हमारी आरक्षित सीट को चेक करा दिया । एक सीट हमारे तरफ की खाली थी जिसे टी.टी. ने सौ रूपये लेकर हमारे सामने बैठे प्रतीक्षारत एक व्यक्ति को आवंटित कर दी । हम लोगो ने काफी समय आपस में बात करते हुए बिता दिया और जब बैठे-बैठे थक गए तो आराम करने के लिए सभी लोग अपनी सीट पर पहुँच गए पर मैं खिड़की पास ही बैठा रहा और ठंडी हवा का आनन्द लेने के साथ-साथ खिड़की से बाहर रात के अँधेरे में देखने का असफल प्रयास भी करता रहा । किसी झूले की तरह हिलती-डुलती और आवाज करती हुई ट्रेन के शोर के बीच हल्की सी नींद भी आने लगी थी । जब हल्की से नींद लेने का प्रयास करते तभी अचानक से तेज हवा के झोके के साथ दूसरी रेल लाइन से तेज सिटी की आवाज के साथ दूसरी ट्रेन विपरीत दिशा से गुजर जाती और नींद उचट जाती थी । बीच-बीच में ट्रेन के शोरगुल के मध्य कही-कही से गाड़ी की सिटी की आवाज भी सुनाई दे जाती तो मन में एक पुराना गीत → ” गाड़ी बुला रही हैं , सिटी बजा रही हैं  ” याद आ जाता । जब ट्रेन अपने किसी ठहराव वाले स्टेशन रूकती तो रात के सन्नाटे में बाहर से एक आवाज अक्सर सुनाई देती ” चाय-चाय गर्म चाय ” और चाय बेचने वाले खिड़की से आवाज लगाते ” साहब ! चाय दूँ क्या ? ” और हम कह देते,” नहीं चाहिये भाई !”

रात के समय यदि कही वीराने में ट्रेन रुक जाती तो यह जानने की तीव्र इच्छा होती थी कि ट्रेन कहां तक पहुँच गयी और हमारी मंजील अभी कितनी दूर और हैं तो यही जानने के लिए मैं अपने मोबाइल का GPS शुरू करके उसमे से सारी जानकारी हासिल कर लेता थी । GPS एक अच्छा उपकरण या सोफ्टवेयर जो हमें अपनी वर्तमान की सारी भौगोलिक और रास्ते की जानकारी बखूबी हमको उपलब्ध करता हैं । इसी तरह ट्रेन कई स्टेशनों पर रुकते-रुकाते चलती रही, इस बीच ट्रेन अपने निर्धारित समय से लगभग एक घंटा विलंब भी हो गयी और कई जगह बेहद धीमे चल से चलती रही । हद तो तब हो गयी जब रात के दो बज रहे थे और ट्रेन मुरादाबाद स्टेशन पर खड़ी हो गयी और चलने का नाम नहीं ले रही थी । उसी बीच सामने के प्लेटफार्म से कई ट्रेन गुजर गई जैसे हमें चिढ़ा रही हो तुम यही खड़ें ही रहो हम तो चले अपने सफ़र पर ।

काफी देर ट्रेन के ठहराव के करण गाड़ी में अंदर बैठे मुसाफिर गर्मी से कुलबुलाने लगे और बाहर टहल रहे लोगो से ट्रेन की देरी का कारण पूछते रहे, किसी को कोई कारण मालूम हो, तभी तो जबाब देता । मैं भी ट्रेन की अंदर की गर्मी से तंग आकर गाड़ी से बाहर आया गया और प्लेटफार्म पर टहलने लगा तभी पास खिड़की से एक महिला की आवाज आयी,” भैया ! रामपुर आ गया क्या ? ” मैंने कहाँ ,”अभी नहीं! अभी गाड़ी मुरादाबाद स्टेशन पर हैं ” । उस महिला ने फिर कहाँ, “अब तक तो गाड़ी रामपुर होने चाहिए, यह गाड़ी लेट क्यों हो रही हैं और यहाँ पर इतनी देर से क्यों खड़ी हैं ।” मैंने कहाँ, “मुझे कारण नहीं मालूम”, और मन में कहाँ,” क्या कारण बताऊँ इनको, ट्रेन ड्राइवर तो हूँ नही मैं, जो सही कारण इनको बता सकूं”। करीब दो घंटे के लंबी प्रतीक्षा के बाद लगभग सुबह के चार बजे हरा सिग्नल हुआ, गाड़ी ने जोर से सीटी दी और धीरे-धीरे अपने स्टेशन से आगे कि तरफ खिसकना शुरू कर दिया । जल्दी से अंदर आकार गाड़ी में अपने सीट पर बैठने के बाद मैं मन इस ट्रेन को कोसने लगा की यह गाड़ी तो पैसंजर ट्रेन से भी गयी बीती हैं,जहाँ मन चाहा काफी देर रोक दिया गया । धीरे-धीरे रात का अँधेरा छटने लगा और सुबह का उजाला दिखने लगा था और अब खिड़की से बाहर का दूर तक नजारा, खेत, खलिहान, पटरियों के किनारे के बने घर, फैक्ट्रिया आदि कुछ दिखने लगा था । एक स्टेशन पर गाड़ी रुकने पर हमने बाहर से चाय लेकर सुबह का शुभारंभ किया और बाकी का समय खिड़की से बाहर के नजारे देखते हुए ही बिता दिया ।

A Picture of Kathgodam Station ( काठगोदाम रेलवे स्टेशन )

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25-जून-2012 को ठीक सवा आठ बजे हमारी ट्रेन काठगोदाम स्टेशन पहुँच गयी, रानीखेत एक्सप्रेस का यहाँ पहुँचने का समय सुबह के 5:05 का था, इसका मतलब यह ट्रेन तीन घंटे से भी ऊपर लेट हो गयी थी । हमने रेलवे को फिर कोसा कि रेलवे प्रशासन को तनिक भी यात्रियों के समय की कद्र ही नही हैं, गाड़ी लेट होने से कितने ही लोगो का काम खराब हो जाता होगा । खैर हमने अपना सारा सामान समेटा और ट्रेन से बाहर आ गए । अब हमें यहाँ से नैनीताल जाना था; जो कि काठगोदाम रेलवे स्टेशन से NH87 (NH87* → रामपुर से कर्णप्रयाग तक) होते हुए करीब 34 किमी० दूरी पर था । नैनीताल पहुँचने के लिए स्टेशन से लोकल टैक्सी की काफी अच्छी व्यवस्था थी । हम लोग अपना सामान लेकर स्टेशन से बाहर जा रहे थे, तभी एक टैक्सी वाला आया और बोला, “आप नैनीताल जाओगे?” हमने कहाँ,” हाँ भाई ! कितना लोगो नैनीताल तक का ?” उसने कहाँ, “पांच सौ रूपये लगेंगे !” हमने कहाँ,” हम तो चार सौ रूपये ही देगें!” पर वो चार सौ रूपये में जाने को तैयार नहीं हुआ । कुछ देर बाद ही दूसरे टैक्सी वाले एक सरदार जी आये और वह चार सौ रूपये में नैनीताल चलने के लिए तैयार हो गया । इस समय पहाड़ों पर सीजन होने के कारण हमारे हिसाब से यह टैक्सी का किराया भी काफी महंगा था, यदि ऑफ सीजन होता तो यही टैक्सी किराया नैनीताल तक का 250 से 300 रूपये तक होता, पर क्या करे सीजन में घूमना हैं तो इस महंगाई को भी झेलना पड़ता हैं । स्टेशन से बाहर आकर टैक्सी में हमने अपना सामान रखा और बैठ कर नैनीताल की ओर चल दिए । सरदार जी ने हमें बताया कि नैनीताल में अब टैक्सी के रूप में डीजल के मुकाबले पेट्रोल गाड़ी को ही टैक्सी के रूप में ही मान्यता है, इसलिए यहाँ पर अधिकतर पेट्रोल गाड़ी ही टैक्सी के रूप में मिलेगी और भाड़ा भी थोड़ा महंगा पड़ता हैं । हमने कहा यह तो अच्छी बात हैं, इससे तो पर्यावरण भी काफी हद तक प्रदूषण से सुरक्षित रहेगा ।

On the way of Nanital City ( हरे-भरे पहाड़ी रास्ते की शुरुआत)

Beautiful Pine Tree at Road Side on the Way of Nainital ( पाइन वृक्षों के साथ एक खूबसूरत नजारा )

काठगोदाम से कुछ किलोमीटर चलने के बाद पहाड़ दिखने लगे और समतल रास्ता धीरे-धीरे पहाड़ी रास्ते में बदलना शुरू हो गया । अब हमारी गाड़ी नैनीताल के सुन्दर, गड्डे रहित, नागिन से बलखाती, हरेभरे पहाड़ों के बीच चौड़े मार्ग (हाइवे) दौड़ रही थी । पहाड़ी रास्ते के खाई किनारे काफी खूबसूरती से रंग किये हुए सीमेंट के चौक, रात में चमकने वाले चिन्ह बने हुए हुए थे । जैसे-जैसे हम लोग नैनीताल के तरफ बढ़ते जा रहे थे वैसे-वैसे मौसम में भी बदलाव शुरू हो गया था । अब मौसम पहले के अपेक्षाकृत काफी ठंडा और सुहावना हो गया था, हवा भी ठंडी चल रही थी ।

A View of Nainital Road Side ( बच्चो ने कहाँ कि हमारी भी फोटो खींचो इस पर बैठाकर)

Beautiful Road View toward the Nainital ( पहाड़ों पर चढ़ाई के समय सुन्दर रास्ते का नजारा )

लगभग आधा घंटा चलने के बाद हमें कुछ परेशानी आने के कारण थोड़ी देर के लिए टैक्सी को हाइवे के किनारे एक सुन्दर सी जगह पर गाड़ी रोक लिया । गाड़ी से बाहर आकार हम लोग में पहाड़ों का और तेज गति से चल रही ठंडी हवा का आनन्द लेने लगे । घाटी में और सड़क के किनारे हरे-भरे पाइन के पेड़ बहुत ही सुन्दर नजारा प्रस्तुत कर रहे थे । कुछ खूबसूरत फोटो मैंने इसी विश्राम के समय पहाड़ों, पाइन वृक्ष और नागिन से बलखाती सुन्दर सड़क के खींचे जिसे मैंने लेख में लगाये हैं लगभग दस मिनिट सड़क किनारे की वादियों में बिताने के पश्चात हम लोग नैनीताल की ओर चल दिए ।

Beautiful Pine Trees on the Midway (बड़े ही सुन्दर लगते हैं पहाड़ी पेड़,पौधे )

Road View toward the Kathgodam (पहाड़ों के बीच नागिन सी बलखाती सुन्दर पहाड़ी सड़क)

रास्ते में हमने सरदारजी से अपने घूमने के कार्यक्रम पर बातचीत शुरू की और अपनी आगे की कुमाऊँ यात्रा के कुछ जगह पर घूमने की योजना भी बताई । नैनीताल से आगे का घूमने का हमारा कार्यक्रम करीब तीन दिनों का था । अपनी योजना बताने के बाद हमने सरदारजी से इस यात्रा के लिए टैक्सी भाड़ा पूछा तो सरदारजी जी ने हमें अपना मोबाईल नंबर देकर कहा कि आप शाम को मालुम कर लेना, मैं आपको इस यात्रा का टैक्सी भाड़ा बता दूँगा और यह भी बता दूँगा की यह तीन दिनों हो जाएगा की नहीं । अब मैं आपको अपने तीन दिनों के कुमाऊँ घूमने की योजना भी बता देता हूँ । हमारी योजना नैनीताल से श्री कैची धाम, रानीखेत, कौसानी, बैजनाथ, पाताल भुवनेश्वर, जागेश्वर और अल्मोड़ा होते हुए वापिस नैनीताल आने की थी ।

इसी बीच हम लोग बातचीत करते हुए नैनीताल पहुँच गए । सरदार जी ने हमें नैनीताल बस स्टैंड से कुछ २०० मीटर पहले एक कमरा किराए पर लेने के हेतु दिखाया । यह कमरा दो मंजील ऊपर और कुछ गन्दी से जगह पर था जो हमें बिल्कुल भी पसंद नहीं आया और हाँ किराया पूछा तो बताया पूरे दो हजार रूपये । हम तो चौंक गए की यदि इस नापसंद और छोटे से कमरे का किराया दो हजार हैं तो नैनीताल के अच्छी और मुख्य जगह पर तो कमरे और भी महंगे मिलेंगे । सीजन चरम पर होने के कारण हमने अपने मन में बैठा लिया कि अब हमें नैनीताल काफी महंगा पड़ने वाला हैं । हमने सरदारजी से कहाँ की आप हमें आगे अपने टैक्सी के ठहराव पर उतार दो, हम लोग अपना कमरा स्वयं ढूंढ लेगे । उसने हमें नैनीताल में तल्लीताल के बस स्टैंड से कुछ कदम पहले काठगोदाम रोड पर ही उतार दिया । हम लोगो ने अपना सामान समेटा और वहाँ से पैदल ही सामान लेकर चल दिए । थोड़ा पैदल चलने के बाद बस स्टैंड के सामने हमारा अभिवादन करती हुयी सुन्दर और विराट हरे पानी से परिपूर्ण नैनी झील नजर आयी । झील में तैर रही नावे बड़ी ही प्यारी लग रही थी । नैनीताल का मौसम और माहौल का तो क्या कहना, बिल्कुल शांत, ठंडा और सुहावना । हम लोग वही किनारे से खड़े होकर काफी देर तक नैनी झील के मनोहारी द्रश्य को निहारते रहे ।

First glimpse on Naini Lake at TalliTal Side (नैनीताल पहुँचने पर नैनी झील के विराट दर्शन )

अब मैं आज के इस लेख को अब यही विराम देता हूँ । जल्द ही मिलता हूँ फिर अपनी इस कुमाऊँ श्रृंखला की अगली यादगार यात्रा लेख के नई कड़ी के साथ । अगले लेख में मैं आप लोगो को शहर के विभिन्न स्थल “नैनीताल के दर्शन” पर ले चलूँगा । आपको आज का यह लेख कैसा लगा, आपकी प्रतिक्रिया और सलाह का हमेशा स्वागत हैं । अगले लेख तक के लिए आप सभी को धन्यवाद और राम -राम !
क्रमशः ………..

About Ritesh Gupta

Ritesh Gupta has written 27 posts at Ghumakkar.

Hello Friends, " जो सफ़र की शुरुआत करते हैं, वो ही मंजिल को पार करते हैं, बस एक बार चलने का हौसला रखिये, आप जैसे मुसाफिरों का तो रास्ते भी इंतज़ार करते हैं !! " My email id → [email protected] : My Name is Ritesh K. Gupta. My Home Town is AGRA (U.P.) By profession, I am computer expert in Applications and Accounting and by heart a traveler. Traveling is good for Health and refreshing Mind. Hindi is our National language and I like to Write and read in Hindi.

Getaway Jungle Camp

36 Responses to “Train Travel to Popular Hill Station → Nainital (सुहाना सफ़र कुमाऊँ का…..1)”


  1. Surinder Sharma says:

    रितेश जी,

    यात्रा आलेख हमेशा की तरह सुंदर है, इस बार फोटो और भी अच्छे लग रहे हैं. ट्रेन का वर्णन बहुत अच्छा लगा. देखने का मोबाइल कम्पनी चार्ज करती हैं या यह सीधे सेट लाइट से सिग्नल लेता है. यात्रा शेयर करने का धन्यवाद.

    राम राम

  2. Surinder Sharma says:

    GPS देखने का मोबाइल कम्पनी चार्ज करती हैं या यह सीधे सेट लाइट से सिग्नल लेता है

    • Ritesh Gupta says:

      सुरिंदर जी….राम राम !
      GPS पर देखने के लिए कम्पनी कोई चार्ज नहीं करती हैं…हाँ इन्टरनेट का चार्ज जरुर लगता हैं | GPS… Map को लोड करने के लिए नेट का और हमारी Position दिखाने के लिए सीधे सैटेलाइट का उपयोग करता हैं ..| इसका मतलब मोबाइल का जीपीएस नेट और सैटेलाइट दोनों के सयोजन से चलता हैं |परन्तु कार के GPS के बारे में नहीं कह सकता हो सकता हैं वो केवल सेटेलाइट से सीधे चलता हो …क्योकि उस डिवाइस में मेप पहले से ही लोड रहता रहता |
      लेख को पसंद करने के लिए आभार …|

      • Surinder Sharma says:

        जानकारी का धन्यवाद. कार का GPS सीधे सेट लाइट से सिग्नल लेता है, और नक्शा पहले से अपलोड होता है, इस लिए नेटवर्क प्रॉब्लम नहीं होती. GPS की बेटरी भी कार के साथ चार्ज होती है, इस लिए बेटरी डाउन की प्रॉब्लम नहीं आती. GPS बोल के रास्ते के बारे में बताता है, और डेशबोर्ड पर माउन्ट होता है, इस लिए ड्राईवर जब १०० किमी की स्पीड से गाड़ी चलाता है. तो कोई रिस्क फेक्टर नहीं होता. पर GPS कम्पनी वाले कुछ महीने बाद नक्शा अप डेट करते रहते हैं, और उसके वह चार्ज करते हैं. कई बार लाइफ टाइम नक्शा अप डेट फ्री होता है, या नेट पर फ्री साईट से अपडेट हो सकता है.

        धन्यवाद

        • मैं थोड़ी जानकारी देना चाहूँगा कि मोबाइल में भी ऐसा जरूरी नहीं कि GPS के लिए इन्टरनेट जरूरी है. आप यदि मोबाइल में Google Maps का प्रयोग कर रहे हैं तब ये ज़रूरी है लेकिन अन्य maps जैसे Nokia Maps में आपको इन्टरनेट प्रयोग करने या ना करने की छूट है. हाँ, जब आप इन्टरनेट के साथ GPS प्रयोग करते हैं तो ये थोडा जल्दी काम करता है और तब इसे A-GPS (Assisted GPS) कहते हैं.

          • Ritesh Gupta says:

            दीपेंद्र जी….
            जैसा आपने बताया बिल्कुल ऐसा ही हैं GPS सिस्टम ……..इसी प्रकार से काम करता हैं यह सिस्टम…|
            जानकारी के लिए धन्यवाद …..

  3. JATDEVTA says:

    करीब दो घंटे के लंबी प्रतीक्षा के बाद लगभग सुबह के चार बजे हरा सिग्नल हुआ, सुपरफास्ट गाड़ी के साथ ऐसा का, ही होता है, यहाँ के कुछ अनछुए पहलु भी दिखाइएगा,

    • Ritesh Gupta says:

      पर उस दिन हमारे साथ ऐसा ही हुआ था और गर्मी व् मच्छरों के पपरेशान भी बहुत हुए थे ……… मुझे तो नहीं लगता की रानीखेत एक्सप्रेस एक सुपरफास्ट ट्रेन ..गाड़ी संख्या के (१५०१३) हिसाब से तो यह एक्सप्रेस ट्रेन हैं….|
      पूरी कोशिश रहेगी कि अधिक से अधिक यहाँ के बारे में लिख सकूँ…|

  4. raj jogi says:

    रितेश जी नमस्कार,
    आपकी पोस्ट लिखने का तरीका बहुत अच्छा है | एक क्रमबद्ध तरीके से सुंदर विवरणात्मक छायाचित्रों के साथ | हमें ऐसा लगता है की हम भी यात्रा कर रहे है आपके साथ |

    • Ritesh Gupta says:

      नमस्कार जोगी जी….
      लेख पर सुन्दर व्यक्तव्य प्रकट करने के लिए धन्यवाद…..!

  5. बहुत दिनों के बाद घुमाक्कर पर कमेन्ट कर रहा हूँ रितेश जी.
    इस बात पर कोई शक नहीं कि घुमाक्कर पर सबसे बढ़िया बारीकी वाले विवरण करने में आपका नाम टॉप के लेखकों में है.

    Wonderful detailed description. This is my one of the dream places to stay permanently, Nainital. Lets see God fulfills my desire or not.

    नैनीताल से श्री कैची धाम, रानीखेत, कौसानी, बैजनाथ, पाताल भुवनेश्वर, जागेश्वर और अल्मोड़ा होते हुए वापिस नैनीताल . यह एक बहुत बढ़िया प्लान है लेकिन केवल तीन दिन. यानी मुझे मुंबई से इन जगहों पर जाने के लिए केवल ६ दिन चाहिए. ८ दिन अगर है मेरे पास तो सुपर डुपर ट्रिप हो जायेगी.

    यह सीरीस हो सके तो ज़रा जल्दी जल्दी लिखना. मुझे इन्तेज़ार रहेगा.

    • Ritesh Gupta says:

      विशाल जी…..आपका स्वागत हैं |
      उत्साहवर्धक टिप्पणी के लिए धन्यवाद…!
      अब तो आपका पहाड़ों का सफ़र (हिमालय) भी शुरू हो गया हैं और मुझे लगता हैं जल्द ही आप इस जगह पर भी जायेंगे …|
      सही कहाँ आपने यदि आपके पास आठ दिन हो यह प्लान बहुत बढ़िया और आराम से पूरा हो जाएगा ….|
      अपनी कोशिश जारी रहेगी जल्द जल्द लिखने की….
      धन्यवाद!

  6. sarvesh n vashistha says:

    हम भी साथ चल रहें हैं … यात्रा छोटी न करना … कुमायूं पूरा देखना है

    • Ritesh Gupta says:

      धन्यवाद…! ऐसे ही साथ-साथ चलते रहना ….LOL….
      इस श्रृंखला में जो मैंने देखा उसे बिल्कुल पूरे विवरण के साथ ही प्रस्तुत करने की कोशिश रहेगी….|

  7. पाताल भुवनेश्वर और जागेश्वर का इंतजार रहेगा क्येांकि इन दोनेा जगहो पर मै नही गया हूं बाकी नैनीताल की खूबसूरत वादियो को आपकी खूबसूरत लेखनी का इंतजार है

    • Ritesh Gupta says:

      धन्यावाद मनु भाई….. पाताल भुवनेश्वर और जागेश्वर का इंतजार भी आपका पूरा होगा…अपनी कोशिश जारी हैं….|

  8. Mahesh Semwal says:

    बहुत खूब | गढ़वाल का तो मुज़े टिक तक ज्ञान है पर कुमायूं का उतना नही है | कुमायूं मैं बस नैनीताल, रानीखेत, कौसानी, बैजनाथ ओर नैनीताल के आस पास के लेक देखे है | पाताल भुवनेश्वर, जागेश्वर व बिंसर देखने की ख्वाइश है|

    पोस्ट में बस दो रंग ही प्रयोग करे , अनेक रंग से पोस्ट में उतना मज़ा नही आता | ये मेरा व्यक्तिगत विचार है |

    • Ritesh Gupta says:

      धन्यवाद….महेश जी….| मेरी नजर में कुमाऊँ भी बहुत खूबसूरत हैं……पाताल भुवनेश्वर, जागेश्वर मुझे बहुत ही अच्छे लगे थे |
      आपकी सलाह का स्वागत हैं…|

  9. SilentSoul says:

    उत्तम विवरण… आगे की यात्रा जल्दी कराओ

    • SilentSoul says:

      कुमांयूं शायद ठीक शब्द नही है… ये कुमाऊं होना चाहिये

      • Ritesh Gupta says:

        S.S. Ji….
        कम्मेंट के लिए धन्यवाद |
        नेट पर ढूंढने पर कुमायूँ और कुमाऊँ दोनों ही शब्द मिल रहे हैं…| पर आपके बताने के बाद मुझे भी अब कुमाऊँ ही ठीक लग रहा हैं….तो अब इस लेख में भी अब जल्द ही कुमायूँ से कुमाऊँ कर दिया जाएगा…|
        इस ओर ध्यान दिलाने के लिए धन्यवाद…!

        • SilentSoul says:

          कुमाऊं ही ठीक शब्द है… कुमायूं तो हिन्दी न जानने वालों ने बना दिया.. वोही नयी जेनेरेशन जो कहती है कव्वा means crow ..LOL

  10. rastogi says:

    रितेश जी
    पिछले वर्ष मॅ भी अपने ओफिस स्टाफ के साथ इसी ट्रेन से मई मे नैनीताल गया था तब 250 रुपये मे आल्टो कार नैनीताल के लिए मिली थी, पर लौटते समय हम 6 लोगो ने बड़ी गाड़ी सूमो की थी जिसका किराया 1500 रुपये दिया था इससे कम मे कोई राज़ी नही था. पर फिर हमने भी शर्त रखी कि हमे आस-पास घूमाते हुए रेल वे स्टेशन छोड़ना होगा. . अच्छा लेख लिखा है.

    • Ritesh Gupta says:

      रस्तोगी जी….
      पिछले साल से अब तक पेट्रोल भी तो महंगा भी हो गया हैं ….सो अब टैक्सी का किराया तो बढ़ना ही था …|
      टिप्पणी के लिए धन्यवाद

  11. ashok sharma says:

    Interesting post going in somewhat right and altogether new direction.photographs are nice.

  12. रितेश जी हमेशा की तरह सुन्दर चित्र सुन्दर लेखन, क्या खूब. वन्देमातरम..

  13. Mukesh Bhalse says:

    रितेश,
    बहुत दिनों से इस श्रंखला का इंतज़ार हो रहा था, पढने पर पूर्ण संतुष्टि की प्राप्ति हुई. आपने बड़े ही मनोयोग से इस पोस्ट को लिखा है. रेल यात्रा का विस्तृत वर्णन पढ़कर मज़ा आ गया, क्योंकि मैं भी ट्रेन में यात्रा का बहुत बड़ा शौक़ीन हूँ. शुरुआत बहुत ही अच्छे तरीके से हुई है, और हम भी तैयार हैं इस श्रंखला की हर एक पोस्ट का लुत्फ़ उठाने के लिए.

    • Ritesh Gupta says:

      मुकेश जी…..
      हमेशा की तरह आपकी इस सुन्दर शब्दों से युक्त इस टिप्पणी ने भी मेरा बहुत उत्साहवर्धन किया …..| मुझे भी ट्रेन में यात्रा का बहुत शौक हैं…..और हमेशा कोशिश रहती हैं कि कही भी जाऊ तो ट्रेन से ही जाऊं…|
      लेख के पसंद करने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद…|

  14. Nandan Jha says:

    रितेश जी, आप धीरे धीरे और पूरे संयम से लिखे पर जब लिखें तो इसी तरह से, पूरे विवरण और संतुलित मापदंड से लैस | इस लेख में फोटोस और गद्य में आपने अपनी निजी जानकारी (जो करीबी लोगों के लिए वांछनीय होती है ) और यात्रा संबधित जानकारी में गजब का संतुलन रखा है जो की मेरी नज़र में काबिले तारीफ़ है | बहुत बढ़िया |

    आपको मालूम ही होगा की अब दिल्ली से सुबह (शायद रोज़ नहीं है) भी एक ट्रेन चलती है काठगोदाम के लिए, ५-६ घंटे में पहुंचा देती है | अच्छा विकल्प है | रानीखेत एक्सप्रेस से मैं केवल ५-६ बार गया हूँ क्योंके अक्सर मैं अपने वाहन से ही जाता हूँ, और हमेशा मोरादाबाद में रात को गर्मी में मच्छरों ने सताया है | एक बार तो हम लोग हल्द्वानी ही उतर गए थे | वैसे हल्द्वानी में सही रेट पर गाडी मिल जाती है | खैर |

    अगले लिख के इंतज़ार में |

    • Ritesh Gupta says:

      नंदन जी…..
      आपकी की इस उत्साहवर्धक और तारीफ़ से परिपूर्ण टिप्पणी ने मेरे अंदर एक नई उर्जा का संचार काम किया | यह बात तो सही हैं की समयाभाव के कारण धीरे-धीरे जरुर लिखता हूँ, पर लिखता अपनी पूर्ण संतुष्टी से….|
      हाँ ! मुझे मालूम हैं , पहले हमारा विचार इसी गाड़ी से जाने का था पर यह गाड़ी सुबह सवा छह बजे “शताब्दी एक्सप्रेस” आनंदविहार से काठगोदाम के लिए जाती हैं पर यह गाड़ी थोड़ी असुविधाजनक हैं क्योंकि पहुँचने का समय लगभग बारह बजे हैं और वहाँ से एक या सवा घंटे नैनीताल का रास्ता | ऐसे लगभग आधा दिन का समय खर्च हो जाता हैं और यह गाड़ी रानीखेत के मुकाबले महंगी भी पड़ती हैं |
      लेख पर अपने विचार व्यक्त करने और उसे पसंद करने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद !

  15. Kavita Bhalse says:

    रितेश जी,
    बहुत ही संतुलित शब्दों में एक उत्कृष्ट लेख. चित्रों का संयोजन भी काबिले तारीफ़ है. ट्रेन लेट होने से जो फजीहत होती है उसे एक दो बार हम भी अनुभव कर चुके हैं.. चलिए अंत भला तो सब भला. श्रंखला की शुरुआत पढ़कर तो ऐसा लग रहा है, जैसे यह श्रंखला भी मनाली- रोहतांग की तरह सुपर हिट होनेवाली है.
    अगले भाग के इंतज़ार में……..

    • Ritesh Gupta says:

      कविता जी…..
      सफ़र मे तो ट्रेन का लेट होना तो आम बात हैं और यह तो चलता रहता हैं …हम तो अपना सफ़र का पूरा मजा लेते हैं |
      बहुत ही सुन्दर शब्दों और प्रशंसा से युक्त टिप्पणी के लिए बहुत-बहुत आभार …|
      धन्यवाद !

  16. बहुत बढ़िया विवरण है रितेश. छोटी से छोटी चीज़ों की जानकारी भी आपने सम्मिलित की है जो पढ़ने वालों के काम आएगी. अगली किश्त का इंतज़ार रहेगा..



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