Om Beach,Gokarna – ॐ बीच,गोकर्ण

June 22, 2012 By:

ॐ बीच पर बीती एक शाम और मुकेश के साथ जबरदस्त विवाद 

ॐ बीच

मैं शिरसी और सहस्रलिंग के दर्शन करके कुछ 2:00-2:30 बजे लौटा था। खाना खाते-खाते मुझे तीन बज गए, अब हमारी कर्णाटक की यात्रा के केवल 24 घंटे ही बचे थे। अगले दिन 4.00 बजे हमें कुम्ता पहुँचना था, जहाँ से हमें मुंबई के लिए ट्रेन पकडनी थी। तो अब मेरी कर्नाटक की यात्रा समाप्त होने जा रही थी। यात्रा के आखरी 24 घंटे मुझे अच्छे नहीं लगते, यात्रा शुरू करते वक्त बहुत उत्साह रहता है कि क्या-क्या करेंगे? कैसे घूमेंगे? आदि-आदि, लेकिन यात्रा के आखरी पल में मेरे मन में उदासी छा जाती है। ऊपर से रूम पर भी थोड़ी उदासी का माहौल था। मैंने आते ही सोनाली और मुकेश से पूछा कि कैसा रहा दिन? तो उन्होंने कहा कि बहुत बढ़िया रहा। उन्होंने पंडित द्वारा सुबह में श्री गोकर्ण महाबलेश्वर का अभिषेक किया और फिर मंदिर के सामने जो बीच है उसमे स्नान किया। मैंने कहा ठीक है चलो शिरसी और सहस्रलिंग नहीं आये तो मजा तो आया उनको। तब मैंने कहा कि चलो ॐ बीच चला जाये। चलो इस बार उन्होंने हाँ कहा तो मैं सीधे होटल से बाहर निकल गया और कार या ऑटो ढूँढने लगा। मुझे एक मारुती ओमनी वैन मिली जिसे मैंने 3-4 घंटे के लिए मात्र तीन सौ में बुक कर लिया। फिर हम चल दिए ओम बीच पर। हम कुल 20 मिनिट में ॐ बीच पहुँच गए। बीच पर जाने वाला मार्ग भी काफी सुन्दर है, पहाडों के ऊपर से होकर जाता है. मैंने एक जगह पर रूककर काफी तस्वीरे ली थी।

2 परिवार मारुती ओमनी में जा रहे है ॐ बीच

ॐ बीच :- ॐ बीच  गोकर्ण से कुछ 5 किमी की दूरी पर है। इस बीच का प्राकृतिक आकार ॐ के जैसा है अगर आप ऊपर से देखे तो  इसलिए इस बीच का नाम ओम बीच है। ॐ बीच बहुत मशहूर बीच है। यहाँ पर बहुत सारी बड़ी-बड़ी 3 स्टार और 5 स्टार होटल और रिसोर्ट है जहाँ आप कम से कम 3 दिन तक तो रीलेक्स्स कर सकते हो। घर से दूर प्राकृतक शान्ति का आभास होता है। ऊपर से बहुत तरीके के आयुर्वेदिक मसाज भी यहाँ पर होते है। काफी हद तक विदेशी लोग होते है जो ओम बीच पर रहते है। काफी लोग बीच पर सन-बाथ (सूरज कि रौशनी का अपने शरीर पर लेना) लेते है अपनी त्वचा को टेन करने के लिए (त्वचा को सावला या भूरा करने के लिए). दूसरे बीच से यहाँ का माहौल कुछ अलग ही है। आपको थोडा विदेशीपन और खुलापन दिखेगा।

ॐ बीच ऊपर से :- गूगल मैप्स की मदद से

1 . कुड्ले बीच 

2. ॐ बीच  पर जाने वाला मार्ग . यहाँ से निचे उतरना पड़ता है .

ॐ बीच जाते वक्त बीच में हमने गाडी रोकी थी एक पहाड़ पर , वहा से कुड्ले बीच दिखाई देता है.

गोकर्ण में मनो में उदासी का माहौल :- अब मुरुडेश्वर में मुकेश का कैमरा तो खराब हो ही चुका था। इसलिए एक तरह से उनका और कविता जी का मन पिछले 2 दिनों से दुखी हो रहा था। ऊपर से मुंबई आकर ठीक होगा कि नहीं यह भी नहीं पता था। सुबह जब मैं शिरसी गया था तब मैं अपना कैमरा साथ लेकर गया था, तो मुकेश ने अपना कैमरा गोकर्ण में कोई रिपैयर करने वाले को दिखाया था, उसने भी ठीक करने से मना कर दिया था, तो अब कैमरा ठीक होने का निर्णय मुंबई में होने वाला था। जब से कैमरा खराब हो गया तब से मैंने मुकेश से कहा था कि फोटो की चिंता मत करना, मेरे कैमरा से ले लेना, एक बार नहीं बार-बार। फिर भी यह बात कही न कही खटक रही थी कि उसका कैमरा उसके पास नहीं था। सोनाली ने पहले से संकेत दिया था कि कैमरा तो गया और अगर नयी चीज़ आनी है तो आ जायेगी, और वही हुआ। मुंबई में मुकेश को नया कैमरा लेना पड़ा। दूसरी बात लगातार 3 दिनों से मुकेश के परिवार को दक्षिण भारत का खाना खाना पड़ रहा था। इसलिए भी उनका मन थोडा सा असंतुस्ट था।

मेरा मन भी थोड़ा उदास था क्योंकि मैंने जो प्लान किया था उस तरह कुछ भी हो नहीं रहा था। मुकेश का परिवार हमारे साथ इडागूंजी नहीं आये थे। बल्कि अलग से अपने परिवार में मस्त घूम रहे थे। शिरसी में तो मैं अकेला ही गया था, जबकि मैंने मुकेश को प्लान पहले से मेल किया हुआ था। जब यात्रा प्लान मेल किया, तब मुकेश ने ऐसा कहा था कि हम को आप जो करने को कहेंगे वैसा ही करेंगे. लेकिन यहाँ पर कुछ अलग ही हो रहा था। ऊपर से सब लोगों कि सारी व्यवस्था करना। अब बात यह हो गयी थी कि यह सब देखते देखते मेरी बाते मुकेश से हो ही नहीं रही थी। और वे लोग भी ज्यादा सोनाली से बात करने में ज्यादा व्यस्त रहते थे। मैं एक टूर मेनेजर जैसा ज्यादा लग रहा था। इसलिए थोड़ी खटास हमारे बीच बन रही थी।

पूरा पेनोरेमिक व्यू – कुड्ले बीच और रास्ते का

ॐ बीच पर मेरे और मुकेश के बीच में विवाद :- अब हम ॐ बीच पर जैसे ही मारुती ओमनी से बाहर निकल कर आये तो ऊपर से हमें ॐ बीच का नज़ारा दिखा। वाह ऐसा लगा कि हम स्वर्ग में आ गए है। गाडियों की पार्किंग कुछ ऊपर एक छोटे से पहाड़ पर होती है। फिर हमें ॐ बीच पर पहुँचने के लिए कुछ  200 – 300 स्टेप्स नीचे उतरने पड़ते है। अब इतना सुन्दर नज़ारा देख कर कविताजी के मुँह से निकल गया “काश कि हमारा कैमरा भी होता तो” । अब मेरी खोपड़ी सटक गयी और मैं सारे धैर्य को भूल गया और जोर से उनपर ब्लास्ट हो गया। मैंने कहा कि आपको मैंने मेरे केमेरे से तस्वीर लेने कि छूट दे रखी है ना। फिर क्यूँ बार बार वही बात लेकर बैठ गए हो। मेरे केमेरे के फोटो में किसी का चेहरा कुछ अलग नहीं दिखने वाला है। ऊपर से मेरा कैमरा सोनी का 16 मेगापिक्सेल का नया ही था, जिसकी क्वालिटी ज्यादा अच्छी ही थी। इधर मैं उनके मनोरंजन के लिए आगे पीछे भाग-भाग कर व्यवस्था कर रहा हूँ और वे लोग है कि उदास ही रहना चाहते है। अब छोडिये कैमरे को, गया तो गया। कुछ नहीं कर सकते। और क्या-क्या कह दिया था, लेकिन उस वक्त मैंने उनके दृष्टिकोण से नहीं सोचा कि इतनी सुंदर जगह पर मौजूद हो और अपना कैमरा न हो तो जरूर ऐसा ही लगेगा। और न उन्होंने मेरे दृष्टिकोण से वह बात ली। यह आपको आगे पता चलेगा।

इस जगह पर मैं हो गया मुकेश और कविताजी पर ब्लास्ट .लेकिन बादमें मैंने उनका फोटो भी  लिया.

ऊपर से नज़ारा समुद्र का . हमें यहाँ से बीच पर जाने के लिए निचे उतारना पड़ता है.

ऐसा स्थिति में हम नीचे सुन्दर ॐ बीच पर आ गए, ॐ बीच पर आते ही थोड़ी कड़वाहट कम हो गयी क्योंकि बीच पर मौसम बहुत अच्छा था, जोर से ठंडी हवा आ रही थी, काफी विदेशी लोग थे। जैसे ही हम बीच पर पहुँचे, हम पहले से ही बीच पर नहाने की व्यवस्था करके आये थे। तो हम चले स्नान करने। करीब आधा एक घंटा स्नान किया। और फिर हम बीच के मध्य में चले गए जहाँ पर काफी पत्थर थे।

फिर से बीच पर मौज मस्ती और स्नान

मामला फिर से थोडा रंगीन हो गया जब मुकेश और कविताजी रोमांटिक पोस दे रहे थे फोटो के लिए.

नहाने के बाद कुछ शंख और समुद्री पत्थर इकठ्ठा करते हुए .  यहाँ मुकेश के हाथो में दोनों जूते है.

ॐ बीच के बीचमे बड़े पत्थरो पर मौज मस्ती :- अब यहाँ पर मुकेश के साथ एक और घटना हुई, जिससे उसका दिल पूरी तरह दुखी हो गया, मुकेश ने यात्रा अपने पैरों में जूते पहनकर की थी और ओम बीच पर भी लेकर आया था, अब बात यह हुई कि जब हम बीच पर नहाने लगे तो सारे कपडे, चप्पले और जूते सोनाली संभाल रही थी। लेकिन नहाने के बाद जब हम बीच के मध्य में गए तो मुकेश ने जूते पहने नहीं और हाथ में ले लिए। उसने बराबर किया क्योंकि अगर पहनता तो बीच की रेत उसके जूते में रह जाती। हम लोग बीच के मध्य में गए जहाँ बहुत सारे पत्थर थे, और फोटो खीचने लगे। हमारा विवाद होने के बाद फिर से बीच पर नहाते वक्त हम फिर से एक दूसरे के साथ मजे से बाते करने लगे और सब भूलने कि कोशिश करने लगे, और फिर मुकेश ने मुझसे कैमरा माँगा और मैंने दे दिया था। उसने कविताजी की बहुत सारी तस्वीरे बीच पर ली। फिर वह उन पत्थरों के ऊपर चला गया। उसने अपने जूते बीच पर ही छोड़ दिए और चला गया पत्थरो पर।

शिवम के पीछे अब भी दोनों जूते दिख रहे है. मुकेश ने यहाँ जूते छोड़े और चला गया बड़े पत्थरो पर कविताजी की फोटो खिचने.

कविताजी और आर्या की तस्वीर

मैं, संस्कृति और सोनाली अलग जगह अलग पत्थरो पर चले गये। थोड़ी देर बाद जब उसने फोटो खीच लिये तो मैंने कैमरा लिया और पत्थरो पर फोटो खींचे। मैंने सोनाली और संस्कृति के फोटो लिये। फिर मैं सोनाली के साथ पत्थरों से नीचे उतरने लगा। लेकिन समुद्र की तरफ वहाँ लहरें इतनी जोर से टकराती है कि पत्थरों से करीब 10 – 12   फीट ऊपर उछलती है। आप स्वयं ही देख रहे हो फोटो में। पानी उछल के आपके मुँह पर और शरीर पर आता है और बड़ा मजा आता है। लेकिन ध्यान रखना यह बहुत खतरनाक भी हो सकता है। अगर बेलेंस चला गया तो सीधा समुद्र के अंदर डूब जाओगे फिर चाहे आपको तैरना आता हो या नहीं। क्योंकि इस पानी कि लहरों में इतना बल होता है कि आपको खीच के ले जायेंगी और आपको पता भी नहीं चलेगा। फिर मैंने इस पत्थर पर मुकेश को बुलाया और जैसे सोनाली ने पानी कि बड़ी-बड़ी लपटों के साथ जो खुशी का अनुभव किया वही मुकेश को भी कराया। मैंने मुकेश की तस्वीरे ली और जब हम वापिस आ रहे थे, तब मुकेश और मुझको एक विदेशी उस पत्थर पर मिला। वह फिरंगी वहा मछली पकड़ने आया था। मुकेश उसके पास गया और उसकी मदद करने लगा। मुझे बराबर से तो पता नहीं, लेकिन मुकेश उससे काफी घुल मिल गया था, लगता है कि मुकेश को काफी मजा आया था उसके साथ।

एक मेरा फोटो हो जाए

सोनाली

सोनाली और संस्कृति टाईटेनिक पोस में

समुद्र का पानी उछलता है पत्थरो को टकराकर, बहुत धीरे धीरे सावधानी से उतरना पड़ता है वरना सीधे पानी के अंदर.

थोड़ा और निचे उतरके

स्प्लेश !!!!!!!!!!!!!!!!!!!!! बड़ा मजा आता है. लेकिन उतनी ही सावधानी रखनी चाहिए. एक गलती और बस समुद्र के पानी में गायब.

अब मुकेश को बुलाया मैंने और फिर उसकी बारी. स्प्लेश !!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!

एक और मुसीबत मुकेश के सर :- अब हमने सोचा कि वापिस चला जाये। हम पत्थरों से उतरकर बीच कि तरफ जाने लगे, तब मुकेश ने देखा कि बीच पर जहाँ उसने जूते उतारे थे, वहाँ पर केवल एक जूता था। दूसरा गायब था। अब यह क्या हो गया? मामला अब ठीक-ठाक हुआ ही था कि फिर से दूसरी परेशानी शुरू हो गयी। सब लोग मुकेश का दूसरा जूता ढूँढने में लग गये थे। काफी देर हमने तलाशा लेकिन हमें नहीं मिला। अब कोई एक जूता लेगा क्यों, जब दोनों है तो, अगर कोई चोर होता तो दोनों लेता, लेकिन यहाँ पर तो केवल एक जूता गया था। यह सब मेरे ख़याल से बीच पर जो ७-८ कुत्ते बैठे थे उनकी करामात हो सकती है। कोई कुत्ता आया होगा और मस्ती में एक जूता ले गया होगा। लेकिन इस बात से मुकेश की तो दुःख के मारे जैसे हालत खराब हो गयी थी। पहले कैमरा गया, दक्षिणी भारत का खाना झेलना पडा, फिर मुझसे विवाद और फिर अब जूते गायब। अब उसकी भी समझ में नहीं आ रहा था कि ये क्या हो रहा है? उसके मुँह से निकल गया कि अब वह मुंबई नहीं आ रहा है अपनी टिकिट को साइबर कैफ़े में जाकर केंसल करके वही से तत्काल कि टिकिट लेकर सीधा इंदौर के लिए रवाना हो जायेगा। मैंने और सोनाली ने इस बारे में कुछ नहीं कहा। क्योंकि अब इतनी सारी परेशानियाँ आ गयी तो क्या कर सकते है। वैसे मेरे मन में एक बात आई थी कि मैं कहूँ कि जूता चोरी होने से या खो जाने से पनौती चली जाती है (ऐसा मैंने बहुत लोगो से सुना है)। लेकिन इस वक्त उसका मूड बहुत खराब था और अगर कह डालता तो शायद वह नहीं तो कविता जी मुझपर ब्लास्ट हो जाती।

मुकेश उस विदेशी पुरुष को मछली पकड़ने में मदद कर रहा है. क्या बाते कर रहे हो ?

ॐ बीच

1. इस जगह पर हम पत्थरो पर मस्ती कर रहे थे . फोटो ले रहे थे . पानी की बड़ी बड़ी लहरों के साथ खेल रहे थे.

2. इस  जगह पर मुकेश  ने अपने जूते रखे थे . आते वक्त एक जूता गायब. 

3. इस जगह पर हमने स्नान किया था .

4. जिस जगह से यह फोटो लिया था वहाँ से हम निचे उतारे है ॐ बीच के लिए . कुछ  200 – 300 स्टेप्स नीचे.

अब बस यही बाकी था :- फिर हम 200 – 300 स्टेप्स चढकर ऊपर चले गये। जहाँ पर हमारी गाडी खड़ी थी। अब मुकेश और उसका परिवार पूरी तरह थक गया था और बहुत परेशान था। दिन में दो बार बीच पर स्नान करने से काफी थकान महसूस होती है। उसके ऊपर से कैमरा खराब, खाने वाली समस्या, विवाद, जूते गायब, पूरी तरह से थका हुआ शरीर। अब इस पर एक और मुसीबत आ जाए तो कैसा होगा? वैसे एक और मुसीबत आ गयी। हमारी गाडी सी.एन.जी. वाली गैस से चल रही थी। और मैंने आपको कहा था कि गोकर्ण से ॐ बीच जाने वाला रास्ता पहाडों के ऊपर से था। लेकिंन वापस जाते वक्त चढाई बहुत तीखी और तीव्र थी, जब हम ॐ बीच जा रहे थे तब यह तीखी और तीव्र हमारे लिए ढलान थी तब हमें इतना पता नहीं चला। अब इस चढान पर आकर हमारी गैस से चलने वाली गाडी बंद हो गयी। बस यही कसर बाकी रह गयी थी। इतनी थकान में गाडी बंद। वैसे मेरे चेहरे पर मुस्कुराहट थी क्योंकि मैं इससे बड़ी और बहुत सारी परेशानियों से गुजर चूका हूँ। तो मेरे लिए कोई नयी बात नहीं थी। लेकिन मुकेश के लिए यह सब पहली बार हो रहा था तो वह बड़ा परेशान था। अब हम लगे अपनी गाडी को धक्का मारने। एक तरफ मैं और दूसरी तरफ से मुकेश। करीब 300 – 400 मीटर तक हम धक्का लगाते रहे। तब कही जाकर हम चोटी पर जा पहुँचे। और फिर गाडी बराबर स्टार्ट हुई। धन्य है ।

ॐ बीच का पूरा पेनोरेमिक व्यू

होटल में जाके फिर से विवाद :- हम गोकर्ण अपने होटल सावित्री में पहुँच गए। लेकिन पूरी ट्रिप कुछ बर्बाद सी लग रही थी। मेरी और मुकेश की दोस्ती में दरार आ रही थी, ऐसा लग रहा था। यात्रा की शुरुआत इतनी सुखद तरीके से हुई और अंत ऐसे हो रहा था। यहाँ इस वक्त मुकेश का मूड बिलकुल नहीं था मुंबई आने का। और मैं और सोनाली अपने रूम में थे। सोनाली ने मुझे कहा कि अगर मुकेश को मुंबई नहीं आना है तो जबरदस्ती मत करो। लेकिन कम से कम जो बीच में खट्टी बाते हो गयी जिसे हम मिसन्डरस्टेंडिंग कहते है उसे दूर करे। तो फिर हम वार्तालाप करने मुकेश कि रूम पर चले गए। और वहाँ पर पहले जमकर विवाद हुआ और फिर हमने प्यार से  डिस्कशन किया। दोनों अपनी अपनी दृष्टिकोण से सही थे। और हमारी दोनों कि दोस्ती में जो मिसन्डरस्टेंडिंग आई थी उसे सोनाली ने सुलझाया। आखिर में सब ठीक हो गया था। एक कहानी की फ़िल्मी हैप्पी एंडिंग की तरह।आखिर में जो हमारे रिश्ते में जो दरार आई थी,वह पनौती मुकेश के जूते के साथ चली गयी। यानी लोगो से सूनी बाते ठीक थी की जूते घूम या चोरी होना कभी कभी अच्छा होता है। इसके बाद हमारा मुंबई का सफर काफी अच्छा रहा। वह कहते है ना कभी खुशी कभी गम या फिर कुछ खट्टी कुछ मिट्ठी।अंग्रेजी में कहते है ना ” All that starts well ends well” बस वही हुआ । लेकिन अब भी आपको गोकर्ण और महाबलेश्वर का मंदिर दिखाना बाकी है। वह इस सीरीस की आखरी पोस्ट पर जल्द ही दिखाया जायेगा।

तब तक के लिए

जय राम जी की ……………..

नोट :- मैं फोटो में हमेशा किसी न किसी व्यक्ति को देखना चाहता हूँ. इस लिए मेरे फोटो में कोई न कोई हमेशा रहता है. लेकिन आगे से घुमाक्कर,कॉम के लिए अलग से फोटो खिचने की कोशिष करूँगा . इस सीरीस के लिए मुझे माफ कर दीजिए.धन्यवाद.

 

About Vishal Rathod

Vishal Rathod has written 70 posts at Ghumakkar.

I am Vishal Rathod from Mumbai.I am a devotee, that is why I am a Ghumakkar. An Engineer, MBA by education, Sales Professional by profession and a small devotee by heart.I like to travel religious places. From past 3 years I have started travelling every three to four months.I am tired of excess materialism and have shifted my focus on spiritualism. My goal as a ghumakkar in life is to visit as many religious places as possible and do bhakti.The only reason to write in ghumakkar.com is to benefit fellow devotees to perform their pilgrimage smoother and easier.God bless all of you. aum namah shivaya . hare krishna hare ram.

Getaway Jungle Camp

22 Responses to “Om Beach,Gokarna – ॐ बीच,गोकर्ण”


  1. SilentSoul says:

    Good photos. as i told earlier there are 3 AUMs in India

    - Aum Parvat (whose photo I gave in my Badrinath post)

    - Aum Beach which you showed in this post

    - Aum range in Aravali hills in Rajasthan

    Is there any other AUM thing in the world ?

  2. JATDEVTA says:

    विवरण तो जबरदस्त लगा लेकिन फोटो के बारे में मैं कुछ नहीं कहना चाहता हूँ,
    फिर से विवाद हो जाएगा हा हा हा हा हा हा, अरे भाई ?
    रही बात लड़ाई झगड़े की ये चोटी मोटी घटना तो होती ही रहती है एक कहावत है कि जहाँ बर्तन होते है वहाँ आवाज भी होती है
    क्या आपको याद नहीं कि मेरी व् नीरज की लड़ाई भी लगभग हो ही गयी थी बस दोनों कुछ बोले नहीं ?

  3. sarvesh n vashistha says:

    मानसरोवर में ॐ पर्वत है
    विशाल जी ३ खुबसूरत फोटो में तो कोई नहीं है
    बाकी फोटो में भी व्यक्ति के बिना सुन्दरता नहीं आती
    वर्णन अच्छा है घूमना पड़ेगा .

  4. Neeraj Jat says:

    फोटो के बारे में मुझे यही कहना है कि सार्वजनिक मंच पर पारिवारिक फोटो अगर ज्यादा मात्रा में हों, तो अच्छे नहीं लगते। आज की पोस्ट में मेरी यह शिकायत है लेकिन आपने आखिर में इस बारे में स्पष्टीकरण दे दिया है। खैर, कोई बात नहीं।
    एक बात और, अगर आप थोडी और मेहनत करके ॐ बीच के दूसरी तरफ चले जाते और वहां से फोटो लेते, तो ॐ सीधा दिखता। इन फोटुओं में ॐ उल्टा दिख रहा है। बीच (middle) तक तो आप चले ही गये थे।
    तीसरी बात, यह पोस्ट एक यात्रा वृत्तान्त कम लग रही है, कुछ और ज्यादा लग रही है। यात्रा में विवाद हमेशा होते हैं। हमें कोशिश करनी चाहिये कि वृत्तान्तों में विवाद ना लिखे जायें। या फिर विवाद का एक संकेत भर दे देना चाहिये, पूरी स्टोरी मायने नहीं रखती।

    • JATDEVTA says:

      वाह नीरज भाई गजब लिख रहे हो मीठी मीठी खाने को कह को कह रहे हो, कडुवी चीजे वो कहाँ जायेगी उसका इंतजाम भी करते जाओ, हमारे साथ जो बीता अगर वो नहीं लिखा तो क्या फ़ायदा लिखने का, कल को कहोगे कि मार्ग में कोई हादसा, घटना, खुशी, दुःख, भी मत लिखो, अच्छा बुरा जो हुआ सब होना चाहिए,

  5. lakshay says:

    nice post. ghumakkari kam, ladai jyada.

  6. ritesh says:

    विशाल जी….
    बहुत अच्छा लिखा हैं आपने ओम् बीच के बारे….वहाँ का माहौल, स्थिति, लहरों से खेलना आदि सब कुछ….|
    आज के लेख में आपने मुकेश से हुए विवाद और उस विवाद सुलझाने के बारे में भी खूब अच्छी तरह से दर्शाया हैं…….सफ़र और जिंदगी में विवाद तो चलते रहते ही हैं, उन्हें अक्सर भूलने में ही समझदारी…..चलो इस विवाद के बाद आपकी आगे की यात्रा बहुत अच्छी रही..|
    लेख के सभी फोटो बहुत अच्छे लगे ….खासकर पहला वाला ओम् बीच का |
    लेख के लिए धन्यवाद !
    घुमक्कड़ी करते रहो….

  7. Surinder Sharma says:

    विशाल जी,

    बहुत बढिया वर्णन है. लड़ाई में आप दोस्त कम भाई जयादा लगते हैं. क्योंकि हम जब सब भाई इकठा होते हैं तो कोई भी गलती हो दोष दुसरे को देते हैं, पर इस से प्यार बढ़ता है. फोटो के बारे में कहना है जब तक आप समझते हो कैमरा आप की सुंदर फोटो ले रहा है , पोस्ट पर लगाते रहो बहुत अच्छा लगता है . मेरी उम्र में आ कर आप को लगेगा कि वह कैमरा बनने बंद हो गए जो अच्छे फोटो खेंचते थे , क्योंकि मेरा फेस अब फोटो जेनिक नहीं रहा.

    बहुत अच्छा वर्णन और बहुत ही अच्छे फोटो हैं, धन्यबाद

  8. विशाल जी ओम बीच के फोटो शानदार हैं. यह ओम कि आकृति हमारे धर्म कि विशालता और प्रतीक को दिखाती हैं. ऐसे ही ओम पर्वत में और ओंकारेश्वर मैं हिंदू धर्म कि विराटता का पता चलता हैं..

  9. lakshay says:

    @mukesh bhalse and @ vishal ratod- ek kahavat hai, raat gai, baat gai. aap dono ko bhi purani baaton pe mitti daalke aage ki taraf dekhna chahiye.

  10. Nandan Jha says:

    @ Vishal – It is a personal matter and I do not know you enough to make a personal comment hence I would abstain.

    I am eagerly waiting for Gokarna Temple and Mahabaleshwar Temple.

  11. RAMAN KUMAR says:

    नंदन जी, मेरी शिकायत ना तो विशाल जी से है और ना ही मुकेश जी से | परन्तु घुमक्कड़ का एक नियमित पाठक होने के नाते मैं आपको सिर्फ एक सुझाव ही दे सकता हुं कि आप यहाँ पर लिखने वालों के लिए कोई आचार संहिता जरूर बनायें | मैं नीरज से भी सहमत हुं कि यहाँ पर विवादों को स्थान ना दिया जाये सिर्फ और सिर्फ घुमक्कड़ी के बारे मैं ही लिखा जाये |
    धन्यवाद |

    • Nandan Jha says:

      रमन जी – धन्यवाद | आपकी बात बिलकुल सही है और इस दिशा में घुमक्कड़ अपने लेखकों के साथ नियमित तौर पर काम करता है | इस आचार-सहिंता की एक औपचारिक जामा नहीं दिया गया है और एक दिशा-निर्देश के तरह रखा गया है | आने वाले समय में इस पर और काम होगा और इसे क्रमागत उन्नति के तहत सुधारा जाएगा | साधुवाद , घुमक्कड़ के साथ बने रहे |

  12. Thanks all of you for reading my post. My posts are always through my heart and soul . I have always wrote whatever is true. This is my art of writing. The above post is real journey of life and not a drama. This post may be indication of everyone’s life that everyday is not bed of roses. And that evening we sat together and talked each other clearing out the differences and we came to know more about each other.It was more like a family. Friendship is bonding via emotions and emotions are not always rosy, sometimes happy, sometimes naughty , sometimes sad. And sad emotions ( comments) really show how much people are attached with us and care for us. There are lots of variations. And I am enjoying these colors of emotions.
    May be all of you have gone only through our quarrel , but no one has gone through that in the night everything was solved. And Mukesh’s Mumbai series was extremely fine. That all of you had replied via your comments.
    All my friends after all we are humans. This is colour of life.
    And finally I am gathering travel stories and step to step I am jotting down. Thats what I have done . I want to remember this after years also. This stories will only help me purify myself.
    And I am sure that after some years I and Mukesh both will laugh on what we had done on that day.
    And thanks to all of you for showering your comments because after some years again and again I am going to read your comments and remember that how many people are connected with me emotionally.

    • JATDEVTA says:

      विशाल व् मुकेश भाई आप दोनों अच्छे दोस्त हो सब जानते है तीन महीने हो गए है इस बात को, उसके बाद आप साथ में बोम्बे भी घुमे हो, अब गीला शिकवा छोड़ कर आगे बढिए, यात्रा में जो कुछ हुआ अच्छा बुरा बताते रहो,

  13. D.L.Narayan says:

    Dear Vishal, this is probably the first “कुछ खट्टा कुछ मीठा” post written by you. Glad to know that the minor misunderstandings have been resolved amicably.

    Waiting to read about your visit to the Gokarna and Mahabaleshwar temples.

  14. vidhan says:

    लेखक वही है जो तटस्थ रूप से अपनी सोच को अपने तरीके से लिखे , विवाद का विवरण लिखने से ये पता चल जाता है की घूमने जाने पर हमें क्या नहीं करना चाहिए !!

  15. बहुत ही ईमानदारी से लिखी गयी पोस्ट है विशाल. काफी साहस चाहिए सच लिखने के लिए.
    फोटो भी काफी अच्छे हैं.
    Regarding you special note about photos – Its your personal choice about what type of photos you want to click or post. I don’t think we should change about natural behavior according to what other like or not. We are Ghumakkars that’s why we are here on Ghumakkar.com. We are not doing travel only for Ghumakkar.com. Everybody wants to read honest and true stories with true and natural photos.

    • Thanks Deependra for your lovely comment. Yaa my thinking is rather than only describing places , nature ,monuments etc. One should also write what he or she did there along with emotions which makes true travel story. Only describing places does not let any one know our feelings inside. And finally we are writing stories for what we did there .So everything should be included ( its upto the individual to put that in his story or not)
      Secondly about photos yours and my thinking are on the same path, but there are some guidelines to put photos in ghumakkar decided by owners and editors. I don’t know exact terms but there are lot of rejections coming from readers about putting lot of family photos. I always like photos with some person inside it. That is why my photos always have someone.

  16. विशाल जी , एक यही तो बढिया काम किया है आपने कि सच लिखा है और दूसरी बात कि सच भी निष्पक्ष रूप से लिखा है । क्योंकि आपने इस लेख में अपनी भी गलती स्वीकार की है कि इतनी हसीन जगह पे जाके अगर किसी का कैमरा खो जाये तो क्या हालत होती है ।

    जब आपने इस सीरीज की शुरूआत की लिखने की तब आप गोकर्ण घूम चूके थे और ये जो विवाद आपने लिखा है वो सब हो चुका था उसके बाद मुकेश जी और उनका परिवार आपके साथ मुम्बई घूमें । यानि की ये जो आपने लिखा है अगर आप इसे ना लिखते तो इस सीरीज की आत्मा ही मर जाती और ये सिर्फ शब्दो का हेरफेर रह जाती

    मै इस चीज का काफी नजदीकी भुक्तभोगी हूं क्योंकि मै हमेशा ग्रुप में घूमना पसंद करता हूं और हमेशा विवादो में पडता भी हूं पर मैने इस सबसे सामंजस्य बिठाना सीख लिया है । मैने लोगेा की कथनी और करनी में अंतर देखा है । मैने देखा है कि कैसे अपने आपको करोडपति कहने वाले मेरे सहयात्री एक एक रूपये के उपर घ्ंटो बर्बाद कर देते हैं पर इन सब बातो ने मुझे जीवन में सहनशीलता का पाठ पढाया है और आपके इस लेख से तो हर घुमक्कड को पता चलेगा कि सब कुछ अच्छा ही नही होता कभी गुस्सा भी आता है मूड भी खराब होता है पर कभी धैर्य नही खोना चाहिये

  17. kbr says:

    विशाल जी
    बहुत ही सुंदर लेख है. कुछ लोग केवल आलोचना करना जानते है. फोटो में व्यक्ति के बिना सुन्दरता नहीं आती, निर्जीव से लगते है. कहते है ना कि “कुछ तो लोग कहेंगे लोगो का काम है कहना, छोड़ो बेकार की बातो को…………
    उनके लिए तो यही जबाव है ” हम तो ऐसे हैं भय्या “



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