NAINITAL-BOATING IN NAINI LAKE नैनीताल- नैनी झील में नौकायन

July 23, 2012 By:

आप सब नैनीताल शहर व इसके आसपास के मुख्य स्थलों की सैर कई लेखों से कर ही रहे है, लेकिन जिस खास नाम के कारण उतराखण्ड के कुमाऊँ क्षेत्र में नैनीताल का बहुत नाम है, देश के प्रमुख पहाडी नगरों में नैनीताल की गिनती भी की जाती है। आज मैं आपको उस स्थल की भी सैर करवा रहा हूँ। नैनीताल में हिमालय का प्राकृतिक सौंदर्य तो भरा हुआ है साथ ही यहां झीलों की भरमार भी है, नैनीताल शहर को झीलों की नगरी तो कहा ही जाता है। यहाँ की शान नैनी झील अति प्रतिष्ठित सुन्दर झील है। जी हाँ आप सही समझे आज आपको नैनी झील की सैर करायी जा रही है। यहाँ आने पर हमने पाया कि नैनीताल झील चारों ओर से पहाडियों से घिरी हुई है। सम्पूर्ण नगर भी इस ताल के चारों ओर ही बसा हुआ है। झील के साथ लगता हुआ हॉकी का मैदान है, मैदान के पीछे ही मस्जिद बनी हुई है। पता लगा कि नैनीताल इलाके में पहले कभी 60 ताल हुआ करते थे। आज भी नैनीताल जिले में सबसे अधिक ताल हैं। यहाँ पर ‘नैनी ताल’ नामक झील जो नैनीताल शहर में ही है, यहाँ का यह मुख्य आकर्षण केन्द्र है। कार से उतरने के बाद हम तीनों ने झील की सैर करने की योजना बनायी।

ऊँचाई से झील का नजारा

झील के चारों ओर पैदल मार्ग।

जिस जगह से नाव किराये पर मिलती थी हम तीनों उस जगह की ओर चल दिये। मार्ग में एक जगह एक बन्दा जामुन की बिक्री कर रहा था। जब उससे जामुन का रेट पता किया तो उसने बताया कि 300 रु किलो, उसने बीस-बीस रु के कागज के कप जैसे भी बनाये हुए थे जिसमें रख कर वह जामुन बेच रहा था। अगर मैं अकेला होता तो कभी ना लेता, लेकिन हमारे साथ एक पहुँचे हुए महाराज जो थे वो माने ही नहीं उन्होंने एक कप जामुन ले ही ली, जामुन वाले कि बदमाशी देखिये कि उसने जामुन जिस कागज के कप में दी थी वो देखने में तो चाय पर मिलने वाले कांच के गिलास जितने आकार का था, हमारे दोस्त ने सोचा था कि चलो एक गिलास जामुन चखने के लिये बहुत रहेंगी। लेकिन गजब हो गया, जब उस गिलास में से आधा गिलास भी खाली नहीं हो पाया था तो जामुन समाप्त हो गयी। अपने पहुँचे हुए दोस्त ने आश्चर्य के साथ हमारी ओर देखा, हमने कहा क्या हुआ? जब उसने दिखाया कि यह देखो जामुन वाले की चालाकी इस कागज के गिलास में आधे में कागज भरा हुआ है, आधा ही जामुन से भरा हुआ था। उस जामुन वाले की चालाकी देख कर मुझे भी अजीब लगा कि दुनिया में कैसे-कैसे लोग भरे पडॆ है। जामुन के बाद बारी आयी भुट्टा बोले तो कुकडी खाने की। मैंने एक भुट्टा लेकर खाना शुरु कर दिया। भुट्टा पेट में जाता रहा, हम धीरे-धीरे पैदल झील किनारे चलते रहे।

कर लो दर्शन।

सामने से ही नाव पर बैठना होता है।

थोडी देर बाद हम उस जगह जा पहुँचे जहाँ से नाव किराये पर मिलती थी। पहले तो विचार बना कि पैडल बोट ले ली जाये। लेकिन तीनों की सलाह उस पर नहीं बनी। आखिरकार एक नाव ले ली गयी जिस पर एक चप्पू से चलाने वाला चालक बैठा हुआ था। यहाँ पर नाव के लिये पैसे पहले ही बाहर बनी एक खिडकी पर जमा कराये जाते है। वे बदले में एक पर्ची देते है जिसे लेकर नीचे पानी के पास जाया जाता है, जहाँ पर नाव वाले पर्ची देखकर नाव में बैठाते है। नाव में बैठने से पहले लाइफ़ जैकैट भी पहननी होती है। वो अलग बात है कि ये लाइफ़ जैकेट ढीली ढाली होती है। पानी में डूबने से बचाने के लिये ये जैकैट कई घन्टे तक बन्दे को डूबने नहीं देती है। हमने नाव से झील के चारों ओर पूरा चक्कर लगाने के पैसे दिये थे। हम सोच रहे थे कि पूरा चक्कर लगाने में लगभग आधा घन्टा लग जायेगा। लेकिन जामुन वाले की तरह नाव वाला भी उसका बाप निकला, नाव वाले ने पहला झटका तो इस बात पर दिया कि इस झील को दो हिस्सों में नाव वालों ने बांटा हुआ है। अत: आपके लिये इस झील का आधा चक्कर ही पूरा हो जायेगा। उसने यह बात झील में काफ़ी देर चलने के बाद बतायी थी। यदि उसने यह बात पहले बतायी होती तो शायद मैं उसकी बोट में सवारी नहीं करता। झील में इन नाव वालों की बदमाशी रोकने के लिये चारों किनारों पर खाली ड्रम लगाये गये है ताकि नाव वाले इन ड्रम के पास से होकर जाये। इसलिये नाव वाले इन ड्रम के बाहर से दूर से होकर कह देते है कि देख लो जी ड्रम के पास से होकर आये है अगर हम ज्यादा पास गये तो नाव जमीन से टकरा सकती है। मैंने तो नाव वाले को सुनानी शुरु भी कर दी थी लेकिन अन्तर सोहिल ने मुझे रोक दिया कि छोडो दोस्त जाने दो आगे ध्यान रखेंगे। इसलिये इस लेख को पढने वाले पाठक जरा ध्यान से देख ले ऐसा आपके साथ भी हो स्कता है। आप कोशिश करे कि अपने पैरों से चलाने वाली पैडल बोट लेकर झील में सफ़र करे। ताकि जहाँ जैसा हो अपनी इच्छा से घूमा जा सके। पहाड़ों की तलहटी में बसा नैनीताल समुद्रतल से 1900 मी से ज्यादा की ऊँचाई पर स्थित है। इस ताल की लम्बाई 1400 मीटर, चौड़ाई 460 मीटर और गहराई 150 मीटर के आसपास तक मापी गयी है। करीब दो किमी की परिधि वाली झील को किसी बैरन नामक अंग्रेज ने स्थल की खोज की थी। नैनीताल के जल की विशेषता यह है कि इस ताल में सम्पूर्ण पर्वतमाला और वृक्षों की छाया साफ़ दिखाई देती है। आकाश पर छाये हुए बादलों का प्रतिबिम्ब इस ताल में बेहद सुन्दर दिखता है कि जिसको देखने के लिए सैकड़ो किलोमीटर दूर से प्रकृति प्रेमी नैनीताल आते हैं। इस ताल के जल में तैरती बत्तखों का झुण्ड, रंग बिरंगी नौकाओं तथा रंगीन बोटों का प्यारा सा नजारा नैनीताल के ताल की शोभा बढ़ाने में बहुत असर दिखाता है। बताते है कि इस ताल के पानी की भी अपनी विशेषता है, बताते है कि गर्मियों में इसका पानी हरा, बरसात में मटमैला और सर्दियों में हल्का नीला हो जाता है।

चप-चप चप्पू चले।

पानी का रंग देखो।

नैनीताल झील के दोनों ओर सड़के हैं। झील का ऊपरी भाग मल्लीताल और निचला भाग तल्लीताल कहलाता है। जहाँ मल्लीताल में समतल खुला मैदान है। मल्लीताल के मैदान पर शाम होते ही मैदानी क्षेत्रों से यहाँ आए हुए पर्यटक जमा हो जाते हैं। शाम के समय तो नैनीताल झील में देखने में ऐसा लगता है कि मानो सारी नगरी बस यही तालाब किनारे में सिमट गयी हो। शाम के समय तल्लीताल से मल्लीताल को आने वाले सैलानियों का बाजार सा लग जाता है। यहाँ पर देखने को भी नैनी ताल शहर में इस ताल के अलावा बहुत कुछ है। जैसे कि नैना पीक, स्नो व्यू, टिफिन टॉप, जहाँ से नगर एवं मैदानी क्षेत्रों के नजारे लिए जाते हैं। मौसम साफ हो तो 365 किमी लम्बी हिमालय पर्वत श्रृंखला का नजारा एक नज़र में देखा जा सकता है। तीन किमी की पैदल ट्रेकिंग कर नैना पीक/चाइना पीक से हिमालय के दर्शन करना यादगार अनुभव देता है। किलबरी में प्रकृति का उसके असली रूप में दर्शन, मां नैना देवी मन्दिर, गुरुद्धारा श्री गुरुसिंह सभा, उत्तरी एशिया के पहली मैथोडिस्ट गिरजाघर, नैनीताल चिड़ियाघर (2100 मी.), रोमांचकारी केव गार्डन, 18 होल वाला गोल्फ ग्राउण्ड, रोप-वे की सवारी, लेक व्यू प्वाइंट, सहित बहुत कुछ है। नैनीताल नगरी उत्तराखण्ड प्रदेश बनने के बाद राजपाल निवास यहाँ होने के कारण सरकारी महत्व भी रखती है। 120 एकड़ भूमि पर फैला ब्रिटेन के बकिंघम पैलेस की वैसी ही नकल राजभवन अलग राज्य बनने से पहले उत्तर प्रदेश के राज्यपाल का ग्रीष्मकालीन आवास भी इसी नगर में हुआ करता था। जिसमें आजकल उतराखण्ड राज्य सरकार के राज्यपाल निवास करते है। आजकल बहुत से नवविवाहित जोडियाँ अपनी ‘मधु यामिनी’ बोले तो हनीमून मनाने हेतु नैनीताल आते हैं। नैनीताल आने के लिये रेल से काठगोदाम (34 किमी) तक आना होता है जो देश के विभिन्न शहरों से जुड़ा है, यहाँ से बस या टैक्सी से आया-जाया जा सकता है। यह पहाडी नगर देश की राजधानी दिल्ली से मात्र 304 किमी दूर है। दिल्ली के आन्नद विहार बस अडडे से यहाँ के लिये सीधी बस सेवा उपलब्ध है। लेकिन ध्यान रहे वहाँ पर आपको निजी बस वाले भी मिलेंगे जो आपको नैनीताल लाने में रुला देंगे इसलिये उन बसों को ना, सरकारी बस को हाँ कहना।

हमारे अलावा वहाँ बहुत सारे लोग थे।

देखते रहो।

नैनीताल, मैदानी लोगों, पर्यटकों, सैलानियों का पसंदीदा नगर है जिसे देखने हर वर्ष हजारों-लाखों लोग यहाँ आते-रहते हैं। उनमें से कुछ ऐसे भी यात्री होते हैं जो केवल नैनीताल की “नैनी देवी” के दर्शन करने और उस देवी का आशीर्वाद प्राप्त करने की इच्छा से आते हैं। यह देवी कोई और न होकर स्वयं ‘शिव पत्नी’ नंदा (पार्वती) हैं। यह तालाब उन्हीं की स्मृति का प्रतीक है। इस सम्बन्ध में पौराणिक कथा कही गयी है। पौराणिक कथा के अनुसार दक्ष प्रजापति की पुत्री उमा (सती) का विवाह शिव से हुआ था। शिव को दक्ष प्रजापति पसन्द नहीं करते थे, एक बार दक्ष प्रजापति ने सभी देवताओं को अपने यहाँ यज्ञ में बुलाया, परन्तु अपने दामाद शिव और बेटी उमा को निमन्त्रण तक नहीं दिया। उमा हठ कर इस यज्ञ में पहुँची। जब उसने हरिद्धार स्थित कनखल में अपने पिता के यज्ञ में सभी देवताओं का सम्मान और अपने पति और अपना निरादर होते हुए देखा तो वह अत्यन्त दु:खी हो गयी। यज्ञ के हवनकुण्ड में यह कहते हुए कूद पड़ी कि “मैं अगले जन्म में भी शिव को ही अपना पति बनाऊँगी”। आपने मेरा और मेरे पति का जो निरादर किया इसके प्रतिफल-स्वरुप यज्ञ के हवन-कुण्ड में स्वयं जलकर आपके यज्ञ को असफल करती हूँ”। जब शिव को यह ज्ञात हुआ कि उमा सती हो गयी है, तो उनके क्रोध का ठिकाना न रहा। उन्होंने अपने गणों से दक्ष प्रजापति के यज्ञ को नष्ट-भ्रष्ट करवा डाला। सभी देवी-देवता शिव के इस रौद्र-रुप को देखकर सोच में पड़ गए कि शिव प्रलय न कर ड़ालें। इसलिए देवी-देवताओं ने महादेव शिव से प्रार्थना की और उनके क्रोध को शान्त किया। दक्ष प्रजापति ने भी क्षमा माँगी। शिव ने उसको भी आशीर्वाद दिया। परन्तु सती के जले हुए शरीर को देखकर उनका वैराग्य उमड़ पड़ा। उन्होंने सती के जले हुए शरीर को कन्धे पर डालकर भ्रमण करना शुरु कर दिया। विष्णु ने अपने चक्र से सती के शरीर के टुकडे कर दिये। ऐसी स्थिति में जहाँ-जहाँ पर शरीर के अंग गिरे, वहाँ-वहाँ पर शक्ति पीठ स्थापित हो गए। जहाँ सती के नयन गिरे, वहीं पर नैनादेवी के रुप में उमा अर्थात नन्दा देवी मन्दिर बनाया गया। आज का नैनीताल वही स्थान है, जहाँ पर उस देवी के नैन गिरे थे। तबसे निरन्तर यहाँ पर शिवपत्नी नन्दा (पार्वती) की पूजा नैनादेवी के रुप में होती है। नैना देवी नाम से एक अन्य मन्दिर हिमाचल प्रदेश के उना जिले में भी है जहाँ सती की दांयी आँख गिरी थी। हिमाचल वाला मन्दिर नैनीताल वाले मन्दिर के मुकाबले ज्यादा जाना पहचाना जाता है।

पहाड पर पेडों की परछाई के कारण पानी भी हरा दिख रहा है।

अमर उजाला अखबार का बोर्ड।

झील में घूम घाम कर हम तीनों पानी से बाहर निकल आये। झील से बाहर आकर मैंने मोबाइल में समय देखा तो पाँच बजने वाले थे। अब यहाँ हमे और तो कुछ देखना नहीं था केवल घर वापिस ही जाना था।

About Jatdevta

Jatdevta Sandeep Panwar has written 100 posts at Ghumakkar.

मैं ठहरा मनमौजी, मतवाला, घूमने के मामले में पर्यटकों (कार हवाई जहाज से साल में एक आध बार घूमने जाने वाले) से एकदम अलग हूँ। घूमने में पूरी जायज कंजूसी दिखाता हूँ। फ़ालतू की फ़िजूल खर्ची पसन्द नहीं है। अपनी मेहनत की कमाई से घूमता हूँ। रिश्वत या दान की कमाई से नहीं। रिश्वत भ्रष्टाचारी लेते है दान पुजारी व भिखारी लेते है। मेरा साल में एक-दो बार तो घूमना होता नहीं है। मैं चाय, बीडी, सिगरेट, गुटका, पान, तम्बाकू, अंडा, मीट, मछली, शराब, आलसीपन, दान और रिश्वत से सख्त नफ़रत करता हूँ।

Getaway Jungle Camp

10 Responses to “NAINITAL-BOATING IN NAINI LAKE नैनीताल- नैनी झील में नौकायन”


  1. Surinder Sharma says:

    जाट देवता,
    बहुत अच्छा वर्णन है. फोटो भी सुन्दर हैं. आप ने झील के दर्शन करवाए बहुत अच्छा लगा. मैं भी आपको सिल्वन ताल ले कर चलूँगा. पढ़ कर अपनी बहुमूल्य राय जरूर देना.

    आप का बहुत बहुत धन्यबाद

  2. Geeta says:

    Hello Sandeep Jee,

    Hum bhi nainital ghum k aaye isi varsh last month. halaki main pehle bhi kai baar gai hun nainital but pehle hamesha winters mein hi gaye the. is varsh summer mein jane se pata chala ki har cheez kitni mehngi hi, humne Amar Ujala akhbar office se upar shalimar hotel mein room liya tha jo room hame winters mein 1500 ka mila tha wahi room ab summers mein 5000 Rs. tak tha. khair unke liye to kamane ke yahi teen char mahine hote hi………, Well wo jamun wala cup humne bhi liya that or 20 Rs. ki chhali bhi khai thi………………., apke lekh se yaden taza ho gai.

    Regards

  3. Mukesh Bhalse says:

    संदीप भाई,
    हमेशा की तरह सुन्दर वर्णन एवं मनभावन तस्वीरें. जामुन का भाव 300 /- किलो….. घोर कलियुग…………….

  4. Nandan Jha says:

    एक छोटी बात और की माल पर वाहन के आवागमन पर १०० रुपैया का टैक्स है और शाम को कुछ समय के लिए आवागमन रोक दिया जाता है इसलिए झील के ठीक साथ साथ माल रोड पर टहलना काफी मनोरम लगता है | वैसे क्योंकि नैनताल एक बहुत ही पोपुलर जगह है , इसलिए यहाँ बहुत भीड़ होती है | अगली कौन से यात्रा पर लेकर जा रहे हैं संदीप जी |

  5. D.L.Narayan says:

    संदीप भाई, आप का यह श्रंखला बहुत पसंद आया.
    नैनी झील में नौकायन – यह शीर्षक लाजवाब है. कहीं यह सुशांत सिंहल का प्रभाव तो नहीं ?
    आप का इस रचना पढ़ते वक़्त याद आया स्वर्गीय राजेश खन्ना का……जिस गली में तेरा घर न हो बालमा (कटी पतंग)
    Rajesh Khanna, rest in peace. Thank you for the immense pleasure you have given to millions of your countrymen and will continue to give for generations to come.

  6. ashok sharma says:

    very good and thorough post covering fine details.but cheating and overcrowding are disheartening.cant we be a little honest?

  7. संदीप जी क्या खूब फोटोस हैं, क्या खूब वर्णन हैं, जी करता हैं, देखते रहो और पढते रहो., धन्यवाद, वन्देमातरम

  8. नैनीताल की यादे ताजा कर दी आपने ………फोटोज बहुत बढिया हैं और अब चलें घर की ओर

  9. परमादरणीय जाट देवता,

    नैनीताल का इतना सम्मोहक और enticing वर्णन करके आपने मेरी दुखती रग को छेड़ दिया है। मैं न जाने कितने वर्षों से अपनी घरवाली से कह रहा हूं कि नैनीताल चलो पर वह हमेशा कह देती है कि नैनीताल मैने खूब देख रखा है, वहां कुछ नहीं है। दरअसल, जब उनका परिवार अल्मोड़ा में रहता था, तो वह वहां M.Sc. किया करती थीं । उनको नैनीताल से विरक्ति सी है।

    अतः अब मुझे नैनीताल जाने के लिये और किसी साथी की इंतज़ार है। कल को ही अपने पंकज भाई से बात करूंगा । सस्ती, सुन्दर और टिकाऊ यात्रा के लिये पंकज गोयल एकदम सटीक इंसान हैं । यात्रा करूंगा तो आप तक उसका किस्सा भी लेकर आऊंगा ! मुझे आशीर्वाद दें कि मैं भी “नैनीताल रिटर्न्ड” की पदवी पा सकूं !

    सुशान्त सिंहल

  10. नैनीताल के बड़े ही अच्छे फोटो दिखाए आपने. लगता है नैनीताल जल्दी ही जाना पड़ेगा.



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