Manikaran→Holiest Place of Parvati Valley (एक सुहाना सफ़र मनाली का….5 ) |
नमस्कार दोस्तों ! पिछले लेख में मैंने आप लोगो को मनाली के सोलांग घाटी (Solang Valley) के यात्रा के बारे में वताया था, जिसे आप मेरे पिछले लेख एक सुहाना सफ़र मनाली का….4 में पढ़ सकते हैं । आइये अब चलते हैं व्यास और पार्वती नदी घाटी के बीच बसे “पवित्र स्थल मनिकरण की यात्रा “ पर ।
दिन शुक्रवार, 25 जून 2010 को हम लोग सुबह 7:00 बजे के आसपास नींद उठ गए और मनाली की इस सुबह का स्वागत हुआ मूसलाधार वारिश से । हम लोग लगभग एक घंटे में अपने नित्यक्रम से निवृत हुए, तब तक बारिश हल्की पड़ चुकी थी और कुछ बूंदाबांदी ही सी हो रही थी । तेज बारिश पड़ने से मनाली मौसम बहुत ही रूमानी हो गया था और हवा में नमी का इजाफा भी पहले के अपेक्षा अधिक हो गया था । हम लोगो ने आज वशिष्ठजी जाने और वही गर्म कुंड में नहाने की योजना बना रखी थी । कार चालक को जगाकर उसे चलने के लिए कहा तो उसने कहा की आज मनिकरण चलते हैं, वह जगह वशिष्ठजी से भी अच्छी हैं और कई गर्म पानी के कुंड भी वहाँ यदि एक-डेढ़ घंटे बाद भी हम लोग निकलेंगे तो सही समय पर मनिकरण पहुँच जायेगे । हमें उसकी बात जंच गयी । थोड़ी देर में चाय-नाश्ता करने के बाद होटल के कमरे में जाकर अपना सारा इधर-उधर बिखरा सामान समेटा और बैगो में जल्दी से पैक किया । होटल के काउंटर पर जाकर अपने दो दिन का हिसाब बनवाया और बिल भुगतान (कुल रु०1725/- का बिल बना जिसमे हमारे दो दिन का कमरे का किराया और कुछ चाय-कोफ़ी-दूध का भी हिसाब था ) करने के बाद होटल चेक आउट कर दिया । होटल के वेटरो की साहयता से सारा सामान कार की डिक्की में रखवाया, उनको टिप के रूप में कुछ रूपये दिए । चलने की पूरी तैयारी होने और सभी लोगो के कार में बैठने के बाद सुबह के लगभग 10:00 बजे के आसपास हम लोगो ने मनाली को अलविदा किया और सुहाने और भीगे मौसम का आनन्द लेते हुए, चल दिए नए स्थान पार्वती घाटी में स्थित पवित्र स्थल मनिकरण की ओर ।
मनाली(Manali)→50Km→भुंतर(Bhuntar)→29Km→कसोल(Kasol)→4Km→मनिकरण(Manikaran)
मनिकरण जाने का रास्ता मुख्यत रूप से भुंतर होकर जाता हैं तो इस बार हमने भुंतर (कुल्लू) तक जाने के लिए कुल्लू जाने वाले NH21* को न चुन कर व्यास नदी के दूसरी तरफ बने नए मनाली वाले रास्ते को चुना । माल रोड से आगे चलने पर व्यास नदी के पुल को पार करने के बाद बाई ओर का रास्ता (NH21*) सोलांग घाटी-रोहतांग-लेह की ओर चला जाता हैं, और दाई तरफ का रास्ता कुल्लू और भुंतर की ओर । नए मनाली से भुंतर तक के इस मार्ग का नाम MDR-29 (Major Districts Road ) हैं , जो मनाली से नग्गर, कुल्लू होते हुए भुंतर तक जाता हैं । हम लोगो में दाई तरफ का रास्ता चुना और भुंतर की तरफ चल दिए । यह रास्ता काफी साफ़-सुधरा, चौड़ा और बहुत ही अच्छी अवस्था में था । इस रास्ते में दाई ओर बह रही व्यास नदी और रास्ते में पड़ने वाले पहाड़, जंगल के प्राकृतिक द्रश्य अपनी अनुपम छंटा बिखेर रहे थे । कुल मिलाकर यह रास्ता बहुत ही खूबसूरत और नयनाभिराम द्रश्यो से भरा पड़ा हैं । रास्ते में सड़क के किनारे हमें एक फल की दुकान नजर आई, गाड़ी रोककर कुछ यहाँ के प्रमुख फल काफी मोलभाव करने के बाद ख़रीदे और अपने सफ़र को फिर जारी रखा । दोपहर लगभग 12:00 बजे की आसपास व्यास नदी की दूसरी ओर कुल्लू शहर नजर आने लगा था । दूर से दिखते कुल्लू शहर के सुन्दर घर, गुरुद्वारा, पुल, पहाड़ बहुत ही प्यारे और मन को लुभा रहे थे । नदी पार दिखते कुल्लू शहर के कुछ फोटो हमने चलती कार से खींचे थे, जो इस लेख में भी लगाये हैं ।
लगभग बीस मिनिट के सफ़र के बाद हम लोग भुंतर के पास पार्वती नदी पर बने पुल के टोल टैक्स पर पहुँच गए । इस पुल से आगे जाने के लिए टोल टैक्स देना होता हैं, जो हमने चुकाया पर कितना चुकाया यह अब याद नहीं । पार्वती नदी पर बना यह पुल बहुत खूबसूरत और अलग ही डिजायन का था । पुल पार के बाद MDR-29 यही खत्म हो जाता हैं और यही से रास्ता दो भागो में बंट जाता हैं । दाई तरफ का रास्ता भुंतर-कुल्लू की तरफ ओर बाई तरफ का रास्ता मनिकरण की तरफ, पुल से से मनिकरण की कुल दूरी लगभग 33 किमी० हैं । भुंतर से मनिकरण तक यह वाला मार्ग MDR-30 मनिकरण रोड कहलाता हैं । हम लोग इसी मनिकरण वाले मार्ग में चल दिए ।

Parvati River in Valley (कसोल के पास जाम में फँसे थे,उस समय कार से निकलकर कर पार्वती घाटी और नदी का यह फोटो लिया था )
अब हम कुल्लू घाटी से निकलकर पार्वती घाटी में प्रवेश कर चुके थे । एकमार्गीय (single root) मनिकरण मार्ग बहुत सुन्दर था और तेज गति शोर करके बहती हुई पार्वती नदी के किनारे मनिकरण तक जाता हैं । हिमालय के गोद में बसी पार्वती घाटी में पार्वती नदी के बहने का संगीत (शोर) हमेशा सुना जा सकता हैं और यह घाटी बहुत ही खूबसूरत, चारों ओर हरियाली, बड़े-बड़े पेड़ और सुन्दर द्रश्य से भरी पड़ी हैं । यह मार्ग काफी संकरा और बहुत सी जगह चट्टानें गिरने, वारिश से काफी उबड-खाबड़ हो गया था । कही-कही यह मार्ग तो पहाड़ों से बाहर के तरफ निकली चट्टान के कारण इतना संकरा हो जाता था, कि एक बार में एक ही तरफ की गाड़ी निकाली जाती थी तब तक दूसरी तरफ के वाहनों को अपनी बारी का इन्तजार करना पड़ता था । संकरा मार्ग होने के कारण यदि कोई बड़ा वाहन जैसे बस ट्रक आ जाए तो समझो लंबा जाम और लगता था कि जैसे समय ठहर गया हो और ट्रेफिक बेहद धीमे गति से गुजरता था । कही-कही इस संकरे मार्ग से सामने वाले वाहन को रास्ता देने लिए गाड़ी को बिल्कुल खाई के बिल्कुल मुहाने तक लाना पड़ जाता था ।
सवा बजे के आसपास हम लोग कसोल से चार-पांच किलोमीटर पहले एक इसी तरह के भयंकर जाम में फँस गए थे जैसे-तैसे एक घन्टे में कसोल को पार किया । कसोल के पार करने के बाद मणिकरण से दो किलीमीटर पहले फिर जाम में फँस गए । हमें ऐसा लगा था की जैसे आज हमारी किस्मत आज जाम ही जाम है और ऊपर से खराब रास्ता, पर क्या करते समय के अनुसार चलने को विवश थे पर गनीमत थी कि मौसम खुशगवार और ठंडा था और रास्ते में कही-कही हल्कीबारिश भी हो गयी थी । आखिरकार किसी तरह रास्ते की इन परेशानियो से निपट कर तीन बजे के आसपास हम लोग मनिकरण पहुँच ही गए ।
मनिकरण (Manikaran) Himachal Pradesh
मनिकरण सयुक्त रूप से हिन्दुओ और सिक्खों का एक महत्वपूर्ण तीर्थस्थल हैं । मनिकरण हिमाचल प्रदेश राज्य में हिमालय की गोद में पार्वती घाटी में पार्वती नदी और व्यास नदी के बीच पार्वती नदी के किनारे बसा हुआ हैं, इसकी समुंद्र तल से ऊँचाई लगभग 1760 मीटर हैं । कुल्लू से यह 45किमी०, मनाली से 88किमी० और भुंतर से 35 किमी० दूर हैं । मनिकरण मुख्यतः अपने खौलते हुए गर्म पानी के चश्मे (कुंड) और खूबसूरत प्राकृतिक सौंदर्य के लिए प्रसिद्ध हैं । माना जाता हैं कि यह गर्म पानी गंधक युक्त हैं और इस पानी से स्नान करने से चर्म रोग दूर हो जाते हैं । मनिकरण में भगवान रामजी, शिवजी, नैनाभगवती आदि के मंदिर और एक गुरुद्वारा हैं । यहाँ हमें प्रकृति का एक अदभुत चमत्कार देखने को मिलता हैं कि एक तरफ नदी में बहता बर्फ जैसा ठंडा पानी दूसरी और उसके किनारे खौलता हुआ गर्म पानी का कुंड, जो इतने गर्म हैं की कुछ मिनिटो में खाना पक जाये । मनिकरण आने पर नदी के दाई तरफ के हिस्से में मंदिर, गुरुद्वारा, धर्मशालाये, बाजार और गर्म पानी के चश्मे हैं, यहाँ पर केवल पैदल ही पुल पार करके जाया जा सकता हैं । नदी के बाए तरफ के हिस्से में टैक्सी, बस स्टैंड, रेस्तरा और होटल हैं । यही से आगे एक रास्ता मनिकरण से आगे खीर गंगा की तरफ चला जाता हैं ।
मनिकरण का महात्य और इतिहास
मनिकरण मुख्यता दो शब्दों से मिलकर बना हैं पहला “मणि” यानि बहुमूल्य पत्थर और दूसरा “कर्ण” यानि कान । हिंदू धर्म के अवधारणा के अनुसार मनिकरण को ब्रह्मांड पुराण में सबसे उत्तम कुलान्त पीठ में स्थित श्रेष्ठ तीर्थराज माना जाता हैं । ब्रह्मांड पुराण में इस तीर्थ का नाम वेद ने हरी हरी कहा हैं और दूसरा नाम अर्धनारीश्वर और तीसरा नाम चिंतामणि हैं । एक बार भगवान आशुतोष भगवान शिवशंकर और माता पार्वती संसार भ्रमण करते हुए इस स्थान पर पहुंचे, इस स्थान का अनुपम सौंदर्य और प्रकृति की मनोहारी शोभा देखकर शिव पार्वती यहाँ रुक गए और हजारों वर्षों तक यहाँ तप और निवास किया । एक बार जलक्रीड़ा करते समय माता पार्वती जी की कान के आभूषण की मणि कही गिर कर गुम हो गयी तो माता पार्वती जी के अनुरोध पर भगवान शंकर के आदेश पर गणों ने मणि को सर्वत्र ढूंढा परन्तु मणि कही न मिली । इस पर भगवान शंकर क्रोधित हो उठे और उन्होंने अपना दिव्य नेत्र खोला । भगवान शंकर के तीसरे नेत्र से नैना माता प्रकट हुई, इसलिए मनिकरण को नैना माता की जन्मस्थली भी माना जाता हैं । सभी देवी देवता भयभीत हो गए और ब्रह्मांड कम्पामान हो उठा । पतालाधिपति शेषनाग जी ने जोर का फूंकार छोड़ा जिससे उबलते हुए गर्म जल की धारा उर्ध्वाधर फूट पड़ी । इस धारा में सहस्त्रो अन्य मणिया सहित माता पार्वती के कान के आभूषण की मणि भी निकल आई और भगवान शंकर का क्रोध शांत हो गया । इस कारण इसका नाम मनिकरण पड़ गया ।
यह स्थान भगवान शंकर को इतना प्रिय था कि काशी में गंगा किनारे एक घाट का नाम “मणिकर्णिका घाट” रखा । भगवान शंकर के महिमा के प्रत्यक्ष के रूप में भूमिगत किसी अज्ञात अदभुत शक्ति के कारण श्री मनिकरण में जगह जगह उबलते हुए जल (86°C – 96°C तापमान) के फव्वारे दर्शक का मन मोह लेते हैं । ऐसे ही गर्म फब्बारे के पास भगवान शिवशंकर का एक बहुत ही भव्य मंदिर स्थापित हैं जिसमे भगवान शंकर जी एक बड़े शिवलिंग के रूप में विराजमान हैं और उनके मंदिर के ठीक सामने एक पीतल के नंदी की बड़ी सी मूर्ति भी हैं । बर्फीले ठन्डे पानी की पार्वती नदी मंदिर के बगल से ही बहती हैं और मंदिर का फर्श गर्म कुंड के कारण अक्सर गर्म ही रहता हैं । मुख्य मंदिर के बगल में ही शिवजी का एक छोटा मंदिर भी हैं । मंदिर का रास्ता मनिकरण के मुख्य बाजार से होकर जाता हैं, एक छोटे से रास्ते से गुरुद्वारे भी जुड़ा हुआ हैं ।

Bathing Hot Pond at Raghunath Temple (नहाने लायक गर्म पानी का एक स्नानागार, पर उसमे पानी अधिक गर्म होने के कारण बंद था ।)
सिक्ख धर्म के अवधारणा के अनुसार कलयुग में श्री गुरु नानक जी ने अवतार लिया और सांसारिक जीवो का उद्धार करते हुए 15अस् 1574 विक्रमी संवत को मनिकरण पहुंचे और साथ ही साथ भाई बाला और मरदाना भी थे । यहाँ पहुँचने पर भाई मरदाना को भूंख लगी और गुरुजी को कहने लगा “मेरे पास आटा तो हैं पर आग और बर्तन का कोई साधन नहीं हैं ।” यह सुनकर गुरुजी ने मरदाने को एक पत्थर उठाने को कहा जब मरदाने ने पत्थर उठाया तो खौलते पानी का चश्मा प्रकट हुआ, गुरूजी ने मरदाने को रोटिया बनाकर खौलते पानी में डाल देने को कहा, जब उसने रोटिया डाली तो सभी रोटीया उस चश्मे में डूब गयी । यह देखकर मरदाना कहने लगा,”थोड़ा सा अनाज था वह भी वैसे ही चला गया ।” गुरूजी ने कहा.”मरदाने ! अरदास कर कि एक रोटी भगवान ले नाम को दूँगा ।” मरदाने के अरदास करने पर सभी रोटिया बाहर आ गयी । मरदाना भोजन करके तृप्त हुआ और खुश होकर कहने लगा,” गुरूजी आप यही ठहरे, आपको तो भूख लगती नहीं, मेरा काम इसी से चलता रहेगा ।” गुरूजी के प्रकट किये हुए चश्मे मे आज भी उसी तरह लंगर पकता हैं । सन 1940 में संत बाबा नारायण हरी जी ने इस स्थान की खोज की और निर्माण आरम्भ किया । सिक्ख धर्म की प्रमुख आस्था का प्रतीक एक भव्य गुरुद्वारा यहाँ शिवमंदिर के बगल में ही स्थापित हैं, जिसे मनिकरण साहिब के नाम से जाना जाता हैं । गुरूद्वारे में समयनुसार हमेशा लंगर आयोजन रहता हैं और लंगर का खाना शिव मंदिर में स्थित उबलते गर्म कुंड के पानी में ही पकता है ।
मणिकरण अपनी प्राकृतिक सुषमा और सुन्दर नजारों के लिए भी प्रसिद्ध हैं । मनिकरण का मौसम हमेशा सुहावना रहता हैं, मन को सुकुन देने वाला होता हैं । मनिकरण के दोनो और ऊँचे-ऊँचे हरे-भरे पहाड़ और पहाड़ों के बीच में तेज गति से पार्वती नदी बहती हैं । इसी पार्वती नदी के दोनो ओर मनिकरण बसा हुआ हैं । नदी पार करने के लिए दो पुल भी हैं जिनमे से एक गुरुद्वारे से और एक टैक्सी स्टैंड चौक से हैं । मनिकरण में कई सारी धर्मशालाएं हैं और कई छोटे बड़े होटलो की भी अच्छी व्यवस्था हैं । खाने के लिए छोटे बड़े ढाबेनुमा रेस्तरा हैं जहाँ आपको स्वादिष्ट खाना देर रात तक उपलब्ध हो जाता हैं । वैसे मनिकरण छोटी जगह हैं तो इसका बाजार भी जल्दी ही बंद हो जाता हैं ।
आज मणिकरण के बारे में बस इतना ही । अगले लेख में मनिकरण के मंदिर, गुरुद्वारा और गर्म पानी के चश्मे आदि पर बिताए अपने बहुमूल्य और खूबसूरत पलो के बारे में अपना अनुभव इस श्रृंखला के अंतिम भाग में प्रस्तुत करूँगा । आज की मनिकरण की यात्रा आपको कैसी लगी, आपकी प्रतिकिया और अगले लेख के लिए सुझावों का स्वागत हैं । अगले लेख तक के लिए आपका धन्यवाद !
नोट : ऊपर लगाये गए फोटो में दर्शाये गए समय और दिनांक वास्तविक हैं ।




























वाह भाई वाह, क्या लेखन हैं, क्या फोटो हैं, मज़ा आ गया. ओर ये तो भगवान जी की ही कृपा हैं की ऐसे ठन्डे स्थानों पर भक्तो के नहाने के लिए गर्म जल के झरने हैं. वन्देमातरम
प्रवीन जी…..लेख को पसंद करने के लिए धन्यवाद…!
सच कहा आपने…यह तो भगवान की ही कृपा हैं…..|
वंदे मातरम…
काफ़ी पहाड़ी स्थानो में गरम पानी के कुंड है , ये उपर वाले की लीला है :-)
लेख और पिक्चर दोनो ही काफ़ी सुंदर |
महेश जी…..
लेख पर टिप्पणी और पसंद करने के लिए धन्यवाद !
रितेश भाई अपने मनाली के साथ पूरा इन्साफ किया है …
मोंटी भाई… पूरी कोशिश की हैं कि सही जानकारी उपलब्ध करा सकु…|
धन्यवाद
रितेश जी, मणिकरण एक शानदार जगह है। पार्वती नदी का यहां बडा भयंकर रूप देखने को मिलता है। पुल पर खडे होकर नीचे पार्वती को देखने से डर लगता है। और पोस्ट लेखन भी हमेशा की तरह शानदार।
आपकी जानकारी के लिये एक बात बताना चाहता हूं कि किसी भी नदी का बायां और दाहिना नदी के बहने की दिशा से निर्धारित होता है। आप नदी के बहने की दिशा में मुंह करके खडे हो जाइये, आपका बायां नदी का बायां होगा और आपका दाहिना नदी का दाहिना हो जायेगा।
एक जगह आपने लिखा है नदी के बाए तरफ के हिस्से में मंदिर, गुरुद्वारा, धर्मशालाये, बाजार और गर्म पानी के चश्मे हैं, नदी के दाई तरफ के हिस्से में टैक्सी, बस स्टैंड, रेस्तरा और होटल हैं ।
अब आप खुद ही बताइये कि क्या यह सही है?
नीरज जी….
मैंने जो लिखा वो अपने मनिकरण आने की दिशा के अनुसार लिखा था पर आपने सही कहा नदी का दांया और बांया उसके बहाव के अनुसार ही निर्धारित होता हैं ….एक अच्छी जानकारी देने के लिए धन्यवाद…..| आपके अनुसार लेख में इसे ठीक कर दिया जाएगा…|
लेख को पसंद करने के लिए धन्यवाद !
नीरज ये बताओ कि मनीकरण के पास रिवालसर क्यो लिखा है
रिवालसर तो मंडी के पास है
Ritesh Ji,
Very nice post. good photos. श्री गुरुगोविंद सिंह ji had never been at Manikaran. श्री गुरुगोविंद सिंह ji visited to Mandi. As Hindu mathology माता पार्वती के कान के आभूषण come outside with flow of water. Bhai Mardana took stone and water come out, it belongs to Hasan Abdal … little need more clarify. As Gurudwara Sahib next to Shiv Mandir and there was already Hot water spring .
Thanks a lot for such wonderful photos and description.
टिप्पणी के लिए धन्यवाद सुरिंदर जी….|
मैंने मनिकरण का इतिहास और महात्य नेट से नहीं बल्कि वहाँ के गुरूद्वारे और मंदिर में लगे बोर्ड से लिखा हैं जिसकी फोटो भी मेरे पास हैं, वो फोटो आपको अगले पोस्ट में देखने को मिल जायेगी |
हां एक गलती जरुर हुई हैं कि गुरुनानकदेव जी की जगह गुरु गोविन्द सिंह जी गलती से टाइप हो गया हैं ….. | इस गलती को अब सही कर दिया जायेगा ….| गलती की और ध्यान दिलाने और लेख की सराहना करने के लिए धन्यवाद !
और आज कितने दिनों बाद हिन्दी में पोस्ट आई है? हिन्दी पट्टी कहां चली गई? भईया हिन्दी वालों, वापस आ जाओ।
लगता हैं हिंदी वाले अधिकतर लेखक घूमने गए……..| क्यों न नीरज जी…आप ही अपना हाल ही का गंगोत्री वाला लेख घुमक्कड़ पर डाल दो…|
हिंदी के दो जांबाज़ सिपाही (संदीप और मनु) शायद हिमाचल निकलें हैं , हफ्ता दस दिनों के लिए |
मजा सा आ गया रीतेश जी… फोटो भी बहुत बढ़िया है…
पार्वती नदीं की भयंकरता चित्र मे स्पष्ट दिखाई दे रही है.. नदी व गुरुद्वारे का चित्र अनुपम है..
धन्यवाद
S.S. JI…..
लेख को पसंद करने के लिए आपका बहुत बहुत आभार !
पार्वती नदी के इसी भयंकरता के कारण ही मनिकरण में नदी के किनारों पर कंक्रीट की दीवार बनाई हुई हैं….
मणिकरण के बारे में मेरी अधूरी जानकारी थी इसीलिए मैंने रोहतांग सोलंग वशिस्थ तथा एक और टूर किया . मनाली से तीन टूर होते हैं मैंने मणिकरण वाला टूर छोड़ दिया . अब जल्दी करूंगा
आपके मनाली के सफ़र में फोटो १००% सुंदर हैं
नीरज जी गंगोत्री तपोवन नहीं लिखोगे तो हिंदी पोस्ट ६ दिन बाद ही आएगी
सर्वेश जी….
अब तो आपकी मनिकरण की जानकारी पूरी हो गयी न ! अब इस टूर को भी जल्द ही कर लेना …|
लेख पर टिप्पणी करने करने के लिए धन्यवाद…|
beautiful post.superb photographs.
congratulations for such a nice travelogue.
Ashok ji….Thanks for linking post…
रितेश,
आपकी यह सीरिज पढ़कर इतना आनंद आया की बस अगले जून में मनाली का अपना टिकिट भी पक्का समझो. विवरण एवं तस्वीरें दोनों ही दमदार हैं. अब भैया नैनीताल कब ले जा रहे हो?
मुकेश जी…..
बहुत अच्छा ……अग्रिम बधाई हो….अब आपने भी मनाली जाने का अपना मन बना ही लिया….|
नैनीताल भी जल्द ही घूमायंगे ! अभी इस श्रृंखला की एक पोस्ट और बाकी हैं जो १६ जुलाई को आ जायेगी…बस फिर उसके बाद नैनीताल का नंबर हैं….|
लेख को पसंद करने के लिए धन्यवाद….!
रितेश जी ,
आज तो मै आपकी पोस्ट की तारीफ मै कुछ लिखू उससे पहले आपकी तारीफ करना चाहती हूँ की आपने भोले बाबा की कहानी बताई जिससे सावन मे हम जितना उनका नाम ले या सुने हम सब के लिए अच्छा हैं .
मै जहाँ तक समझती हूँ की पोस्ट तारीफ के लिए सबसे बड़ा कमेन्ट यह हैं की किसी के मन मै वहां जाने की ललक जागना तो हमारे मन मै तो आ गया की हम लोग भी मनाली जाये . कुल मिलाकर आपका लेखन शानदार लगा और फोटो भी बहुत अच्छे लगे ………
कविता जी…..
आपने सही कहा ! भोले बाबा का सावन में जितना भी नाम लो उतना ही हम सबके लिए अच्छा हैं…..जय भोले भंडारी की | यह पोस्ट मैंने सोमवार को इस कारण ही प्रकाशित की थी और मनिकरण की अगली पोस्ट भी सोमवार को ही आएगी…जिसमे मनिकरण में विराजमान शिवलिंग के भी दर्शन होगे…|
जानकार अच्छा लगा की आपने और मुकेश जी ने अगले जून का कार्यक्रम मनाली का बनाया हैं…..|
लेख पर सुन्दर टिपण्णी के लिए धन्यवाद ….!
बहुत ही बढ़िया लेख रितेश और बड़े ही मन से लिखा गया है, ऐसा पढ़ कर लगता है | आपका ठहराव इस लेख के माध्यम से दिखता है , उत्तम | मणिकरण की लोकेशन वातव में बहुत ही मनोहर है |
मणिकरण से दो किलोमीटर पहले कसोल पड़ता है जो की एक तरह का छोटा हिप्पी गाँव है , वहां खाने के एक दो बहुत ही बढ़िया कैफे (भोज ओर एक और) हैं और हवा में एक लगातार नशा |
नंदन जी…
मेरे ख्याल से कसोल मनिकरण से लगभग चार किमी० दूर हैं | मैक्लोडगंज के बाद कसोल ही एक ऐसी जगह हैं, जहाँ स्थानीय लोगो से ज्यादा विदेशी लोग नजर आते हैं | खैर हम यहाँ रुके तो नहीं थे, पर गुजरे जरुर थे …उस समय यहाँ पर दोपहर के वक्त काफी सन्नाटा था ….और अजीव सा वातावरण था यहाँ का ..|
प्रेरक और सुन्दर शब्दों के माध्यम से टिप्पणी करने और लेख को पसंद के लिए धन्यवाद !
jay shree krishna Ritesh ji. Om Namah Shivay. jay mata parvati ji.
Bahut Hi Dharmik aur punya dene vali yatra aaj aapne hame karvai he. bahut hi Achha laga hame aapki is post ke dwara Manikarnika teerth aur us teerth se judi hui story ke bare me sunkar.
Aur Itni thand me garam pani ke kholte kund vastav me ye to chamatkaar he.
Is post ko padhakr hame bahut hi divya anubhuti hui he. Jese ki hum bhi manikarnika pahunch gaye ho.
Dhanyawaad Ritesh ji is Divya aur sundar post ke liye.
Har Har Mahadevv. jay bhole nath
जय श्री कृष्णा तरुन जी….
लेख पर सुन्दर शब्दों के माध्यम से प्रतिक्रिया करने के लिए धन्यवाद …!
इन गर्म कुण्ड के कारण मनिकरण को चमत्कारिक तीर्थ कहा जाता हैं..|
हर हर महादेव…..जय भोले नाथ की…
धन्यवाद
बहुत ही दमदार पोस्ट है रितेश. उतने ही उम्दा फोटो भी हैं. आपने मनाली और आस पास के स्थानों का बहुत ही बढ़िया विवरण दिया है.
दीपेंद्र जी….
आपका बहुत-बहुत धन्यवाद….
आगे भी ऐसी ही कोशिश जारी रहेगी……।
DEAR THERE IS ONE ROOM IN MANIKARAN WHICH IS JUST LIKE A SPA (STEAM BATH). NEXT TIME YOU SHOULD GO THERE.
GUD DISCRIPTION OF MANIKARAN. CONTINUE……
धन्यवाद संजय जी….
कृपया आप बतायेगे की यह स्पा रूम मनिकरण कहाँ हैं….
यदि स्पा की यथा स्थिति का पता चल जाये हमारी और हमारे घुमक्कड़ भाइयो के लिए सज्ञान में रहेगी…|
धन्यवाद