Manikaran→Excursion of the Holy Town (एक सुहाना सफ़र मनाली का….6 ) |
नमस्कार दोस्तों ! पिछले लेख में मैंने आप लोगो को व्यास और पार्वती नदी घाटी के बीच बसे “पवित्र स्थल मनिकरण” के बारे में वताया था, जिसे आप मेरे पिछले लेख “एक सुहाना सफ़र मनाली का….5” में पढ़ सकते हैं । आइये अब चलते हैं इस श्रृंखला के अंतिम लेख “पवित्र स्थल मनिकरण के भ्रमण” पर ।
सुबह मनाली से चलने के बाद कार की साहयता से तीन बजे के आसपास हम लोग मनिकरण पहुँच ही गए । इस समय मनिकरण में धूप तेज खिली हुयी थी, पर मौसम ठंडा था और पूरी घाटी में पार्वती नदी का शोर किसी मधुर संगीत की तरह गुंजायमान हो रहा था । यहाँ पहुँचने के बाद के सबसे पहले एक खाली स्थान देखकर कार को सड़क के किनारे लगा दिया और एक होटल की तलाश करने अपने छोटे भाई अनुज के साथ निकल पड़ा । कई होटल छान मारे पर सस्ता या बजट होटल की हमारी तलाश पूरी न हो सकी, ज्यादातर सभी होटल के कमरे का किराया रु० 1500/-प्रतिदिन से अधिक ही बताया जा रहा था और ऊपर से यह कह रहे थे, जल्दी से जो कमरा मिले वोही ले लो नहीं अन्यथा सप्ताहांत होने के कारण दिल्ली वाले आ जायेगे और आपको फिर कोई कमरा भी नहीं मिलेगा । फिर भी हमने अपनी कमरे की तलाश जारी रखी, करीब आधे घंटे की तलाश के बाद हमें पार्वती नदी के किनारे टैक्सी स्टैंड से पहले एक होटल (अब नाम याद नहीं हैं) पहुँच गए ।
होटल लगभग पूरा खाली था, कई सारे रूम देखने के बाद हमें उस होटल का एक कमरा पसंद आ गया, कमरा काफी सुव्यवस्थित और बड़ा था । कमरे की बालकनी से बहती पार्वती नदी का सुन्दर द्रश्य नजर आ रहा था और उस कमरे लगे बाथरूम भी काफी बड़ा और साफ़ सुधरा था । उसने हमें उस कमरे के रु.1200/- बताये जो हमे काफी मंहगा लगा और उससे एक रुपया भी नीचे करने को तैयार नहीं हुआ, उसने कहाँ की,”आपको अभी यह होटल खाली नजर आ रहा हैं, पर रात तक यह पूरा भर जायेगा ।” अत: हमे मजबूरीवश उसी मूल्य पर वह कमरा लेने पड़ा पर वो कमरे में एक अतरिक्त बिस्तर देने को राजी हो गया था । सबसे अच्छी बात इस होटल की थी, कि इसकी अपनी तीन या चार कार के खड़ी करने लायक पार्किंग की भी व्यवस्था थी । हमने होटल के उस कमरे को कुछ अग्रिम राशि देकर आरक्षित कर लिया । कार को होटल की पार्किंग में लगाकर कमरे में सारा सामान पंहुचा दिया । यहाँ के होटलों की एक खास बात यह की होटलो में गर्म पानी के लिए गीजर की कोई व्यवस्था नहीं हैं । यहाँ के होटलों में गर्म पानी की आपूर्ति नदी के उस पार स्थित गर्म कुंड से होती हैं, जो चार-पांच मिनट गर्म पानी का नल खुला छोड़ने पर गर्म पानी आने लगता हैं ।
लगभग एक घंटा सफ़र की थकावट उतारने के बाद हम लोग गर्म कुंड में नहाने के इरादे पार्वती नदी के दाई तरफ के मंदिर, पुराने बाज़ार की ओर चल दिया । टैक्सी स्टैंड के अंतिम छोर से पार्वती नदी को एक पुल की साहयता से पार किया । पुल के नीचे से अपने अथाह जलराशि के साथ रोद्र रूप में बहती पार्वती नदी काफी वेगमान, भयानक और मन को अति सुन्दर लग रही थी । पूरे मनिकरण में पार्वती नदी के तेज वहाब से बचाव के लिए किनारों पर कंक्रीट की दीवार खड़ी कर दी गयी हैं, जिससे बरसातो में नदी में अधिक पानी आने पर भी इस नगर का बचाव हो जाता हैं । पुल पार करने के बाद सबसे पहले प्राचीन श्री राम मंदिर नजर आया, इस मंदिर में गर्म कुंड के पानी में नहाने की व्यवस्था भी हैं । थोड़ा आगे बढ़ने पर नैना भगवती मंदिर हैं और वही पर एक छोटे से चौराहे पर लकड़ी का पुराना सुन्दर रथ जगन्नाथजी की यात्रा हेतु रखा हुआ था । चौराहे से आगे जाने पर प्राचीन मंदिर श्री रघुनाथ जी का आया हैं, इस मंदिर के बाहर बेहद ही गर्म उबलते पानी का एक चश्मा(कुंड) सड़क के समीप ही था, जिसमे से बहुत तेजी से गर्म भाप निकल रही थी । प्रकृति का यह चमत्कार देखकर कर हम प्रभु के सामने नतमस्तक हो गए । यह कुंड इतना गर्म था कि आप किसी कपड़ो में कच्चे चावल या चने बांधकर इस कुंड में छोड़ कुछ मिनटों में उबलकर पक जाते हैं । इसी उबलते चश्मे के पीछे नहाने का पानी से भरा हुआ एक स्नानागार कुंड बनाया हुआ था, पर इस स्नानागार का पानी अत्यधिक गर्म होने के कारण आज बंद था । यहाँ पर महिलाए और पुरुषों दोनो के लिए अलग-अलग नहाने कि व्यवस्था हैं । गर्म कुंड का पानी गंधक युक्त हैं और इस पानी में नहाने से चर्म सम्बन्धी सारे रोग दूर हो जाते हैं ।
हमने किसी स्थानीय दुकानदार से नहाने लायक और कुंड के बारे में पूछा तो उसने बताया कि आगे गुरूद्वारे में भी दो कुंड हैं, एक कुंड गुरूद्वारे के मुख्य भवन के नीचे ढका हुआ हैं और दूसरा कुंड खुले में पार्वती नदी पार करके हैं । हम लोग मनिकरण के घने बाजार और संकरी गलियों से होते आगे चलते रहे हैं यहाँ के बाजार में अधिकतर दुकानों पर प्रसाद, छोटे बर्तन, खान-पीने का सामान, बच्चो के खिलौने, मेवो आदि की थी । कुछ देर चलने के बाद मनिकरण का मुख्य आराध्य देव शिव भगवान का मंदिर आ गया । हम लोग मंदिर में प्रवेश कर गए, मंदिर के अंदर दरवाजे से थोड़ा आगे ही एक उबलते गर्म पानी का एक ओर चश्मा (कुंड) था । कुंड के ऊपर ही दीवार पर भगबान भोलेनाथ का बड़ा सा चित्र अंकित हैं । गर्म कुंड के कारण मंदिर का फर्श भी अत्यधिक गर्म हो रहा था, अन्जाने में फर्श पर नंगे पैर चलने पर लोग उचक-उचक कर चल रहे थे । पैर जलने से बचाने के लिए मंदिर परिसर में जूट की चटाई और लकड़ी के पटरियां डाली हुई थी । हमने मंदिर के इस खौलते इस गर्म कुंड में झाँक कर देखा । कुंड का पानी बहुत तेजी से उबल रहा था और कई सारे बड़े-बड़े मटके कुंड के गर्म पानी में रखे हुए थे । इन मटको में गुरुद्वारे के लंगर का खाना पक रहा था, जिन मटको पर बोरी पड़ी हुई थी उनमे दाल और जो मटके खुले हुए थे उनमे चावल पक रहा था । बहुत से भक्त लोग इस कुंड में धागे की साहयता से छोटी-छोटी पोटलियो में प्रसाद के लिए चावल और चने पका रहे थे । एक रास्ता मंदिर के पास से ही गुरूद्वारे के अंदर जाने के लिए था । हमें सबसे पहले नहाना था, सो हम लोग उस रास्ते से गुरूद्वारे के अंदर चले गए । चप्पल जूता स्टैंड पर हम लोगो ने चप्पल जूते जमा करा दिए और गुरुद्वारे का गर्म पानी के स्नानागार पहुँच गए ।
गुरुद्वारे का स्नानागार (नहाने का कुंड) ठीक गुरुद्वारे के नीचे एक छोटे से स्विमिंगपुल जैसा था और गहराई करीब तीन या साढ़े तीन फुट थी । मुख्य कुंड के पास ही महिलाए के लिए अलग से कुंड की व्यवस्था थी । इस कुंड में एक बड़े पाइप की साहयता से बगल के शिवमंदिर के उबलते कुंड का गर्म पानी मिलाया जा रहा था । देखने में पानी बिल्कुल स्वच्छ था, हाथ लगाने पर पानी गुनगुने से थोड़ा सा ही गर्म था । ठन्डे मौसम से गर्म पानी देखकर हमारा मन नहाने को मचल उठा और फटाफट कपड़े उतारकर कुंड के पानी में उतर गए । हमारे बच्चे तो गर्म पानी के वजह से बार कुंड से बाहर आ रहे थे । काफी देर गंधक युक्त गर्म कुंड में स्नान करने के पश्चात हम लोग तैयार होकर अंदर के रास्ते से ही भगवान शिवजी के मंदिर में पहुँच गए । प्रसाद के लिए महमें मंदिर से बाहर आना पड़ा, दरवाजे के पास ही एक दुकान से हमने प्रसाद ख़रीदा और वापिस मंदिर आ गए । मंदिर प्रागंण काफी साफ सुधरा था और ठंडी हवा चल रही थी । मंदिर में भगवान भोले नाथ का शिवलिंग खूबसूरत फूलो से सुशोभित था और बड़ा मनोहारी लग रहा था । हम लोगो ने मंदिर में भगवान शिव का ध्यान किया, उनकी वंदना की और आशीर्वाद लिया । हमने मुख्य शिव मंदिर के चारों ओर एक परिक्रमा पूरी की । शिवलिंग के सामने बड़े से पीतल के नंदी जी की खूबसूरत मूर्ति विराजमान थी, यहाँ नंदी जी के साथ हमने कुछ फोटो ली ।

Holy Shivlingam at Main Shiv Temple at Manikaran (मनिकरण का मुख्य शिव मंदिर में स्थापित परम पूज्य शिवलिंग…जय भोले नाथ की.. )

a sculpture of Bholenath ji above Hot water Spring (गर्म चश्मे के ऊपर भोलेनाथ जी के मनोहारी रूप को प्रस्तुत करता एक कलाकृति )
भोलेनाथ जी के दर्शन करने के पश्चात हम लोग गुरुद्वारे में मत्था टेकने पहुँच गए । एक पतले रास्ते से गुरुद्वारे में प्रवेश किया, मुख्य भवन गुरुद्वारा परिसर कुछ सीडियाँ चढ़कर एक बड़े से हॉल में था । सीडियाँ पर काफी भीड़ थी, बमुश्किल हाल में प्रवेश किया । पूरे हॉल में बैठने के लिए साफ़ सुधरे गड्डे बिछे हुए थे और भीड़ होने के वावजूद यहाँ का वातावरण में शांति व्याप्त थी । हमने मनिकरण साहिब तक्ख के आगें अपना मत्था टेका और देशी घी के हलुवे का प्रसाद ग्रहण किया । कुछ समय हॉल के शांत माहौल में बिताने के बाद हम लोग हाल से बाहर आ गए । हॉल के बाहर ही दाई तरफ लंगर के लिए एक बड़ा हॉल भी था पर इस समय सफाई कार्य के चलते लंगर बंद था । हम लोगो ने पूरा गुरुद्वारा परिसर अच्छे से घूमा । गुरूद्वारे को सड़क तक जोड़ने वाले पार्वती नदी पर बने पैदल पुल पर भी गए । यहाँ से नदी का तेज वेग साफ़ मालूम पड़ रहा था और पुल के बीचो-बीच ठंडी हवा चल रही थी । पुल के दोनो ओर का नजारा शानदार था । कुछ फोटो पुल पर लेने के बाद वापिस मणिकरण के बाजार में आ गए ।
काफी समय बाजार घूमते हुए और सामान का मोल भाव करते हुए बिता दिया । एक छोटे से चाय की दुकान पर चाय और आलू के परांठे ओर चाउमिन का नाश्ता किया । रास्ते में पड़ने वाले और मंदिर के दर्शन करने के बाद शाम के सवा सात बजे तक हम लोग वापिस होटल के कमरे में पहुँच गए । लगभग दो-तीन घंटे आराम करने के बाद दस बजे के आसपास हमने अपना रात का खाना टैक्सी स्टैंड के चौक पर स्थित एक ढाबेनुमा रेस्तरा पर खाया, खाना यहाँ का काफी स्वादिष्ट था । मनिकरण के सभी दुकाने इस समय बंद हो चुकी थी कुछ ढाबे ही खुले नजर आ रहे थे । रात अधिक हो जाने के कारण वापिस कमरे में आ गए । कमरे में आकार काफी समय खिड़की से बाहर बहती पार्वती नदी को देखते रहे, ठंडी हवा चल रही थी । रात के सन्नाटे में अँधेरे के आगोश में लिपटे पूरे मनिकरण में नदी का शोर चहु ओर गूंज रहा था । इस समय हमें एक अलग ही अहसास की अनुभूति हो रही थी । बैठे-बैठे जब आँखों में नींद भर आई तब खिड़की बंद करके चुपचाप से कम्बल ओड़कर सो गए ।
ऐसा ही वीडियो मैंने होटल के कमरे की खिड़की से बहती हूयी पार्वती नदी का और वहाँ से नदी के पार दिखता मनिकरण का बनाया हैं जिसे आप मेरे यू-ट्युब के इस लिंक पर देख सकते हैं → पार्वती नदी और मनिकरण मनिकरण और पार्वती नदी

A Information Board about Manikaran (गुरूद्वारे के निचले तल में गर्म गुफा के पास दीवार पर लिखा मनिकरण का इतिहास )
दिन शनिवार,26 जून 2010 को सुबह के सात बजे हमारी नींद खुल । खिड़की से बाहर मनिकरण का नज़ारा लिया, आज धूप काफी खिली हुई थी, नदी पार का हर चीज चमकदार लग रही थी । आज का दिन हमारी यात्रा का अंतिम दिन था और हमें 12:00 के आसपास मनिकरण से वापिसी करनी थी । हमारे नहाने का आज का कार्यक्रम भी गर्म कुंड में पर ही था, सो धुले कपड़े थैली में डाले और चल दिए कुंड की तरफ । जिस होटल में हम ठहरे थे, उसके सारे कमरे किराये पर उठ चुके थे । हम लोग रास्ते में पड़ने वाले पहले कुंड पहुंचे तो वो आज भी अधिक गर्म पानी के कारण बंद था । अतः नहाने के लिए हम लोग गुरूद्वारे वाले ढके हुए कुंड पर गए । नहा धोकर नौ बजे के आसपास हम भोले नाथ जी के मंदिर पहुँच गए वहाँ मंदिर जाकर में भगवान शंकर के शिवलिंग के दर्शन किये और उनकी पूजा की ।कुछ समय यहाँ बिताने के बाद मंदिर से जुड़े अंदर के रास्ते गुरूद्वारे के निचले भाग में स्थित छोटी सी एक गर्म गुफा पर पहुँच गए, इस गुफा का रास्ता बहुत ही छोटा था (जैसा कि फोटो में देख सकते हैं)। हम लोगो ने झुककर गुफा में प्रवेश किया । अंदर से गुफा काफी छोटी थी और गुफा के अंदर के दीवार वाले पत्थर काफी गर्म थे । कई लोग दीवार पर अपनी पीठ टिकाकर गुफा की गर्मी का आनन्द ले रहे थे ।
गुफा के अंदर से दर्शन करने के बाद हम लोगो ने गुरूद्वारे के मुख्य भवन में जाकर मत्था टेका । कुछ देर बाद मुख्य भवन से निकल कर दाहिने तरफ के लंगर वाले हॉल में पहुँच गए । इस समय पौने दस बज रहे थे और हॉल में लंगर चल रहा था, हॉल में काफी भीड़ जमा थी कई लोग अपनी बारी के प्रतीक्षा कर रहे थे । हम लोगो में हॉल में से ही एक जगह से धुले हुए बर्तन लिए और एक खाली जगह देखकर बैठ गए । लंगर में हमने चावल, कड़ी, दाल, चनिया और रोटी का प्रसाद ग्रहण किया । लंगर मे स्वादिष्ट खाना भोजन करने के बाद हम लोग सीढ़ियों से गुरूद्वारे के निचले हिस्से में पहुँच गए, गुफा से बाहर निकलने के पश्चात हम लोग मनिकरण के बाजार में घूमते हुए हम लोगो ने वापिसी में प्राचीन रघुनाथ मंदिर, लकड़ी की सुंदर नक्काशी से निर्मित नैना भगवती का मंदिर और मुख्य प्राचीन श्री राम मंदिर के दर्शन किये ।
प्राचीन श्री राम मंदिर मनिकरण का एक मुख्य मंदिर हैं । श्री राम मंदिर तक जाने के लिए कुछ सीढ़िया चढ़कर जाना होता हैं । यह मंदिर पत्थर और पत्थर की सुन्दर कलाकृति से निर्मित भव्य और बड़ा मंदिर हैं । जब हम लोग इस मंदिर में पहुंचे तो मंदिर की सुंदरता, दीवारों पर पत्थरों की सुन्दर कलाकृति देखकर मुग्ध हो गए । हम लोगो ने बड़ी श्रद्धा से मंदिर में भगवान के दर्शन लाभ उठाया और मंदिर की सुन्दर कलाकृति का अवलोकन किया । इस मंदिर में भी नहाने हेतु गर्म कुंड की भी व्यवस्था थी ।

Mata Naina Bhagwati, Manikaran (लकड़ी के सुन्दर मंदिर माता नैना भगवती की मनिहारी प्रतिमा …..जय माता दी…)
पौने ग्यारह के आसपास हम लोग वापिस होटल के कमरे में पहुँच गए । अपना बिखरा हुआ सारा सामान समेट कर बैगो में पैक कर लिया । पौने बारह बजे के आसपास हम लोगो ने होटल वाले को कमरे का पूरा हिसाब कर दिया और कार में सारा सामान डाल कर अपनी वापिसी की यात्रा शुरू की और मनिकरण को अलविदा किया । पर यह क्या ! होटल की पार्किंग से निकलते ही लंबा जाम मिल गया । आज मनिकरण में काफी संख्या में छोटी-बड़ी गाड़ियों के आवागमन के कारण मनिकरण का यह छोटा सा रास्ता पूरी तरह से जाम पड़ा था । मनिकरण के इस छोटे से रास्ते पर कुछ बड़ी बसों के आने कारण जाम और भी भयंकर हो गया था । हम लोग जाम में धीरे-धीरे खिसकते हुए आगे बढ़ रहे थे । इस जाम के कारण हमारा काफी समय बर्बाद हो गया, लगभग दो-ढाई घंटे जाम फँसे रहने के बाद कसोल से पहले चौड़ी सड़क आने पर जाम लगभग समाप्त हो गया । दोपहर के ढाई बज रह थे और अब जोरो से भूंख भी सताने लगी थी । हमने कार चालक से खाना खाने के लिए किसी ढाबे या रेस्तरा पर रुकने को कहा । हमारे कार चालक ने कसोल से छह किलोंमीटर आगे साँझा-चूल्हा नाम के रेस्तरा पर गाड़ी रोक दी । हमें कसोल के पास स्थित साँझा-चूल्हा रेस्तरा बनावट से बहुत ही खूबसूरत और सुन्दर रंगों से भरपूर लगा । रेस्तरा के बाहर बहुत सुन्दर पेड़ पौधे से युक्त हरा-भरा बगीचा भी था, मेरे ख्याल से शायद इसमें रुकने की भी व्यवस्था थी । हम लोग भोजन करने के लिए रेस्तरा में अंदर चले गए । लकड़ी से निर्मित झोपड़ीनुमा आकार का यह रेस्तरा अंदर से काफी बड़ा और भी पूरी तरह से हिमाचली संस्कृति और साज-सज्जा निर्मित था । रेस्तरा में सेवा देने वाले वेटर और लोग हिमाचली वेशभूषा में थे, और वहाँ आये आगुंतक/ग्राहक लोगो का आग्रह बड़ी शालीनता से स्वीकार कर रहे थे । लगभग आधे घंटे में हम लोग यहाँ से खाना खाकर निकल लिए और आपनी यात्रा को जारी रखा ।
चार बजे के आस पास हम लोगो ने भुंतर के पार्वती नदी और व्यास नदी पर बने पुल को पार लिया था । भुंतर से हम लोग MDR30 से NH21* हाइवे पर चल दिए । इसी मार्ग पर हमने अपनी यात्रा को जारी रखा । रात के दस बजे के आसपास हम लोग चंडीगढ़ के पास के हाइवे पर चल रहे थे, यहाँ से आगे हमें खाने के लिए कोई ढंग का ढाबा नहीं मिला । रात को लगभग 12:00 बजे के आसपास करनाल से आगे एक बड़े ढाबे पर खाने के लिए गाड़ी रोकी । खाना खाकर अपनी इस यात्रा को हमने जारी रखा, और रात के सन्नाटे में हाइवे पर कार से चलते हुए लगभग तीन बजे हम लोग अपने नॉएडा स्थित आवास पर पहुँच गए । रात को ही हमने अपने कार चालक को धन्यवाद सहित कार का पूरा हिसाब-किताब भी कर दिया था ।
इस प्रकार हमारी (एक सुहाना सफ़र मनाली का) मनाली, रोहतांग और मनिकरण की सुखद और यादगार यात्रा के इस छह भागो की श्रृंखला यही समापन होता हैं । जल्द ही एक नई श्रृंखला लेकर जल्द ही उपस्थित होने की कोशिश करूँगा, तब तक के लिए आप सभी का धन्यवाद !
जय भोले नाथ की → जय घुमक्कड़ी → वंदे मातराम !
नोट : ऊपर लगाये गए फोटो में दर्शाये गए समय और दिनांक वास्तविक हैं ।


























रितेश जी राम राम, मनिकर्ण के इतने सुन्दर फोटो मैंने आज तक नहीं देखे हैं. इतने सुन्दर, विस्तृत, और हर जगह के फोटो, मज़ा आ गया. माँ नैना भगवती का मंदिर, श्रीराम मंदिर आदि के फोटो सबसे प्यारे हैं. आपने जंहा पर खाना खाया था, वंहा के फोटो भी अच्छे हैं. और आपके लेखन का तो ज़वाब ही नहीं. ये भगवान का करिश्मा ही हैं की एक ही स्थान पर गर्म जल और ठन्डे जल के स्रोत उपलब्ध हैं. आप लोग वीक एंड पर गए थे और वो भी जून की आखिर में, जिस समय गर्मी की छुट्टियाँ पीक पर होती हैं, कमरा महंगा तो मिलना ही था. धन्यवाद, वन्देमातरम..
प्रवीन जी…राम राम !
सुन्दर शब्दों में टिप्पणी के लिए आपका बहुत-बहुत शुक्रिया ….| वंदे मातरम…..
यहाँ के गर्म पानी में नहाने का अलग मजा है, जो लोग कई कई दिन तक नहीं नहाते वे भी यहाँ पर नहा लेते है, छ सात साल पहले की यादे ताजा हुई
रितेश गुप्ता जिन्दाबाद ! आपकी छः सात साल पहले की यादें ताज़ा हुईं – किस चीज़ की ? छः सात साल पहले नहाये थे, फिर मनिकर्ण में जाकर दोबारा नहाये ? हा – हा – हा ! मुझे एक किस्सा याद हो आया ! एक सज्जन डॉक्टर के पास पहुंचे और जब उनका नंबर आया तो बोले, “डॉक्टर साहब, आप ने मुझे पहचाना?” डॉक्टर ने कहा, “कुछ -कुछ ध्यान तो आ रहा है । आपका चेहरा देखा हुआ लग रहा है।” मरीज़ बोला, “जी, मैं आपके पास पिछले साल आया था बुखार की दवा लेने !” “अच्छा, अच्छा, सुनाइये, बुखार तो आपका ठीक होगा? और कुछ तकलीफ ?” डॉक्टर ने पूछा ।
“जी नहीं, और कोई तकलीफ नहीं, वो आपने नहाने के लिये उस समय मना किया था। मैने पूछने आया था कि अब नहा लूं क्या?”
सो, आपका मजेदार यात्रा वृत्तान्त बहुत ज्ञानवर्द्धक रहा। विशेषकर फोटो बहुत चित्ताकर्षक हैं। आपकी वीडियो भी देखी ! आगे जब भी कभी वीडियो बनाने का अवसर मिले तो एक बात अवश्य ध्यान रखें कि वीडियो कैमरा एक्शन रिकार्ड करने के लिये लिये होता है। कैमरा खुद नहीं हिलना चाहिये। 99% वीडियो रिकार्डिंग tripod पर कैमरा फिट करके इसीलिये की जाती है। हम अगर हाथ को बिल्कुल steady रख कर भी शूट करने की कोशिश करें तो कैमरा मामूली सा हिलता ही रहता है। अगर tripod न हो तो कैमरा खिड़की की चौखट पर, या कार की छत पर टिकाया जा सकता है। वैसे कपड़े की एक थैली में थोड़ी सी दाल, राई या सरसों भर कर थैली सिल ली जाये तो यह एक कैमरे के लिये बहुत शानदार सपोर्ट बन जाती है।
आपका ही,
सुशान्त सिंहल
सुशान्त जी, आप कैमरों के उस्ताद लगते हैं। बडी उपयोगी बात बताई है आपने। वैसे डोरी बांधकर भी कैमरों को हिलने से रोका जा सकता है। डोरी का एक सिरा कैमरे में बांधकर और दूसरा पैर के नीचे रखकर अगर खींचा जाये तो कैमरा काफी हद तक हिलने से रोका जा सकता है। वैसे सर्वोत्तम उपाय तो ट्राइपोड ही है।
सुशांत जी कैमरों के ही उस्ताद हैं , इनकी कई पोस्ट पढ़ कर मैंने भी थोडा बहुत ज्ञानार्जन किया है .
@संदीप जी → अच्छा लगा जानकार कि लेख के माध्यम से आपकी छ सात साल पुरानी याद तो ताज़ा हुई |
@ सुशांत जी…
व्यंग्यात्मक और लेख पर प्रशंसा से युक्त टिप्पणी के लिए और लेख का पठन करने लिए आपका बहुत -बहुत आभार |
यह वीडियो तो मैंने ऐसे ही होटल के कमरे की खिड़की से नदी के देखते हुए अपनी याद हेतु के बनाया लिया था । वीडियो खीचने सम्बन्धी महत्वपूर्ण जानकारी देने के लिए आपका धन्यवाद…आगे अवसर मिलेगा तो जरुर ध्यान रखुगा…..|
मणिकर्ण के फोटो बहुत बढिया हैं ………..मेरा अभी तक जाना नही हो पाया ………फोटो देखकर लगा कि मनोरम स्थान है ………गर्म पानी के श्रोत सुंदर है …………..आपका लेखन हमेशा की तरह मनलुभावन है और इस शैली का मै कायल
टिप्पणी के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद ! कभी मौका लगे तो जाइयेगा जरूर…..बहुत ही सुन्दर जगह हैं|
रितेश जी ,
आपके साथ साथ हम भी यात्रा कर रहे थे .बहुत अच्छी जानकरिया मिली हर पोस्ट की एक आवश्यकता होती हैं जिसमे वंहा की मुलभुत सुविधाओ की जानकारी हो जिससे जाने वालो के काम आये .हमारे पडोसी जून में मनाली और रोहतांग जा रहे थे और उसी दौरान आपकी यह पोस्ट हमने उनको देखने के लिए कहा और उनके लिए आपका ये लेख काफी मददगार साबित हुआ .अब आप कंहा की यात्रा करवा रहे हैं .
धन्यवाद .
शुक्रिया कविता जी…….मुझे यह जानकार अच्छा लगा की मेरी यह मनाली की श्रृंखला आपके पड़ोसी की काम आई….अब शायद यह आपके अगले जून में मनाली के यात्रा में भी काम आएगी….| अब आगे कुमायूँ के यात्रा करवाएंगे…| धन्यवाद!
सॉरी, छः सात साल पहले की यादें तो जाट देवता की ताज़ा हुई थीं ! मैने अपनी टिप्पणी रितेश गुप्ता को संबोधित की है। कृपया आप दोनों अपने – अपने मतलब की बातें ग्रहण करे लें । :D
मैंने ती अपने मतलब की बात ग्रहण कर ली….शायद जाट देवता ने भी अपने मतलब की बात ग्रहण कर ली होगी….|
:)
Very informative and entertaining series Ritesh Bhai. Love the way you pay minute attention to every details. All pictures were good.
Amit ….
Thank you very much for your comment…… !
Thanks for provid wonderful details of Manikaran.Last time i missed this place due to time constraint. After reading your blog, i am planning to touch this place again. Ritesh bhai, can you please share the cab expenses for Noida to Manali trip? That will be very helpful
Mayank Ji…..
Thank you very much for your comment. Really Maniakaran is wonderful & beautiful place. Congrats for your planning to this place.
For cab details you may visit my first post of this series,
Link here
http://www.ghumakkar.com/2012/04/05/agra-to-manali-via-noidadelhi-by-car-%E0%A4%8F%E0%A4%95-%E0%A4%B8%E0%A5%81%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A4%BE-%E0%A4%B8%E0%A4%AB%E0%A4%BC%E0%A4%B0-%E0%A4%AE%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A5%80/
And also I am mentioning Cab Expenses as per detail below→
Total Journey Kilometer Approx 1350 (Faridabad →(35) →Noida→ (560)→ Manali →(10)→Llocal →(108)→ Rohtang →(83)→ Manikaran→ (553)→ Noida→ (11km)→ Extra
KM 280 x 7 (A.C.) = 1960/-
KM 1070 x 6 (Without A.C.) = 6420/-
4 Night x 100 = 400/-
8 Food x 100 = 800/-
Total Cab Expense with Driver Rs.9580.00 , Road Toll Tax & Parking C harges Extra .
My above Cab expenses as per our tour 2010 and Now 2012 and cab rate would be increase.
Thanks
रितेश बहुत ही सजीव चित्रण किया है… हम 1993 में यहां गये थे अब तो ये पूरा ही बदल गया है..
नैना भगवती मन्दिर ये तो तब नही था… इतना सुंदर व भव्य मंदिर मजा आ गया
और चित्र संख्या 1 मनिकरण का इतना सुन्दर व सजीव चित्र पहली बार देखा है… ये तो Best photo of the month के लायक है
S.S. Ji नमस्कार ,
लेख पर टिप्पणी करने और पसंद करने के लिए आपका बहुत -बहुत आभार |
लेख का पहला मनिकरण का फोटो मेरा पसंदीदा फोटो में से एक हैं….| मैं आपको बता दूँ कि मैं जब भी किसी यात्रा पर जाता हूँ तो फोटो लेने के लिए केवल कैमरे का सहारा नहीं लेता बल्कि अपने मोबाइल (Nokia 5610d अब मेरे पास Nokia 500 भी हैं ) का भी उपयोग करता हूँ…..और यह फोटो मेरे मोबाइल (Nokia 5610d) से लिया गया फोटो हैं….|
धन्यवाद !
ऋतेश जी ह्में पवित्र स्थल मणिकर्ण जैसी रमणीक व मनोहर जगह भ्रमण करवाने के लिए धन्यवाद. प्राकृतिक छटा बखेरते सुंदर मनोहारी द्रश्य, धार्मिक भावनाओं से ओत-प्रोत चित्र, लकड़ी तथा पत्थरों के भवनों पर शिल्पकारों द्वारा कि गई कारिगरि, गर्म पानी के प्राकृतिक चश्में, लेखन, चित्रों तथा चलचित्रों ने मन मोह लिया. क्या बात है. और सबसे सुंदर दीवार पर खुदी भगवान त्रियम्ब्क की पवित्र मूर्ती. वापसी में सांझा चूल्हा रेस्तरां में जलपान करना, आंदित कर दिया.
त्रिदेव जी…
सुन्दर शब्दों से युक्त टिप्पणी के लिये आपका बहुत-बहुत आभार….! मुझे अच्छा लगा जानकार की आपको लेख हर हिस्सा और फोटो पसंद आये ….|
धन्यवाद!
रितेश जी एक बहुत अच्छी सुंदर फोटोग्राफी वाली श्रंखला पूरी क्रमबद्ध विवरण बार बार देखने योग्य .
जाट देवता : जो लोग कई दिन तक नहीं नहाते:—– किसकी तरफ.
टिप्पणी के लिए शुक्रिया सर्वेश जी….
very good photographs and very nice post.keep it up.
Ashok ji….
Thanks you very Much !
Very nice description and good photos. Thanks
Surinder ji….
Thanks you very Much for your comment !
Ritesh,
After going through this post one can easily presume that how beautiful and sacred place the Manikaran is. The boiling water of hot water springs is really mysterious which strengthens our belief in almighty the super power. Your unique style of writing and selection and arrangement of pictures is praiseworthy. Waiting eagerly for nainitaal……………………….
Thanks.
Mukesh Ji…..
I am very thankful to you for your very nice & valuable comment.
I’ll try to start new series soon.
Thanks again for your kind word.
Ritesh.Gupta
रितेश जी, पहली फोटो अवार्ड विन्निंग फोटो है, गजब का संयोजन है | जब मैने ये फोटो देखी थी पहले तभी से मैं ये लिखने को आतुर था पर बिना लेख पढ़े टिपण्णी नहीं देना चाहता था | एक सिख परिवार का फोटो खिचवाना, मंदिर / गुरूद्वारे के परिपेक्ष्य में , वाह , उम्दा |
हमेशा की तरह , बारीकी और मेहनत से संजोया हुआ लेख | हम लोग कसोल में ठहरे थे और मणिकरण की यात्रा गाडी से की और जाम में ऐसा फंसे की गुरूद्वारे में उचित समय बिता कर भागे | साधुवाद | ये पूरी श्रृंखला बहुत ही अच्छी बन कर आये है | अगली श्रृंखला में कहाँ लेकर चलेंगे ?
और नंदन मुझे ये सुन कर और भी आश्चर्य हुआ कि ये पहली फोटो मोबाईल से खींची गयी है… मैने पहली एसी मोबाईल की फोटो देखी है जो कैमरे को भी मात कर रही है
नंदन जी….
हमेशा की तरह प्रोत्साहन से भरपूर सुन्दर टिप्पणी के लिए आपका बहुत-बहुत आभार …..|
वैसे तो S.S.जी आपको बता ही दिया है की यह फोटो मोबाइल से खिची गयी….और मैं आपको बता दू कि इस पूरी श्रृंखला में जिन फोटोओ पर समय और दिनांक नहीं हैं, वे सभी फोटो मोबाईल से अवतरित हैं….और रोहतांग की पोस्ट में सबसे ज्यादा पसंद किया गया Panoramic View वाला फोटो भी मोबाइल से खींचा गया था….|
मनिकरण के जाम से तो हम भी आते और वापिसी में बहुत परेशान रहे थे |
अब हमारी अगली श्रृंखला ” सफ़र खूबसूरत कुमायूं का ” रहेगी ..|
धन्यवाद …!
आपको होटल बहुत महंगे मिले , हम तो गुरूद्वारे में ही रुक गए थे और खाना भी वहीँ खाया .
…………सॉरी खाना नहीं था प्रसाद ग्रहण किया !!
विधान जी….क्या करे मज़बूरी थी इसलिए इतने महंगा होटल लेना पड़ा | गुरूद्वारे में लंगर का प्रसाद ग्रहण करने अलग ही मज़ा हैं…..|
This series has been rewarded as the ‘Featured Story of July 2012′.
Congratulations Ritesh. Celebration time.
This series is actually so good that it must be the featured story. I am happy that Editors selected this story..
Congrats Ritesh…आगरे का 1 किलो पेठा भिजवा देना मुंह मीठा करने के लिये
@Nandan Ji……. Thank you & editors for select my story for Feature Story of July 2012.
@S.S. Ji…. Thanks you very much for your excellent words about my story ….आगरे का पेठा तैयार हैं बोलो कहाँ भिजवाना हैं…..|
Shri Ritesh Gupta Ji
Sabse pahle to Manali ki yatra ka etana sajeev chityan karne ke liye bahut bahut dhanyvad sath hi ek aur dhanyvad hindi me likhne ke liye.
me apni patni ke sath 1996 me manali rohtang aur manikarn ki yatra par gaya tha. aapki yatra ka vivran padte hue easa lag raha tha jese film chal rahi ho.
muze es web site ka pata abhi 5-7 dino pahle hi laga hai aur pichle 2 dino me aapki manali yatra ke sabhi bhag pure padkar aatmvibhor ho gaya hoo.
hibdi ki esi hi seva ki aapse aage bhi kamana karta hoo.
श्रीमान भूपेंद्र जी….
आत्म तृप्ति से मनाली के सम्पूर्ण लेख पढ़ने और फिर उसके बाद इस प्रशंसायुक्त टिप्पणी के लिए आपका बहुत-बहुत आभार !
इस साईट पर मेरे सभी लेख हिंदी भाषा में ही हैं, और आजकल मेरी हिंदी भाषा में ही नैनीताल के सीरीज चल रही हैं….समय मिले तो उसे भी पढियेगा …..उसका लिंक हैं…. http://www.ghumakkar.com/2012/08/12/travel-to-nainital
आगे भी इस प्रकार मेरी हिंदी भाषा में ही लेख आते रहेगे…..आप भी आते रहिये और उत्साहवर्धन करते रहिये….
धन्यवाद !