Beautiful Murudeshwar and Calm Idagunji :- खूबसूरत मुरुडेश्वर और शांत इडागूंजी

May 14, 2012 By:

 मुरुडेश्वर खूबसूरती का प्रतिक ,अध्यात्मक शांती का निवास और मनोरंजन का भण्डार 

मुरुडेश्वर मंदिर में भगवान शिव की मूर्ती

मुरुडेश्वर का चेहरा

 

फोटो का श्रेय :- ऊपर वाली फोटो मंदिर की वेबसाइट के ” download ” section  से ली गयी है .

१७ मार्च २०१२ 

हम कुछ शाम को ५.३० को मुरुडेश्वर पहुँच गए. वैसे तो मुरुडेश्वर में काफी होटल है लेकिन काफी महंगे है.कम से कम होटल ८०० रू से शुरू होते है वह भी एक-दम साधारण सुविधा वाली क्योंकि मुरुडेश्वर एक धार्मिक, पिकनिक तथा अवकाश बिताने वाला गंतव्य है.लेकिन मेरी काफी कोशिश के बाद मुझे इंटरनेट से पंचवटी निवास की जानकारी मिली.

मैंने मुकेश को नंबर दिया १० दिन जाने से पहले और कहा की दो रूम बुक कर दे और उसने किया.

पंचवटी निवास :- बस यह निवास को देखकर हमारी सारी थकन मिट गयी. एकदम समुद्र के सामने उस निवास में चारों ओर शान्ति है. मंदिर के परिसर से केवल ३ मिनट की दूरी पर इस निवास से पूरा समुद्र नज़र आता है. दिन भर ठंडा पवन और रात को समुद्र की लहरों की मधुर आवाज़ कानों में आती है. हमने वहाँ पहुँच कर सबसे पहले, पहली मंजिल पर दो कमरे ले लिए. ऊपर से नज़ारे काफी अच्छे थे. निवास के आगे नारियल के पेडो और फूलों के पौधों का एक बागीचा है जो खूबसूरती पर चार चंद लगा देता है. मेरा यह बिलकुल समुद्र के सामने पहली बार ठहराव था. वाह मजा आ गया. रूम में साधारण सुविधाएँ के साथ साथ टीवी, गरम पानी और सीधे समुद्र के हसीं नज़ारे बिलकुल मुफ्त है.यह सब केवल ४०० रू प्रतिदिन.

आपको श्रीदेवी और अनिल कपूर की फिल्म मिस्टर इंडिया तो याद होगी क्या ???

अनिल कपूर श्रीदेवीजी अपना रूम किराया देते वक्त मार्केटिंग करते है “वाह क्या कमरा है. कमरे के आगे गार्डन. गार्डन के आगे समुंदर.और समुन्दर से आती ठंडी हवा.”

बस ऐसा ही दृश्य यहाँ था , जहां बच्चे भी नहीं थे , तो श्रीदेविजी को यह कमरा बहुत पसंद आता .पक्की बात है.

पंचवटी निवास – मुरुडेश्वर

निवास के आगे बगीचा और बगीचा के आगे समुन्दर. 

सामान रख के मैं पहले तो आजू-बाजू की जगह जैसे की मंदिर, खाने पीने के लिए होटल, दवा की दूकान, मंदिर में दर्शन आरती का वक्त आदि देखने के लिए चला गया.

मैंने महसूस किया की वाह क्या जगह है . ऐसी जगह न तो मैंने कभी देखी है . मैंने न केवल नैसर्गिक सौंदर्य का आभास किया पर आध्यात्मिक शान्ति भी महसूस की.

मैंने केमेरे से फोटो खीचना शुरू किया तो बस दूसरे दिन शाम को ५ बजे तक खिचता ही रहा. उस समय मैंने मंदिर में जाकर दर्शन किये और उसके परिसर में घूमा फिर समुद्र तट पर.

अब मैं आपको कुछ मुरुडेश्वर शहर के बारे में बता दूं.

मुरुडेश्वर :- मुरुडेश्वर एक धार्मिक शहर है जिसकी महिमा मैंने आपको मेरी पिछली पोस्ट मैं बता ही दी थी. यह उत्तर कन्नड जिल्ले में NH – 17 हायवे पर स्थित है और मेंगलोर से १६० किमी की दूरी पर है. वहाँ पर दिल दहलाने वाली खूबसूरती और शान्ति है. अरब सागर के समुद्र तट पर यह पिकनिक और छुटियाँ बिताने का भी स्थल है. यहाँ वाटर स्कूटर , बंजी जम्पिंग , फॅमिली बोटिंग आदि जैसे वाटर स्पोट्स है जो यह जगह को खूबसूरती , मनोरंजन, धर्मं, शान्ति और विश्राम का एक पैकेज बना देता है.

मुरुडेश्वर का विकास आर.एन.शेट्टी ने किया है जो की एक बहुत बड़े व्यापारी है. मंदिर से लेकर मंदिर का परिसर, ट्रस्ट और यहाँ एक होटल भी उन्होंने बनवा दी है. होटल नवीन बीच रिसोर्ट नाम की एक बहुत ही बढ़िया होटल और नवीन बीच रेस्तौरेंट, आर एन शेट्टी गेस्ट हॉउस और धर्मशाला भी उनके नाम है जिसकी वजह से मुरुडेश्वर ज्यादा प्रसिद्ध हुआ है .

मुरुडेश्वर आते वक्त मेरा कहना है की आप अपने केमेरे में कम से कम २०० फोटो की जगह तो कर ही ले क्योंकि मेरे हिसाब से यह भी कम ही होंगी इतनी फोटोजेनिक जगह है.

और इससे ज्यादा मैं मुरुडेश्वर के बारे में बता नहीं सकता हूँ मेरे विवरण में. आइये अब कुछ चित्र देखते है जो मैंने शाम को लिए थे जब मैं सामान्य जानकारी निकालने गया था.

निवास के गेट से निकाली गयी फोटो शाम के वक्त

दुनिया का अबसे बड़ा गोपुरम – २५० फीट  ऊंचा

मुरुडेश्वर मंदिर का राजगोपुरम :- मुरुडेश्वर का राजगोपुरम दुनिया  का सबसे ऊंचा  गोपुरम है. इसकी ऊंचाई २४९ फीट की है. इसकी सबसे ऊंची 20 मंजिल पर हम लिफ्ट की मदद से जा सकते है. यहाँ जाने के १० रू का चार्ज है. मैं लिफ्ट में ऊपर गया और बहुत सारी तस्वीरे ली करीब १५ से २० मं तक. यहाँ से बहुत बढ़िया नज़ारे है समुन्दर के साथ शिवजी की मूर्ती और सूर्य देव . वाह क्या कहना!

आर.एन.शेट्टी का प्लान है की इसके हर एक मंजिल में एक संग्राहलय बनाया जाए ताकि कला के चाहने वालो को यहाँ पर मजा आ जाये

मंदिर गोपुरम

नवीन बीच रेस्तौरेंट :- ठीक मंदिर के परिसर के बाजू में समुन्द्र के थोड़े भीतर सीमेंट के स्तंभ पर स्थित है यह खाने पीने की होटल. बहुत बढ़िया दक्षिण, अच्छा उत्तर भारत का (पंजाबी) और चाइनीस शाकाहारी खाना यहाँ मिलता है वह भी ठीक ठाक दामो में. और यहाँ से समुन्दर के नज़ारे बहुत बढ़िया लगते है. समुद्र की लहरें नीचे होटल के स्तंभों के  साथ टकराती है . जिससे बहुत ही बढ़िया आवाज़ आती  है और खाने साथ साथ समुद्र के संगीत का मजा आता है . ऐसा लगता है की हम समुन्दर के ऊपर बैठ कर खा रहे है. इसी होटल में हमने रात का खाना, सुबह की चाय और नाश्ता, दुपहर का खाना और नाश्ता किया. किसी भी शक के बिना आप यहाँ पर भोजन या नाश्ता कर सकते है.

होटल नवीन बाच रेस्तौरंत 

मुरुडेश्वर मंदिर की शिव मूर्ती :- मुरुडेश्वर की शिव मूर्ती दुनिया में सबसे ऊंची मूर्ती थी पूरे १२३ फीट की. लेकिन जब यह मूर्ती बनी तो नेपाल के काटमांडू शहर में एक और शिव की मूर्ती बनी उसे प्रतियोगिता में जिसकी ऊँचाई १४३ फीट है.इस मूर्ती पर चांदी और स्वर्ण रंग के पैंट मारे गए है जिससे रात को यह बहुत चमकती है.

मुरुडेश्वर मंदिर और शिवजी की मूर्ती

मंदिर के परिसर में मंदिर के मुख्या द्वार के सामने  समुन्दर और मैं 

आइये अब भगवान के दर्शन करते है.

मंदिर के परिसर में श्री गणेशजी की मूर्ती

मंदिर के परिसर में देवी पार्वती  की मूर्ती

यह है मुरुडेश्वर भगवान शिव – मुख्य लिंग

मुरुडेश्वर बीच से लिया गया फोटो

मुरुडेश्वर मंदिर के अप्रिसर में विशाल शिव मूरी के साथ रावण और श्री गणेश

भगवान शिव का भव्य चेहरा 

रात में मुरुडेश्वर में कुछ अलग ही भाव लगता है. जो भी मुरुडेश्वर आये वो रात को जरूर रुके क्योंकि मूर्ती और गोपुरम पर लाइट का मजा कुछ अलग ही है. पूरी रात लाइट जलती है जिससे हम स्वर्ग में आ गए है ऐसा लगता है. भोलेनाथ की मूर्ती पर  चांदी वाले रंग का पैंट मरा है . उस पर रात को उज्जवल और फोकस  वाली लाइट उनके चेहरे पर गिरती है. ऐसा लगता है की भोलेनाथ की मूर्ती ही नहीं स्वयं भोलेनाथं बैठे है. और अभी बोल पड़ेंगे

गोपुरम रात में

भगवान शिव की मूरी रात में

करीब डेढ़ दो घंटे बाद  जानकारी लेकर में पहुंचा पंचवटी निवास जहा मैंने सब को फ्रेश होने के लिए कहा था . मैं भी फ्रेश हो गया और हम निकल पड़े खाना खाने के लिए नवीन बीच रेस्तौरेंट में. स्वादिष्ट पंजाबी भोजन करके मन तृप्त हो गया खासतौर पे मुकेश का परिवार

नवीन बीच रेस्तौरेंट में खाना खाते समय

मुरुडेश्वर मंदिर के परिसर के चित्र :- क्यूंकि मुरुडेश्वर का विवरण ज्यादा चित्रों द्वारा ज्यादा अच्छा लगता है, तो मंदिर के परिसर के चित्र देखिये .

मंदिर के परिसर में भगवद्गीता का दृश्य

भगवद्गीता का रहस्य अर्जुन को समझाते हुए भगवन कृष्ण, चेहरे के भाव तो देखिये 

सूर्यास्त और भगवान शिव राजगोपुरम के ऊपर से 

मुरुडेश्वर मंदिर

मुरुडेश्वर मंदिर का  मुख्य द्वार 

सूर्य देव अपने रथ पर

मुरुडेश्वर मंदिर के परिसर में भगवान शिव , ऋषि भागीरथ,नंदी  और गंगा मैया 

ख़ूबसूरत मुरुडेश्वर

हम खाना खाके घर पर आ गए थे. बहुत थक गए थे. सुबह इडागूंजी जो मुरुडेश्वर से २१ किमी दूर है वहा भी जाना था  रात के कुछ १० बजे थे मेरा और मुकेश के परिवार ने बाहर बालकोनी में एक सोफा पर बैठकर बहुत सारी बाते की.  करीब ११ बजे हम लोग सोने गए तब मुकेश ने कहा की वह सुबह इडागूंजी नहीं आ रहा है क्योंकि दो रातो के ट्रेन के सफर से काफी थक गया है और मुरुडेश्वर में विश्राम करेगा. मैंने कहा ठीक है. मैं सोनाली और आर्या चले जायेंगे. फिर हम सोने चले गए. पलक झपकते ही नींद आ गयी .

१८ मार्च २०१२ 

मुरुडेश्वर से इडागूंजी :- हम सुबह उठ गए ६.०० बजे और स्नान करके  इडागूंजी कीओर चल पड़े, जहा पर महागणपति विराजमान है. इडागूंजी मुरुडेश्वर से २१ किमी दूर उत्तर की ओर  है जो राष्ट्रीय हायवे NH – 17 से ५ किमी दूर है. वहाँ जाने के लिए आपको दो तीन वाहन  बदलने पड़ेंगे या फिर ऑटो रिक्शा पकडनी पड़ेगी. ऑटो रिक्शा आप से ३५० रू चार्ज करेगी . लेकिन ३५० रू में आप जाकर आ सकते हो केवल दो ढाई घंटे में .चलिए मेरे साथ अब इडागूंजी की  ओर . सुबह सुबह ७.०० बजे समुद्र बहुत खूबसूरत लगता है जब सूरज की किरणे थोड़ी कम गर्मी देती है और सामने से पवन आता है . यह एक अलग ही अनुभूति है जिसे आप और केवल आप ही अनुभव आकर सकते हो,  मैं तो क्या कोई भी यह विवरण यह पूरी तरह से बता सकता है.

सुबह सुबह पंचवटी निवास में इदागुंजी जाते वक्त

सुबह ७.०० बजे में पंचवटी निवास हे द्वार से मुरुडेश्वर मंदिर के दर्शन

 

मुरुडेश्वर से इडागूंजी जाने का रास्ता :- हम ऑटो रिक्शा में  मुरुडेश्वर क्रोस ( २ किमी) यानि की हायवे पहुच गए. और वहाँ से निकल पड़े उत्तर की ओर यानी मुंबई की तरफ. करीब १० – १२ किमी तक हम हाईवे पर आगे चलते गए और फिर आता है  इडागूंजी क्रोस. वहाँ से हमें पूर्व की दिशा में जाना होता है जंगल की तरफ . और वाह ! अंदर जंगल में जाते वक्त क्या नज़ारे है . रोड के दोनों तरफ नारियल और सुपारी के जाड के घने जंगल  और बीच बीच में एक बँगला आता है . और देखते ही देखते २ किमी अंदर जाते ही मौसम ठंडा हो गया और हमें ठंडी लगने लगी वोह भी गर्मी के मौसम में. और दूसरी बात की वहाँ इतनी शान्ति थी कि अगर हम रुक जाये हमारी ऑटो बंद करके तो केवल  पक्षियों और जानवर के मधुर गीत सुनाई देते है. यहाँ पर एक फ़ार्म हाऊस होना जरूरी है, ऐसा लगता है. बीच बीच में कुछ छोटी नदियों के प्रवाह भी दिखाई दे रही थी जिससे प्राकृतिक सौंदर्य और भी बढ़ रहा था. वाह क्या जगह है !

कोई भी मुरुडेश्वर जाए तो इडागूंजी जरूर जाए वरना आप कुछ मिस करेंगे यह मेरा दवा है………………….केवल २ घंटे लगते है ऑटो रिक्क्षा में.

इडागूंजी वक्त जाते समय रास्ते पर, पीछे सुपारी के पेड है .

इदागुंजी जाए वक्त रास्ते में , बाजू में नारियल के पेड है.

कर्नाटक के काजू :- सुपारी और नारियल के पेड के साथ साथ वहाँ पर और पूरे NH – 17 पर काजू के पेड भी है. काजू के पेड वहाँ बाहर उगते है. काजू का सबसे ज्यादा उत्पादन कर्नाटक में ही होता है. काजू खाने में बहुत स्वादिष्ट होते है , उन्हें दवाइयों में भी इस्तमाल किया जाता है. और गोवा में फेनी नाम की एक ड्रिंक भी बनाते  है जो शराब जैसा नशा देती है.

यहाँ पर हर एक रेलवे स्टेशन पर आपको काजू के पैकेट बिकते हुए दिखेंगे . यहाँ कर्णाटक की सरकार के कर्मचारी स्वयं हेलिकोप्टर द्वारा हर एक काजू के पेड पर दवाईया छिडकते  है. एक खास कार्यालय है केवल इसी काम के लिए. वाह कितनी  अच्छी पहल और  उपक्रम है . सभी सरकार को ऐसी पहल करनी चाहिए अपने अपने राज्यों के पेडो को बीमारियों और किटाणु से बचने के लिए.

जाते वक्त रास्ते में काजू के पेड 

करीब ८-९ किमी NH -17  से पूर्व की तरफ हम पहुँच गए इडागूंजी  मंदिर . हमें करीब ३५ – ४० मिनिट लगी पहुँचने के लिए .

इडागूंजी महागणपती की छोटी गाथा :- द्वापर युग के अंत में सारे अमर संत बद्रिकाश्रम में पूजा  करते सूत पौर्निका को , कलयुग के दोषों को हटाने के लिए श्री कृष्ण के कहने पर .संत वलखिल्य इस संत के जुंड के प्रमुख थे और उन्होंने यह पूजा शुरू की. लेकिन कोई न कोई बाधा बीच में आ ही रही थी. फिर से उन्होंने  श्री कृष्ण को पुकारा तो श्री नारद मुनि आये संत वलखिल्य के पास. उन्होंने नारदजी का स्वागत किया और सारी कठिनाई बता दी और उनका वास्तविक निवारण का उपचार बताने को कहा.

नारादजी ने श्री विग्नेश्वर की पूजा करने का उपचार बताया.तो फिर संत वलखिल्य ने उचित सहन बताने को कहा . नारदजी उन्हें पश्चिम की ओर श्रवती नदी के करीब एक पवित्र स्थान बताया . कहा की असुरों के संहार के लिए स्वयं तीनो त्रिदेव भी यहाँ तपस्या करते थे. इसी कारण वहाँ पर त्रिदेव ने दो कुंद भी बनाए है. सारे संतो ने पूजा शुरू की तो नारदजी ने स्वयं तीनो त्रिदेव ब्रह्मा ,विष्णु और महेश को आमंत्रित  किया उस पूजा में . फिर तीन त्रिदेवो और सारे देवता सहित सारे संतो ने पूजा की. पहले जगदंबा पार्वती को पूजा की वह अपने पुत्र गणेश को भेजने की आज्ञा दे. और फिर पार्वतीजी के श्री गणेश आये और उस शंका का निवारण किया . इसलिए इस जगह की महिमा बहुत है क्योंकि इस जगह सारे हिंदू त्रिदेव, सारे महान और अमर संत और तैतीस करोड देवताओं ने पूजा की .

इडागूंजी का मंदिर बहुत पुरातन है करीब १५०० साल पुराना और यहा पर रहने की व्यवस्था  भी है. ज्यादा जानकारी के लिए देखो

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शिव परिवार मंदिर के द्वार पर

इदागुंजी महागणपति विग्नेश्वर की मूर्ती स्वयम्भू है और इस जैसी मूर्ती कही भी नहीं है. यह मूर्ती  बड़ी है और खड़ी मुद्रा में है. उनके पैर बहुत छोटे है और उनके सर पर एक  गड्ढा भी है .उनके एक हाथ में कमाल का फूल और एक हाथ में मोदक है. काले पत्थर की यह मूर्ती बड़ी प्यारी लगती है . गणपतिजी के ऐसे दर्शन करके मन बाघबान हो गया . आइये अब कीजिये भगवान विग्नेश्वर महागणपती के दर्शन.

इडागूंजी महागणपति की मूर्ती

 

विग्नेश्वर महागणपती के फोटो का श्रेय :- ऊपर वाली फोटो का श्रेय Sreeni Somakumar को जाता है जिन्होंने अपने ब्लॉग में लगाई है.

http://highspiritedsree.wordpress.com/2009/08/08/murudeshwar-mookambika/

आते वक्त हमने इडागूंजी से कुछ  भूंगडो (नलिया) ( आप लोग इसे क्या नाम देते हो? ) का पैकेट लिए ( आप सोनाली को फोटो में देख सकते है ) यह पीले रंग  गोल गोल पाईप जैसे वेफर होते है. यह हम बचपन में बहुत खाते थे. और यहाँ बहुत मिलते है. हमने इसके बहुत सारे पैकेट लिए और मुकेश के परिवार को भी दिए.

इडागूंजी से आते वक्त सोनाली  को याद आ गया बचपन (मेरी गुजराती भाषा में इसे भूंगडा, मराठी और हिंदी में  इसे नालिया बोलते है.आप लोग इस खाने की वास्तु  को क्या कहते हो  ? )

हम लोग दर्शन करके निकल पड़े मुरुडेश्वर की ओर.हम कुछ ९.०० बजे पहुच चुके थे . मुकेश को फोन लगाया तो वे लोग नाश्ता कर रहे थे नवीन बीच रेस्तौरेंट में. अब मैं यह यात्रा अभी के लिए समाप्त करता हूँ.

मुरुडेश्वर रेलवे स्टशन के चित्र 

कोई असली मुरुडेश्वर की वर्तनी ( spelling ) बताओ . मैं तो कन्फ्युज हो गया हूँ इंटरनेट और रेलवे स्टशन के चक्कर में .इसलिए जो आसान था वो ही लिख दिया . माफ करना……………

मुरुडेश्वर के बारे में अभी विवरण समाप्त नहीं हुआ है . मनोरंजन का भाग और परिवारों  के साथ चित्र  अभी बाकी है ……………अगली पोस्ट में. तब तक लिए

“जय रामजी की”

 

About Vishal Rathod

Vishal Rathod has written 70 posts at Ghumakkar.

I am Vishal Rathod from Mumbai.I am a devotee, that is why I am a Ghumakkar. An Engineer, MBA by education, Sales Professional by profession and a small devotee by heart.I like to travel religious places. From past 3 years I have started travelling every three to four months.I am tired of excess materialism and have shifted my focus on spiritualism. My goal as a ghumakkar in life is to visit as many religious places as possible and do bhakti.The only reason to write in ghumakkar.com is to benefit fellow devotees to perform their pilgrimage smoother and easier.God bless all of you. aum namah shivaya . hare krishna hare ram.

Getaway Jungle Camp

17 Responses to “Beautiful Murudeshwar and Calm Idagunji :- खूबसूरत मुरुडेश्वर और शांत इडागूंजी”


  1. कचरी …….यू पी में लोग इसे कहते हैं और बचपन में हमने भी खाई हैं ……..मुझे लगता है कि जो भवन के उपर लिखी है लास्ट फोटो में वो सही वर्तनी है ………….फोटो में सभी अच्छे हैं पर जो समंदर किनारे रास्ते का फोटो है वो मुझे सबसे अच्छा लगा उसमें हरियाली के साथ घूमने में बडा मजा आया होगा ……………ये पोस्ट वाकई में बढिया थी आगे का इंतजार

  2. Very Very nice post, gazab post.

  3. sarvesh n vashistha says:

    सुंदर चित्र , पूर्ण विवरण , ……लिखते, दिखाते चलो .
    पूर्ण होने के बाद कार्यक्रम बनायेंगे

  4. plz remove previous comment

    महोदय आपके घुमक्कड़ के ब्लॉग पढ़ पढ़कर आप लोगो से ईर्ष्या होने लगी है। मैने पिछले 1 माह पहले ही आपके ब्लॉग में विचरण प्रारंभ किया था पता नही किस लिंक के जरिये मै आपके ब्लॉग पर पहुंचा लेकिन जो होता है अच्छे के लिये ही होता है। मै तो पिछले 4 सालों से आॅफिस से घर और घर से आॅफिस की ही यात्रा कर रहा हूँ। एकदम कोल्हू के बैल की तरह। मुरूडेश्वर का लॉस्ट फोटो बहुत ही अच्छा लगा जो हम सपने में देखेते हैं जब पहली वारिस होती है शहर में। आप लोगों का जीवन धन्य है। हॉ जो आपने पूछा है नलियों टाइप के वेफर्स के बारे में हमारे म.प्र. में उन्हें पुन्गे बोलते हैं और लोग खाते समय इनमें देखते हैं कहीं इनके अंदर छिपकली तो नही है ये बचपन से सीखाया जाता है मुझे याद है 1986 के आस पास 2 रू में एक पुन्गे का बडा पैकेट आता था ।कृपया काजू के पैकेट के क्या दाम थे वहाँ बताने का कष्ट करें ताकि हमें भी पता पड़े कि जहाँ काजू बहुतायत में होता है कितना सस्ता है वहाँ। आपके ब्लॉग में एक ही कमी है about us page जिसमें ये बताया जाये कि कौन है रियल हीरो

  5. JATDEVTA says:

    वाह क्या कमरा है? कमरे के आगे गार्डन। गार्डन के आगे समुंदर और समुन्दर से आती ठंडी हवा।
    भाई जब भी मैं यहाँ जाऊँगा तो इसी में रुकूँगा,
    मुरुडेश्वर का राजगोपुरम दुनिया का सबसे ऊंचा गोपुरम है, इसकी ऊंचाई 249 फीट की है, इसकी सबसे ऊँची 20 मंजिल पर हम जा सकते है लिफ्ट की मदद से, अरे भाई अपुन तो पैदल जायेंगे अगर उन्होंने जाने दिया तो नहीं तो जाना मना।
    रात में मुरुडेश्वर में कुछ अलग ही भाव लगता है. जो भी मुरुडेश्वर आये वोह रात को जरूर रुके, अपुन दो दिन रुकने वाले है।
    पीछे सुपारी के पेड किसकी सुपारी ली थी?
    इस जगह सारे हिंदू त्रिदेव, सारे महान और अमर संत और तैतीस करोड देवताओं ने पूजा की, अब आने वाले समय में यह संख्या बदलने वाली जब इसमें एक जाट देवता भी जुड जायेंगे हा हा हा
    भूंगडो ( नलिया) को हमारे यहाँ फ़ूकनी कहते है।

    देख भाई सच्ची बात आज का लेख मुझे आप के आज तक के सभी लेखों में सबसे अच्छा लगा, फ़ोटो तो गजब हओ यार, क्या कोई दुकान वाला भी ऐसे एंगल से ले पायेगा, मैं जब भी यहाँ गया तो कम से कम दो दिन तो ठहर कर ही आऊँगा।

  6. arvind kumar says:

    very nice, pics as well as short description, I am on this site since last 10 days and trying to understand for posing also. aap logon se sikh raha hu.

  7. Mukesh Bhalse says:

    विशाल,
    जितनी ख़ूबसूरत यह जगह है उससे कहीं अधिक इसे आपने अपने लेख एवं छायाचित्रों से बना दिया है. मुरुदेश्वर सचमुच फोटोग्राफी के लिए जन्नत है. आज आपकी यह पोस्ट पढ़कर इस जगह से जुडी मेरी सारी यादें तरोताजा हो गईं. बहुत सुन्दरता से लिखी गई पोस्ट और फ़ोटोज़ भी मनमोहक.

    नवीन बीच रिसोर्ट होटल का साउथ इंडियन खाना तो सस्ता एवं लज़ीज़ था लेकिन नोर्थ इंडियन के मामले में यहाँ खाना एक समझौता ही है, कीमतें बहुत अधीक और स्वाद का कहीं अता पता नहीं. एक बात जरूर है की साउथ इंडिया में जाकर वहीँ का खाना खाने में ही समझदारी होती है, वहां जाकर नोर्थ इंडियन खाने की लालसा एक मृग मरीचिका ही साबित होती है.

    और सोनाली की उँगलियों में जो दिखाई दे रहा है उसे हमारे इधर MP में शहरी क्षेत्र में फिंगर और गावों में “पोंगा पंडित” कहा जाता है.

    अगली कड़ी के इंतज़ार में.

  8. Monty says:

    हरियाणा में इसे फूंकनी कहते है..हमने भी खूब खाई है…

    काफी अच्छा लिखा है…

  9. Ritesh Gupta says:

    विशाल जी….
    बहुत बढ़िया और उत्तम वर्णन …..आपने हिंदी भाषा में सुन्दर शब्दों से अपने पूर्ण भाव लिखा हैं, जो हमें लेख में नजर आया | कही-कही शब्दों में मात्राओं में गडबड़ी हो गयी हैं |
    मुरुदेश्वर और इडागूंजी बहुत अच्छे लगे , फोटो तो अतिसुन्दर हैं …..|
    लेख के माध्यम से दक्षिण के स्थानों से हमारा परिचय कराने के लिए धन्यवाद….|

  10. venkatt says:

    Excellent photos of Murdeshwar, especially the ones at night. It seems u had a real good time. How good are the facilities at Panchawati residence? Is it safe enough for families?

  11. Manish Kumar says:

    शानदार चित्र विशाल और अच्छा विवरण। बेहद रमणीक लगा समुद्र के किनारे स्थित ये मंदिर।
    आपका हिंदी प्रेम देख कर अभिभूत हूँ कि आप मेहनत कर रहे हैं हिंदी में लिखने की। पर हिंदी की गलतियाँ आँखों में खटकती हैं। अंग्रेजी की तरह हिंदी में स्पेल चेक नहीं होने की वजह से ये परेशानी और बढ़ जाती है। जैसा पहले भी लिखा है आप अंग्रेजी में इससे बेहतर लिखते हैं।

  12. Nandan Jha says:

    विशाल, बहुत विस्तार से बताया आपने, और खासकर से मंदिर के आसपास की जानकारी और पंचवटी निवास की बहुमूल्य सूचना | काफी कुछ नया पता चला मुरुदेश्वर के बारे में |

    काजू के बारे में सुना है की ये एक ऐसा फल है जिसमे किसी प्रकार का कोई पोषक मूल्य नहीं है |

    पर एक शिकायत है, बहुत ग़लतियाँ हैं इस पोस्ट में , उस कारण से बार बार विघ्न पैदा होता है पढने के दौरान | आपकी हिंदी में लिखने की कोशिश सर आँखों पर , लेकिन शायद थोड़ी और मेहनत से ये कमी आसानी से दूर हो सकती है | मैं खुद अच्छे से नहीं लिख पाता हूँ इसलिए अभी केवल कमेंट्स में ही हिंदी लिखता हूँ , आशा है मेरे सुझाव के बारे में सोचेंगे |

  13. Thanks to all of you for your encouraging words and appreciation through your comments .

    @ Venkatt :- Facilities are OK at Panchwati . A double bed room with a attached bath room and a TV. AC rooms are not available at the moment. But the best part of the Niwas was its location just in front of sea ,cool breeze blows through out the day and 3 mins away from main temple. And yaa it is safe for families, no problem at all.

    @ Manish :- Yaa I understood that even after putting that much effort and double time I am not able to rectify the spelling mistakes in Hindi without any help. but bear me for this series . Next one I am going to write in English which is my strength . And Thanks for suggestion.

    @ Nandan :- Yaa Nandanjee got it . you are absolutely right . Last two posts were corrected by Sandeep Jatdevta. And I didn’t get time in this one. Next post will be corrected and next series will be in English.

  14. ashok sharma says:

    very beautiful place,good write up,good pics.

  15. बहुत सुन्दर स्थान , सुंदर फोटो और उससे भी सुंदर आपका यात्रा विवरण. पढकर मजा आ गया.



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