Aundha Nagnath / औंढा नागनाथ: भोले बाबा का एक और आशियाना |
Table of contents for A religious trip to Marathwara region of Maharashtra
- Aundha Nagnath / औंढा नागनाथ: भोले बाबा का एक और आशियाना
- Parli Vaidyanath / परली वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग दर्शन
याम्ये सदड्गे नगरेतिरम्ये विभुषिताग विविधैश्च भोगिः , सद्भक्तिमुक्तिप्रद्मिश्मेकम श्री नागनाथं शरणं प्रपद्ये.
(द्वादश्ज्योतिर्लिन्गस्तोत्रम, कोटिरुद्रसंहिता, शिवमहापुराण)
नांदेड में हजुर साहिब सचखंड गुरूद्वारे के पावन दर्शन के पश्चात अब हमारी यात्रा का अगला गंतव्य था श्री औंढा नागनाथ ज्योतिर्लिंग दर्शन.
नांदेड में रणजीतसिंह यात्री निवास से लगभग 10 बजे चेक आउट करने के बाद औंढा के लिए बस पकड़ने के उद्देश्य से हम नांदेड के बस स्टेंड पर पहुँच गए, वहां जाकर पता चला की औंढा के लिए डाइरेक्ट कोई बस उपलब्ध नहीं थी अतः हम बसमथ के लिए बस में सवार हो गए और बसमथ से बस बदलकर लगभग साढ़े 12 बजे औंढा नागनाथ पहुँच गए. अब अपनी कहानी को यहाँ विराम देकर आपको स्थान से परिचित करता हूँ.
श्री औंढा नागनाथ – एक परिचय:
औंढा नागनाथ, महाराष्ट्र के मराठवाड़ा क्षेत्र में स्थित हिंगोली जिले के औंढा नामक तालुके (तहसील) में स्थित है, तथा यहाँ पर एक अति प्राचीन तथा सुन्दर मंदिर में भगवान भोलेनाथ के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक (सन्दर्भ- द्वादश्ज्योतिर्लिन्ग्स्तोत्रं, कोटिरुद्रसंहिता, श्री शिव महापुराण अध्याय २९) आठवें क्रम के ज्योतिर्लिंग ” नागेशं दारुकावने” स्थित हैं, और इसी वजह से इस स्थान का महात्म्य प्राचीन धर्म ग्रंथों तथा पुराणों में भी मिलता है.
नागेश्वर ज्योतिर्लिंग के सम्बन्ध में मतभेद:
शिव महापुराण के द्वादश्ज्योतिर्लिन्ग्स्तोत्रं में उल्लेखित बारह ज्योतिर्लिंगों में से कुछ की भौगोलिक स्थितियों के बारे में भक्तों के मत अलग अलग हैं. कारण यह है की स्तोत्र (श्लोक) में इन ज्योतिर्लिंगों की भौगोलिक स्थिति अस्पष्ट है अतः लोग अपने अपने तरीके से व्याख्या करते हैं तथा अर्थ निकालते हैं, स्थान निर्धारण में सबसे ज्यादा विवादित दो ज्योतिर्लिंग हैं, एक है नागेश्वर ज्योतिर्लिंग जिसके बारे में कुछ लोगों का मत है की यह गुजरात स्थित द्वारका के समीप है वहीँ अन्य लोगों का मत है की यह ज्योतिर्लिंग महाराष्ट्र के मराठवाड़ा क्षेत्र के औंढा नमक गाँव में स्थित श्री नागनाथ मंदिर में है.
ठीक इसी प्रकार श्री वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग के बारे में भी मतभेद है, कुछ लोगों का मानना है की यह ज्योतिर्लिंग झारखंड राज्य में जेसीडीह के करीब देवघर कसबे में स्थित है, वहीँ अन्य लोग मानते हैं की यह ज्योतिर्लिंग महाराष्ट्र के बीड जिले में स्थित परली वैजनाथ स्थान पर स्थित है.
खैर, हमें इस विवाद की और ध्यान न देकर जिस ज्योतिर्लिंग स्थान पर हम आसानी से पहुँच सकें वहीँ सच्ची भावना से भक्ति करके संतुष्ट होना चाहिए.
श्री नागनाथ मंदिर शिल्प:
श्री नागनाथ मंदिर का शिल्प बड़ा अनोखा तथा विष्मयकारी है, मंदिर का निर्माण कार्य महाभारतकालीन माना जाता है. पत्थरों से बना यह विशाल मंदिर हेमाड़पंथी स्थापत्य कला में निर्मित है तथा करीब 60000 वर्गफुट के क्षेत्र में फैला है.मंदिर की चारों दीवारें काफी मजबूती से बनाई गई हैं तथा इसके गलियारे भी बहुत विस्तृत हैं. सभा मंडप आठ खम्भों पर आधारित है तथा इसका आकार गोल है.
यहाँ महादेव के सामने नंदी नहीं है तथा मुख्य मंदिर के सामने अन्य स्थान पर नंदिकेश्वर जी का मंदिर अलग से बनाया गया है.
मुख्य मंदिर के चारों ओर बारह ज्योतिर्लिंगों के छोटे मंदिर भी बने हुए हैं. मंदिर की दीवारों पर पत्थरों को तराश कर की गई सुन्दर नक्काशी देखने लायक है, तथा दीवारों पर कई देवी देवताओं की मूर्तियाँ उकेरी गई हैं. शिलाखंडों से निर्मित इन मूर्तियों को देखने से मन प्रसन्न हो जाता है. मंदिर की दिवार के एक कोने पर बने एक शिल्प में भगवान् शिव रूठी हुई पार्वती जी को मना रहे हैं, यह द्रश्य देखकर लोग दांतों तले उँगलियाँ दबा लेते हैं, पत्थर से बनी मूर्तियों के चेहरों पर कलाकार ने जो भाव उत्पन्न किये हैं, लाजवाब हैं.
अन्य महत्वपूर्ण हिन्दू मंदिरों की तरह इस मंदिर पर भी धर्मांध औरंगजेब की कुद्रष्टि पड़ी तथा उसने मंदिर का उपरी आधा भाग ध्वस्त कर दिया था, लेकिन अचानक हज़ारों की संख्या में कहीं से भ्रमर (भौरें) आ गए तथा औरंगजेब के सैनिकों पर टूट पड़े, अंततः औरंगजेब को अपनी सेना समेत वापस लौटना पड़ा (यह और कुछ नहीं भगवान् का चमत्कार ही था).
बाद में इंदौर की महारानी पुण्यश्लोका देवी अहिल्याबाई होलकर जो की स्वयं शिव की बहुत बड़ी भक्त थी ने इस मंदिर का उपरी टुटा हुआ हिस्सा पुनर्निर्मित करवा कर मंदिर का जीर्णोद्धार करवाया, अतः उनकी स्मृति में मंदिर परिसर में प्रवेश से पहले ही मातुश्री अहिल्या बाई होलकर की प्रतिमा विराजमान है.
मंदिर का उपरी आधा भाग जो की औरंगजेब ने ध्वस्त कर दिया था तथा बाद में देवी अहिल्या बाई ने बनवाया, सफ़ेद रंग से पुताई किया हुआ है, तथा मंदिर का आधा निचला हिस्सा जो की प्राचीन मंदिर का वास्तविक हिस्सा है अभी भी काला ही है, यानी उस हिस्से पर पुताई नहीं की जाती.
श्री नागनाथ मंदिर का अनोखा गर्भगृह:
इस मंदिर की एक विशेषता है की यहाँ गर्भ गृह सभा मंडप के सामानांतर स्थित न होकर, सभा मंडप के निचे स्थित गुफा नुमा तलघर में है, मैंने इस तरह का मंदिर इससे पहले कभी नहीं देखा, सभा मंडप के एक कोने में चौकोर आकार का एक द्वार है तथा इस द्वार से सीढियाँ लगी हैं जो की निचे तलघर में स्थित गर्भगृह तक जाती हैं, रास्ता भी इतना छोटा है की एक बार में एक ही व्यक्ति तलघर में जा या आ सकता है.
अन्दर गर्भ गृह भी बहुत छोटा है तथा एकसाथ केवल आठ या दस लोग ही पूजा कर सकते हैं, उंचाई भी इतनी कम है की व्यक्ति खड़ा नहीं हो सकता सिर्फ झुक कर या बैठ कर ही रहा जा सकता है, जबकि मंदिर बहुत विशाल है, तलघर स्थित गुफा नुमा गर्भ गृह के ठीक ऊपर वाली मंजिल पर बहुत जगह है जहाँ सुविधाजनक गर्भगृह आसानी से बनाया जा सकता था, फिर क्यों इतनी छोटी सी जगह पर ज्योतिर्लिंग स्थापित किया गया जहाँ ठीक से खड़ा भी नहीं रहा जा सकता, मेरी समझ से बाहर था, मुझे तो यह मंदिर बड़ा ही रहस्यमय लगा. अन्दर गर्भगृह में मध्यम आकार का ज्योतिर्लिंग स्थापित है, जो की चांदी के आवरण से ढंका रहता है तथा समय समय पर अभिषेक के लिए आवरण को हटाया जाता है.
यहाँ पर गर्भगृह में भक्तों को सीधे ज्योतिर्लिंग पर पूजन तथा अभिषेक की अनुमति है. यह ज्योतिर्लिंग रेत से निर्मित है, भक्त गण अभिषेक के दौरान अपने हाथों से रेत को महसूस कर सकते है.
गर्भगृह के इस अद्भुत निर्माण, तथा बहुत संकरा होने तथा जगह बहुत कम होने की वजह से कई बार वृद्ध भक्तों तथा बच्चों के लिए गर्भगृह में प्रवेश जोखिम भरा हो सकता है. फर्श हर समय गीली होने तथा प्रकाश की कमी की वजह से फिसलने का भी डर होता है, लेकिन यह भी सच है की भगवान् के दर्शन मुश्किलों तथा जोखिमों से गुजरने के बाद ही होते हैं.
वैसे भक्तों की सुरक्षा के लिए मंदिर प्रशासन ने पुख्ता इंतज़ाम किये हुए हैं, जगह जगह पर सुरक्षा की द्रष्टि से सिक्योरिटी गार्ड्स तैनात रहते है. गर्भगृह वातानुकूलित है जो की भक्तों को गर्मी में शीतलता प्रदान करता है.
मंदिर समय सारणी:
सामान्य दिनों में नागनाथ मंदिर के द्वार सुबह 4 बजे खुलते हैं तथा रात्रि 9 बजे बंद हो जाते हैं, लेकिन विशेष दिनों तथा उत्सवों के दौरान समय बढ़ा दिया जाता है. शुरू के एक घंटे में मंदिर के पुजारी पूजन अभिषेक करते हैं तथा इस दौरान भक्तों को गर्भगृह में प्रवेश नहीं दिया जाता. 12 से 12 :30 के बिच महानैवेद्य तथा आरती होती है. शाम 4 से 4 :30 के बिच श्रीस्नान एवं पूजा होती है इस दौरान भी भक्तों को गर्भगृह में प्रवेश नहीं दिया जाता. 8 :30 से 9 :00 के बिच शयन आरती होती है.
मंदिर के पण्डे पुजारी:
यहाँ के पण्डे पुजारी भी बड़े सहयोगी स्वभाव के हैं तथा भक्तों की हरसंभव मदद करते है. पूजा अभिषेक भी बड़े विस्तृत रूप से अच्छी तरह से करवाते है. बहुत ज्यादा दक्षिणा की भी मांग नहीं करते हैं, 151 से 251 रुपये के बिच पंचामृत सहित रुद्राभिषेक किया जा सकता है. हमने जिन पुजारी जी से अभिषेक करवाया था उनका मृदु व्यव्हार तथा सहयोग एवं मन प्रसन्न कर देने वाला अभिषेक हमारी स्मृति में सदा केन्द्रित रहेगा. अपने साथी घुमक्कड़ भक्तों की सुविधा के लिए मैं उनका मोबाइल नंबर यहाँ देना चाहूँगा - पं. दीक्षित जी - 09420576066 .
ठहरने की व्यवस्था:
औंढा, हिंगोली जिले में एक छोटा सा क़स्बा है, जो की हिंगोली शहर से लगभग 30 किलोमीटर की दुरी पर स्थित है. पुरे गाँव की अर्थव्यस्था तीर्थ यात्रियों पर ही निर्भर है. मंदिर की बढती लोकप्रियता के बावजूद भी यहाँ ठहरने के लिए सर्व सुविधायुक्त आवास की कमी है. मंदिर प्रशासन के द्वारा निर्मित यात्री निवास उपलब्ध है, लेकिन न्यूनतम सुविधाओं के साथ. वैसे मंदिर प्रशासन यहाँ यात्रियों के रात्रि विश्राम के लिए एक सर्वसुविधा युक्त धर्मशाला बनाने के लिए प्रयासरत है.
खाने के लिए ठीक ठाक व्यवस्था है, लेकिन पिने के पानी का स्वाद थोडा सा अप्रिय है, अतः यहाँ मिनरल वाटर पिने की सलाह दी जाती है. छोटे छोटे रेस्तरां हैं जो मराठी, पंजाबी तथा गुजराती भोजन उपलब्ध करते हैं, लेकिन ज्यादा अच्छे खाने की उम्मीद नहीं की जा सकती.
कैसे पहुंचें:
भारतीय हिन्दू तीर्थयात्रा की सही पहचान की तर्ज पर औंढा नागनाथ की यात्रा थोड़ी दुष्कर ही है. बड़े शहरों से यहाँ पहुँचने के लिए सीधी सुविधा नहीं है. अपनी यात्रा को कुछ भागों में बाँट कर ही यहाँ पहुंचा जा सकता है. हिंगोली तक पहुंचकर वहां से सीधे औंढा के लिए महाराष्ट्र राज्य परिवहन की बस के द्वारा पहुंचा जा सकता है, या फिर नांदेड पहुँच कर वहां से बसमथ और फिर बस बदल कर औंढा पहुंचा जा सकता है, या फिर हिंगोली या नांदेड से प्राइवेट जीप लेकर भी यहाँ पहुंचा जा सकता है.
अपनी कहानी:
सुबह से भूखे होने की वजह से साढ़े बारह बजे औंढा पहुँच कर सबसे पहले हमने बस स्टॉप पर स्थित एक रेस्तरां में नाश्ता किया, और उसके बाद हम चल दिए मंदिर की और दर्शन के लिए. यहाँ एक बात बताना चाहूँगा की यहाँ पर मंदिर बिलकुल बस स्टॉप के ठीक सामने ही है तथा बस से उतारते ही मंदिर परिसर दिखाई देता है, याने न किसी से पूछने की जरुरत और न ही ऑटो रिक्शा ढूंढने की जेहमत.
मंदिर में प्रवेश के बाद मंदिर को देखते ही माँ भाव विभोर हो गया, प्राचीन शिल्पकला का एक नायाब नमूना, बड़ा सुन्दर मंदिर था. कुछ ही देर में पंडित जी से अभिषेक के बारे में बात करके हम दर्शनों के लिए लाइन में लग गए. गर्भ गृह में पहुँच कर भगवान् के समीप बैठकर करीब आधे घंटे तक रुद्राभिषेक का आनंद उठा कर इश्वर को धन्यवाद देते हुए हम मंदिर से बहार आ गए.
इसी के साथ मैं अपनी यह पोस्ट यहीं समाप्त करता हूँ इस वादे के साथ की हम जल्द ही दर्शन करेंगे एक और ज्योतिर्लिंग के अपनी पोस्ट के माध्यम से. तब तक के लिए………. ॐ नमः शिवाय…………………………………………






















मुकेश भाई पुन: दर्शन कराने का दिल से आभार, इस मन्दिर में गुफ़ा में जाते समय व बाहर आते समय सिर टकराने से बचाना जरुरी हो जाता है, वैसे भीड यहाँ हमेशा जोरदार मिलती है हमारा तो तीन घन्टे में नम्बर आया था। इन मुगलों ने तो कोशिश की थी कि सभी हिन्दू मन्दिर तो धवस्त कर दिया जाये लेकिन भोले का चमत्कार वे ऐसा ना कर पाये। इतिहास के बारे में अच्छी जानकारी दी, वैसे आपको बता दूँ कि बसमत से मात्र 12 किमी दूर ही कुरुँदा गाँव है जहाँ से अपने दोस्त बाइक पर हिमालय में घूमने आते है। यह बात आपने सही बतायी है कि यहाँ पर सीधी बस सेवा कम ही मिलती है, बसे बदल-बदल कर जाना पडता है।
मुकेश भाई, मैने तो इस मंदिर का नाम तक नहीं सुना था… धन्यवाद आपने दर्शन करा दिये, वो भी इतने सुन्दर चित्रों के साथ
जटा कटा हसंभ्रम भ्रमन्निलिंपनिर्झरी । विलोलवी चिवल्लरी विराजमानमूर्धनि । धगद्धगद्ध गज्ज्वलल्ललाट पट्टपावके किशोरचंद्रशेखरे रतिः प्रतिक्षणं ममं
ऊँ नमः शिवाय
mukeshji sadar pranam,
bhole baba ki is yatra drashan ke liye aapka dhanyawad.
main bhi apne yatra likhna chahta hun. kya aap mujhe hindi main likhne ka rrsta bata sakte hain
प्रवीण जी,
हिंदी में लिखने के लिए आप गूगल ट्रांसलिटरेट http://www.google.com/transliterate/ की सहायता ले सकते हैं. गूगल ट्रांसलिटरेट आपके द्वारा रोमन इंग्लिश में लिखे हुए शब्दों को हिंदी में ट्रांसलिटरेट कर देता है, आप गूगल ट्रांसलिटरेट पर रोमन में शब्द लिखकर जैसे ही स्पेस देंगे आपका शब्द हिंदी में बदल जायेगा. आप अपना पूरा लेख लिखकर उसे गूगल ट्रांसलिटरेट के पेज से कट कर के कहीं वर्ड की फाइल में पेस्ट कर दीजिये………….बस हो गया, बहुत आसान है.
धन्यवाद.
संदीप भाई,
टिप्पणी के लिए धन्यवाद. आपने बिलकुल सही कहा संकरा रास्ता होने तथा जगह के अभाव में सिर टकराने की यहाँ बहुत संभावना रहती है. हम जब वहां दर्शन के लिए गए थे तब भीड़ कम थी अतः कम समय में बड़े अच्छे से दर्शन तथा पूजन हो गया. बाकी तो सब भोले की कृपा है.
ॐ नमः शिवाय……..बम बम भोले……….
साइलेंट सोल जी,
प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद. और शिव तांडव स्तोत्रं की पंक्तियाँ दर्शाने के लिए भी.
धन्यवाद.
मुझे हाल ही में ओंधा नागनाथ में बारे में पता चला है | एक मित्र के साथ लंच कर रहा था तो उन्होंने पूरा व्याख्यान दिया, मन ही मन कुछ चित्र खीच लिए थे मैने, आज आपके लेख के ज़रिये देख भी लिए | धन्यवाद |
दो बातें मेरी तरफ से, पहले तो ये की काफी अचरज के बात है , की इतनी लोकप्रियता के बाद भी, कोई सीधा कनेक्शन नहीं है , उम्मीद है मंदिर ट्रस्ट इस बारे में कुछ कर रहा होगा |
दूसरा ये, की ऐसी जगह पर , आपके शब्दों में, ……..मृदु व्यव्हार तथा सहयोग एवं मन प्रसन्न कर देने वाला अभिषेक ………… , ऐसे पंडित मिलना वाकई में एक अजूबा है | तो धन्यवाद , दीक्षित जी का फ़ोन नंबर घुमक्कड़ों को बताने के लिए |
मुझे अप्रैल में देवघर जाना है, एक उपनयन का न्योता है , यात्रा कर प्रबंध हो चुका है, उम्मीद है की मेरी तरफ से भी भोले नाथ पर छोटा सा लेख आएगा | संदीप के हिसाब से तो सभी लोग भोले के पीछे हाथ धो कर पड़े हैं तो मैं क्यों पीछे रहूँ |
wow ……………..
you got to take pic of the linga . that was great Mukesh……………………………….
Thanks for the darshan……………………………………..
ज्योतिर्लिंग के बारे में बढिया जानकारी। बैजनाथ का एक और ‘ज्योतिर्लिंग’ है। वो है हिमाचल में कांगडा जिले में बैजनाथ के नाम से। वे भी अपने बैजनाथ को बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक मानते हैं।
नंदन जी,
आपको पोस्ट पसंद आई, धन्यवाद.
आपकी पोस्ट के द्वारा बाबा बैद्यनाथ धाम, देवघर के दर्शन होंगे जानकार बड़ी प्रसन्नता हुई, अब तो बस आपकी इस पोस्ट का इंतज़ार रहेगा.
Vishal,
Thanks for your comment and I was eagerly waiting for the same. Generally the pandit we fix for our Abhishek helps us capturing pictures inside the temple.
Thanks.
नीरज जी,
पोस्ट को पसंद करने के लिए आभार. आपने बिलकुल सही कहा, मैंने भी हिमाचल (कांगड़ा) के बैजनाथ के बारे में सुना एवं पढ़ा है. देखते हैं, ईश्वर ने चाहा तो वहां भी पहुँच जायेंगे.
मैंने अपने कमेण्ट में औरंगजेब के बारे में भी लिखा था कि हमें अंग्रेजों का शुक्रगुजार होना चाहिये कि उन्होंने मुगलों की सत्ता को मटियामेट करने में अहम भूमिका निभाई, नहीं तो क्या पता हम आज किसी मस्जिद में नमाज पढ रहे होते। मेरी इन लाइनों को संचालकों ने हटा दिया है और इसकी सूचना भी मुझे मेल से दी जा चुकी है। मेल में इस कमेण्ट को मुस्लिम विरोधी बताया गया है।
मैं एक हिन्दू हूं लेकिन मुस्लिम विरोधी नहीं हूं। अपने बारे में इससे ज्यादा सफाई नहीं दूंगा।
हमारा इतिहास मुस्लिम शासकों की निर्दयता से भरा पडा है। उनकी निर्दयता के बारे में लिखना यानी अपने इतिहास के बारे में लिखना मुस्लिम विरोधी कैसे हो सकता है? सभी जानते हैं कि मुगल काल में और उससे भी पहले सल्तनत काल में भारत में जबरन धर्म परिवर्तन जोरों पर था। गैर मुस्लिमों पर कई तरह के अतिरिक्त कर लगाये जाते थे, उन्हें प्रताडित किया जाता था। जहां अकबर एक सम्माननीय पात्र बना वहीं औरंगजेब कट्टरता के कारण बदनाम भी हुआ। इस बात को आज के समय में गैर मुस्लिमों के साथ साथ समझदार मुसलमान भी स्वीकार करते हैं। फिर यह तो हमारे इतिहास का एक हिस्सा है, इसे लिखना किसी भी सूरत में गलत नहीं हो सकता। अगर मुगल काल उसी तरह जारी रहता, मुगल शासक आपसी लडाईयों और अंग्रेजों के कारण कमजोर ना पडते, तो कौन जानता है कि हम जो आज हिन्दू होने पर गर्व करते हैं, हमारे पूर्वज शासकीय प्रताडना से तंग आकर मुसलमान बन गये होते और हम दिन में पांच टाइम की नमाज पढ रहे होते। तब हमें मुसलमान होने पर गर्व होता।
संचालकों ने मेरा कमेण्ट हटा दिया और यह कमेण्ट भी हटा दिया जायेगा। मैं संचालकों की इस ‘प्रतिक्रिया’ से बहुत आहत हूं और घुमक्कड डॉट कॉम का बहिष्कार करता हूं। मैं घुमक्कड पर अब और समय नहीं दे सकता, ना कोई पोस्ट लिखूंगा और ना ही कोई टिप्पणी करूंगा।
Neeraj ! cool down my boy ! I fully agree with you and my views are same as your removed contents….BUT
But you must understand the problems of being a Moderator of a public forum. They have to take care of all the members, and keep their site free of controversies. I had been a Moderator of a Yahoo egroup for 11 years, and I know I had to lose my temper, my patience and my confidence in controlling the mob of different ideas. my site was religious, so it had more chances of getting controversial. Many times we got notice from yahoo to remove certain contents and we had to do it… even of our dearest friends.
और अब तो अदालत भी इसमें कूद पड़ी हैं… याहू, गूगल को जान बचानी भारी पड़ रही है.
बिचारे पंडिज्जी, झा साहब पर दया करो, और उनके नजरिये से देखो… (हालांकि मैं भी कई बार आहत हुआ… पर लिख रहा हुं अभी तक)
ईसमाईल पलीज
मुकेश जी
ॐ नमः शिवाय….
बहुत ही धार्मिक और सुन्दर जानकारी, लेख पढ़कर और सुन्दर चित्रों के द्वारा बाबा भोले नाथ जी के दर्शन करके मन बहुत ही प्रशन्न हुआ…..
आपने हमें इक और नई जगह औंधा नागनाथ ज्योतिर्लिंग के बारे बताया जिसका नाम हमने पहले कभी नहीं सुना था.
मुकेश जी, क्या आप या और कोई भी घुमक्कड़ बंधू बता सकता हैं, कि भारत में हमारे बारह ज्योतिर्लिंग कहा-कहा स्थित हैं ?
एक बार और सुन्दर जानकारी के लिए धन्यवाद
रीतेश
Good post & nice pics.
Regards,
Shubham
@ Shubham,
Thank you very much little champ.
Thanks.
@ Ritesh,
Thanks for liking the post.
To see the photographs of shrines of all 12 Jyotirlings and to view the lingmurties of above, please visit on of my posts on ghumakkar http://www.ghumakkar.com/2011/03/22/a-trip-to-srisailam-jyotirling-and-tirupati-part-1/
As per Dwadashjyotirlingastotram mentioned in Koti rudrasamhita in Shivmahapuraan the twelve jyotirlingas of lord Shiva are located as follows:
1. Somnath Jyotirling in Somnath (Prabhas Patan) Distt. Junagarh (Gujarat).
2. Mallikarjuna Jyotirling in Srisailam Distt. Kurnool (Andhra Pradesh)
3. Mahakaleshwar Jyotirling in Ujjain Distt. Ujjain (M.P.)
4. Mamleshwar Jyotirling in Omkareshwar Distt. Khandwa (MP)
5. Vaijnath/Vaidyanath Jyotirling in village Parli Distt. Beed (Maharashtra) & in Devghar, Distt. Santhal Pargana, Jharkhand.
6. Bhimashankar Jyotirling in village Bhimashankar Tehsil Kher Distt. Pune (Maharashtra)
7. Rameshwar Jyotirling in Rameshwaram Island Distt. Ramanathpuram (Tamil Nadu)
8. Nageshwar Jyotirling in Nageshwar (Dwarka) Distt. Jamnagar (Gujarat) & in Aundha nagnath Distt. Hingoli Maharashtra.
9. Vishweshwar Jyotirling in Varanasi Distt. Varanasi (UP)
10. Triyambak Jyotirling in Nashik (Maharashtra)
11. Kedareshwar Jyotirling in Kedarnath Distt. Rudraprayag (Uttarakhand)
12. Ghrushneshwar Jyotirling village verul near Ellora Distt. Aurangabad (Maharashtra )
Thanks.
जानकारी उपलब्ध करने के लिए
धन्यवाद मुकेश जी …..
मुकेश जी , बहुत अच्छी पोस्ट | पड़कर बहुत आनंद आया | जैसे की आपने बताया कि मंदिर में जाने के लिए बहुत ही संकरा रास्ता है तथा एक व्यक्ति ही एक बार में गर्भगृह में जा सकता है | इसी तरह का एक और मंदिर है हिमाचल परदेश में नंदिकेश्वर महादेव जो कि चामुंडा माता मंदिर के साथ ही है उसमें भी गर्भगृह में परवेश के लिए इतना ही संकरा रास्ता है तथा एक व्यक्ति उसमें ठीक से खड़ा नहीं हो सकता है सिर्फ बैठकर ही शिव पूजा कर सकता है |
@ रमन,
पोस्ट को पसंद करने तथा हिमाचल के मंदिर के बारे में अतिरिक्त जानकारी प्रदान करने के लिए धन्यवाद. हो सकता है मंदिर के इस तरह के डिजाइन के पीछे कोई विशेष कारण हो.
धन्यवाद.