SRIKHAND MAHADEV श्रीखण्ड महादेव बाइक से यात्रा की तैयारी |
SHRIKHAND MAHADEV YATRA श्रीखण्ड महादेव यात्रा की तैयारी हेतू कुछ सुझाव दिये गये है। हम इस यात्रा में कुल चार महारथी गये थे, उनके बारे में संक्षेप में बताया गया है।
(1) नितिन जाट, (2) नीरज जाट, (3) विपिन गौड, (4) संदीप पवाँर,
(1) NITIN HUDDA नितिन जाट,
सबसे पहले उस 28 वर्ष के, वजन 75 किलो के महारथी के बारे में, जिसने इस यात्रा के बारे में जमकर यानि सबसे ज्यादा तैयारी की थी। लेकिन सारी तैयारी उसकी आशिकी भरी लापरवाही में धरी की धरी रह गयी। नितिन ने 10 दिन पहले ही जाने की हाँ कर दी थी जिस कारण उसने अपने कार्यालय से घर तक आना-जाना दोनों को मिलाकर आठ-नौ किलोमीटर के आसपास है, पैदल ही शुरु कर दिया था, ताकि उसे इस कठिन यात्रा में कोई परेशानी न आये। सबसे बढिया तैयारी के बाद भी बंदा, ये शानदार यात्रा पूरी नहीं कर पाया, क्योंकि उसने पहाड में पैदल पगडन्डी पर चलते समय घोर लापरवाही दिखाई थी, जहाँ सावधानी से चलते हुए भी इन्सान के गिरने का भय रहता है, वहाँ पर नितिन मोबाइल से बात करते हुए जा रहा था। जिसका खामियाजा वो तीन बार गिर कर ऐसा भुगत चुका था जिससे कि वो जॉव से आगे मात्र दस किमी जाने में ही और आगे पैदल चलने लायक नहीं बचा था। तीन बार पहाड में फ़िसलने व गिरने से उसके घुटने व कुल्हे में जबरदस्त चोट आयी थी। हम चारों में सबसे हंसमुख मस्त बंदा था। बाइक व कार का तगडा चालक है। नितिन जैसे वाहन चालक मैंने कम ही देखे है। बस में यात्रा करने से यथासंम्भव बचता है। सबसे मजबूत पक्ष कोई नशा नहीं करता है। इस यात्रा का इकलौता असफ़ल यात्री व शादी शुदा व दो बच्चों का पिता।
(2) NEERAJ JAAT नीरज जाट,
अब बारी है अपने 25 वर्ष के, वजन 50 किलो के नीरज जाट जी की, इनके बारे में मेरी निजी राय है कि नीरज में घूमने का दीवाना पन जुनून की तरह (मेरी तरह) जरुर है, लेकिन उसमें अभी तक साहसी घुमक्कड वाली बात की थोडी सी कमी दिखाई दी। नीरज ने सबको बताया कि ये यात्रा बेहद ही कठिन है यह सावधानी बरतनी है वो बरतनी रखनी है, आदि-आदि, लेकिन उन सब बातों में से शायद किसी पर भी स्वयं अमल नहीं किया होगा, तभी तो इस कठिन यात्रा पर इनके हाथ-पाँव फ़ूल गये थे। अगर नीरज ने अपनी बतायी हुई आधी तैयारी खुद भी कर ली होती तो उसे कोई समस्या नहीं आती, खैर देर आये दुरुस्त आये अब भी अगर उसने अपनी शारीरिक क्षमता नहीं बढायी तो आगे आने वाले समय में उसका शामली एक्सप्रेस बनना तय है। शामली एक्सप्रेस हमारे यहाँ उस ट्रेन को कहा जाता है जिसको रेलवे वाले सबसे बाद में जाने की झंडी दिखाते है। चारों में नितिन के बाद दूसरे नम्बर पर हंसमुख बंदा नीरज है। बाइक चलानी नहीं आती है। अगर आती भी है तो नाम मात्र की। बसों व ट्रेन में यात्रा करने का शौकीन है। नहाने से लेकर पेट साफ़ करने तक में बेहद ही लापरवाह है। लेकिन इतना होते हुए भी इस यात्रा को किसी भक्त के उकसाने पर ही सही, पूरी करने पर, इसके हौसले की दाद देनी पडॆगी। बंदा उतराई पर बहुत तेज उतरता है समझाया भी कि उतराई पर तेज उतरना खतरनाक होता है, जिसका खामियाजा एक बार पहाड से उतराई में फिसल कर देख भी चुका है। लेकिन फिर भी मानना पडेगा कि जीवट वाला बन्दा है, सबसे मजबूत पक्ष कोई नशा नहीं करता है। अभी तक शादी नही हुई है।
(3) VIPIN GAUR विपिन गौड,
हम चारों में ये बंदा तीनों मस्तमौला जाटों के लिये अन्जान था, उम्र मात्र 27 वर्ष, वजन 55 किलो का प्राणी हमें पहली बार मिला था। उससे पहले इसने मेरा ब्लॉग देख कर मुझे फ़ोन किया था कि क्या मैं भी चल सकता हूँ? वैसे केदारनाथ के पास का रहने वाला है यानि जन्मजात पहाडी जिस कारण पहाड पर चलने की उसकी आदत तो जरुर ही रही होगी, वैसे उसका ब्लॉग देख कर लगता है कि बंदा घूमता भी जरुर है खासकर पैदल यात्राएँ। बंदे की चढाई पर तो शाबासी देनी पडेगी कि कही हिम्मत नहीं हारी। चढाई में मेरा जमकर साथ दिया। पानी की कमी से इस बंदे को बेहाल होते हुए भी देखा है। हम चारों में से सबसे सीधा इन्सान कोई था, तो सिर्फ़ ये विपिन गौड। बंदा कार्य तो किसी ट्रेवल कम्पनी में करता है लेकिन मुख्य स्थलों के अलावा ज्यादा जानकारी नहीं रखता है। इसे भी कोई खास बाइक चलानी नहीं आती है। बस में यात्रा करने को मजबूरी मानता है। सबसे मजबूत पक्ष कोई नशा नहीं करता है। इन्होंने अभी तक यहाँ पर एक पोस्ट भी लिखी है और उम्मीद है कि आगे भी लिखता रहेगा। इन्हे भी अभी तक कोई कन्या शादी के लिये नहीं मिली है।
(4) SANDEEP PANWAR संदीप पवाँर, JATDEVTA
इन चारों में से उम्र में सबसे बडे 37 साल, वजन भी सबसे ज्यादा 78 किलो, लेकिन मैं मानता हूँ कि उम्र व वजन से ज्यादा, इन्सान की हिम्मत व हौसला, साथ ही अनुभव होना चाहिए जो ऊपर तीनों बंदों में कुछ कम दिखाई दिया था या कहो कि थोडे से अनुभवहीन थे। जो बंदा प्रतिदिन 30 किमी साईकिल चलाता हो पैदल व सीढी चढने का कोई मौका ना चूकता हो। इन चारों में ये बन्दा ही ऐसा था जिसे ना पानी की चिंता और ना खाने की चिंता जो जब मिल जाये तब ठीक, ना मिले तो ठीक। एक मस्त इन्सान जिसे कोई चिंता नहीं, कैसे भी हालात हो कभी कोई परेशानी नहीं मानता। बसों में लगातार 24-25 घंटे, कार से कई-कई दिन व रेल में लगातार 70 घण्टे तक की कई यात्राएँ कर के देख ली है अब तो बाइक से अच्छा कुछ नहीं लगता है कार में भी वो आनन्द कहाँ मिलता है? सुबह जल्दी चलने व शाम को जल्दी रुकने में विश्वास करता है। इन चारों में चढाई सबसे आगे रहने वाला (तैयारी करने के कारण) वो बात अलग है कि उतराई में सावधानी बरतने के कारण कुछ धीमा उतरता है, नहीं तो तीनों ने चढाई व उतराई पर रफ़तार देख ही ली है। खासकर थाचडू से ड्न्डाधार की उतराई पर। शादी शुदा व दो बच्चों का पिता।
सावधान
सावधान
ऐसी कठिन सी मानी जाने वाली SHRIKHAND MAHADEV YATRA पैदल यात्राओं के लिये कुछ खास तैयारी करनी होती है जो ज्यादा नहीं है। कुछ सावधानियाँ सबके लिये।
हिमालय में 10000 फ़ुट से ज्यादा ऊँचाई वाली जगहों (वैसे इस यात्रा में हमें 18500 फ़ुट तक की ऊँचाई पार करनी पडी थी) पर सबसे बडी समस्या साँस फ़ूलने की है जो ऐसी जगह पर आती है। ये तो होना भी है क्योंकि पहाडों पर चढते समय हमारा शरीर ज्यादा मात्रा में आक्सीजन की खपत करता है। जिस कारण हमें साँस लेने में परेशानी महसूस होती है। उन लोगों को बहुत समस्या आती है जो साल में एक-दो बार ही बिना कोई तैयारी के पहाडी पैदल यात्रा पर निकलते है। ऐसी यात्रा पर आने से पहले कम से कम 10-12 दिन पहले से अपने शरीर को ऐसी यात्रा के लायक बनाने की तैयारी जरुर कर देनी चाहिए। जिसके लिये एक घन्टा सुबह व एक घन्टा शाम को तेज पैदल चाल तो हर हालात में करनी ही चाहिए। यदि आप साइकिल चला सकते हो तो अपने कार्यालय आना जाना इसी पर शुरु कर सकते है जिससे आपके पैर पैदल यात्रा के लिये तैयार हो सके, व साँस लेने में भी परेशानी का पता लग सके। घर या कार्यालय में लिफ़्ट की जगह सीढियाँ चढनी व उतरनी शुरु कर देनी चाहिए। अपने साथ मात्र दो जोडी कपडे ले जाने बहुत रहते है, हाँ एक गर्म कपडा जैसे चददर/हल्का कम्बल जरुर रखना चाहिए। कम से कम वजन लेकर जाना चाहिए, पहाडों में A.T.M. के भरोसे ज्यादा नहीं रहना चाहिए, कुछ दो-तीन हजार तो नकद नारायण भी जेब में रहना ही चाहिए। बारिश से बचने का प्रबन्ध कर ले। बुखार व दर्द की दवाएँ ले जाना ना भूले। कैमरा व अलग से बैट्री। दाँत साफ़ व दाडी बनाने का कम से कम सामान रखना चाहिए। बाइक के लिये पेंचर का जरूरी सामान (हमारे पास ना था) या टयूब लेस टायर हो, एक प्लग, चैन साकेट अलग से रख ले।
शौच आदि करने के लिये सुबह मुँह अंधेरे जाना होगा, नहीं तो दिन निकलने पर खुले में समस्या/शर्म आयेगी। सारी यात्रा 70 किमी की पैदल ही करनी होगी, कोई सहायता (गधा/खच्चर) नहीं मिलेगी, ऐसी जगह लोगों को अपना खुद का वजन भारी पड रहा होता है, अत: दूसरे किसी और साथी से मदद की उम्मीद ना करे। रात को रुकने की कोई परेशानी नहीं, प्रत्येक तीन-चार किमी बाद टैंट आसानी से मिल जाते है अगर भीड ज्यादा हो तो सिर्फ़ पार्वती बाग में (सीमित टैंट होने के कारण) दिक्कत हो सकती है, इस मार्ग पर अंधेरे में यात्रा करने में कोई खास समस्या नहीं है, हिमाचल के स्थानीय बंदे तो चाँदनी रात में ही ज्यादातर यात्रा करते है। बारिश से बचने का उपाय जरुरी कर ले, डन्डा अपनी इच्छानुसार ले, बिना डन्डे भी कोई खास परेशानी नहीं, वैसे बर्फ़ में इसकी जरुरत बडे काम आती है। पीने का पानी जगह-जगह मिल जाता है व नैन सरोवर से आगे (असली फ़ाडू यात्रा) बर्फ़ के भरोसे पर ही काम चलाना पडता है। आखिरी दिन दर्शन वाले दिन आप पूरे दिन सुबह पार्वती बाग से खाकर शाम तक बिना खाये रह सकते है तो कोई परेशानी नहीं आयेगी, नहीं तो दिन में खाने का सामान लेकर जाये। आप इस यात्रा को जॉव से सुबह जल्द शुरु कर शाम तक आराम से काली कुंड से आगे भीम डवार के आसपास तक जाने की कोशिश कर सकते हो दूरी मात्र 20-25 किमी है। अगले दिन सुबह जल्दी चलकर दर्शन कर शाम तक भीम डवार/काली कुंड तक आ सकते हो, जिसके बाद अगली सुबह जॉव तक आना व अपने घर की ओर जाया जा सकता है। नहीं तो आप के पास जॉव आने के बाद यदि दो घन्टे का भी समय है तो आगे की पैदल यात्रा पर निकल जाना चाहिए ताकि जितना सफ़र आप काट सको उतना अच्छा रहेगा। दिल्ली>अम्बाला>शिमला>नारकंडा>रामपुर से दो किमी पहले वाला पुल से सतलुज पार करे>बागीपुल तक बस या हो सकता है बागीपुल से 6 किमी आगे जॉव तक बस मिल जाये, जॉव से श्रीखण्ड महादेव आना-जाना दोनों ओर की दूरी मिलाकर मात्र 70 किमी होती है।
अगले लेख से यह धमाकेदार यादगार यात्रा पढने के लिये अपनी-अपनी कमर कस ले, बीते वर्ष आपने मेरी लेह-लद्धाख यात्रा देखी थी, इस वर्ष यह वैसी ही बाइक वाली रोमांचक यात्रा रहेगी।


















बहुत बढिया शुरूआत। बडी खुशी की बात कि मेरा नाम राशि भी साथ गया था। देखते हैं आगे क्या होता है।
अब पढा है सारा वर्णन। अपनी बडाई तो ऐसे करते हैं जैसे एक सन्दीप को ही ठेका दिया है ऊपर वाले ने बडाई करने का। अपनी बडाई कम से कम करनी चाहिये।
तो बाकी घुमक्कडों, अब शुरू होती है हिमालय के बर्फीले इलाकों में समुद्र तल से 18000 फीट की ऊंचाई पर भागमभाग। हिमालय पर ट्रेकिंग का पहला नियम यही है कि कभी भी तेज चलने का कम्पटीशन नहीं करना चाहिये, लेकिन लगता है कि हमारे भाई ने इसे अपने जीवन मरण का प्रश्न बना लिया है।
जिस नीरज की बात आप कर रहे हो भाई, वो अकेला ही निकल जाता है, जबकि आपको साथ की जरुरत पडती है। उसके जज्बे को चुनौती मत देना आज के बाद। ठीक है कि बाइक नहीं चलाता, लद्दाख नहीं गया, खाना टाइम पर चाहिये, नहाना धोना जरूरी नहीं मानता लेकिन ये बातें उसके साहस में आडे नहीं आतीं।
नीरज जाट उस बला का नाम है जिसे बारुद कहते है अगर जलाओ यानि भडकाओ तो बारुद, नहीं तो राख है। बिल्कुल पेट्रोल की तरह जब तक माचिस की तीली ना दिखाओ तब तक भडकता ही नहीं है, लेकिन एक बार भडका दो तो फ़िर आता है मेरा भाई असली रंग में, याद है मुझे श्रीखण्ड की शिखर से वापसी जहाँ विपिन बेहाल था और नीरज मस्त सांड की तरह विजेता बन दौडा आया था। घुमक्कडी जिन्दाबाद।
मजा आ गया संदीप जी , अब देखना ये है कि आप चारो की जोडी मिलकर क्या रंग जमाती है । वैसे एक बडे का साथ होना जरूरी है और कुंवारो को संभालने के लिये एक शादीशुदा का साथ होना जरूरी है क्योंकि तजुर्बा उम्र के साथ ही आता है
क्या कहा????? कुंवारों के साथ एक अनुभवी शादीशुदा होना चाहिये। भाई, हम किसी डिस्को बार में नहीं गये थे। हम गये थे दुर्गम पहाडों में अपने हाड तुडवाने। वहां कुंवारे और शादीशुदा के कोई मायने नहीं होते।
लगता है कि तुमने कथा ध्यान से नहीं पढी। हमारे ग्रुप दो शादीशुदा थे- एक असफल हुआ और दूसरा सफल जबकि दो कुंवारे भी थे- दोनों सफल। तो मतलब ये है कि शादी के बाद सफलता का प्रतिशत आधा रह जाता है जबकि कुंवारे फुल फुल होते हैं।
नीरज ने मेरी पोस्ट पर मना करने पर भी कमैन्ट कर दिया इसका तो सीधा सा मतलब यही समझ आता है कि शायद नीरज ने हमारी बातों पर गौर किया है, चलो उम्मीद करते है कि नीरज का लेख जल्द ही यहाँ दिखाई दे।
Best wishes for a fabulous trip Sandeep and Gang. I can already imagine a thriller unfolding soon. :-)
जय भोले नाथ की…..बहुत अच्छी शुरुआत संदीप भाई……
चारो यात्रियों का परिचय भी क्या कमाल का दिया हैं ……
अब देखते हैं कि अगले लेख क्या धमाकेदार मिलने वाला हैं …………?
रीतेश………….
Jai ho Jaat devta ki.
Wah ek aur shrankhla, mazza aa jayega.
Jaldi likhiye intezaar rahega.
Sandeep ji, Like a good starter before food.
आपका धमाकेदार यादगार यात्रा के बारे में पढने के लिये मैंने कमर कस लिया….अब बारी आपकी है
आपकी इस यात्रा को मैं आप व नीरज के ब्लाग पर पढ़ चुका हुं।
यह यात्रा साहसिक व रोमांचक थी, जिसका अवसर जीवन में शायद एक ही बार मिलता है, आपके पूरे दल को बधाई व शुभकामनाऐं ।
माना कि बस तथा रेल द्वारा समय व पैसै की बचत होती है, परन्तु सब जगह नहीं पहुंच सकते। मोटर साइकिल से तन,धन का नुकसान तो है, पर मन की इच्छायें पूरी होती है।
यह ठीक है कि नीरज मन की करता है, परन्तु उसकी उर्जा इससे ही है।
क्या ही अच्छा हो यदि नीरज जिद छोडकर कभी—कभी मोटर साइकिल भी प्रयोग करे।
Namaskar Sandeep jee ,
Asli Ghumakkar to aap hai , hum to sirf tourist hai……………
Very beautiful start, majaa aa gaya. All the four are great personalities……………..
Let see aage kya hota hai…………………….
Waiting eagerly……..
संदीप भाई,
थोड़ा विलम्ब से प्रतिक्रिया प्रेषित करने के लिए क्षमा चाहता हूँ. बड़े ही रोचक ढंग से परिचय करवाया है आपने आपका तथा अपने हमसफ़रों का. आगे देखना है की यह चौकड़ी क्या धमाल करती है इस साहसिक यात्रा में.
धन्यवाद.
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जाटदेवता सन्दीपभाई,सप्रेम वन्दे!
तय्यारी जोरदार है! आगे पढके फिर लिखती हू!