दिल्ली से लेह-लद्धाख बाइक पर, अन्तिम भाग (V.I.P. POINT) |
Table of contents for Delhi Leh Bike Trip
अम्बाला में एक अन्य बाइक भी हमारे साथ ही 50-55 की रफ़्तार से चल रही थी, यहाँ आवारा जानवर सड़क पर डिवाईडर के साथ ही बैठे हुए थे, जिससे साथ चल रहा बाइक वाला एक गाय के मुँह से टकरा गया था। इस टक्कर से गाय व बाइकर दोनों लहुलुहान हो गये थे। हमने अपनी बाइक रोकी उस युवक की हालत बेहद खराब थी, वो वही अम्बाला का ही रहने वाला था, उसने हेलमेट भी नहीं पहना था, उसे कुछ अन्य लोगों की मदद से उठाकर एक किनारे किया, तथा एक युवक ने पुलिस को फ़ोन किया। इसके बाद हम चारों आगे चल दिये, कुछ दूर आगे जाने पर एक पुलिस की गाडी भी खडी थी उन्हे उस घटना के बारे में बताया वो तुरन्त उस दिशा में चले गये थे। ये घटना देख हमारी हालत भी बुरी हो गयी थी, जिससे रात में बाइक चलाने का मन नहीं कर रहा था। घर अभी दो सौ किमी दूर था। मैं तो रुकने को कह रहा था पर मराठे नहीं माने। अत: मुझे भी उनके साथ चलना पडा। हाँ पल्सर वाले हमारे साथ नहीं थे, वे अपने दोस्त/ रिश्तेदार के पास चंडीगढ चले गये थे। हमें घर जाने की जल्दी थी, इसलिये हम रात में भी चलते रहे। कहीं कोई परेशानी नहीं आयी, जब हम पानीपत आये तो जोरदार बारिश हमारा इंतजार कर रही थी, हमने घर फ़ोन करके खाना बनाने को कह दिया था कि रात बारह बजे तक हम आ जायेंगे। ये भी एक संयोग रहा आते व जाते दोनों बार हम बारिश में भीग गये। हमने पूरा पानीपत व बीस-पच्चीस किलोमीटर आगे तक जोरदार बारिश में ही यात्रा जारी रखी। मार्ग में गर्मी लग रही थी, बारिश में भीगने से गर्मी भाग गयी थी, रात के ठीक एक बजे हम अपने घर पर मौजूद थे। मेरी माता जी, पत्नी, व दोनों बच्चे हमारा इंतजार कर रहे थे। हमारे चेहरे पर दुनिया के तीन सबसे ऊँचे दर्रे पार करने की खुशी, एक विजेता की खुशी थी। आखिर ऐसे कितने सनकी, पागल, दीवाने, हिम्मती, मतवाले, होते होंगे जो ऐसी यात्रा कर पाते होंगे? मुझे उम्मीद है कि ये लेख देख कर और दीवाने ऐसी यात्रा पर जाना चाहेंगे, उन सबको मेरी शुभकामनाएँ। ये यात्रा यहीं समाप्त होती है।

दिल्ली(DELHI), से सोनीपत(SONIPAT), पानीपत(PANIPAT), कुरुक्षेत्र(KURUKSHETRA), अम्बाला(AMABALA), चडीगढ(CHANDIGARH), रोपड(ROPAR), बिलासपुर(BILASPUR), मंडी(MANDI), पण्डोह(PANDOH DAM) बांध, हणोगी माता मन्दिर(HANOGI MATA), कुल्लू(KULLU), मणिकर्ण(MANIKARAN), मनाली(MANALI), रोहतांग जोत दर्रा(ROHTANG PASS), पास टांडी(TANDI), कैलोंग(KEYLONG), बारालाचा दर्रा(BARALACHA LA PASS), सरचू(SARCHU), गाटा लूप(GATA LOOP), पांग(PANG), तंगलंगला दर्रा(TANGLANG LA PASS), उपशी(UPASI), कारु(KARU) चांग ला(CHANG LA), पैगोंग सो(PANGONG LAKE), झील लेह(LEH), खर्दूंगला पास(KHARDUNGLA PASS), सियाचीन ग्लेशियर(SIACHEN GLACIER), पत्थर साहिब गुरुद्धारा(PATHAR SAHIB), फ़ोतूला टॉप(FOTULA TOP), जलेबी बैंड कारगिल(KARGIL) की लडाई का यादगार स्मारक स्थल, द्रास(DRASS), कस्बा जोजिला दर्रा(JOJILA PASS), बाल्टाल(BALTAL), श्री अमरनाथ यात्रा(AMARNATH YATRA), श्रीनगर(SRINAGAR), शहर अंनतनाग(ANANTNAG), जवाहर सुरंग(JAWAHAR TUNNEL), बटोट(BATOT), पटनी टॉप(PATNI TOP), उधमपुर(UDHAMPUR), कटरा(KATRA), जम्मू(JAMMU), पठानकोट(PATHANKOT), जालंधर(JALANDHAR), लुधियाना(LUDHIANA), खन्ना(KHANNA), अम्बाला, पानीपत होते हुए हमारी यात्रा रही थी।

आगे इसी पोस्ट में इस यात्रा के बारे में कैसे जाना, कहाँ रहना, कितना खर्चा, क्या परेशानी, क्या ले कर जाना है आदि-आदि सब कुछ बताया जा रहा है। जिससे इस यात्रा पर जाने के इच्छुक दीवानों को फ़ायदा हो।
य़ात्रा की तैयारी……….
के लिये कुछ खास नहीं करना पडता है। सबसे पहले आपको आपको अपना वाहन तय करना है, कि कैसे, किस वाहन से जाना है। प्रत्येक वाहन के अपने-अपने फ़ायदे व नुकसान होते है, हर इंसान की पसंद अलग-अलग होती है, मेरी राय से तो सबसे अच्छा वाहन रेल है, लेकिन वो हर जगह उपलब्ध नहीं है, खासकर पहाडों में। रही बात आपको कोई जगह देखनी है तो सबसे अच्छा वाहन बाइक ही है जिससे हम उस जगह व मार्ग का अवलोकन अपनी मर्जी से कर सकते है, जब जहाँ मन करा, वही रोक लो, देखो व आगे बढो। जब बात कम इंसान व समय बचाने की आती है तो सबसे बढिया है बाइक जिसे आप जब चाहे जहाँ चाहे ले जा सकते है, बाइक पर अकेले या दो जने जैसे भी आप का मन करे, वैसे जा सकते है। अगर सामान ज्यादा हो तो बाइक पर अकेले जाना ही ठीक रहता है, दो सवारी होने पर खासकर खराब मार्ग पर थोडी समस्या पीछे बैठने वाले को तो आती ही है। लेह जैसे दुर्गम स्थानों पर जाने के लिये 125 सी.सी से कम की बाइक से बहुत परेशानी आती है, जब आप दुनिया के तीन सबसे ऊँचे दर्रे पार करोगे तब। अत: बाइक थोडी जानदार या फ़िर उस पर अकेले सवार हो तो बेचारी बाइक झेल सकती है अन्यथा नहीं, बाइक कार में तुलना करनी बेकार है, कार में आराम व बाइक से रोमाँच का मुकाबला कभी नहीं कर सकती है, सबसे बडी बात जहाँ मेरे जैसे सिरफ़िरे बाइक ले जा सकते है, कार वाले उस रास्ते पर जाने की सोच भी नहीं सकते है। दिल्ली व आसपास के लोग तो सीधे बाइक पर लेह व ऐसी यात्रा की ओर जा सकते है, लेकिन दूर-दराज मध्य भारत व दक्षिण भारत से आने वालों को जम्मू, पठानकोट या चंडीगढ तक रेल से आकर इन जगहों से अपनी “बाइक यात्रा” की शुरुआत कर सकते है। (हमारे जांबाज़ मराठा वीर साथी तो हर बार नान्देड से ही बाइक चला कर दिल्ली आते है। फ़िर यहाँ से सब साथ जाते है।) एक बात गांठ बांध ले कि आप प्रत्येक दिन का सफ़र सुबह जल्दी मुँह अंधेरे शुरु करे व शाम को रात होने से पहले रुक जाये, जल्दी आराम करे। ऐसी यात्रा करने के लिये जुनून चाहिए इतना जुनून लाने के लिए कुदरत का दीवाना होना पडेगा। सबसे जरुरी बात जो हमारे साथ हुई थी कि कभी भी ज्यादा फ़ासले पर मत चलना नहीं तो फ़िर फ़िर ढूंढते रहना व मोबाइल प्रीपेड मत लेकर जाना वहाँ सिर्फ़ पोस्टपेड यानि बिल भरने वाले मोबाइल ही काम करते है। वाहन की रफ़्तार समय अनुसार रखना।
सामान…………….
बाइक व इंसान के लिये एक प्लग, एक चैन साकेट, व हो सके तो पेंचर लगाने का सामान जरुर रख ले, नहीं तो दो टयूब अपने बैग में जरुर रख ले, क्या पता कब जरुरत पड जाये। बाइक के टायर, चैन का सैट, नये हो, ज्यादा पुराने ना हो, बाइक की सर्विस करा ले, व किसी भी मार्ग से जाये, लेह जाकर अपनी बाइक को जरुर चैक करे। अपने साथ कपडे एक जोडी पहनने के बाद सिर्फ़ दो जोडी से ज्यादा मत ले जाये, जुराब तीन जोडी, बाकि जरुरी सामान जैसे दांत साफ़ करने का, नहाने का जरुर साथ रखे, हाँ एक गर्म हल्का कम्बल/चद्धर ओढने के लिये, एक गर्म बनियान, एक हल्की जैकेट हवा रोकने वाली, दस्ताने, गर्म टोपी/मफ़लर के बिना भूल कर भी मत जाये, चाहे दिल्ली में लू ही क्यों न चल रही हो, कोई भी मौसम हो। हाँ कुछ जरुरी दवाई जरुर रख ले व बैग हो सके तो पिट्ठू ले जाना ज्यादा बेहतर रहता है।
खाने पीने की…………
पूरे मार्ग में कोई समस्या नहीं है। प्रत्येक 40-50 किमी बाद खाने का मिल जाता है, खासतौर पर मांसाहारी लोगों की मौज है। हम जैसे शाकाहारी मैगी/चाऊमीन, रोटी चावल से काम चला लेते है। एक समय का साधा खाना चालीस-पचास रुपये से शुरु हो जाता है। अब जितने चोंचले करोगे उतना मंहगा होता जायेगा।
रात में ठहरने………..
की कोई खास समस्या नहीं है। मार्ग में जम्मू शहर, कटरा शहर, उधमपुर शहर, पटनी टाप सीमित संख्या में, रामबन, अन्नतनाग, श्रीनगर डलझील में, सोनमर्ग होटल में, बाल्टाल टैंट में, द्रास होटल में, कारगिल गुरुद्दारे/होटल में, पत्थर साहिब गुरुदारे में, लेह सिटी मंहगे होटल में, उपशी सस्ते होटल में, पांग टैंट में, सरचू टैंट में, भरतपुर सिटी टैंट में (मत रुकना आक्सीजन की कमी सतायेगी), दारचा पुल के पास दुकानों व पीछे घरों में, कैलोंग, मनाली, कुल्लू, हणोगी माता का मन्दिर होटल जैसी सुविधा वाली धर्मशाला में, मंडी होटल में, बस इतने नाम बहुत है। इनमें से ज्यादातर जगह मात्र एक व्यक्ति सौ रुपये में बात बन जाती है, एक-दो जगह पर दौ सौ का खर्च भी आ जाता है। आप चाहे तो एक दिन के हजार से चार-चार हजार वाले कमरे व होटल भी मिल जायेंगे। जैसा गुड डालोगे वैसा मीठा मिलेगा। मनाली से जाते हुए, ये लेख आपका पूरा साथ निभायेगा। जम्मू से जा रहे हो तो, माता के दर्शन कर अगली सुबह हैली पैड के बराबर वाले मार्ग से उधमपुर आ जाये, फ़िर आराम से शाम तक श्रीनगर आ सकते है, श्रीनगर शहर में कुछ नहीं रखा है जो है, मशहूर निशात बाग व शालीमार बाग भी डलझील के किनारे ही है, यहाँ से गुलमर्ग देख कर शाम तक सोनमर्ग या द्रास आसानी से जाया जा सकता है, इसके बाद कारगिल युद्ध संग्रहालय देखते हुए, कारगिल शहर गुरुद्धारे होते/रुकते हुए, लेह से 26 किमी पहले पत्थर साहिब गुरुद्धारे आ जाये, अगली सुबह दस बजे तक लेह आकर डी.सी दफ़्तर से खर्दूगंला जाने की लिखित आज्ञा ले घूम कर आये, साथ ही अगले दिन के लिये पैन्गोग लेक की भी आज्ञा भी उसी समय ले ले। पैगोग से आकर रात में उपशी रुके, व मनाली की ओर चले आये, बस 3-4 जगह बर्फ़बारी मिलेगी, इस सफ़र में दुनिया के तीन सबसे ऊंचे दर्रे पार करने पडते है, पूरे पांच सौ किलोमीटर का गंजा पहाडी रेगिस्तान(मगर हसीन भी) पार करना होता है, मनाली से जाते समय दारचा के बाद, व आते समय सरचू के बाद बारालाचा दर्रा तो बर्फ़ का समुद्र ही है, बस जबर्दस्त ठण्ड से जूझना पडेगा, इससे ज्यादा कोई खास परेशानी नहीं आयेगी। अरे जब हमारे जैसे का कुछ नहीं बिगडा तो फ़िर किसका बिगडेगा। बर्फ़बारी होते समय ज्यादा सावधानी से बाइक चलानी पडेगी। जून के महीने को छोड कर ज्यादा महंगाई भी नहीं मिलती है। सुरक्षित रात्री-विश्राम के लिये जरुर सावधान रहे, वैसे वहाँ के लोग धोखेबाज कम ही है। फ़िर भी जहाँ रुके फ़ोन से अपने घर जरुर सूचित कर दे व आगे अगले दिन का कार्यक्रम भी बताना ना भूले कि कल कहाँ तक जाना है? सरकारी विभाग के विश्राम गृह में आसानी से जगह मिल जाती है।
जाने का सही समय…….
अपनी नजर में तो हमेशा सारा समय ही सही होता है। जब जी करा, उधर मुहं/मुंडी/बाइक उठा कर चल दो, फ़िर भी इस जगह जाने के लिये दर्रों के खुलने पर निर्भर करना पडता है। जो आमतौर पर मई के आखिरी सप्ताह में जाकर ही खुल पाते है। बरसात में ऐसी जगह जाने से बचना चाहिए, और दर्रों के बंद होने का समय अक्टूबर का आखिरी सप्ताह है। अत: ये कहना ठीक है कि जून से लेकर मध्य अक्टूबर तक सबसे ज्यादा सही समय है।
पैट्रोल का खर्च………..
तो वाहन के अनुसार आयेगा। दिल्ली से मनाली, लेह खर्दूंगला, पैगोंग लेक, अमरनाथ, वैष्णो माता सहित कुल दूरी तीन हजार किलोमीटर के आसपास है। बाइक का खर्च आप अपनी बाइक के औसत से हिसाब लगा लेना, ये ध्यान रखना पहाड में औसत पाँच किलोमीटर कम हो जाता है। फ़िर भी गुणा भाग कर के चलना। कार वाले तो बाइक से तीन गुणा मान कर चले, मनाली से जा रहे हो तो टांडी से अपनी टंकी फ़ुल करा ले क्योंकि इसके बाद लेह सिटी में (350 किलोमीटर दूर) ही पैट्रोल मिलेगा, बुलेट पर जा रहे हो तो एक दस लीटर या पाँच-पाँच लीटर की दो कैनी साथ भर कर रख ले। हमारा यात्रा खर्च तो एक बंदे का कुल/मात्र साढे तीन हजार सब कुछ मिलाकर आया था, उन दस-ग्यारह दिनों का कोई ज्यादा नहीं है। सारे चीजे तो मैने छोड ही रखी है, रोटी के सिवाय, अब ज्यादा खर्चा कहाँ से होता?
अब भी कुछ कसर रह गयी हो तो मुझे बता देना, उसे भी बता दिया जायेगा, अब आपको अगले लेख का इंतज़ार करना है।













इस यात्रा के बाद मैंने श्रीखण्ड महादेव यात्रा, प्रयाग-बनारस पैदल यात्रा, नैनीताल के पास के सभी ताल, हर की दून आदि कई यात्रा कर ली है धीरे-धीरे सभी आपको दिखाऊँगा।
संदीप जी……बहुत ही अच्छी यात्रा रही आपकी……..
अगले लेख का इंतजार रहेगा …..
आपका दोस्त ……..रीतेश
रितेश भाई केदारनाथ यात्रा के बाद अगली पैदल यात्रा दिखानी है।
superb yatra thi , majaa aa gaya……………………………….
aapki shrikhand mahadev ki yatra maine doosre website par padhi thi……………………
bahut great yatra thi. aisa aapne varnan kiya hai, ki lagta hai mein swyam yatra kar raha tha……………
aap travelling mein inspiration ho sandeepjee…………………….
Congrats , Mahadev aap par bahut meherban hai…………….
विशाल जी श्रीखण्ड यात्रा भी एक दो सीरीज के बाद दिखानी है।
बहुत रोचक यात्रा रही सन्दीप जी। जल्दी ही बाकी यात्राओं का भी वर्णन कीजिये।
विभा जी जल्द ही अगली सीरीज मिलेगी।
समापन हुआ एक लम्बे और आकर्षक उत्सव का | सधन्यवाद संदीप |
नन्दन जी आपको भी धन्यवाद।
यात्रा की तैयारी के लिये संक्षिप्त व सटीक विवरण आपके इस लेख की विशेषता है। यह एक सहेजकर रखने योग्य लेख है जिससे इस रूट पर यात्रा करने वालों को बहुत मार्गदर्शन मिलेगा। वास्तव में हरेक यात्रा के अंत में ऐसी ही जानकारी भरा उपसंहार होना चाहिये जो लेख को बहुत ही उपयोगी बना देगा। “घुमक्कड़ डॉट कॉम” पर भ्रमण के मामले में आप “अनडिस्पुटेड हीरो नम्बर वन” हैं।
शर्मा जी आपकी आज्ञा का पालन अवश्य करुँगा, मुझे आप जैसे वरिष्ठ घुमक्कडों से प्ररेणा मिलती है। मेरे लिये कोई और आदेश हो तो अवश्य कहना, मैं अपनी बाइक से सम्पूर्ण राजस्थान भ्रमण पर जाने का इच्छुक हूँ, आशा करता हूँ कि उस दौरान आप से भी मुलाकात अवश्य होगी।
sandeepji great mai bhi june me pro. bana raha ho.
संदीप जी मै अल्टो कार से लखनऊ से लेह जून में जा रहा हू |
मै जानना चाहता हू की अल्टो से जाने में कोई दिक्कत तो नहीं आएगी ?
और कौन सा रूट सही रहेगा ?
कार से जाने के लिए क्या क्या तयारी कर लू
लखनऊ-लेह-कारगिल तक जाना और आना है ४ लोग रहेंगे
नीरज मिश्रा जी व राजेश शुक्ला जी आपकी जून में होने वाली रोमांचक व यादगार यात्रा के लिये अंग्रिम बधाई, आल्टो से जाने में कोई दिक्कत नहीं आयेगी, हमारे साथ भी एक मारुति 800 वाला मनाली से उपशी तक लगभग साथ ही चल रहा था। बस यह ध्यान रखना कि किसी जगह पानी ज्यादा नजर आ रहा हो तो उसकी गहराई चैक किये बिना नहीं घुसना, हो सकता है कि उसमें कोई गडडा ना हो, रुट दोनों प्रयोग करना तभी असली मजा आयेगा। एक से जाना एक से आना, कार से जाने के लिये एक दस ली की कैन पेट्रोल से जरुर भरवा लेना क्योंकि लेह से पहले कारु में आखिरी पेट्रोल पम्प था(अब उपशी में बना है कि नहीं इसकी जानकारी नहीं है, इसके बाद रोहतांग से आगे टांडी में ही पेट्रोल मिलता है जो लगभग 350 किमी होता है, बीच में पेट्रोल मिलने की उम्मीद बहुत ही कम है। और कोई जानकारी की जरुरत हो तो फ़िर याद कर लेना, आपका दोस्त संदीप पवाँर
डियर संदीप … नमस्कार .. आपकी देल्ही -लेह यात्रा ब्रितांत लेख पढ़ा . रोमांचकारी यात्रा के लिए बधाई …. और सबसे जयादा बधाई व आभार अपनी यात्रा कि हर पहलु का विस्तार पूर्ण बर्णन……… मै छत्तीसगढ़ का रहने वाला हूँ .मै और मेरे मित्र छत्तीसगढ़ से लेह निज वाहन ओमनी से करने कि योजना बना चुके है संभवतः जून में ……… कोई सुझाव या चेतावनी …………… मो.न.=9977o49600
श्रीपत जी जून में जा रहे है तो थोडा देर से जाइये ताकि आपको अमरनाथ यात्रा का मौका भी मिल जाए, सवारी मिलकर ६ से ज्यादा नहीं होने चाहिए, जिस मार्ग से जाओ उससे वापिस मत आना दोनों मार्ग से ही असली रोमांच आएगा, अगर दिल्ली से होकर जाओ तो मिलते हुए जाना अच्छा लगेगा, भले ही पांच मिनट के लिए,
यात्रा के लिए शुभ शुभ कामना, ढेर सारी,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
संदीप जी .नमस्कार ………. जबाब के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद .. आप लोगो कि रोमांचक ” बाइक यात्रा ” से प्रभावित हो कर मै और मेरे पांच मित्र अब बाइक से आपके बताये रूट —— मनाली -लेह ———– और —– लेह -श्रीनगर -देल्ही —यात्रा कि योजना फ़ाइनल कर दि है … जून के अंतिम सप्ताह में हम अपनी बाइक ट्रेन में बुक कर देल्ही से यात्रा प्रारम्भ करेंगे ……… यात्रा शुरू करने से पहले आपसे मुलाकात अवश्य करना चाहेंगे …. कृपया अपना कांटेक्ट नंबर देने का कष्ट करेंगे …..श्रीपत
श्रीपत जी बाइक से जा रहे हो तो आपका असली रोमांच से सामना होगा, देखते है की आपको कितने बार बर्फबारी से होकर जाना पड़ेगा, बाईक लेकर आप चंडीगढ़/ जम्मू तक ट्रेन से जा सकते हो, अगर दिल्ली से जाओगे तो भी कोई बात नहीं?
वैसे मोबाइल नंबर मेरी प्रोफाइल में भी लिखा हुआ है फिर भी आपके लिए दे रहा हूँ 09716768680
यात्रा के लिए एक बार फिर शुभ कामना,
संदीप जी , नमस्कार …… अंततः हमारी टीम ने लेह लद्दाख यात्रा बाइक से करने का निर्णय फायनल कर दिया है .. २४ जून को मै और मेरे ५ मित्र छत्तीसगढ़ से अपनी बाइक यात्रा आरम्भ करेंगे …….. संभवतः देल्ही में आपसे २७ जून को मुलाकात हो सकती है .. इस डेट पर आप वहाँ उपलभ्ध रहेंगे न …….. मुझे व मेरी टीम के लिए कुछ शानदार टिप्स और शुभकामनाये तैयार रखेंगे …….. श्रीपत राय
श्रीपत जी राम राम, २७ जून को मैं दिल्ली में ही मिलूँगा, मेरा मोबाइल तो आपके पास है ही जब आप दिल्ली पहुँचो तो सुबह सुबह फोन मिला लेना मैं जरुर मिलना चाहूँगा, शुभकामना
आपके लेख के सामानांतर हमने भी अपने चार मित्रों के साथ दिनांक ५ जुलाई ( छत्तीसगढ़ ) से अपनी यात्रा आरम्भ कर चिरिमिरी (सी.जी.) से देल्ही , देल्ही से मनाली ,मनाली से लेह ,लेह से श्रीनगर , श्रीनगर से जालंधर ,देल्ही . देल्ही से जमुना एक्सप्रेस हाइवे पकड़कर आगरा , और अंत में आपने स्वीट होम २१ जुलाई को पहुच गए ………… आपके के लेख को आदर्श मानकर हमने यात्रा आरम्भ की थी ईश्वार की कृपा से सब कुछ हमारे पक्ष में रहा और यात्रा सुखद रही ……….. आपका बहुत-बहुत आभार
श्रीपत जी आपने बहुत ही अच्छी खबर बतायी है की आपने भी यह शानदार यात्रा सफलता से पूरी कर ली है
आपके विवरण का इसी साईट पर इन्तजार रहेगा जल्द ही विवरण बताइयेगा
आपने इस यात्रा का विवरण इतनी अच्छी तरहसे लिखा है. कि इसे पढनेके बाद मैने मन ही मन अब वहा जानेकी ठान ली है. अगर और भी कोही आना चाहता है, या मुझे अपने साथ ले जा सकता है, तो अवश्य संपर्क करे. धन्यवाद …. संदीपजी
सचिन भाई जरुर जाईये और हो सके तो अपनी यात्रा की तिथि जरुर बता देना ताकि कोई और भी जाना चाहेगा तो साथ हो लेगा।