Rohtang Pass→Adventure Trip To Snow Valley (एक सुहाना सफ़र मनाली का…..3) |
नमस्कार दोस्तों ! पिछले दिन 23 जून को हम लोगो ने मनाली के आस पास के दर्शनीय स्थलों की सैर की थी, जिसके बारे आपने मेरे पिछले लेख “एक सुहाना सफ़र मनाली का….2 ” में पढ़ा ही होगा । आइये अब चलते हैं ” रोहतांग दर्रे की रोमांचक यात्रा “ की सैर पर ।
पिछ्ली रात हम लोग तय करके सोये थे कि अगले दिन हम लोगो को सुबह जल्दी उठकर रोहतांग दर्रा और सोलांग वैली देखने जाना हैं और अपने कल के इस कार्यक्रम से हमने अपने कार चालक को भी अवगत करा दिया था । उससे इस सम्बन्ध बातचीत भी हुई और उसने बताया की रोहतांग जाने के लिए बहुत जल्दी सुबह लगभग छह बजे की आसपास निकलना पड़ेगा, जिससे वहाँ पहुंचने में देरी न हो और रास्ते के जाम-झाम से बचा जा सके । दिनांक 24 जून 2010 का ठंडी सुबह का दिन था और सुबह-सुबह ही हल्की बारिश हो चुकी थी । हम लोग पौने पांच बजे के आसपास नींद से उठ गए और फोन करके कार चालक को भी उठा दिया था । हम लोगो ने जल्दी-जल्दी सुबह के अपने नित्यक्रम निपटाए । हमारे कमरे की बाथरूम में गीजर के द्वारा गर्म पानी की सुविधा होने से हम लोग नहा-धोकर तैयार हो गए थे । रोहतांग के सफ़र में साथ ले जाने के लिए बच्चो के कुछ गर्म कपड़े, शाल और कुछ नाश्ता एक बैग में लगा लिया क्योंकि सफ़र के दौरान इनकी जरुरत पड़ ही जाती हैं । जगने से लेकर होटल से बाहर आते-आते हम लोगो को करीब एक घंटे का समय लग गया और नीचे आकार देखा की कार अभी पार्किंग से बाहर ही नहीं आई थी; कारण मालूम किया तो पता चला की हमारी कार पार्किंग सबसे पीछे और गाड़ियों के पीछे लगी हुई थी और उसका निकलना इतना आसान नहीं था । किसी भी तरह से होटल स्टाफ की साहयता से कार चालक ने आगे की कारों के बीच में इधर-उधर जगह बनाते हुए अपनी कार निकालने का रास्ता बना ही लिया । कार से पार्किंग से बाहर के बाद अब हम लोग प्रस्थान करने तैयार थे । सब लोगो के कार में बैठने की बाद लगभग पौने छह के आसपास हम लोग रोहतांग के सफ़र पर चल दिए । सुबह के भौर की हल्की मद्धम रौशनी चारो ओर छाई हुई थी । मौसम बिल्कुल साफ़ था और वातावरण में धीरे-धीरे रौशनी बढ़ने के साथ दूर-दूर तक के नज़ारे साफ़ नजर आ रहे थे । यदि बात हम मौसम की करे तो वातावरण काफी खुशमिजाज और ठंडा था और सुबह के समय हल्की बारिश हो जाने के कारण थोड़ा रूमानी भी हो गया था और उस समय हमारे जुबां पर एक प्यारा सा नगमा आ गया : ” ओ ! आज मौसम बड़ा…बेईमान हैं जरा…बेईमान हैं…आज मौसम……” ।
सुबह के समय माल रोड और उसके आसपास की सभी दुकाने बंद थी । गलियों में एकाद ठेल पर चाय और ब्रेड-मक्खन बेचने वाले अपने काम में व्यस्त थे और वे सुबह के समय राहगीरों और पर्यटकों को अपनी सेवा प्रदान कर रहे थे । हम लोगो ने भी इस ठन्डे मौसम में एक ठेल के पास गाड़ी रोककर गर्म-गर्म चाय, ब्रेड और हमारे पास थोड़ा बहुत खाने का सामान रखा हुआ था जो हम अपने साथ लाये थे, उससे सुबह का अपना हल्का-फुल्का नाश्ता किया । गर्म चाय के सेवन शरीर में थोड़ा सा गर्मी का अहसास हुआ । चाय पीने के बाद हम लोग माल रोड राष्ट्रीय राजमार्ग NH-21* से होते हुए व्यास नदी पर बने एक पुल को पार करने के बाद बायीं हाथ पर मुड़ने की बाद व्यास नदी की दाई तरफ के हाइवे पहुँच गए और मनाली-लेह मार्ग पर अपना सफ़र जारी रखा । हम सोच रहे थे कि हम लोग ही सबसे पहले जल्दी उठकर रोहतांग की ओर जा रहे हैं; पर सुबह की समय हाइवे पर काफी हलचल थी और मस्ती करते पर्यटको और घुमक्कड़ो से भरी बहुत सी छोटी-बड़ी गाड़िया नजर आ रही थी ।
मनाली (MANALI) → 12 किमी० → पलचान (PALCHAN) → 5 किमी० → कोठी (KOTHI) → 20 किमी० → मरही गांव (MARHI) → 15 किमी० → रोहतांग दर्रा (Rohtang Pass Top Point)
हाइवे पर व्यास नदी की साथ चलते हुए सारा रास्ता प्राकृतिक द्रश्यो से भरा पड़ा हुआ था । प्रकृति के गोद पड़ने वाले पहाड़, नदी, नाले, छोटे-छोटे घर, घने वन और हरियाली के बीच में बने होटल/रिसोर्ट, लहराती सड़को के द्रश्यो अपने आप में अनूठे थे । कुछ समय बाद सड़क से बहुत दूर बर्फ ढकी पहाड़ियों का खूबसूरत नजारा भी दिखना शुरू हो गया था । लगभग 11 किमी० चलने के बाद हाइवे बाद पलचान (PALCHAN) नाम की जगह से पहले यह हाइवे दो भागो में बट जाता हैं । बायीं तरफ वाला रास्ता सोलांग घाटी और धुंदी (DHUNDI) की तरफ और यहाँ से दाहिने हाथ वाला रास्ता रोहतांग-लेह की ओर चला जाता हैं । हम लोगो को पहले रोहतांग पास की तरफ जाना था सो हमने पहले दाहिने वाला ही रास्ता चुना और उस पर अपने सफ़र को जारी रखा । दाई ओर मुड़ने से पहले तक का रास्ता सपाट और थोड़ा बहुत उतार चढ़ाव वाला था; और यह सड़क भी काफी चौड़ी और अच्छी हालत में थी, परन्तु दाहिने मुड़ने और पलचान से कुछ आगे निकलने के बाद जबरदस्त पहाड़ी चढ़ाई शुरू हो गयी थी । आगे तीखे और घुमावदार कैची जैसे खतरनाक मोड़, जब इन मोड़ो से गाड़ी गुजरती तब अनायास एक डर मन में बैठ जाता था कि अब तो नीचे खाई में गए । कभी गाड़ी खाई की तरफ और कभी पहाड़ की तरफ चली जा रही थी । जब इन तीखे घुमावदार मोड़ो से कार गुजरती थी तब हम लोग भी अपने आप कार के गति के साथ-साथ कभी दांये और कभी बांये अपने आप तरफ सरक जाते थे, फिर अपने आप को सही स्थिति में लाते तब तक फिर सरक जाते थे । सारे रास्ते ऐसा ही सिलसिला चलता रहा और हम प्रकृति प्रेमी भी बड़े शान से इस रोमांचक सफ़र और नजारों का आनन्द लेते चले जा रहे थे ।
रास्ते में कई जगह हमें खाने-पीने और गर्म कपड़े, जूते और दस्ताने किराए पर उपलब्ध कराने वाली अनेको दुकाने नजर आई । खास बात यह की दुकाने नाम से होकर नम्बरों से थी, जिससे पर्यटक इन दुकाने को आसानी से याद रख सके और वापिसी में दुकान को पहचान का उनका किराये पर लिया हुआ सामान आसानी से वापिस कर सके । यह सभी दुकाने हिमाचल पर्यटन से अपने इन्ही नम्बरों से अनुबंधित होती हैं जिससे दुकानदार और पर्यटकों की बीच में किसी भी प्रकार की धोकाधड़ी न हो और राज्य में एक स्वस्थ पर्यटन होता रहे ।
रोहतांग-लेह हाइवे पर सफ़र करते हुए अब हम लोग पलचान से ५ किमी० आगे ” कोठी “ नाम जगह के पास तक पहुँच गए थे । कोठी इस रास्ते में पढ़ने वाली एक खूबसूरत जगह हैं और यहाँ सड़क के दाहिने ओर सुन्दर वादियों में वन विभाग का एक रेस्टहाउस (P.W.D. Rest House) है । शायद इस रेस्टहाउस में ठहरने के लिए पहले से ही आरक्षण करना होता हैं । हमारे कार चालक ने कार को एक दुकान के पास थोड़ा विश्राम करने और चाय पीने के लिए रोक लिया । हमने जहाँ पर कार रोकी उस दुकान का भी एक अपना एक पहचान नंबर था इस दुकान के नीचे वाले भाग में किराए पर गर्म कपड़े, जूते और दस्ताने उपलब्ध थे । हम लोगो ने चाय बनाने के लिए दुकानदार को आदेश दे दिया था तभी उस दुकान में से एक महिला बाहर आई और हमसे आग्रह करके बोली ” रोहतांग के ठन्डे मौसम से बचाब के लिए हमारे पास गर्म कपड़े, दस्ताने और बर्फ में चलने के लिए जूते हैं । आप इन्हें हमारे यहाँ से सस्ते किराये में ले जाओ और लौटते समय इन्हें वापिस कर जाना ।” वैसे तो उस महिला ने यह बात अपने स्थानीय अंदाज में कही थी पर मैने यहां पर इसे अपने अंदाज में लिखा हैं ।
हमने अपने कार चालक से पूछा कि इन कपड़ो के वहाँ पर कोई जरूरत पड़ेगी तो उसने कहाँ “वहाँ पर ठण्ड तो होगी और बर्फीले पहाड़ पर चलने के लिए ट्रेकिंग जूते और गर्म कपड़ो की जरुरत तो पड़ेगी और मेरे ख्याल से इससे आगे अब दुकाने भी कम ही मिलेंगी । यदि आप लेना चाहो तो यही से ले लो ।” हमने उस महिला एक व्यक्ति के पूरे कपड़े का किराया पूछा तो उसने 300/- रूपये प्रति व्यक्ति बताया हमने कहा अरे ! यह तो बहुत महंगे हैं । काफी देर मोलभाव करने पर वह महिला 150/- रूपये प्रति व्यक्ति गर्म कपड़े पर मान गयी । हम लोगो ने अपने पसंद और नाप के गर्म कपड़े और जूते का चुनाव किया और उन्हें पहनकर रोहतांग की सर्दी से निपटने को तैयार हो गए । हम लोग इन मोटे कपड़ो को पहन कर थोड़ा फूल से गए थे । खैर हमने उस महिला को गर्म कपड़ो का 750/- रूपये किराये का भुगतान किया और गर्म-गर्म चाय पी; थोड़ा बिस्किट, नमकीन का नाश्ता किया और अपने आगे के रास्ते की ओर चल दिये । कोठी से आगे ऊँची-ऊँची पहाड़ियों से घिरा रास्ता बहुत सुन्दर और मनोहारी द्रश्य वाला था । हमारे कार चालाक ने बताया की इसको शूटिंग पॉइंट कहते हैं क्योंकि अधिकतर फिल्मो की शूटिंग इसी जगह के आसपास होती रहती है ।
सफ़र में चलते समय पहाड़ों के ऊंचाई में दिखती सड़क को देखकर ऐसा लग रहा था की किसी ने उसे आसमान की सबसे ऊंचाई पर ही बना दिया हो । हमारे मन में एक अजीब सा रोमांच का आभास हो रहा था कि अब हमें भी इसी ऊँची सड़क से गुजरना हैं । दूसरी तरफ गहरी-गहरी खाईयां उसके किनारे से गाड़ी को निकलते देख मन में अजीब-अजीब से ख्याल भी आ रहे थे । जैसे-जैसे हम लोग ऊँचाई की ओर चलते चले जा रहे वैसे-वैसे उसी अनुपात में पहाड़ों पेड़ों-पौधों की संख्या के साथ-साथ तापमान में भी गिरावट आती जा रही थी और सड़क पहले की अपेक्षा धीरे-धीरे संकरी हो रही थी । आगे के सफ़र में सड़क के संकरी होने जाने और कई जगह भूस्खलन के कारण रास्ता दलदली, उबड़खाबड़, फिसलन से भरा होने के कारण खतरनाक हो गया था । पहाड़ों में कई जगह तो रास्ता इतना संकरा हो गया था कि एक समय में एक तरफ की ही गाड़ी ही गुजर पा रही थी और वाहनों के दबाब के कारण जाम की स्थिति बन गयी थी । एक गाड़ी तो उबड़खाबड़ और ऊंचाई वाले रास्ते पर चालक की अनुभवहीनता के कारण बंद ही पड़ गयी थी, जैसे-तैसे वो चालक उस गाड़ी को वहाँ से निकालने ने सफल हो ही गया और रास्ता खुल ही गया था । रास्ते में कई जगह पीछे से आती कई स्थानीय गाड़ी जल्दी के चक्कर में बार-बार होर्न देकर ओवरटेक करने की कोशिश कर रही थी । वैसे पहाड़ों में स्थानीय चालक बाहर के वाहन चालक को पसंद नहीं करते । हमेशा आगे निकलने की होड़ में लगे रहते हैं और अपने आप को पहाड़ों का कुशल चालक मानते हैं । हमारी कार का चालक पूरे रास्ते भर बड़ी कुशलता, धैर्य और अनुभव से कार को एक सामान गति से सड़क और ट्रेफिक के अनुसार चला रहा था । हम लोगो को उसके पहाड़ों में गाड़ी चलाने के हिसाब से समझ गए कि यह बहुत ही अनुभवी कार चालक हैं, और हमें उस पर पूरा भरोसा था ।
रास्ते में एक जगह एक तेज गति से गिरता मनोरम पहाड़ी झरना नजर आया । झरने से आगे बढ़ने एक छोटी सी झील नजर आई जिसे छोटी नदी पर एक बाँध बनाकर बनाया गया था और यहाँ पर एक पिकनिक स्पोट भी बनाया गया था । कुछ किलोमीटर आगे बढ़ने पर तेज बहती व्यास नदी के ऊपर बने एक संकरे पुल को पार करने के कुछ देर बाद हम लोग इस इलाके राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-21*) पर पड़ने वाले अंतिम और सबसे ऊँचे गांव ” मरही (Marhi) ” पहुँच गए । इस गांव की समुद्र तल से ऊंचाई लगभग 3335 मीटर हैं । अत्यधिक ऊंचाई (पहाड़ों पर दस से ग्यारह हजार फुट से ऊपर के जगह पर वृक्ष रेखा समाप्त हो जाती हैं और केवल घास और पत्थर ही नजर आते हैं ।) के कारण इस गांव में पेड़ पौधे बहुत ही कम नजर आ रहे थे पर यहाँ का मौसम जबरदस्त ठंडा था । मनाली से मरही की गांव की दूरी लगभग 36 किमी० हैं । यह गांव पैराग्लाइडिंग का बेस कैम्प भी हैं और पैराग्लाइडिंग करने वाले उत्साही लोगो की इस रोमांचक खेल के लिए यहाँ पर बुकिंग की जाती हैं । मरही गाँव से आगे रोहतांग-लेह हाइवे के ऊँचे पहाड़ी स्थान से उड़कर (पैराग्लाइडिंग करके) आने वाले लोग इसी गाँव में उतरते हैं ।
जब हम मरही गाँव पहुंचे उस समय सड़क के दोनों विश्राम करने की लिए रुके यात्रियो की बहुत सी गाड़ियों सड़क दोनों ओर खड़ी हुई थी । जिससे आगे रोहतांग के ओर जाता हुआ रास्ता और भी संकरा ओर तंग हो गया था, और जाम के से हालात हो गए थे । हम लोगो का इस गॉव में रुकने का कोई इरादा नहीं था सो हम लोग जाम का सामना करते हुए अपनी मंजिल की ओर चल दिए । अभी हमारा रोहतांग का सफ़र यहाँ से लगभग 15 किमी० दूर था और आगे का रास्ता उबड-खाबड़, धूल भरा और खतरनाक हो गया था । कही-कही रास्ते दोनों ओर के पहाड़ों/चट्टानों को काटकर बीच में निकाला गया था । हमने सोचा की कैसे इन विषम परिस्थिर्यो में मजदूरो ने इतने इतनी ऊंचाई वाले खतरनाक परिवेश में (जहाँ आसानी से साँस लेना भी मुश्किल हैं ।) इस सड़क मार्ग का निर्माण किया होगा और विपरीत मौसम में मार्ग को सुचारू रखने के लिए कितने मेहनत करनी पड़ती होगी । खैर अब पहाड़ों पर यदा-कदा वर्फ दिखाना शुरू हो गयी थी और जैसे-जैसे आगे बढ़ते जा रहे थे वैसे-वैसे पहाड़ों पर बर्फ की मात्रा भी बढ़ती जा रही थी ।
कुछ किलोमीटर चलने की बाद रास्ते के दोनों ओर बर्फ नजर आना शुरू हो गयी थी और सड़क बर्फ पिघलने के कारण गीली हो गयी थी । कई जगह बर्फ काटकर रास्ते बनाये गए थे, तो कई जगह रास्ते के दोनो ओर बर्फ की दीवार की खड़ी थी । कभी-कभी हम बर्फ दीवारों से इतने नजदीक से गुजरे कि हाथ बढ़ाकर अपनी मुट्ठी में बर्फ को भर लेते थे और आपस में कार में ही छीटाकशी करते थे । बर्फ की इन दीवारों के बीच रास्ते से गुजरते हुए हमें फ़िल्म “जब वी मेट” में यहाँ पर फिल्माया गया एक गीत याद आ गया वो हम कुछ इस प्रकार गुनगनाने लगे → “ये इश्क हाय…! बैठे बिठाये जन्नत दिखाए….ओ रामा…ये इश्क हाय… ।” इन रोमांचक बर्फ से घिरे मार्ग से गुजरते हुए, ऐसा महसूस होता हैं की हम सपनो की सफ़ेद दुनिया जन्न्त में आ गये हो । कुछ किलोमीटर चलने के बाद हमने अपने कार चालक से पूछा कि “अभी रोहतांग कितनी दूर हैं ?” तो उसने बताया की “ऊपर सड़क का मोड़ जो उस पहाड़ी नजर आ रही बस उसी के पीछे हैं रोहतांग । मुश्किल से दो किलीमीटर ही होगा और कुछ देर में पहुँचने वाले हैं ।”
रोहतांग दर्रा (Rohtang Pass)
एक परिचय रोहतांग दर्रे से । समुंद्र तल से लगभग 13050 फीट (3978 मीटर) की ऊंचाई पर स्थित प्रसिद्ध रोहतांग दर्रा हिमाचल प्रदेश के सबसे ऊँचे और मुख्य दर्रो में एक हैं । रोहतांग हिमालय पर्वत के पूर्वी पीर पंजाल श्रृंखला के अन्तर्गत आता हैं । रोहतांग दर्रे को लोग इसके पुराना नाम “भृगु-तुंग” नाम से भी जानते हैं और कुछ लोग तो इसे यहाँ के मौसम की विषमता (बर्फीले तूफान) के कारण ” मौत की घाटी ” तक कहते हैं । अत्यधिक ऊँचाई के कारण यहाँ हवा का घनत्व (विरलता) कम होता हैं इस कारण वातावरण में आक्सीजन की मात्रा घट जाती हैं । कभी-कभी साँस लेने में भी परेशानी उठानी पड़ती हैं और थकावट हो जाती हैं । रोहतांग मनाली-लेह राष्ट्रिय राजमार्ग 21* (NH-21*) पर पड़ता हैं और मनाली (जिला-कुल्लू) से लगभग 52 किलीमीटर दूर हैं । रोहतांग को लाहुल-स्पीति का प्रवेश द्वार भी कहा जाता हैं क्योकि लाहुल-स्पीति केवल इसी मार्ग से जाया जा सकता हैं । इस दर्रे का मौसम अक्सर बदलता रहता हैं और इसी मौसम के अत्यधिक बदलाव के कारण यह और भी अधिक प्रसिद्ध हो गया हैं । दोपहर बाद यहाँ का मौसम कब बिगड़ जाये पता ही नहीं चलता, कुछ देर पहले तेज धूप पड़ रही होती है तो कुछ देर बाद घने बादल आकार कुहरे सा आभास करा देते है । यहाँ पर अक्सर हड्डियों के भेदने वाली ठंडी हवा चलती रहती हैं । रोहतांग पर साल भर बर्फ पड़ती हैं और सर्दियो में (नबम्बर से अप्रेल तक) अत्यधिक बर्फ पड़ने के कारण रास्ते ढक जाते और रोहतांग दर्रे को छह माह के लिए बंद कर दिया जाता हैं । इन छह महीनो में लेह और लाहुल-स्पीति का सड़क संपर्क मार्ग बिल्कुल खत्म हो जाता हैं ।
रोहतांग आकार प्रकृति के विराट स्वरूप के दर्शन होते हैं और यहाँ के उन्मुक्त वातावरण में हम खो से जाते हैं । रोहतांग वास्तव में किसी स्वर्ग से कम नहीं हैं यहाँ से नजर आती बर्फ से ढकी सुन्दर हिमालय पर्वतमाला मन को मन्त्र-मुग्ध कर देती हैं । यहाँ अक्सर बादल पहाड़ों से नीचे नजर आते हैं और यहाँ जैसे विरल नज़ारे शायद ही किसी और जगह देखने को नजर आये । गर्मियों में यह स्थान हजारों पर्यटको और घुम्मकड़ो से आबाद हो जाता हैं । रोहतांग की ढलान पर दूर-दूर तक बर्फ का विशाल साम्राज्य देखकर उम्रदराज लोग अपने आप को जवान महसूस करते है, और नौजवानो के अंदर में बालपन जाग उठता हैं । यहाँ हर तरफ लोग खूब मौज-मस्ती करते और आपस पर एक दूसरे पर बर्फ के गोले बनाकर फेकते, हँसतें और यहाँ का भरपूर आनन्द नजर आ जाते हैं । पर्यटको के लिए रोहतांग में बर्फ में होने वाले साहसिक और रोमांचक खेल जैसे स्कीइंग, बर्फ के स्कूटर की सवारी, स्लेज से बर्फ पर चलना, ढलान से स्नोमीटर से फिसलना आदि की पूर्ण व्यवस्था हैं और विशेषज्ञ की देखरेख में इनका मूल्य चुकाकर अपना मनोरंजन किया जा सकता हैं ।
अब चलते हैं अपने यात्रा वृतान्त की ओर । करीब पन्द्रह-बीस मिनिट सफ़र और तंग रास्ते के जाम को झेलते हुए हम लोग रोहतांग पहुँच गए । रोहतांग टॉप से कुछ पहले पार्किंग और वहाँ पर खच्चर से रोहतांग टॉप तक घूमने की अच्छी व्यवस्था थी । हम लोगो ने यहाँ पर नहीं रुके और लेह के रास्ते आगे चलते हुए सुबह के नौ बजे रोहतांग दर्रे के टॉप पर पहूँच गए । रोहतांग में बर्फ का विशाल साम्राज्य और पहाड़ों की खूबसूरती देखकर हम लोग मंत्रमुग्ध हो गए । हमने रोहतांग दर्रे और उससे पहले पड़ने वाली पहाड़ियों में कई जगह देखा की बर्फ का रंग आंशिक रूप काला पड़ गया था, और कारण था रोहतांग में डीजल गाड़ियों कि अधिक मात्रा में आवागमन से उनसे निकला काला धूआँ जो इन सफ़ेद बर्फ जमा होकर बर्फ के रंग काला कर देता हैं और दूसरा कारण पर्यटको के द्वारा अपने साथ लाए सामान की गन्दगी और कूड़ा का यहाँ पर छोड़ देना था । यह जानकारकर हमें दुःख हुआ की अत्यधिक पर्यटक दबाब के कारण रोहतांग की सुंदरता धीमे-धीमे समाप्त हो रही हैं । मेरी लोगो से अपील है की यदि आप लोग कही भी घूमने जाए तो इधर-उधर कूड़ा फेककर वहाँ की सुंदरता को नष्ट न करे ।
रोहतांग दर्रे की शुरुआत से ही बड़ी संख्या में सड़क पर लोगो ने अपने वाहनं सड़क के इधर-उधर खड़े किये हुए थे और बर्फ में अपने लोगो के साथ खेलने और सैर का आनन्द ले रहे थे । यहाँ के स्थानीय लोगो और फोटोग्राफरो ने बर्फ के पुतले, सुंदर रंगीन फूलो और कागजो से सजे मॉडलनुमा छोटे घर बना रखे थे और लोगो की इनके साथ खूबसूरत वादियों फोटो अपने कैमरे में कैद कर पर्यटकों को अपनी सेवा प्रदान कार रहे थे । रोहतांग में इस समय काफी संख्या में पर्यटक जमा थे और काफी भीड़-भाड़ थी । हमने अपने कार चालक से इसी सड़क पर और आगे चलने को कहा । कार चालक हमें रोहतांग दर्रे के अंत तक ले गया जहाँ से लेह और लाहुल-स्पीति के लिए सड़क की ढलान शुरू हो जाती थी । रोहतांग के इस हिस्से में भीड़भाड़ काफी कम थी और इस जगह हमको ताज़ी और साफ़ सुधरी बर्फ देखने को मिल गयी थी । हमने आपकी कार यही पर एक जगह सड़क के किनारे रुकवा दी ।
कार से निकलकर रोहतांग की धरती पर हमने पहला कदम रखा तो यहाँ के नज़ारे देखकर हम तो धन्य हो गए और मन में कहा कि रोहतांग वास्तव हमारे देश की धरती पर जड़ा हुआ एक अनमोल नगीना हैं । सड़क के दोनो ओर पहाड़ियों और ढलानों पर जहाँ देखो बर्फ का विशाल साम्राज्य फैला हुआ था । भटकते बादलों की बीच अवतरित होती दूर नजर आती बर्फ से ढकी हिमालय की खूबसूरत पर्वतमाला रोहतांग की सुंदरता भी चार चाँद लगा रही थी । प्रकृति की गोद में बसा रोहतांग एक अदभुत रमणीक स्थल हैं । बर्फ पर पड़ती लुकाछुपी करती सूरज की तेज किरण बर्फ पर पड़ने के बाद आँखों को चकाचौंध सी कर रही थी और वातावरण को और भी प्रकाशमान कर रही थी । रोहतांग पर कई छोटी-बड़ी बर्फ से ढकी पहाड़ियां और ढलान हैं जहाँ पर स्नोमीटर, स्किनिंग, बर्फ के स्कूटर आदि पर लोग अपना मनोरंजन कर रहे थे । रोहतांग पर भूख मिटाने के लिए स्थानीय लोगो के द्वारा बर्फ के ऊपर ही छोटी-छोटी खुली हुई स्टालनुमा दुकाने यहाँ सड़क के किनारे लगायी हुई थी । दुकान क्या एक मेज पर ही अपना बेचने का सारा सामान लगा रखा था और बगल में ही मेज-कुर्सी डाल रखी थी । इन दुकानों में बिस्किट, कोल्डड्रिंक, चिप्स, ब्रेड, अंडा, गरम चाय, काँफी, भुट्टे, मैगी नूडल्स, आमलेट आदि उपलब्ध थे ।
हमने सोचा की बर्फ में घूमने बाद में जायेगे पहले थोड़ी पेट-पूजा कर ले जाये और काफी देर चलते रहने के कारण अब हमें भूख भी लगाना शुरू हो गयी थी । सबसे पास की एक दुकान पर जाकर पूछा तो गर्म खाने में चाय, आमलेट और मैगी नूडल्स उपलब्ध थे । हमने नूडल्स और आमलेट के भाव पूछे तो थोड़े महंगे लगे (शायद ६० या ४० रूपये पर अब याद नहीं आ रहा हैं ) । महंगे हैं तो क्या हुआ यह सब हमें इतनी ऊंचाई और विषम परिस्थियों में उपलब्ध भी तो हो रहे थे । हमने दो कटोरा नूडल्स और एक आमलेट-ब्रेड बनाने का आदेश दे दिया और पास में रखी मेज-कुर्सी पर बैठकर प्रतीक्षा करने लगे । हमने अपने कार चालक से भी खाने के लिए पूछा तो उसने कहाँ की “मैं अपने पसंद का थोड़ी देर बाद में खा लूँगा” । हमने उसे खाने के लिए पैसे दे दिये और कहा ” तुम्हारा जब मन करे तब खा लेना ” । कुछ ही देर प्रतीक्षा के पश्चात गर्म-गर्म नूडल्स और आमलेट-ब्रेड आ गयी । मुझे नूडल्स जरा भी पसंद नहीं थे, सो मैंने आमलेट-ब्रेड पर ही धावा बोला और बाकी लोगो ने भी अत्यधिक भूख के दबाब में फटाफट नूडल्स फटाफट खत्म कर दिए । हमने एक कटोरा और नूडल्स बनाने का आदेश दे दिया । चारों ओर बर्फ से घिरी जगह के बीच में मनमोहक नजारों का आनन्द लेते हुए खाने का मजा अपने आप में एक न भुलाने वाला अनुभव था ।
अपनी भूख को शांत करने के पश्चात हम लोग सड़क के दूसरी तरफ ऊपर की ओर नजर आ रही साफ़ और ताज़ी बर्फ से ढकी एक पहाड़ी की और चल दिए । इस पहाड़ी पर कोई भीड़भाड़ नहीं थी बस इक्का दुक्का लोग ही टहल रहे थे । बर्फ में थोड़ी से जूतों की साहयता से जगह बनाकर हम लोग इस पहाड़ी पर चढ़ गए । पहाड़ी के थोड़ा ऊपर और जाने पर रोहतांग से दिखने वाले नज़ारे और भी बेहतरीन हो गए जिन्हें आप फोटोओ में देख सकते हो । यहाँ की बर्फ साफ़ सुधरी और ताज़ी होने के कारण थोड़ी भुरभुरी थी ओर इस ताज़ी बर्फ पर पहले जूते के निशान हमारे ही बने थे । बर्फ ऊपर सावधानी से चलते हुए भी जूते कही-कही बर्फ में धंस जा रहे थे और बर्फ जूतों में अंदर घुस कार पैरों को सुन्न कर रही थी । अपना जूता उतारते बर्फ को निकालते और फिर दुबारा से पहनकर अपनी मस्ती में लग जाते थे । इतनी सारी बर्फ देखकर हमारे अंदर का बालपन जाग उठा और उछलने, कूदने और मस्ती करने को दिल मचलने लगा । हमने बर्फ में खेलते हुए एक छोटा सा बर्फ का पुतला बनाया उसके हाथ, पैर, नाक और एक मुँह भी दिया जो बार-बार बनाने पर गिर रहे । बड़ी मुश्किल से वो छोटा सा पुतला बन पाया और उसका बाकायदा नामकरण भी किया उसका नाम हमने रखा “लल्ला” । उस छोटे से सफ़ेद रंग के बर्फ पुतले साथ हमने ढेर सारी फोटो खींच डाली । लगी ने आपको न बच्चो जैसी बात पर ऐसा करके देखो, बड़ा मजा आता हैं और ये जिंदगी पल के हसीन पल बनकर कभी न भूलने वाली यादें बन जाती हैं ।
इस पहाड़ी की बर्फ पर टहलते हुए हम लोग और ऊँचाई पर चले गए । ऊपर बर्फ की बीच में हमें एक छोटा सी जगह मिली जो बर्फ से खाली थी और उसमे बर्फ के बीच में एक छोटा गड्डे का रूप ले लिया था । उस खाली जगह में छोटे-छोटे गोल पत्थर पड़े हुए और उन छोटे पत्थरों के बीच बर्फ से पिघलकर पानी बह रहा था । बर्फ से बहकर निकला पानी आगे जाकर बर्फ में गायब हो रहा था । कुछ फोटो हमने यहाँ की भी लिए और पास में एक पत्थर की ऊँची से चट्टान पर चढ़ कर रोहतांग क्षेत्र का अवलोकन भी किया ।
काफी समय इस पहाड़ी पर व्यतीत करने के पश्चात हम लोग नीचे उतरकर सड़क के दूसरी और ढलान पर पहुँच गए । इस तरफ की बर्फ थोड़ी गन्दी और मटमैले रंग की थी । लोगो के द्वारा स्कीइंग और स्नोमिटर चलाने के कारण बर्फ दब गयी थी और और लंबे-लंबे निशान से बन गए थे । हम लोग इस घाटी का आनन्द ले रहे थे तभी एक स्कीइंग कराने वाला आया और अपनी सेवा देने के लिए आग्रह करने लगा । हमने कहाँ ” कितने पैसे लोगो और कहाँ तक स्कीइंग कराओगे ” । वो बोला “वो सामने पहाड़ी तक के एक चक्कर के 300/- रूपये लूँगा ।” हमने कहाँ ” भाई ! यह तो बहुत महंगा हैं और हमें स्कीइंग करने भी नहीं आती गिर गए तो परेशानी हो जायेगी ।” वो नहीं माना और अब वो 150/- रूपये चक्कर पर आ गया । अंत में हमने उससे मना ही कार दिया क्योंकि हमने पहले स्कीइंग कभी नहीं की थी और गिरने का भय भी लग रहा था ।
कुछ समय यहाँ के मनोरम नज़ारे, लोगो को स्कीइंग करते हुए और स्नोमीटर चलाते हुए देखते हुए बिता दिया । अब हम लोग वापिस सड़क पर आ गए और देखा कि सड़क के किनारे एक भुट्टा वाला गर्म-गर्म भुट्टे भून कर बेच रहा था । वैसे पहाड़ी इलाके में भुट्टे मिलना आम बात हैं, यदि इतनी ऊँचाई पर भी मिल जाये तो मजा ही आ जाता हैं । मैंने उससे एक भुट्टे का भाव पूछा तो उसने 20/- का एक बताया । मैंने एक बड़ा सा सुन्दर बड़े दाने वाला एक भुट्टा छांटकर उसे भुनवाया । बर्फीले मौसम में गर्म-गर्म भुट्टे का स्वाद अलग ही आनन्द देता । भुट्टे का स्वाद लेते हुए हम लोग अपनी कार के पास आ गए ।
बर्फ में खेलते हुए हमारे किराये के गर्म कपड़े गीले हो गए थे । जूते के अन्दर बर्फ घुसने कारण जूते अंदर से गीले हो गये थे और पैर सुन्न से हो गए थे । हमने गीले कपड़े और जूते उतारकर कार की डिक्की में डाल दिया और अपने स्पोर्ट्स वाले जूते पहन लिए । दोपहर के बारह बजने वाले थे और यह तीन घंटे का समय कब व्यतीत हो गया की पता ही नहीं चला । इस समय रोहतांग के मौसम में थोड़ा बदलाव शुरू हो गया था और कुछ घने बादल रोहतांग की पहाड़ियों पर मडराने लगे थे । तेज गति से बहती बर्फीली ठंडी हवा शरीर को तीर की तरह से चुभो रही थी ।

Every one is enjoy at Rohtang (रोहतांग में बर्फ का पुतला और बर्फ से बनाई गई सुन्दर आकृति.....ये फोटो वापिसी में कार से लिया गया है )
काफी समय यहाँ पर व्यतीत हो जाने के कारण हमारे कार चालक ने यहाँ से वापिस चलने को कहा । अभी हमारा यहाँ से वापिस जाने को दिल नहीं कर रहा था पर हमें वापिसी का लंबा और खतरनाक रास्ता भी तय करना था और सोलांग वैली भी जाना था । रोहतांग की इन सुन्दर वादियों में फोटो खीचने का अपने आप में एक अलग अनुभव होता हैं, चारों ओर के द्रश्य सुन्दर नजारों से भरे पड़े हैं और यहाँ की फोटो भी बेमिसाल आते हैं । हमने तो यहाँ के ढेर सारे फोटो खींच डाली थी; कुछ फोटो इस लेख में भी लगाए हैं । आपको इनमे से कौन सा फोटो सबसे अच्छा लगा जरा बताइए तो ? लगभग सवा बारह बजे की आसपास हम लोग कार में सवार हो गए और रोहतांग में बिताए उन खूबसूरत पलो में मन में संजोकर वापस मनाली की ओर चल दिये ।
मैंने रोहतांग के उन खूबसूरत पलों को अपनी स्वयं लिखित कविता के रूप में कुछ इस प्रकार संजोया हैं :→
वो पल अक्सर याद आते हैं,
एक प्यारा अहसास दिला जाते हैं ।
सफ़ेद बर्फ से पटी पहाड़ियाँ,
वो बर्फीली सुन्दर घाटियाँ ।
हर पल बदलता मौसम यहाँ,
पहाड़ों में घने बादलों डेरा यहाँ ।
बर्फ में करते वो अठखेलियाँ,
वो आपस की हंसी ठिठोलिया ।
वो पल अक्सर याद आते हैं,
एक प्यारा अहसास दिला जाते हैं ।
मुझे लगता हैं कि यह लेख कुछ ज्यादा ही लंबा हो गया हैं । अब अपने इस रोहतांग की इस यात्रा लेख को यही विराम देता हूँ, और अगले लेख में “रोहतांग वापिसी, सोलांग वैली और मनिकरण की यात्रा ” के बारे में अपना अगला लेख प्रस्तुत करूँगा । आज रोहतांग दर्रे की रोमांचक यात्रा आपको कैसी लगी, आपकी प्रतिकिया और अगले लेख के लिए सुझावों का स्वागत हैं । अगले लेख तक के लिए आपका धन्यवाद !
29 मई का दिन मेरे लिए खास हैं; क्योंकि हमारी जिंदगी और हमारे हर सफ़र के साथी मेरी बड़ी बेटी ” अंशिता ” छोटे बेटे ” अक्षत ” दोनो बच्चो का आज जन्मदिन हैं और यह खुशी का दिन मैं आप लोगो (अपने घुमक्कड़ परिवार के साथ) के साथ बाँटना चाहता हूँ ।
नोट : ऊपर लगाये गए फोटो में दर्शाये गए समय और दिनांक वास्तविक हैं ।

































Dear Mr. Ritesh Gupta
Happy Birthday to ANSHITA and AKSAT. Wonderful, marvellous photos and description. For me best photo is Anshita at Rohtang Pass Road.
Best Regards,
Surinder
Dear Mr. Surinder Sharma ji……
Thank you very much liking my post & picture…..
रितेश भाई,
इस पोस्ट के मुख्य आकर्षण फोटो हैं। बेहतरीन कैमरा अगर बेहतरीन हाथों में पड जाये तो हमेशा गजब के फोटो आते हैं। मुझे सर्वोत्तम फोटो हम सब साथ साथ हैं लगा।
और रोहतांग के बारे में हम यह कह सकते हैं कि यह दो संस्कृतियों का मिलन स्थल भी है और वियोग स्थल भी है। कुल्लू और लाहौल को अलग अलग करता है यह। आज तो राजनैतिक रूप से यह मात्र दो जिलों को अलग करता है लेकिन पहले दो देश… मतलब रोहतांग पार करते ही सबकुछ अलग।
आपने जो रोहतांग के बारे में बताया है कि यह एक ऐसी जगह है जहां दोपहर बाद मौसम कब कैसा हो जाये, पता नहीं चलता; ऐसा हिमालय में 3500-4000 मीटर की ऊंचाई वाले हर हिस्से में होता है।
नीरज भाई…..
रोहतांग के बारे में और अधिक जानकारी देकर आपने अच्छा किया….|
लेख के फोटोओ पसंद करने और उनमे सर्वोत्तम फोटो चुनने के लिए आपका शुक्रिया….|
अंशिता और अक्षत को जन्मदिन की बहुत बहुत शुभकामनाये मेरी और समस्त घुमक्कड परिवार की ओर से क्योंकि ये दोनो केवल लिखते ही नही है पर घुमक्कडी में आपके साथ रहते हैं ………….
सबसे अच्छा फोटो गढढे वाला लगा ये नजारा देखने लायक था
वैसे सारे फोटो बढिया हैं हम लोग गर्मियेा में जब गये तो इतनी बर्फ नही थी ………….डीजल का धुंआ पहाडो को बहुत नुकसान देता है पर क्या करें डीजल इतना सस्ता है कि पैट्रोल के मुकाबले लोग डीजल की गाडी लेते और टैक्सियां तो डीजल की ही चलती हैं
मनु जी……
सही कहा ” अंशिता और अक्षत ” लिखने नहीं पर हर सफ़र में हमेशा हमारे साथ रहते हैं ……|
बधाई देने और टिप्पणी के लिए धन्यवाद…..!
रितेश जी राम राम, सबसे पहले आपके बच्चो को उनके जन्मदिन कि बहुत बहुत बधाई,भगवान उन्हें जिंदगी में हर सफलता दे, उनकी हर इच्छा पूरी करे, ये जिए हज़ारो साल, साल के दिन हो पचास हज़ार….और वाह रोहतांग को देखकर मुझे अपनी मनाली रोहतांग यात्रा कि याद हो आयी. रोहतांग यानिकी रूहों का दर्रा, या आत्माओ का निवास, इसलिए इसे मौत कि घाटी भी कहते हैं.पर मौत कि घाटी इतनी सुन्दर होगी वंही पर जाकर पता चलता हैं.जब हम पहली बार मनाली गए थे तो बर्फ़बारी के कारण बीच में ही फंस गए थे,पर तब भी बर्फ़बारी का आनंद लिया था.हम लोग दूसरी बार में रोहतांग पहुँच पाए थे. आपके फोटो बहुत शानदार हैं.फोटो तो हज़ारो खींच सकते हैं, लेकिन जी नहीं भरता हैं.इन फोटो में आपने व्यास मंदिर का फोटो नहीं लिया हैं, जोकि व्यास नदी का उद्गम स्थल हैं.खैर मज़ा आ गया सुबह सुबह बर्फ कि ठंडी ठंडी वादियों में जाकर. धन्यवाद…
प्रवीन जी…. राम राम
सुन्दर शब्दों के माध्यम से बच्चो को बधाई देने और टिप्पणी के लिए आपका ह्रदय से बहुत-बहुत धन्यवाद …..!
रोहतांग के बारे में जो आपने बताया वो मुझे काफी अच्छा लगा …….लगता हैं आपने इस लेख के माध्यम से अपनी रोहतांग पुरानी यादो को ताजा किया हैं…..
हम लोग व्यास मंदिर नहीं गए थे इसलिए उसका फोटो हमारे पास नहीं हैं ……
धन्यवाद….!
कोण सी फोटो अच्छी नहीं है ढून्ढ नहीं सका .
बुइतिफुल……….
हम तो सिर्फ मरही तक जा सके.
लेख पर प्रतिकिया के लिए धन्यवाद सर्वेश जी…
मई की गर्मी में आप के लेख ने बहुत टंडक दी …..:-)
आप चाहते हैं की पहाड़ में आप का घर हो …..और हमारा होते हुए भी नही भोग पाते | हमारा पुस्तेनि घर चंदरबदनी मंदिर (टिहरी) में है|
जितना सुंदर लेख उतने सुंदर फोटो |
धन्यवाद महेश जी……..
वैसे जो वस्तु अपने पास होती हैं उसकी कदर कुछ कम ही होती हैं…..ऐसा ही कुछ आपके साथ भी हैं और दूसरे शहर में कामकाज में व्यस्त रहने के कारण आप उसे भोग नही पाते……..|
रितेश,
सबसे पहले तो अंशिता और अक्षत को जन्मदिन की हार्दिक बधाईयाँ और ढेर सारा प्यार.
आज आपकी पोस्ट की तारीफ़ करने के लिए मेरे पास शब्द नहीं है……………एक से बढ़कर एक तस्वीरें और उस पर आपका लेख…………..अति सुन्दर.बहुत दिनों के बाद घुमक्कड़ पर कोई ऐसी पोस्ट पढ़ी जिससे मन में हलचल होने लगी. इतनी जबरदस्त गर्मी में बर्फ से लबरेज़ पहाड़ों की तस्वीरें देखना और वो भी सुन्दर वर्णन के साथ, मज़ा आ गया.
कुछ मिनटों के लिए ही सही, झुलसा देने वाली गर्मी से निजात दिलाने और सपनों की बर्फीली दुनिया में सैर कराने के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद.
मुझे “Panoramic view of Rohtang Pass and Leh Road ” और ” हम साथ साथ हैं” वाली तस्वीरें सबसे ज्यादा पसंद आईं.
“वो पल अक्सर याद आते हैं” कविता भी लाजवाब थी…………………आप इतनी अच्छी कविता भी करते हैं आज पता चला. और हाँ एक बात तो भूल ही गया………..इस बार आपके तस्वीरों के captions भी बहुत ही लुभावने थे जैसे “एक तमन्ना ! छोटा सा घर हो यहाँ” कुल मिला कर इस पोस्ट को मेरी ओर से 10 /10.
मुकेश जी……
बच्चो बधाई देने के लिए आपका बहुत धन्यवाद… और सुन्दर और मधुर शब्दों के माध्यम से लेख पर प्रतिकिया करने बहुत बहुत शुक्रिया ……|
” Panoramic view of Rohtang Pass and Leh Road ” वाला फोटो मुझे भी सबसे अच्छा लगता हैं, यह फोटो मैंने अपने नोकिया मोबाइल से इक ऊँची सी चट्टान पर खड़े होकर लिया था …..| वैसे रोहतांग इक शानदार जगह हैं…..|
कभी – कभी हम भी कविता कर लेते ….हौसला बढ़ाने के लिए धन्यवाद…..|
पढकर काफी अच्छा लगा मेरी पुराणी यादें ताज़ा हो गयी.
वैसे अब तो अपनी गाडियां लेकर जा ही नहीं सकते क्योंकि himanchal pradesh govt. ने दूसरे state की गाडियों का का आना जाना रोक दिया है. पहले तो हम भी अपनी गाड़ी लेकर गये थे बड़ा मजा आया था. पर जब दोबारा गये तो हमारी गाड़ी को वहीँ रोक लिया पुलिस वालों ने और बोला सिर्फ H.P. न. गाडियां ही ऊपर जाएँगी.
बड़ा मजा आया पढकर.
लेख को पढ़ने और पसंद करने के लिए…धन्यवाद….|
आप दुबारा कब गए थे…….?
मेरे ख्याल से रोहतांग जाने पर दूसरे राज्य की टैक्सीयो पर प्रतिबन्ध हैं पर निजी वाहनों पर नहीं …..निजी वाहन अब भी रोहतांग जा सकते हैं….|
रितेश भाई बर्फ के फोटो दिखाकर हमें उकसा रहे हो तो ठीक है अपुन भी फिर से इस इलाके से होकर जाने वाले है, bike से जायेंगे जिस पर कोई रोक नहीं है हा हा हा हा
आप को कौन उकसा सकता हैं संदीप भाई….आप तो अपने मर्जी के मालिक हो और घुमक्कड़ी भी अपनी मर्जी से ही करते हो….
रितेश ,
आपकी रचना का श्रम साफ़ दिखाई देता है , मैं ये बात शायद पहले भी लिख चूका हूँ पर वाकई. इसी कारण से आपके लेख एक अंतराल के बाद भी आते हैं तो खलता नहीं है | रोहतांग का जाम तो जन-व्यापी है, अभी एक टनल बन रही है तो शायद मढ़ी के बाद तो रोड कभी न बने | मेरे ख्याल से अपनी निजी गाडी तो आप ले जा सकतें है आज भी, हो सकता है की टेकसी को लेकर कुछ व्यवधान हो |
Many many happy returns of the day, Anshita and Akshat. Wishing you happiness and love.
Best,
Nandan
नंदन जी…..
सुन्दर शब्दों के माध्यम से प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद….|
लेख लिखते समय मैं हमेशा ध्यान रखता हू की सही और विस्तृत जानकारी अपने लेख में लिख सकु जिसमे थोड़ी मेहनत तो लगती हैं ….और लेख के बीच अंतराल का कारण मेरा व्यस्त होना हैं समय मिलने पर ही धीरे-धीरे लेख को पूरा करता हूँ …….|
इक टनल जिसका नाम रोहतांग टनल हैं वह सोलांग वैली से आगे ढूंढी नाम की जगह पर बन रही हैं और इसके बारे में कुछ वर्णन में अपने अगले लेख में भी करूँगा | टैक्सियों के रोहतांग जाने के बारे में मेरा भी यही ख्याल हैं….|
Thank you very much for wish my Children…
No doubt the pics are simply fantastic and the description of the post tells about the magnitude of the enjoyment you had. Having maggi at that height and an immensely white environment is inexplicable. i went to rohtange manali in 2004 and since then have not been able to visit it but your pics are super enticing and am now dying to go there. I remember on reaching there me and my friend asked a local native that where is the pass ie rohtang pass and he gave a funny reply he pointed towards two peaks and said “yeh pahari aur wo pahari pass pass hain and isliye yeh rohtang pass hai”
Thanks for showing us the beautiful pictures and a wonderful post!!
लेख को पढ़ने, पसंद करने के लिए और अपने कुछ यादे हमसे बाँटने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद….|
आपके दोस्त ने भी खूब funny जबाब दिया रोहतांग की बारे में “यह पहाड़ी और वो पहाड़ी पास -पास हैं इसलिए यह रोहतांग पास हैं “…..हा हा हा हा….
one again Thanks for lovely comment…..
रितेश जी,
बहुत ही सुन्दर पोस्ट, पढ़ते पढ़ते सचमुच गर्मी में सर्दी का एहसास होने लगा. सारे फ़ोटोज़ एक से बढ़कर एक थे अतः किसी एक को चुनना मेरे लिए तो मुश्किल था.
अंशिका एवं अक्षत को मेरी तथा शिवम् एवं संस्कृति की ओर से जन्मदिन की ढेरों शुभकामनायें और ये दो लाइनें –
“सुख सम्रद्धि के आँगन में तुम करते रहो बसेरा.
स्वर्ण मुकुट पहनाये तुमको २९ मई का नया सवेरा.”
कविता जी….
लेख पर सुन्दर शब्दों के माध्यम से प्रतिक्रिया के शुक्रिया ……|
आपको, शिवम और संस्कृति को अंशिता और अक्षत की ओर से बहुत-बहुत धन्यवाद
और हाँ अंत में लिखी दो खूबसूरत लाइन मुझे बहुत पसंद आई…..|
नमस्कार रितेश् जी
सबसे पहले आपके पास आपकी जिंदगी में इतनी अनोखी बात है की आपके दोनों बच्चो का जनम दिन एक दिन पर है औए वोह है आज. अंशिता और अक्षत को जनम दिन की ढेर सारी बधाई.
रितेश जी क्या बात है. आपके लेख दिन प्रति दिन और भी सुंदर होते जाते है. आपका विवरण को जबरदस्त मेहनत का खिताब देता हूँ. वाह क्या लिखते हो.मजा आ गया . और आपका यह लेख तो घुमाक्कर.कॉम पर सबसे अच्छे लेखो में से एक है. मुझे आपके लेखो में से भी यह सबसे बढ़िया लगा.बहुत मजा आ गया. हाँ मेरे लिए तो काफी लंबा लेख था क्यूंकि मैं हिंदी बहुत धीमी गति से पढता हूँ . इसलिए सुबह सुबह लेख पूरा नहीं पढ़ सका . अभी भी किसी तरह से समय निकाल के यह पढ़ा और कमेन्ट कर रहा हूँ.
और पहाडियों वाले डरावने रास्ते का खूब अच्छे से वर्णन किया है. यह जगह आपने सच कहा स्वर्ग की तरह सुंदर है.यहाँ आना पक्का करना ही होगा. बरफ में खेलने की इच्छा जागृत हो गयी है.
फोटोस एक से बढ़कर एक है .किस्से चुनना बहुत मुश्किल है.आपने ब्रह्मित कर दिया. शाहरुख की दिलवाले दुल्हनिया , सलमान की हम आपके है कौन की आमिर की ३ इडियटस कौनसी सबसे अच्छी फिल्म ऐसा कठिन प्रश्न है .
खैर सबकी अपनी अपनी पसंद होती है . हमें तो “Panoramic view of Rohtang pass and Leh road” यह वाली फोटो सबसे ज्यादा पसंद आई .
आखिर में आपकी कड़ी मेहनत इस पोस्ट पर जालक रही है .
बार बार ऐसी घुमक्कडी करते रहिये और पोस्ट के माध्यम से हमें भी कराईये.
धन्यवाद.
नमस्कार विशाल जी……नमस्कार …!
आपसे और सभी घुमक्कडो से सभी माफ़ी चाहुगा की व्यस्तता के कारण थोड़ा देर से जबाब दे रहा हू ….|
लेख को पढ़ने, उसे पसंद करने, बच्चो को बधाई देने और उस पर प्रतिक्रिया के लिए सबसे पहले आपका हृदय से धन्यवाद ……….!
सच कहा यह एक अनोखी ही बात हैं मेरे दोनों बच्चो क जन्म दिन एक ही दिन हैं और यह बहुत ही कम देखने को मिलता हैं |
मनाली और रोहतांग तो हमारी यादों में अब तक बसा हुआ हैं सच में बहुत ही आकर्षक जगह हैं ..|
सच कहाँ आपने थोड़ा लेख लंबा हो गया हैं और लगभग ५००० शब्दों से ऊपर पर | जब मैं लिखता हू तो तल्लीनता से उस जगह के बारे में अधिक से अधिक विवरण देने की कोशिश रहती हैं |
आपकी पसंद का फोटो “Panoramic view of Rohtang pass and Leh road” मेरे मोबाइल से लिया गया एक फोटो हैं जो मुझे भी बहुत पसंद हैं |
आगे भी मेरी ऐसी ही कोशिश जारी रहेगी की आप लोगो की सामने घुमक्कड़ सम्बन्धी अच्छी से अच्छी जानकारी अपने लेख के माध्यम से प्रस्तुत कर सकू…..|
धन्यवाद
वाह वाह रितेश जी, मैं कल ही मनाली रोहतांग की यात्रा से वापस आया हूँ, आपके पिछले लेखों से लाभान्वित भी हुआ हूँ. पर ये लेख पढ़ कर फिर मैं वापस वहीँ पहुँच गया. क्या सुन्दर विवरण करते हैं आप..शब्द चित्र और रंगरेखा चित्र दोनों ही अति सुन्दर उकेरे हैं आपने. और आपके पुत्र अक्षत व पुत्री अंशिता को मेरी और से जन्मदिन की ढेरों शुभकामनाये व आशीर्वाद.
राजीव जी…..
फिर तो आपने मनाली और रोहतांग में तो बहुत मजे किये होगे…..
लेख को सुन्दर शब्दों के माध्यम से प्रतिक्रिया व्यक्त करने और बच्चो को आशीर्वाद देने के लिए आपका शुक्रिया ……!
धन्यवाद…!
mai apne pariwar ke sath 23 may ko lauta hu manali se. hamlog marhi tak ja sake the. aapki post ne hame rohtang ki bhi darshan kara di. very nice illustrated description, of course birthdayy wish to cute angles.
अरविन्द जी…..
आपकी मनाली यात्रा पर आपको बधाई…..! आपक लोग मरही से आगे क्यों नहीं गए कोई कारण ….?
Thank you very much for liking my post and wishes to children….
Thanks
Hi Ritesh,
The travelogue was not at all big. It was keeping me busy all the time. It was a wonderful article written perfectly.
The way you have explained the entire road length will help a lot of people planning to travel the region.
Thanks for sharing your wonderful experience and a very Happy Birthday to the kids.
Regards
Sumit
Hello Sumit…..,
Thanks for reading and linking post and wishes to children….
b’ful description and awesome photos. my blessings to kids
S.S. _(”)_
Thank you very much for liking and wishes…
रितेश भाई, बहुत ही अच्छा वर्णन और बेहद आकर्षनीयय तस्वीरें से सजा आपका इस लेखन पढ़कर वाकई बहुत मज़ा आ गया।
अक्षत और अंशिता को हार्दिक शुभकामनाएं जन्मदिन के शुभ अवसर पर।
D.L. Ji..
लेख पर सुन्दर प्रतिकिया करने व्यक्त करने और बच्चो बधाई देने के लिए आपका धन्यवाद |
और हाँ घुमक्कड़ के जून माह विशिष्ठ लेखक चुने जाने पर आपको भी बहुत बधाई…..!
Ritesh ji, humlog aage rohtang isiliye nahi ja sake kyoki rasta kafi aage patla dikh raha tha aur vehicles ki lambi line lagi huyi thi . driver ne bataya ki 4 5 ghante upar jane me lag sakte hain. marhi karib 10 baje din me pahuche the. climate bhi kharab hone lagi thi. ek jagah kafi snow thi magar purani fresh nahi, vahi ruke humlog aur karib 1 ghante ke bad laut gaye vahan se. meri chhoti beti ki tabiyat bhi thand se kharab hone lagi thi. after all we enjoyed a lot the chill weather of there .
Beautifully written post with breathtaking photographs. Panorama photos are really fantastic.
Deependra Solanky Ji…..Thanks you very much for reading & liking my post……
Jay shree krishna Ritesh ji. Bahut hi sundar aur Attractive post thi . padhakr bahut hi achha laga. esa laga ki mano me bhibarf ki un vadiyon me pahunch gaya hu.
photo bhi bahut hi sundar the. muje Gadde vala photo bahut pasand aaya jisme ki jharna bhi tha. vese to sare hi photo Awesomeeeeeeeeeeeeeee the.
Aur Safed barf ko dekh kar bahu hi achha laga. bahut hi sundarrrrrrrr post thi. Aur Kya sundar bhasha sheli use ki he aapne. Superbbbbbbbbbbbbbbbbbbbbb and Awesomeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeee
Bahut khoob ritesh ji.
तरुन जी…..
जय श्री कृष्णा ! बहुत दिनों बाद घुमक्कड़ नजर आये …वापिस देखकर अच्छा लगा |
बहुत ही सुन्दर शब्दों के माध्यम से लेख की प्रशंसा करने और उसे मन से पढ़ने के लिए आपका बहुत बहुत आभार …|
मनाली जगह ही कुछ ऐसी हैं, जहाँ फोटो हमेशा शानदार आते हैं…..|
धन्यवाद …..
रितेश जी,
आज इस पोस्ट को शायद चौथी या पांचवी बार पढ़ा, और आश्चर्य की बात है की इस बार भी उतना ही आनंद आया जितना पहली बार पढ़कर आया था, बल्कि उससे भी कहीं ज्यादा। इस बार तो चंडीगढ़ के लिए आरक्षण नहीं मिल पाने की वजह से कार्यक्रम निरस्त हो गया लेकिन अगली गर्मियों में पक्का ………….
मुकेश जी….
आपका इस पोस्ट पर बार-बार आने के लिए और प्रशंसा करने के लिए आपका बार-बार धन्यवाद….| मुझे लगता है ….आपको को रोहतांग की बर्फीली वादियाँ बुला रही हैं…..चलो इस बार नहीं तो अगली बार जरुर जाइए…… आपको को बहुत बढ़िया लगेगा…..
धन्यवाद……
बहुत गलत बात है मुकेश जी, मैं तो ख्वाब देख रहा था कि जून के प्रथम सप्ताह में आपके साथ मनाली होकर आयेंगे पर आपने प्रोग्राम बनाया भी और निरस्त भी कर दिया। देखिये, कुछ हिसाब बन पाता है तो चले चलें साथ साथ !
प्रिय रितेश,
दिल में एक लहर सी उठी है अभी कि इस जून में हम दोनों बुढ्ढे – बुढ़िया मनाली होकर आयें ! नेचुरली, अगर मनाली जाना है तो आपकी इस पुरानी श्रृंखला का पारायण करना सबसे अधिक समझदारी भरा काम मुझे अनुभव हुआ। शायद यह पोस्ट्स पिछले वर्ष उस समय आईं जब मैं घुमक्कड़ से दूर घर की समस्याओं से दो-चार हो रहा था । अतः उस समय तो चूक गया पर अब तो इसका एक – एक अक्षर, शब्द और फोटो ठीक से पढ़ना है, याद करना है और याद न रह सके तो कागज़ पर नोट करके लेजाना है।
आपसे फोन पर / फेस बुक पर भी आवश्यक जानकारी लेने की इच्छा रहेगी। पोस्ट की तारीफ में और क्या कहूं? बहुत मेहनत से और बहुत सलीके से लिखा गया है ताकि हम जैसे लोग इससे लाभान्वित हो सकें।
प्रिय सुशान्त जी…
इस जून मनाली घूमने का आपका यह निर्णय जानकर मुझे अच्छा लगा…वाकई में बहुत अच्छी जगह है..| अब बात रही मेरे और मेरे पोस्ट की तो मैं इस सम्बन्ध में आपकी साहयता के लिये सर्वथा उपलब्ध रहूँगा….|
लेख की तारीफ करने के लिए आपका बहुत-बहुत शुक्रिया….धन्यवाद ….आभार…|
रीतेश….