Manali→Natural Beauty of Solang Valley (एक सुहाना सफ़र मनाली का….4) |
नमस्कार दोस्तों ! पिछले लेख में हम लोगो ने मनाली के पास रोहतांग दर्रा (Rohtang Pass) की सैर की थी, जिसके बारे आपने मेरे पिछले लेख एक सुहाना सफ़र मनाली का….3 में पढ़ा ही होगा । आइये अब चलते हैं “सोलांग घाटी की यात्रा “ पर ।
समय चक्र का पहिया अपनी गति से चला जा रहा था और हम लोगो को पता ही नही चला की रोहतांग के खुशगवार माहौल में सैर करते हुए तीन घंटे कब बीत गए और रोहतांग से अब विदा लेने का समय हो गया था । हम लोगो का यहाँ से जाने का मन तो नहीं कर रहा था, पर समय के अनुसार चलने को विवश थे । चलते-चलते अंतिम बार रोहतांग की खूबसूरत वादियों का ध्यान से अवलोकन किया और लगभग दोपहर के 12:15 बजकर अपनी कार में बैठकर अपने अगले पड़ाव सोलांग घाटी के लिए चल दिए गए । रोहतांग से वापिसी के समय पूरे रोहतांग पर सड़क के किनारे पर कई सारे लोगो को मौज-मस्ती और बर्फ में एक दूसरे के साथ आनन्द लेते हुए देखना हमारे ले लिए एक सुखद अनुभव था । वैसे मैंने कई लोगो और अपने मित्रों से सुना रखा था की वो लोग मनाली घूमने गए थे और किसी न किसी कारण से रोहतांग नहीं जा सके यदि रोहतांग पहुँच भी गए तो वहाँ उन्हें ताज़ी बर्फ नहीं मिली पर इन मामले में हम बहुत खुशनसीब थे, क्योकि हम लोग पहली बार मनाली गए और बड़े आराम से बिना परेशानी के रोहतांग भी पहुँच भी गए साथ ही साथ ढेर सारी ताज़ी बर्फ भी मिल गयी थी ।

Just Opposite of first picture a Hill of Rohtang (ये खूबसूरत वादियाँ, गगन चूमते पहाड़ अक्सर याद आते हैं ।)
रोहतांग से आगे बढ़ते हुए रास्ता उबड़खाबड़ और काफी ढलान वाला था और रोहतांग से वापिस होते कई सारी गाड़ियां आगे और पीछे चल रही थी, जिससे कई जगह संकरे मार्ग पर जाम के स्थिति सी पैदा हो रही थी । कुछ देर चलने के बाद सड़क से नीचे मरही गाँव नजर आने लगा था और सड़क के किनारे बहुत से लोग पैराग्लाइडिंग का लुफ्त ले रहे थे । पैराग्लाइडिंग कराने वाले पूरी सुरक्षा के साथ पर्यटको के साथ स्वयं घाटी में छलांग लगाकर उन्हें रोमांचक अनुभव प्रदान करा रहे थे और मरही बेस कैंप के नजदीक उतर रहे थे । खैर पौन घंटे के बाद हम लोगं “मरही” गाँव पहुँच गए । इस समय “मरही” में मनाली की ओर जाने वाली मुख्य मार्ग पर जाम लग रहा था सो एक सड़क किनारे के रेस्तरा पर थोड़ी देर सुस्ताने के लिए कार खड़ी दी । रेस्तरा में कार चालक और हम लोगो ने चाय और बच्चो ने कोल्डड्रिंक और चिप्स का नाश्ता किया । कुछ देर यहाँ बिताने और जाम थोड़ा हल्का हो जाने के बाद हम लोग फिर से अपने सफ़र पर चल दिए ।
इसी मार्ग पर आगे चलते हुए मरही गाँव से कुछ किलोमीटर नीचे उतरते हुए नदी पर बने एक संकरे पुल पर आने और जाने वाली गाड़ियो की अधिकता आपस में पुल पर फँस जाने के कारण भयंकर और करीब आधा किलोमीटर लंबा जाम लग गया था और हम लोग जाम में सबसे पीछे लगे हुए थे । ऐसा लग रहा था की जाम खुलने में करीब आध-पौन घंटा लग जाएगा । बगल में व्यास नदी नीचे घाटी में अपने पूरे वेग से बह रही थी बड़ा ही सुन्दर नजारा नजर आ रहा था । तभी हमारे कार चालक ने एक गाड़ी के घाटी में उतरते हुए और व्यास नदी को पार करके जाम से आगे की खाली सड़क पर जाते हुए देखा । उसके ऐसा करते देख कार चालक ने उसी रास्ते से जाने के लिए कहने लगा तो हमने कहा कि “वो बड़ी गाड़ी हैं और हमारी गाड़ी छोटी हैं इससे क्या नदी पार हो जायेगी और क्या तुमने क्या पहले कभी कार से नदी पार की हैं ?” । कार चालक ने कहा ” हां ! मैं ऐसा पहले भी कर चुका हूँ और इससे गाड़ी से बड़े आराम से नदी पार हो जायेगी ।” अंत में काफी बातचीत करने के बाद हमारी रजामंदी से कार चालक ने इंडिका कार को सड़क के किनारे एक कच्चे रास्ते से होते हुए व्यास नदी घाटी की ओर चल दिया । नदी में पानी अपने पूरे वेग से बह रहा था नदी के दूसरी ओर कुछ लोग अपनी गाडियाँ धो रहे थे । हमारे कार चालक ने कार को पहला गियर लगाया और जोर से एक्सीलेटर देते हुए नदी मे उतारकर पानी के वेग से लड़ते हुए नदी को तिरछा पार कर लिया । कार नदी के दूसरे किनारे बहाब के कारण थोड़ा सा जगह बदल कर आगे पहुँच गयी थी और वहाँ किनारे पर दूसरी गाडियां खड़े होने के कारण रास्ता बंद था सो गाड़ी को पानी में ही बैक करके सही और खाली रास्ते से होते हुए हाइवे पर आ गए थे । जब हम कार से नदी को पार कर रहे थे, तब हमारे दिल की धड़कन कई गुना बढ़ गयी थी और हमें रोमांच और भय मिश्रित अनुभव की अनुभूति हुई थी । कार से वेगमान नदी को पार करने का यह वाकया आज तक हमारे दिल में जिन्दा हैं और हमें आज भी एक पूर्ण रोमांच की अनुभूति देता हैं । कार से नदी को पार करने से एक बात तो पता चल गयी थी की हमारा कार चालक काफी अनुभवी और कुशल चालक था ।
खैर मार्ग के जाम और खराब रास्ते की कठिनाईयों का सामना करते हुए और कोठी नाम की जगह के पास स्थित दुकान पर किराए के गर्म कपड़े वापिस करने के पश्चात लगभग तीन घंटे में हम लोग पलचान गाँव तक पहुँच गए । पलचान से थोड़ा आगे चलने पर दो मोड़ नजर आये दाहिने वाला सोलांग घाटी की और बायां वाला मनाली की ओर । हम लोगो को सोलांग नाला की ओर जाना था सो हम लोग दायें मुड़ गए । थोड़ा चलने और सोलांग नाला पर बने नदीपुल पार करने के बाद हम लोग सवा तीन बजे के आसपास रमणीय सोलांग घाटी में पहुँच गए ।

Natural panoramic View of Solang Valley (सोलांग घाटी में अपने प्राकृतिक सौंदर्य से अचंभित करती ये हरी-भरी वादियाँ )
सोलांग घाटी (Solang Valley)
सोलांग घाटी मनाली से लगभग 14 किलोमीटर दूर उत्तर दिशा में स्थित हैं और यह मनाली से ढूंढी जाने वाले रास्ते पर पड़ता हैं । सोलांग के समुंद्रतल से ऊँचाई लगभग 2490 मीटर हैं । सोलांग घाटी के पास में ही एक पहाड़ी नाला भी बहता हैं, इसलिए इसे सोलांग नाला भी कहते हैं । सोलांग घाटी का सबसे खूबसूरत पहलु हैं; दूर तक नजर आती इसकी काफी बड़ा हरा-भरा पहाड़ी ढलान हैं जो एक तरफ से ऊँचे पहाड़ से घिरा हुआ हैं । गर्मियों में हरी घास से परिपूर्ण इस ढलान पर पैराग्लाइडिंग, पैराशूटिंग, घुड़सवारी और जोर्बिंग (एक रबड़ की तरह के बहुत बड़ी पारदर्शी गेंद, जिसके अंदर दो लोगो को सुरक्षित बांधकर कर ढलान के ऊँचाई से ढलान के तल तक करीब २०० मीटर तक ढरकाया जाता हैं । Zorbing -A giant ball with room for 2 people which is rolled down a 200 meter hill ) का और सर्दियों में बर्फ से ढकी सफ़ेद ढलान पर स्कीइंग का आनंद लिया जा सकता हैं । सोलांग में एक रोपवे की भी वयवस्था हैं जो लोगो को सोलांग के सबसे ऊँचे पहाड़ की ऊँचाई की सैर कराती हैं ।
हम लोगो ने कार को घाटी के बाहर जाती सड़क के किनारे ही खड़ा करवाकर एक छोटे से रास्ते घाटी में प्रवेश किया था । सोलांग घाटी के अंदर समतल स्थल पर कही-कही पानी भरा हुआ था जिससे चलने-फिरने में थोड़ी परेशानी हो रही थी । सोलांग घाटी में काफी भीड़भाड़ थी और लोग-बाग अपनी सुविधानुसार इस घाटी का लुफ्त ले रहे थे । सोलांग घाटी की हरियाली से परिपूर्ण ढलान का दूर तक का खूबसूरत नजारा देखकर हम तो मंत्रमुग्ध से हो गए थे । यदि मौसम की बात करे तो मौसम बहुत ही सुहावना था और मन को लुभाने वाली ठंडी-ठंडी चल रही थी ।
घाटी में प्रवेश द्वार के सामने ही एक उड़नखटोले (Rope-way) व्यवस्था थी जो ओंक और पाइन के जगंलो से घिरे पहाड़ की ३०० मीटर की सबसे ऊँची चोटी तक जा रही थी । हमने सोचा चलो रोपवे की भी सैर कर लेते हैं और टिकिट काउंटर पर जाकर एक व्यक्ति का किराया पूछा तो उसने हमें एक चक्कर (नीचे से पहाड़ की चोटी और वापिस तक का ) रूपये 400/- प्रति व्यक्ति बताया जो हमें महंगा नहीं बल्कि बहुत महंगा लगा, पर प्रकृति के इस खूबसूरत सानिध्य में आकर काफी लोग इस महंगे रोपवे का भी लुफ्त ले रहे थे । हमने तो रोपवे पर जाने का विचार ही त्याग दिया था । घाटी में लोगो को रोमांचक खेलो का लुफ्त लेते और प्रकृति के नजारों को देखना भी बहुत अच्छा लग रहा था । पैराग्लाइडिंग तो हमें करनी नहीं थी सो हमने ऐसे ही एक पैराग्लाइडिंग काउंटर पर जाकर पैराग्लाइडिंग का मूल्य भी मालूम किया उसमे हमें एक बार के रूपये 700/- बताए जो पहाड़ के सामने की ऊँचाई से पैराग्लाइडिंग कराने के थे । सोलांग के आकाश में चिड़ियों की तरह मडराते लोगो को पैराग्लाइडिंग और पैराशूटिंग करते देखना बड़ा ही अच्छा लग रहा था ।
सोलांग घाटी में कोई भी खाने-पीने की दुकान या रेस्तरा नहीं था, पर घाटी के बाहर सड़क किनारे कुछ दुकाने थी जो मैगी और चाय-कोफ़ी बेच रहे थे । वैसे मनाली के पास सोलांग घाटी कुछ समय हरे-भरे वातावरण में व्यतीत करने के लिए बहुत ही अच्छी जगह हैं । यहाँ की वादियों में टहलते हुए एक अलग ही सुकून दिल को मिलता हैं । सोलांग घाटी में टहलते और प्रकृति का आनंद लेते हुए हम लोगो को लगभग दो घंटे व्यतीत हो गए थे । सूरज की रौशनी मद्धम सी पड़ने लगे थी और शाम सी होने लगी थी । काफी समय हो जाने के कारण अब हमे मनाली भी लौटना था सो एक बार सोलांग घाटी को एक नजर निहारने के बाद कार में बैठकर वापिस मनाली की ओर चल दिए ।
जब हम लौट रहे थे तब मनाली से सोलांग घाटी की के रास्ते पर सड़क निर्माण और सड़क के किनारे साफ-सफाई, रंगाई-पुताई का काम बड़ी तेजी से चल रहा था और इसी कारण सड़क के एक तरफ का हिस्सा बंद कर दिया था, जिससे जाम के हालत पैदा हो गए थे ।
सड़क बनने और रंगाई-पुताई का तेजी से काम होने का कारण वो हमें बाद में पता चला कि सोलांग घाटी से करीब आठ और मनाली से करीब बीस किमी० आगे ढूंढी (DHUNDHI) नाम की जगह पर हिमाचल प्रदेश के महतवपूर्ण योजना “रोहतांग सुरंग (ROHTANG TUNNEL)” की आधारशिला रखी जानी हैं, और आधारशिला का शिलान्यास श्रीमती सोनिया गाँधी के द्वारा 28-जून-2010 होना था ।रोहतांग सुरंग हिमालय के पीरपंजाल श्रृंखला में स्थित रोहतांग पास के नीचे बन रही हैं । 8.8 किलोमीटर की ये टनल भारत की सबसे लंबी सड़क सुरंग होगी। ये टनल 2015 में बनकर तैयार हो जाएगी। इसके बनते ही मनाली और लद्दाख/लाहुल स्पीति के मध्य करीब 46 किलोमीटर का सफर कम हो जाएगा । रोहतांग दर्रा भारी बर्फ़बारी के कारण छह महीने के लिए बंद हो जाता हैं और लद्दाख/लाहुल स्पीति सड़क संपर्क मार्ग बिल्कुल खत्म हो जाता हैं इस सुरंग के बन जाने पर मनाली से लद्दाख/लाहुल स्पीति का संपर्क हमेशा के लिए बहाल हो जायेगा और 80 किमी० प्रति घंटे के रफ़्तार से गाडियाँ इस सुरंग में दौड़ सकेंगी ।सड़क निर्माण के कारण जाम का सामना करते हुए मनाली पहुँचने में हमें लगभग एक घंटे से ज्यादा ही समय लग गया था । माल रोड बंद हो गाड़ियों के लिए बंद हो चुका सो पीछे वाले रास्ते से होते हुए कार चालक ने कुल्लू की तरफ माल रोड से कुछ कदम ही दूर तिब्बत मार्केट के सामने “वन विहार” के सामने गाड़ी खड़ी कर दी । हम लोग वही वन विहार के पास कार से उतर गए और कार चालक को वापिस होटल भेज दिया । वन विहार का खुलने का समय सुबह 8:00 बजे और बंद होने का समय शाम 7:00 बजे तक का था । घने और ऊँचे देवदार के वृक्षों से घिरा “वन विहार” मनाली की प्रशिद्ध स्थलो में एक हैं और इसका प्रवेश शुल्क रूपये 5/- प्रति व्यक्ति हैं । जब हम पहुंचे उस समय शाम के साढ़े छह का समय हो रहा था और शाम को सात बजे यह बंद होने वाला था । हम लोगो का वन विहार घूमने मन नहीं था, क्योंकि पूरे दिन रोहतांग और सोलांग घाटी घूमने के कारण काफी थकान के साथ-साथ पैरो में भी दर्द हो रहा था और वन विहार घूमने के लिए केवल आधे घंटे समय था । वन विहार कल घूमने का सोचकर कर अभी घूमने के इरादा त्याग दिया और सामने से ही एक फल की दुकान से कुछ फल ख़रीदे और आराम करने के लिए वापिस होटल पहुँच गए ।
होटल के कमरे में लगभग दो घंटे का विश्राम करने के पश्चात अब हमारी थकान कुछ कम हो गयी थी और रात के आठ बजे के आसपास हम लोग वापिस माल रोड कुछ देर घूमने और रात का खाना खाने पहुँच गए । माल रोड पर कल की अपेक्षा आज बहुत अधिक भीड़ थी, लोग बाग अपने में पूरी तरह मस्त थे और मनाली के सुहाने मौसम में सड़क के बीच डीवायडर पर बैठकर अपनी दिनभर की थकान मिटा रहे थे । हम लोगो ने शुरू से अंत तक माल रोड एक बड़ा चक्कर लगाया और सड़क के बीच डीवायडर पर बैठ गए । एक मालिश वाला हमारे पास आकार मालिश कराने के लिए जिद्द करने लगा पर मेरा मन नहीं था मालिश कराने के पर छोटे भाई अनुज ने मोलभाव करके पचास रूपये वाली मालिश से पच्चीस रूपये में तय किया और उसकी सेवा का लुफ्त उठाया । करीब एक घंटा माल रोड पर बिताने के बाद हम लोग खाना खाने के लिए एक अच्छे रेस्तरा के तलाश करने लगे । एक अच्छा रेस्तरा हमें वन विहार के सामने के बाजार में दूसरी मंजील पर नजर आया । सीडिया चढ़ कर हम लोग उस रेस्तरा (अब नाम याद नहीं हैं) में पहुँच गए, रेस्तरा अंदर से काफी शांत और अच्छी साज-सज्जा से युक्त अच्छे वातावरण में था । आज खाने में नान-सब्जी की जगह साऊथ इंडियन व्यंजन का मन था सो हमने ओनियन डोसा, मसाला डोसा और बच्चो के लिए चाउमीन का आदेश दिया । बीस मिनट में हमारा आर्डर आ गया, यहाँ का खाना काफी स्वादिष्ट था । रात काफी हो गयी थी सो हम खाना खाने के बाद सीधे होटल के कमरे में पहुँच गए थे ।
इसी के साथ हमारा आज के इस दिन का हाल यही समाप्त होता हैं । अगले दिन की हमारी कोई भी योजना नहीं थी, कल का कार्यक्रम कल ही बनायेगे; यही सोच कर हम लोग अगले दिन की एक नई सुबह के लिए सो गए । अगले भाग में “ मनिकरण की यात्रा ” के बारे में अपना अगला अनुभव प्रस्तुत करूँगा । आज सोलांग घाटी की यात्रा आपको कैसी लगी, आपकी प्रतिकिया और अगले लेख के लिए सुझावों का स्वागत हैं । अगले लेख तक के लिए आपका धन्यवाद !
नोट : ऊपर लगाये गए फोटो में दर्शाये गए समय और दिनांक वास्तविक हैं ।





















रितेश जी , ये रोज्मरा की जिन्दगी में जाम चाहे शहर हो या पहाड़ हो बड़ते जा रहे हैं . पहाड़ों में घुमने के लिए जेब में मोटे पैसे रखने पड़ते हैं .
सोलंग घाटी में अगर बरफ पड़े तो यह बहुत सुंदर दिखती हे उस समाया वहां पर बरफ के खेल चलते हैं नदी पार के फोटो दर के मारे नहीं खींचे या रोमांच के पल में कैमरा याद नहीं आया . सुरंग बन जाने पर जाट देवता मोटर साइकिल सबसे पहले जायेगी
सर्वेश जी आपने सही कहा कि जाट देवता की बाइक सबसे पहले जायेगी मेरी भी यही इच्छा है कि मैं इस स्थल पर अब जभी जाउंगा जब यह सुरंग बन जायेगी,
लेख बहुत बढ़िया रहा, मनाली से बढ़िया सोलंग नाला लगता है क्योंकि यहाँ अभी तक बहुत कुछ बचा हुआ है
सुरंग बनने के बाद रोहतांग की मांग काम हो जाने वाली है क्योंकि फिर आसानी से बारालाचा ला पहुँच में आ जाएगा
पक्षियों की तरह आसमान में उड़ने का अपना अनुभव एल अलग अहसास देता है
संदीप जी…फिर तो आपको सुरंग में जाने के लिए प्रतीक्षा करनी पडेगी….सुरंग बनने की अनुमानित वर्ष २०१६ हैं….और आप तो जानते ही हो कि सरकारी काम अक्सर देर से ही होते हैं….|
आपने सही कहा की सोलांग नाला अभी अपने प्राकृतिक परिवेश में ही हैं….यहाँ पर प्रकृति सबसे नजदीक का अहसास होता हैं…| लेख को पसंद करने के लिए धन्यबाद
सर्वेश जी….लेख पर प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद…..| जाम और महंगाई तो हमारे देश को खा ही गए हैं….|
आपने सही कहा की कार से नदी पार करते हुए फोटो खींचने की जरा भी याद ही नहीं रही…और उस समय मैं घुमक्कड़ पर लिखता भी नहीं था |
रितेश जी,
सोलांग घाटी के ख़ूबसूरत नजारों पर आज हमने भी अपनी कल्पना के घोड़े दौड़ा दिए. आपके विवरण तथा तस्वीरों से मालुम होता है की जगह सचमुच बड़ी ही सुन्दर है. अन्य सारे रोमांचक खेलों के बारे में तो पहले सुन तथा देख रखा था लेकिन ज़ोर्बिंग (Zorbing) का तो मैंने नाम ही आज पहली बार आपकी पोस्ट के द्वारा सुना.
आपके द्वारा दी गई ज़ोर्बिंग की छोटी सी परिभाषा के बाद इस खेल के बारे में मेरी उत्सुकता और बढ़ गई तो मैंने विकी भैया (Wikipedia) की मदद से इसके बारे में और जानकारी जुटाई, बहुत मज़ा आया इस रोमांचकारी खेल के बारे में जानकर.
सच बताऊँ तो मुझे आपकी ये सिरीज़ बहुत पसंद आ रही है. एक कड़ी को छाव से पढने के बाद दूसरी के इंतज़ार में लग जाते हैं. हर कड़ी में कुछ न कुछ नया देखने को मिल रहा है.
मुकेश जी….
लेख पर सुन्दर शब्दों से टिप्पणी करने के आपका बहुत बहुत आभार | आप अपने कल्पना के घोड़े मत दोड़ाइये बल्कि इस खूबसूरत जगह को घूमने की योजना भी बनाइये |
जोर्बिंग …इसके बारे में पहले भी एक डोक्युमेंट्री फ़िल्म भी किसी न्यूज चैनल पर आ चुकी हैं….|
मुझे बहुत खुशी हुई की आपको यह सीरीज पसंद आ रही हैं ……धन्यवाद…!
nice post
Thanks lakshay..:)
very interesting and full of information. Tunnel is very important not only for the tourists but for security also.
fotos of Solang valley are very eye catching.
I enjoyed reading this post Ritesh
S.S. Ji ….._(“)_
Thank you very much for liking and comment on my post…|
You are right., As per security reason Rohtang Tunnel is Very Important..
रितेश जी .
आपका सफ़र सचमुच सुहावना था .सब कुछ आपके फेवर में था हर यात्रा में थोड़ी बहुत दिक्कत तो होती हैं जैसे कार से नदी पार करना वैसे आपका ड्रायवर काफी समझदार मालूम पड़ता हैं .आपकी पोस्ट पढ़कर अब हमारी भी यात्रा योजना में कुल्लू मनाली शामिलहो गया हैं .रितेश जी ,बहुत सुन्दर जगह है और आपने बहुत अच्छा वर्णन करके पोस्ट में चार चाँद लगा दिए . अगली पोस्ट के इंतज़ार में .
धन्यवाद.
कविता जी….
लेख पर सुन्दर प्रतिकिया करने के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद….|
मुझे अच्छा लगा यह जानकार की मेरी पोस्ट पढ़ने के बाद आपकी योजना में कुल्लू मनाली शामिल हो गया….जल्दी ही जाने की योजना बनाना…|
धन्यवाद…
रितेश जी राम राम, क्या खूब फोटो हैं, क्या खूब लेखन हैं, सोलंग घाटी मनाली के सबसे खूबसूरत स्थानों में हैं. बहुत अच्छी यात्रा चल रही हैं आप की , धन्यवाद सैर हमें भी कराने के लिए.
प्रवीन जी….राम राम ..
कमेन्ट के लिए आपका बहुत आभार….
रितेश जी,
बहुत अच्छा यात्रा वृत्तांत लिखा है. बढ़िया फोटो, रोहतांग सुरंग (ROHTANG TUNNEL) के दर्शन पहली बार किये.
धन्यवाद
सुरिंदर जी…धन्यवाद लेख को पसंद करने के लिए…..|
बड़ी अच्छी पोस्ट रही ये तो …
बाकि बात रही सोलांग वैल्ली की तो सारी की सारी एक्टिविटी बड़ी ही महंगी है.
सबसे छोटी पैराग्लाइडिंग की थी वहाँ हम पांच लोगो ने जेब ढीली हो गयी….
खैर ये सब शिमला के कुफरी और नालदेहरा से तो अच्छा ही है. क्योंकि वहाँ तो थोड़ी दूर के लिए ही घोड़े वाले 250 ले लेते है..
पोस्ट पढकर सर्दियों की याद दिला डी भाई.
मोंटी जी…
लेख को पसंद करने के लिए धन्यवाद …सही कहा आपने सोलांग वैली की सारी की सारी एक्टिविटी महंगी हैं…|
सन १९९९-२००० की यात्रा में शिमला के कुफरी में हमसे तो घोड़े वाले ने टॉप पर जाने के ४०० रूपये प्रति व्यक्ति लिए थे….आप सस्ते में कैसे निपट आये…|
जितना सुन्दर लेख उतना सुन्दर फोटो | पहाड़ों में सुरंग , सड़कों का चोडा होना, बाँध सबसे से बड़े कारण है Landsliding के | उन्नति के नाम पर जो हम लोग कुदरत के साथ खिलवाड़ कर रहें है उसका खामियाज़ा हमारे आने वाली पीडी को भुगतना होगा |
मैं अभी केदारनाथ और बद्रीनाथ से आया हूँ , जगह जगह सड़क को चोडा करने के लिए पहाड़ों को डाइनामाइट से तोड़ा जा रहा है |
महेश जी….लेख पर आपने विचार व्यक्त करने के लिए आपका बहुत धन्यवाद |
आप अभी केदारनाथ और बद्रीनाथ से आये तो जल्द ही इनके बारे में आपसे लेख भी पढ़ने के मिलेगा…
रितेश जी, मैं दो बार रोहतांग पास और सोलंग बैली जा चुका हूं. आपका लेख पढ़कर ऐसा लगा कि तीसरी बार फिर पहुँच गया हूँ. सचमुच रोहतांग और सोलंग पर्यटकों का मन मोह लेते हैं. बार बार जाने की इच्छा होती है. बहुत सुन्दर वर्णन आपके द्वारा. मणिकरण यात्रा का इंतज़ार है. धन्यवाद.
आनन्द भारती जी…
सच कहा आपने यह जगह ही कुछ ऐसी ही यहाँ बार बार जाने को मन करता हैं….|
लेख पर आपने विचार व्यक्त करने के लिए धन्यवाद….
मनिकरण की बारे में जल्दी ही पढ़ने को मिलेगा….
रितेश जी, बहुत बढ़िया लेख और बहुत बढ़िया फोटो, लगे रहो …
जय राम जी कि..
संजय कौशिक जी…
लेख को पढ़ने और पसंद करने के लिए धन्यवाद….|
जय राम जी की
सोलंग घाटी के मनमोहक दृश्य दिखने के लिए धन्यवाद, मैं कभी इस तरफ नहीं जा पाया | एक दो और फोटो डाले जा सकते थे, खैर | मनाली और रोहतांग के जाम का तो पूरा याराना है , मुझे नहीं याद पड़ता की कभी किसी ने कहाँ हो तो बिना जाम का सामने किये रोहतांग/मनाली पहुँच गए | जब हम लोग गए थे, २००९ के गर्मियों में, तो भी यही हाल था |
एक बार टनेल बन गयी, तो वास्तव में रोहतांग जाने लायक रहेगा क्योंकि आवागमन कम हो जाएगा, बस रोड बची रहे |
नंदन जी ….
लेख को पसंद करने और अपने विचार व्यक्त करने के लिए आपका धन्यवाद….| लेख सम्बंधित इससे और अधिक फोटो नहीं थे हमारे पास ..इसलिए नहीं डाले…|
जाम का तो हर जगह ही या हाल हैं…..
अति उत्तम पोसट है चित्र भी अच्छे है
धन्यवाद नवीन…
रितेश जी
आपकी यह पोस्ट भी पिछली पोस्ट की तरह सुंदर है . बहुत खूबसूरत नज़ारे है . ऑर हमेशा की तरह विवरण जबरदस्त है . तस्वीरो का तो जवाब नहीं. यह रोहतांग पास और सोलंग घाटी अब जाने की बहुत इच्छा हो रही है. ओपर से अडवेंचर स्पोर्ट्स ने ४ चाँद लगा दिए. बहुत बढ़िया. घूमते रहे लिखते रहिये और कमेन्ट रहिये .
विशाल जी….
आपका कमेन्ट हमेशा की तरह लाजबाब और बहुत ही अच्छा लगा …..सुन्दर शब्दों के माध्यम से टिप्पणी करने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद….| विशाल जी आप अपनी इच्छा को अब दबाओ नहीं…जल्दी ही इन जगह पर जाने का कार्यक्रम भी बनाओ…|
लेख पर टिप्पणी के लिए धन्यवाद….!
बस अब हिमालय कि यात्राए शुरू होने जा ही रही है . मेरी पहली यात्रा शुरू हो रही है इस जुलाई में बाबा अमरनाथ से . फिर देखते है कहा कहा जाते है .
रितेश भाई , यात्रा विवरण बहुत सुन्दर है . मैं २००९ में मनाली और रोहतांग गया था. सोलोंग वैली भी गया था ओऊ पारा गलैडिंग भी की थी . जिस रोप वे की बात आपने की है और तस्वीरे दिखाई है तब वो बन रहा था . यादें ताजा कराने के लिए धन्यवाद .
मृत्युंजय जी…
लेख पर प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद….|
good post,good pics.
Ashok Ji…
Thanks for Commenting & Liking…
Jay shree krishna Ritesh ji,
Ek aur sundar aur romanch se bhari post ke liye dhanyawad. nature ke photos bahut hi sundar lage. Aur aapne jo rope way aur pera gliding ke bare me bataya vo bhi bahut hi romanch se bharppoor laga. Padhakr esa laga ki abhi pera gliding me bethkar pakshiyon ki tarah udana Bhari jaye.
Aur nature ke soundarya la lutfa liya jaye. bahut hi sundar post thi. bahut enjoy kiya is post ko.
Veryyyyyyyyyyyyyyyyyyy Amajingggggggggggggggggggggggggggggggggggggggg posttttt.
जय श्री कृष्णा तरुन जी…..!
सुन्दर शब्दों से लेख की प्रशंसा करने और उसे पढ़ने के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद …|