BHEEMTAL LAKE भीमताल झील का भ्रमण

June 25, 2012 By:

भीमताल आने के बाद रहने-खाने का प्रबन्ध तो ओशो आश्रम में हो ही गया था। पहला आधा दिन बिल्कुल खाली-ठाली बैठ कर बिताया गया था, अगले दिन सुबह का खाना खाकर मैं तो अपनी घुमक्कडी की इच्छा पूरी करने निकल पडा। कल से भीमताल नजरों के सामने दिखाई दे ही रहा था अत: सबसे पहले देखना भी इसको ही था। सडक पर आते ही सबसे पहले इस ताल के किनारे यहाँ का भीमताल का पुलिस थाना आता है। पुलिस थाना भीमताल से एकदम सटा हुआ है बीच में बस सडक ही है। थाने से आगे चलते ही एक तिराहा आता है जहाँ से उल्टे हाथ जाने पर भवाँली होते हुए नैनीताल व अल्मोडा की ओर जाया जाता है भीमताल से नैनीताल व काठगोदाम 22 किलोमीटर तथा अल्मोड़ा 64 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यदि इसके विपरीत सीधे हाथ पर जाये तो भीमताल के साथ-साथ एक किमी से भी ज्यादा चलना होता है। मैंने वो सवा किमी की दूरी लगभग 30-35 में तय की होगी। मैं मजे से इस ताल के दर्शन करता हुआ आगे टुलक-टुलक बेहद ही धीमी गति से आगे बढ रहा था। पैदल टहलते हुए यह साफ़ दिखाई दे रहा था कि भीमताल एक त्रिभुजाकर आकृति/आकार की झील है। इस ताल के आखिरी छोर पर जाने के बाद एक बाँध दिखाई देता है जहाँ से गौला नदी की शुरुआत होती है जो आगे जाकर किसी दूसरी नदी में मिल जाती है। इस बाँध पर आगे चलते हुए एक मन्दिर दिखाई देता है जिसके बारे में पता चला कि यह प्राचीन भीमेश्वर महादेव का मन्दिर है। यह मन्दिर भीम या किसी और ने व किसकी याद में बनाया, यह तो पता नहीं लेकिन यहाँ पर पूजा-पाठ लगातार हो रही है।

भीमताल की पहली झलक।

ताजे-ताजे पत्ते।

भीमताल कुमाऊँ क्षेत्र की सबसे बड़ी झील है। यह ताल नैनीताल से भी बड़ा है। विशाल आकार होने के कारण ही, शायद इस ताल को भीमताल कहते हैं। यह झील समुद्र तल से 1370 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है। इसकी लम्बाई 1674 मीटर, चौड़ाई 427 मीटर और गहराई 30 मीटर के आसपास है। भीमताल सवा किमी लम्बाई में फैला हुआ काफ़ी बड़ा ताल है यहाँ पर पर्यटन विकास निगम का एक आवास गृह भी है। सरकारी विश्राम गृह के अलावा भी यहाँ पर रहने खाने की अच्छी निजी व्यवस्था भी है। नैनीताल की तरह ही इस ताल के भी दो कोने हैं जिन्हें तल्ली ताल और मल्ली ताल कहा जाता हैं। परन्तु कुछ विद्धान इतिहासकार इस ताल का सम्बन्ध पाण्डु पुत्र भीम से जोड़ते हैं। बताते है कि भीम ने ही यहाँ भूमि को खोदकर यह विशाल ताल बनाई थी। मुझे नहीं लगता कि वैसा हुआ होगा,  इस बाँध पर खडे होकर ताल में देखा तो वहाँ पर एक टापू दिखाई दे रहा था। इस ताल का सबसे बेहतरीन बिंदु यह टापू ही है जो इसके बीचो बीच बना हुआ है, बेशक यहाँ जाने के लिए नाव से ही जाना होता है, लेकिन अगर वहाँ तक ना भी जाना चाहो तो भी कोई बात नहीं, यहाँ किनारे पर रह कर भी घंटो बैठा जा सकता है, आपको पता ही नहीं लगेगा कि कब समय बीत गया? जिस दोस्तों ने इस विशालकाय भीमकाय ताल का दर्शन किया होगा उन्हें इसकी इस खूबी का अवश्य पता होगा।

भीमताल की पूरी झलक।

भीमताल में किनारे पर स्थित एक प्राचीन मन्दिर।

यहाँ पर इस झील के मध्य में भीमेश्वर मन्दिर के पास ही एक छोटा सा द्धीप है, जो ज्वालामुखी चट्टानों से निर्मित हुआ बताया गया है। भीमताल की झील में बने उस द्धीप में कई देशों की विभिन्न प्रजातियों की एकत्रित की हुई समुद्री मछलियाँ एक विश्व स्तरीय एक्वैरियम का निर्माण कर उसमें पाली गयी है। झील विकास प्राधिकरण की इस अनोखी पहल के कारण यह टापू पर्यटकों को आकर्षित करने के साथ उनका ज्ञानवर्धन भी कर रहा है। भीमताल के टापू पर पहले कभी रेस्टोरेंट हुआ करता था लेकिन उससे झील में गंदगी बढ़ने लगी थी। जिस कारण झील संरक्षण परियोजना के अंतर्गत यहाँ रेस्टोरेंट की जगह एक्वैरियम बनाया गया। जिसके परिणाम स्वरुप झील को प्रदूषण से मुक्ति मिली व झील के दर्शकों की संख्या में बढोतरी भी हुई। अलग-अलग रंग-बिरंगी प्रजातियों की मछली वाला यह एक्वैरियम धीरे-धीरे ही सही, लेकिन प्रसिद्धि पा रहा है। इस एक्वैरियम के निर्माण पर करोड़ रुपए से ज्यादा की लागत आई थी। इसमें मछलियों को रखने के लिए 33 टैंक बनाए गए हैं। जिनमें से दो टैंकों में समुद्री जल में रहने वाली मछलियों की कई प्रजातियाँ रखी गई हैं। इस एक्वैरियम को देखने के लिए प्रति व्यक्ति सौ रुपए का शुल्क भी देना पडता है। यहाँ पर करंट पैदा करने वाली मछली ’इल’ भी देखी जा सकती है।

भीमताल में स्थित टापू पर जाने के लिये नाव।

भीमताल में बीचो बीच स्थित टापू।

इस टापू तक आने-जाने के लिये नाव मिल जाती है। लेकिन उनका किराया भी पहले पता कर लेना चाहिए कहीं बाद में आपसे ज्यादा पैसों की माँग ना करने लगे। मैंने यहाँ पर झील में घुस कर नाव की सवारी नहीं की, और जब नाव में ही नहीं बैठा तो एक्वैरियम देखने का तो सवाल ही नहीं आता है। मैं कोई तीन घन्टे इस ताल के किनारे बैठा रहा। ताल के किनारे ठन्डी-ठन्डी हवा मन को बडा सुकून मिल रहा था। घडी में समय देखा तो दोपहर के एक बजने वाले थे। जब इस ताल की लगभग पूरी परिक्रमा हो गयी तो, अब यहाँ से आगे जाने की सोची जिस मार्ग से भीमताल थाने से यहाँ तक आया था, किसी ने बताया कि यही से वो ही मार्ग, यहाँ से सामने आगे बढता हुआ नैकुचियाताल की ओर चला जाता है अत: मैं भी टहलता हुआ उसी ओर चला गया था। इस ताल का मैंने इसके किनारे के अलावा पहाड़ की काफी ऊँचाई से भी अवलोकन किया है, जिसके लिए मुझे कोई खास चढाई भी नहीं करनी पडी थी क्योंकि जहां हम रुके हुए थे, वहाँ से ऊपर-ऊपर ही एक कच्चा मार्ग ऐसी जगह जाता था जहाँ से मैंने इस विशाल ताल का पूरा नजारा लिया था, हमारे साथ ओशो आश्रम के मालिक का एक लड़का भी साथ था जिसने हमें यह भी बताया था कि “कोई मिल गया” नाम की फिल्म की शूटिंग भी यही इस ताल के ऊपर दूसरे वाले पहाड़ पर हुई थी, मैंने दूर से वह मकान भी देखा था जिसमे ऋतिक रोशन उस फिल्म में रहता था, अगर आप में से कोई यहाँ आये तो इस बात को जरुर याद रखे व् एक बार ऊंचाई से भी इस झील के दर्शन जरुर करे ताकि ऊँचाई से देखने पर यह भीमकाय ताल सिमट कर छोटा दिखाई दे और एक बार में ही कैमरे और आँखों में समां सके। बाकी आपकी मर्जी………..

भीमताल में किनारे पर स्थित एक प्राचीन मन्दिर।

खाने का जब मन करे खा लो।

नैनीताल पुलिस की यह बात हजम नहीं हुई? हाजमोला लिया उससे भी कुछ नहीं हुआ।

अगले भाग में नौकुचियाताल के दर्शन कराये जायेंगे।
वैसे इस पोस्ट को जो छोटी मान रहा हो उसके लिए बता दूं कि इसमें 800 से ज्यादा शब्द है।

About Jatdevta

Jatdevta Sandeep Panwar has written 100 posts at Ghumakkar.

मैं ठहरा मनमौजी, मतवाला, घूमने के मामले में पर्यटकों (कार हवाई जहाज से साल में एक आध बार घूमने जाने वाले) से एकदम अलग हूँ। घूमने में पूरी जायज कंजूसी दिखाता हूँ। फ़ालतू की फ़िजूल खर्ची पसन्द नहीं है। अपनी मेहनत की कमाई से घूमता हूँ। रिश्वत या दान की कमाई से नहीं। रिश्वत भ्रष्टाचारी लेते है दान पुजारी व भिखारी लेते है। मेरा साल में एक-दो बार तो घूमना होता नहीं है। मैं चाय, बीडी, सिगरेट, गुटका, पान, तम्बाकू, अंडा, मीट, मछली, शराब, आलसीपन, दान और रिश्वत से सख्त नफ़रत करता हूँ।

Getaway Jungle Camp

12 Responses to “BHEEMTAL LAKE भीमताल झील का भ्रमण”


  1. Surinder Sharma says:

    जाट देवता बढ़िया फोटो और विवरण हैं

    शुक्रिया

  2. राम राम जी, भीमताल झील के फोटो बहुत अच्छे हैं, और यह क्षेत्र खुबानी, आलूचे, आदि फलो के लिए भी मशहूर हैं, भुवाली मैं तो बकायदा फलो की पूरी मंडी लगती हैं. भीमताल क्षेत्र मार्च, अप्रैल या फिर अक्टूबर, नवंबर मैं बहुत खूबसूरत व मनोरम लगता हैं. और झील मैं नौकायन का तो अलग की मज़ा हैं.

  3. हाँ आपकी बाकी लेखो के मुकाबले में थोड़ी छोटी है . बहुत सुन्दर है भीमताल .आपने ऊपर पहाड़ पर जाके भीमताल के दर्शन करने जरूर कहा.काश यहाँ पर ऊपर से लिया हुआ एक फोटो भी होता.बीचमे जो टापू है उसका फोटो बहुत सुन्दर लग रहा है. और बहुत सच में बहुत शान्ति का आभास हुआ होगा तीन घंटे के लिए ताल के किनारे बैठे बैठे. भीमताल केदर्शन के लिए धन्यवाद.

  4. Monty says:

    हम भी जा रहे 15 दिन बाद 4 दिन का टूर है देखते है कितना सुन्दर है ये.

    • JATDEVTA says:

      मोंटी भाई १५ दिन बाद तो मौसम एकदम सुहावना हो जायेगा क्योंकि तब तक तो बारिश पहाडो पर पूरी तरह छा चुकी होगी, यहाँ भीमताल में रहते हुए ही आप नौकुचियाताल व् सातताल देख सकते है दोनों की दूरी ५-५ किमी की है, रहने की भी कोई खास समस्या नहीं आयेगी, भीमताल में ओशो आश्रम है, भीमताल से नौकुचियाताल जाते समय कई होटल है जो पेइंग गेस्ट की तरह ठहराते है, मौसम की चिंता ना करे तब तो मस्त…………

      • Monty says:

        जाट देवता भाई का धन्यवाद…

        वैसे जाट है तो हम सब हिन्दुस्तानी, पर फिर भी पूछता हू कि आप हो कोन से राज्य से…

        में तो हरियाणा से

        • JATDEVTA says:

          वर्तमान में यूपी के वासी है, लेकिन हमारा पैंतालीस पीढियों पुराना अभिलेख धार जिले का पाया गया है

  5. बहुत ही सुंदर फोटो हैं, खास तौर पर टापू वाला .

  6. ashok sharma says:

    good post.nice pics.

  7. Ankit says:

    Wow……… Greatest snap with details. I like it. Thanks for sharing. Please keep it.

  8. जाट भाई आपने तो भीमताल झील का भ्रमण अच्छी तरह से कराया । पूरा चक्कर लिया झील का अब देखते हैं कि नौकुचिया ताल कैसा है मै आपकी पोस्ट पढकर थकान उतार रहा हूं हा हा हा
    ओशो के बारे में भी बहुत बढिया तरीके से जानकारी दी आपने । ये यात्रा भीमताल के साथ साथ एक और व्यू दे रही है ।

  9. abhishek kashyap 'trainman' says:

    जाट जी पुलिस की बात तो बिलकुल सही है.. उसमे तो हमे कुछो गलत लगा ही नहीं..
    वैसे वर्णन बड़ा ही मोहक रहा इस टापू का.. उत्तराखंड से मुझे इसीलिए सबसे ज्यादा प्यार है.. क्योकि जिंदगी का असली मजा तो यहीं है बस… देवभूमि उत्तराखंड..



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