Parli Vaidyanath / परली वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग दर्शन

February 12, 2012 By:

 

पूर्वोत्तरे प्रज्वलिकानिधाने सदा वसंतम गिरिजासमेतम.
सुरासुराराधितपाद्पदमम श्रीवैद्यनाथं तमहं नमामि.
(अध्याय २८, द्वादश्ज्योतिर्लिन्ग्स्तोत्रम, कोटिरुद्रसंहिता, शिवमहापुराण) 

 

                                                                                                    Shri Parli Vaidyanath Jyotirling Namami   

औंढा नागनाथ ज्योतिर्लिंग के दर्शन, पूजन तथा अभिषेक के बाद अब हमारा अगला पड़ाव था परली वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग जो की औंढा नागनाथ से लगभग 130 किलोमीटर की दुरी पर है, औंढा बस स्टैंड से सीधे परली के लिए महाराष्ट्र परिवहन की बसें उपलब्ध हैं, या फिर औंढा से परभणी और परभणी से परली पहुंचा जा सकता है, औंढा से हमें परली के लिए सीधी बस मिल गई थी अतः शाम करीब सात बजे हम परली पहुँच गए, परली बस स्टॉप से ऑटो रिक्शा में सवार होकर हम श्री परली वैद्यनाथ मंदिर पहुँच गए, परली में एक बड़ी अच्छी बात यह है की परली वैद्यनाथ मंदिर ट्रस्ट द्वारा संचालित यात्री निवास (धर्मशाला) मंदिर के एकदम करीब स्थित है, यानी मंदिर की सीढियों से एकदम लगा हुआ.

परली वैजनाथ मंदिर: एक विहंगम द्रश्य

हम जब भी धार्मिक यात्रा पर जाते हैं तो हमारी हमेशा यही कोशिश रहती है की विश्राम स्थल मंदिर के जितना हो सके करीब हो, ताकि अपने प्रवास के दौरान हमारा जितनी बार मन करे उतनी बार हम भगवान् के दर्शन कर पायें, साथ ही साथ मन में यह संतुष्टि भी होती है की हम मंदिर के करीब रह रहे हैं, और हम मंदिर की सारी गतिविधियाँ देख पाते हैं.
यात्री निवास में व्यवस्था भी अच्छी थी, 300 रु. में डबल बेड, अटेच्ड लेट बाथ, गरम पानी के अलावा एल सी डी टीवी आदि, कुल मिला कर ठीक ठाक व्यवस्था थी, रूम में चेक इन करने के बाद थोडा सा आराम करके हम भोजन की तलाश में निकल गए, हम खाने के लिए ज्यादा दुर जाने के मूड में नहीं थे अतः मंदिर के पास ही बने एक घर नुमा होटल को चुन लिया, खाना ज्यादा अच्छा नहीं था लेकिन भूखे होने की वजह से खा ही लिया. वापस अपने कमरे पर आकर कुछ देर विश्राम करने के बाद रात करीब साढ़े आठ बजे हम प्रथम दर्शन के लिए मंदिर में प्रवेश कर गए. रात दस बजे की शयन आरती में शामिल होने के लिए हम कुछ देर मंदिर में ही रुके, रात का वक्त था और दर्शनार्थियों की संख्या भी बहुत कम थी अतः हम आसानी से गर्भगृह के अन्दर ज्योतिर्लिंग के पास बैठकर ॐ नमः शिवाय जाप करने लगे, कुछ ही देर में आरती शुरू हो गई, आरती के बाद हम यात्री निवास के अपने कमरे में जा कर सो गए.  ये तो था हमारा परली वैद्यनाथ मंदिर में प्रवेश तक का विवरण, अब मैं आपको हमेशा की तरह जानकारी देना चाहूँगा इस ज्योतिर्लिंग एवं मंदिर के बारे में.

परली वैद्यनाथ- एक परिचय:
महाराष्ट्र राज्य के मराठवाडा क्षेत्र के बीड़ जिले में स्थित है धार्मिक नगर परली वैजनाथ (परली वैद्यनाथ), और यहाँ पर स्थित है भगवान शिव का सुप्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग मंदिर, जिसमें विराजते हैं भगवान् वैद्यनाथ जो की शिवपुराण के कोटिरुद्रसंहिता के २८ वें अध्याय के  अंतर्गत वर्णित द्वादशज्योतिर्लिंगस्तोत्रं के अनुसार भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक हैं. हालाँकि जैसे मैंने अपनी पिछली पोस्ट में बताया की इस ज्योतिर्लिंग के स्थान के बारे में भी लोगों के बिच मतभेद है तथा बहुत से लोग मानते हैं की यह ज्योतिर्लिंग झारखण्ड के देवघर में स्थित बैद्यनाथ धाम मंदिर में स्थित है, फिर भी भक्तों का एक बड़ा वर्ग मानता है की बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग परली में ही है.
भारत के नक़्शे पर कन्याकुमारी से उज्जैन के बीच अगर एक मध्य रेखा खिंची जाय तो उस रेखा पर आपको परली गाँव दिखाई देगा, यह गाँव मेरु पर्वत अथवा नागनारायण पहाड़ की एक ढलान पर बसा है. ब्रम्हा, वेणु और सरस्वती नदियों के आसपास बसा परली एक प्राचीन गाँव है तथा यहाँ पर विद्युत् निर्माण का बहुत बड़ा थर्मल पॉवर स्टेशन है. गाँव के आसपास का क्षेत्र पुराण कालीन घटनाओं का साक्षी है अतः इस गाँव को विशेष महत्व प्राप्त हुआ है.

पौराणिक किवदंती:
देव दानवों द्वारा किये गए अमृत मंथन से चौदह रत्न निकले थे, उनमें धन्वन्तरी और अमृत दो रत्न थे. अमृत को प्राप्त करने दानव दौड़े तब श्री विष्णु ने अमृत के साथ धन्वन्तरी को एक शिवलिंग में छुपा दिया था. दानवों ने जैसे ही उस शिवलिंग को छूने की कोशिश की वैसे ही शिवलिंग में से ज्वालायें निकलने लगी, लेकिन जब उसे शिवभक्तों ने छुआ तो उसमें से अमृतधारा निकलने लगी, ऐसा माना जाता है की परली वैद्यनाथ वही शिवलिंग है, अमृत युक्त होने के कारण ही इसे वैद्यनाथ (स्वास्थ्य का देवता ) कहा जाता है.

श्री वैद्यनाथ मंदिर शिल्प:
माना जाता है की वैद्यनाथ मंदिर लगभग 2000 वर्ष पुराना है, तथा इस मंदिर के निर्माण कार्य को पूरा होने में 18 वर्ष लगे थे, वर्त्तमान मंदिर का जीर्णोद्धार इंदौर की शिवभक्त महारानी देवी अहिल्याबाई होलकर ने अठारहवीं सदी में करवाया था. अहिल्या देवी को यह तीर्थ स्थान बहुत प्रिय था.

यह भव्य तथा सुन्दर मंदिर मेरु पर्वत की ढलान पर पत्थरों से बना है तथा गाँव की सतह से करीब अस्सी फीट की उंचाई पर है. इस मंदिर तक पहुँचने के लिए तीन दिशाएं तथा प्रवेश के तीन द्वार हैं. यह मंदिर गाँव के बाहरी इलाके में स्थित है तथा बस स्टैंड एवं रेलवे स्टेशन से चार किलोमीटर की दुरी पर है. इस मंदिर के शिल्प के विषय में एक रोचक कहानी है, महारानी अहिल्या बाई होलकर जिन्होंने इस मंदिर का जीर्णोद्धार करवाया, उन्हें इस मंदिर के निर्माण के लिए अपनी पसंद का पत्थर प्राप्त करने में बड़ी कठिनाई हो रही थी, अंततः उन्हें अपने स्वप्न में उस पत्थर की जानकारी मिली तथा उन्हें आश्चर्य हुआ की जिस पत्थर के लिए परेशान हो रही थी वह परली नगर के समीप ही स्थित त्रिशाला देवी पर्वत पर उपलब्ध है.
मंदिर के चारों ओर मजबूत दीवारें हैं , मंदिर परिसर के अन्दर विशाल बरामदा तथा सभामंडप है यह सभामंडप साग की मजबूत लकड़ी से निर्मित है तथा यह बिना किसी सहारे के खड़ा है, मंदिर के बहार ऊँचा दीप स्तम्भ है तथा दीपस्तंभ से ही लगी हुई है पुण्यश्लोक देवी अहिल्याबाई की नयनाभिराम प्रतिमा. मंदिर के महाद्वार के पास एक मीनार है, जिसे प्राची या गवाक्ष कहते हैं, इनकी दिशा साधना के कारण मंदिर में चैत्र और आश्विन माह में एक विशेष दिन को सूर्योदय के समय सूर्य की किरणें श्री वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग पर पड़ती हैं. मंदिर में जाने के लिए काफी चौड़ाई लिए कई सारी मजबूत सीढियाँ हैं जिन्हें घाट कहते हैं. मंदिर परिसर में ही अन्य ग्यारह ज्योतिर्लिंगों के सुन्दर मंदिर भी स्थित हैं. मंदिर में प्रवेश पूर्व की ओर से तथा निकास उत्तर की ओर से है. यह एकमात्र स्थान है जहाँ नारद जी का मंदिर भी है. ज्योतिर्लिंग मंदिर के पहले ही शनिदेव तथा आदि शंकराचार्य के मंदिर भी हैं.

ज्योतिर्लिग मंदिर प्रवेश द्वार

ज्योतिर्लिग मंदिर प्रवेश द्वार

मंदिर के सामने का द्रश्य

प्रवेश द्वार

मंदिर परिसर में फुर्सत के क्षण

मंदिर मुख्य प्रवेश द्वार तथा पार्श्व में मंदिर शिखर

दीप स्तम्भ तथा देवी अहिल्या प्रतिमा

भक्त निवास

 

कुछ खरीददारी

यात्री निवास के निचे की ओर सजी दुकानें

खरीददारी

देवी अहिल्या बाई का आशीर्वाद

गर्भगृह:
इस मंदिर में गर्भगृह तथा सभाग्रह एक ही भू-स्तर (लेवल)  पर स्थित होने के कारण सभामंडप से ही बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग के दर्शन हो जाते हैं, शिवलिंग एकदम काले शालिग्राम पत्थर से निर्मित है. गर्भगृह में चारों दिशाओं में एक एक अखंड ज्योति दीप हमेशा जलते रहते हैं.  ज्योतिर्लिंग (जलाधारी सहित) को क्षरण से बचाने के लिए हर समय एक चांदी के आवरण से ढँक कर रखा जाता है, सिर्फ दोपहर में दो से तीन बजे के बिच श्रृंगार के लिए ही आवरण हटाया जाता है, अतः भक्तों को आवरण से ज्योतिर्लिंग के दर्शन पूजन करके संतुष्टि करनी पड़ती है. ज्योतिर्लिंग के ठीक ऊपर पांच माध्यम आकार के चांदी के गोमुख लटकते रहते हैं जो की भगवान वैद्यनाथ का अभिषेक करने में प्रयुक्त होते हैं. यहाँ पर भी मंदिर ट्रस्ट के नियमों के अंतर्गत 151 से लेकर 251 रु. के बिच दक्षिणा देकर पंचामृत से ज्योतिर्लिंग का रुद्राभिषेक किया जा सकता है लेकिन चांदी के आवरण के साथ ही. गर्भगृह माध्यम आकार का है तथा एक साथ अठारह से बीस लोग पूजन अभिषेक कर सकते हैं.

सभामंडप में गर्भगृह के ठीक सामने लेकिन थोड़ी दुरी पर एक ही जगह पर एक साथ तीन अलग अलग आकार के पीली आभा लिए पीतल के नंदी विद्यमान हैं, जहाँ से ज्योतिर्लिंग के स्पष्ट दर्शन होते हैं. गर्भगृह के प्रवेश द्वार के समीप ही माता पार्वती का मंदिर भी है.

मंदिर का बरामदा तथा नंदी जी का मंदिर

गर्भगृह के सामने स्थित तीन नंदी

गर्भगृह के ठीक सामने सभा मंडप

श्री परली वैजनाथ ज्योतिर्लिंग

गर्भगृह के ठीक सामने

मंदिर समय सारणी:

श्री वैद्यनाथ मंदिर सुबह 5 बजे प्रातः आरती के साथ खुलता है, तथा दोपहर 3 बजे तक खुला रहता है, तथा इस समय के दौरान भक्त गण पूजा अभिषेक कर सकते हैं. शाम 5 बजे भस्म पूजा होती है, तथा रात 9 : 45 बजे शयन आरती होती है. रात दस बजे मंदिर बंद हो जाता है.

ठहरने की व्यवस्था:
यहाँ पर यात्रियों के ठहरने के लिए उत्तम व्यवस्था है, मदिर से बिलकुल सटे हुए दो यात्री निवास हैं जो की श्री बैद्यनाथ मंदिर ट्रस्ट के द्वारा संचालित किये जाते हैं 200 रु. से 300 के शुल्क पर उपलब्ध हैं. इन यात्री निवासों में सारी मूलभूत सुविधाएँ  उपलब्ध हैं जैसे गर्म पानी, टेलीविजन आदि.

यात्री निवास का कमरा

यात्री निवास

कैसे पहुंचें:

परली वैजनाथ महाराष्ट्र के बीड़ जिले में स्थित है, तथा महाराष्ट्र के बड़े शहरों जैसे मुंबई, पुणे, औरंगाबाद, नागपुर, नांदेड, अकोला आदि से सीधे सड़क मार्ग से जुड़ा है तथा यहाँ पहुँचने के लिए महाराष्ट्र परिवहन निगम की बसें आसानी से उपलब्ध हैं.

परली वैजनाथ दक्षिण मध्य रेलवे लाइन से भी जुड़ा है, ट्रेन्स जैसे काकीनाडा मनमाड एक्सप्रेस, सिकंदराबाद मनमाड एक्सप्रेस, बेंगलोर नांदेड लिंक एक्सप्रेस आदि परली वैजनाथ के लिए उपलब्ध हैं.

परली में बस स्टैंड तथा रेलवे स्टेशन एक दुसरे के बहुत करीब हैं. स्टेशन से मंदिर जाने के लिए 30 रु. देकर ऑटो रिक्शा लिया जा सकता है.

परली वैजनाथ रेलवे स्टेशन पर ट्रेन का इंतज़ार

परली वैजनाथ स्टेशन

अपनी कहानी:

सुबह जल्दी उठकर मंदिर पहुंचकर पंचामृत रुद्राभिषेक करवाने के बाद तथा मंदिर में सुखद क्षण बिताने के बाद हम करीब 11 बजे रेलवे स्टेशन पहुँच गए, जहाँ से हमें 1:15 पर निकलने वाली अकोला पेसेंजर ट्रेन से अकोला के लिए बैठना था. इस ट्रेन ने हमें रात 9:00 बजे अकोला पहुँचाया, वहां से अकोला महू ट्रेन में सवार होकर अगले दिन की शाम को हम अपनी इस यात्रा की ढेरों मधुर स्मृतियाँ लेकर सकुशल अपने घर पहुँच गए. इस श्रंखला की इस अंतिम कड़ी को अब मैं यहीं विराम देता हूँ, फिर कुछ ही समय में उपस्थित होऊंगा अपनी अगली यात्रा की कहानी के साथ.

About Mukesh Bhalse

Mukesh Bhalse has written 35 posts at Ghumakkar.

I am a Mechanical Engineer & Business Administration Graduate by education and a Quality Manager by profession. I stay near Indore (MP). Traveling, Music, Literature and natural beauty in rains are my passion. I am fond of knowing culture of different places, visiting new places. We (My family) are devotees of Lord Shiva and are extremely interested in visiting abodes of lord shiva (Shivalayas). We took a pledge to visit at least one Jyortirlinga each year and so far we have completed nine (9). Our recent jyotirling visit was Kashi Vishwanath Jyotirling and next we have planned to visit Bhimashankar Jyotirling. Visit My Blog: http://mukeshbhalse.blogspot.com

Getaway Jungle Camp

22 Responses to “Parli Vaidyanath / परली वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग दर्शन”


  1. बम-बम भोले, शिव के भक्त महाशिवरात्रि तक बिल्कुल ना माने, मुकेश भाई बहुत अच्छा लेख लगा, वैसे यहाँ मैं अभी तक नहीं जा पाया हूँ देखते है अबकी बार तो जाना हो ही जाये।

  2. Aum Namah Shivaya …………………..

    Good to see Bhole baba in the morning……………………………………….

    You again managed to get pic of Bhole Baba here . Congrats…………………..

    Any idea why there 5 abhishek patras above the lingam , normally its one……………..

  3. Silentsoul says:

    बड़ा सजीव चित्रण किया मुकेश भाई. यहां नंदी की 3 मूर्तियां अलग लगी.. लगभग हर मंदिर में एक नंदी होता है…. यहां 3 क्यों है ??

    भला हो अहिल्याबाई का जिनकी वजह से हमारी धरोहरें बची हुई हैं ।

  4. Mukesh Bhalse says:

    संदीप भाई,
    पोस्ट पढने तथा पसंद करने के लिए धन्यवाद. आपने सही कहा, भोले के भक्त अब भोले को शिवरात्रि तक छोड़ेंगे नहीं. आपका क्या भैया, कभी भी हो आओगे बस जाट खोपड़ी के सरकने की देर है.
    धन्यवाद

  5. Mukesh Bhalse says:

    @ Vishal,

    Yes Bhole Baba’s darshan in the morning is an unexpected boon………….

    Yes once again I managed it……… how to capture snaps in a restricted place is an art…….Do you want to learn? Then join my class.

    The reason of 5 Abhishek Patra is, maximum 5 individuals can perform Abhishek at a time here and the holy thread of each of the Abhishek patra is being hold by an individual performing Abhishek.

    Thanks.

  6. Mukesh Bhalse says:

    साइलेंट सोल जी,
    प्रशंसा के लिए धन्यवाद. यहाँ तीन नंदी क्यों है, मुझे भी इस बारे में कोई जानकारी नहीं है.
    दूसरी बात, पुण्यश्लोक देवी अहिल्या बाई की तो जितनी स्तुति की जाये कम है, उनसे बड़ा शिवभक्त तो इस संसार में हो ही नहीं सकता.
    धन्यवाद.

    • Silentsoul says:

      और अंत में आपको केदार नाथ आना ही पड़ेगा… ज्योतिर्लिंगों की संख्या पूरी करने के लिये… अच्छी तरह सलाह ले कर आना ताकि उस य़ात्रा का पूरा फायदा उठा सकें… हरिद्वार की आरती, जागेश्वर, तथा कई सारे प्रयाग आपका इंतजार कर रहे होंगे

      • Mukesh Bhalse says:

        साइलेंट साहब,
        उत्तराखंड जाने से पहले आप से खूब सलाह मशविरा करके जायेंगे, वैसे उत्तराखंड में बद्री केदार यात्रा के दौरान भूस्खलन की इतनी ख़बरें पढने को मिलती है की जाने के नाम से थोडा सा डर लगने लगा है.

  7. Neeraj Jat says:

    अपन तो जी जब भी जायेंगे, स्टेशन पर ही पडकर सो जायेंगे- फ्री में। वैसे परली के लिये नांदेड, परभणी और पूर्णा से लोकल ट्रेनें भी मिलती हैं। एक लोकल ट्रेन तो कोल्हापुर के पास मिरज से भी आती है- मिरज से पंढरपुर, लातूर होते हुए।
    खैर ज्योतिर्लिंगों की श्रंखला में आज परली के बारे में बढिया जानकारी मिली। और हां, हमें तो गर्भगृह, शिवलिंग का मैटीरियल और नंदी की पोजीशन आदि के बारे में कुछ भी जानकारी नहीं है, कम से कम अपना इतना ज्ञान तो बढ ही रहा है।
    देखते हैं अगली बार कहां ले जाओगे।

    • Mukesh Bhalse says:

      नीरज जी,
      आपकी टिप्पणी का प्रत्युत्तर देने में थोडा विलम्ब हो गया, अतः क्षमाप्रार्थी हूँ. आपको लेख तथा जानकारी पसंद आई, जानकार हर्ष हुआ. लोकल ट्रेनों की जानकारी प्रदान करने के लिए धन्यवाद.

  8. Nandan says:

    परली वैद्यनाथ के बारे में कोई जानकारी नहीं थी तो बहुत बहुत धन्यवाद हमें सुरक्षित परली ले जाने के लिए | जैसा की मैने लिखे था की अगर संयोग लगा तो अप्रैल में झारखंड वाले वैद्यनाथ का लेख पढने को मिलेगा |

    • Mukesh Bhalse says:

      नंदन जी,
      पोस्ट तथा जानकारी पसंद करने के लिए धन्यवाद. हमें आपकी झारखण्ड वाले बैद्यनाथ धाम की पोस्ट का बेसब्री से इंतज़ार है.
      धन्यवाद.

  9. Nandan says:

    And I forgot to write that there would be more people who would be interested in taking the photography class :-), we still remember the incident from the Museum. lol.

    • Mukesh Bhalse says:

      Nandan,
      You are too welcome in my class.
      Yes i can never forget the Kutch Museum incident, but still I haven’t learn the lesson, and I can’t resist myself to capture photographs at prohibited places and I admit it whole heatedly (As Mr. Harivansh Rai Bachchan admits publicly that he had a bad habit of stealing pens throughout his life).

      Thanks.

    • Mukesh Bhalse says:

      बिमल जी,
      परली वैजनाथ यात्रा के लिए जरुरी फ़ोन नम्बर्स इस प्रकार हैं:
      1 . यात्री निवास मेनेजर श्री तिलकरी – 09403484279
      2 . पुजारी (उपाध्याय) श्री श्रीकुमार बाबुराव जोशी – 09822891338 , 09860989711 , 02446 -223740
      3 . पुजारी (उपाध्याय) श्री विद्यासागर त्रिनेत्र स्वामी – 09221796483
      4 . पुजारी (उपाध्याय) श्री दयासागर त्रिनेत्र स्वामी – 09096787202
      आशा है उपरोक्त जानकारी आपके लिए लाभदायक साबित होगी.
      धन्यवाद.

  10. Jambulingam says:

    Mr. Mukesh, I am planning to visit Parli Vaidyanath. My program is as follows:
    Departure: Chennai Central 1535 hrs 12607 Lal Bagh Express 365
    Arrival: Bangalore 2135 hrs

    Departure: Bangalore 2300 hrs 16594 Bangalore – Nandad Express 907
    Arrival: Parli Vaidyanath 1920 hrs “Parli Vaidyanah Dharshan and
    Night Stay at Parali Vaidyanath”

    Departure: Parli Vaidyanath 1630 hrs 51434 Pandapur Nizamabad Express 64
    Arrival: Parbhani 1758 hrs “Aundha Naganath Dharshan
    and Night stay at Parbhani”
    Departure: Parbhani 1812 hrs 11402 Nandigram Express 540
    Pl state what is the distance between Parli Vaidyanath Railway Station to Parli Vaidyanath Temple. and similarly from Parbhani Railway Station to Aundha Nagnath Temple

  11. Mukesh Bhalse says:

    Dear Jambulingam,

    Its nice that you are visiting such a sacred place, one of the abodes of lord Shiva. My heartiest best wishes to you for your trip.

    Parli Vaijanath temple is around 5 km from railway station and it takes 15 minutes by auto rickshaw and auto charge is Rs. 30.

    Parbhani to Aundha Nagnath is approx. 55 km and it takes 1.25 hr to cover the distance by bus. In Aundha there are temple trust run guest houses, I would suggest you to stay there instead of staying in Parbhani, so as to enable you darshan of jyotirlingam once again in morning. In the morning after darshan/ Abhishek you can catch bus for Parbhani and finally from Parbhani you can catch your train easily as your train departure time from Parbhani is 1812 Hrs.

    Thanks.

  12. san-jay says:

    Jai Bhole nath Mukeh Ji…no words to admire ..bahut achi information hai ..sabhi bhakto ko bahut laabh hoga ek yatra report se.

    • Mukesh Bhalse says:

      Sanjay ji,
      Thank you very much for the appreciation. I am glad to read that you gone through the post and liked it. Such comments motivate us to write more and quality material useful for readers.

      Thanks.

  13. Dr. Ravi S. Balaskar says:

    Hi mukesh,

    i have seen u r pics, the small tour of parli-vaijanath temple. I am from parli-vaijanath. Recently working as assistant professor in Pratap College, Amalner, Jalgaon. Love to see the pics. thanks for uploading.

    tc bye…:)



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