आगरा से आबू रोड और वहा से अम्बा जी (गुजरात )…..Part.1 |
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- आगरा से आबू रोड और वहा से अम्बा जी (गुजरात )…..Part.1
घुम्मर.कॉम के समस्त पाठको को मेरा नमस्कार.
मेरा नाम रीतेश गुप्ता हैं और मैं आगरा (जहा विश्व प्रसिद्ध ताजमहल हैं) उत्तर प्रदेश का रहने वाला हू । घुमक्कड़.कॉम मैं आने का मेरा उद्देश्य आप लोगो मेरे द्वारा की गयी यात्रा के बारे मैं बताना । अभी हाल ही मैं आबू रोड, माउन्ट आबू , अम्बा जी , उदयपुर एवं नाथद्वारा की यात्रा करके आया हू और इसी यात्रा के बारे में मैं आप सब को अपना अनुभव और वहाँ बिताए समय के बारे बताना चाहता हू ।
इस यात्रा मैं और मेरा परिवार शामिल हैं । हमारी इस यात्रा का दिन सुनिश्चित हुआ २६ जून २०११ दिन रविवार और हमने अपना अग्रिम बुकिंग आगरा फोर्ट अहमदाबाद सुपर फास्ट ट्रेन से कराया । २६ जून २०११ को ठीक १० बजकर २५ मिनट पर हम लोग ट्रेन से आबू रोड के लिए रवाना हो गए । दूसरे दिन सुबह ट्रेन के आबू रोड पहुचने का समय ९ बजकर १५ मिनट हैं ट्रेन १० मिनट (०९:०५ ) पहले ही स्टेशन पर पहुच गयी ।
आबू रोड पहुचने के बाद सोचा की पहले कहा जाया जाये अम्बाजी या फिर माउन्ट आबू , तभी हमारा पहले से बुक किया टेक्सी ड्राईवर आ गया और उसने सलाह दी की पहले अम्बा जी चलते हैं और फिर शाम को मैं आपको माउन्ट आबू पंहुचा दूंगा और कल आपको मैं आपको सारा माउन्ट आबू घुमा दूंगा ।
आबू रोड से अम्बा जी दुरी लगभग २८ से ३० किलोमीटर होगी । आबू रोड राजस्थान राज्य में और अम्बाजी गुजरात राज्य में हैं ।

श्री अम्बाजी माता परिसर का द्रश्य गेस्ट हाउस से
अम्बाजी जी एक सिद्ध शक्तिपीठ हैं और गुजरात का प्रमुख तीर्थ स्थल हैं साल भर यात्री यहाँ पर माता अम्बाजी के दर्शन के लिए आते रहते हैं. खैर १ घंटे बाद हम लोग अम्बा जी पहुच गए. ड्राईवर ने हमें फ्रेश होने के लिए एक गेस्ट हाउस २ घंटे के लिए किराये पर दिलवा दिया ।
१.३० घंटे बाद फ्रेश हो जाने के बाद हम सभी माता के दर्शन के लिए चल दिए तभी हमारे टेक्सी के ड्राईवर ने बताया की मंदिर परिसर में केमरा, मोबाइल, खाने पीने का सामान एवं चमड़े की कोई भी वस्तु ले जाना मना हैं । हमने अपना सारा सामान गेस्ट रूम में रख दिया । उसके बाद वापिस आकर हमने एक दुकान से प्रसाद लिया और अपने जूते वही उतार दिए । मंदिर में काफी भीड़ थी धक्का मुक्की में हमने माता के दर्शन का लाभ उदय व प्रसाद लगाया तथा मंदिर परिसर बने प्रसाद काउंटर से पैक माँ अम्बाजी को भोग लगाया प्रसाद घर के लिए ख़रीदा और वापिस गेस्ट हाउस में आ गये कुछ देर बाद हमने अपना सारा सामान समेटा टेक्सी में डाला और अम्बाजी स्थित जैन मंदिर और पहाड़ो वाली देवी गब्बर (जहा माँ अम्बा जी ने अपने चरण रखे थे) के लिए रवाना हो गए ।
ये जैन मंदिर अम्बाजी और गब्बर के बीच मैं पड़ता हैं । यह जैन मंदिर काफी पुराना हैं और और साथ ही नया मंदिर भी पास में बना हुआ हैं । जैन मंदिर काफी भव्य, सुन्दर और बहुत शांत हैं, छत्तों पर बहुत ही बारीक़ और सुन्दर कारीगरी थी ।

जैन मंदिर के छत्तों पर सुन्दर कारीगरी

जैन मंदिर दरवाज़ा
हमने कुछ फोटो ले लिए वो भी पुराने मंदिर के, यहाँ नए मंदिर मैं फोटो लेना मना था! जैन मंदिर से हमने विदा ली और आगे चल दिए ।
गब्बर पहाड़ अम्बा जी के मंदिर से लगभग ३-४ किलोमीटर दूर हैं । रास्ते में हमने गब्बर तक जाने के लिए उड़नखटोला के पांच टिकिट लिए, एक टिकिट की कीमत ८० रुपये थी । पहाड़ वाली देवी का मंदिर एक ऊँचे गब्बर नाम पहाड़ पर हैं तथा वहा तक जाने के लिए सीडियो व उड़नखटोला से जाया जा सकता हैं । उड़नखटोले से हम लोग ऊपर गब्बर पहाड़ पर गए ।




ऊपर पहाड़ से प्रकृति का बड़ा ही शानदार नज़ारा था, चारो और हरियाली थी और तेज मगर ठंडी हवा चल रही थी मन अति प्रसन था यहाँ पर आकर ।
आसमान में बादलो अपना डेरा जमाया हुआ था , दूर अम्बाजी नगर नजर आ रहा था ! थोड़ी देर प्रकृति आनंद लेने के बाद हम वापिस उड़न खटोले से नीचे आ गए ! नीचे उड़न खटोले के परिशर में बच्चो के झूले व रेस्टोरेंट की व्यवस्था थी ।
कुछ देर बाद हमने आगे का सफ़र जारी रखा और माउन्ट आबू के लिए चल दिए । रास्ते में हमने एक रेस्टोरेंट खाना खाया और शाम ४ बजे तक माउन्ट आबू पहुच गए..।
आगे की यात्रा का विवरण अगले भाग २ में……….
धन्यवाद













Liked your detail post. I heard about all the places mentioned by you but never heard about Gabbar.
Could you provide some detail (history) of Amba Temple?
It will be great if you could put captions with the pictures.
Looking forward to your next post.
Hell Ritesh,
Warm Welcome to Ghumakkar.com,
It was a nice post and pictures too were beautiful. Everything was fine except some typing mistakes, I advice you to check the entire write up for grammatical / Typing mistakes before sending them for publishing. The word used for rope way “Udan Khatola” was very entertaining, I liked it. Its nice to have one more Hindi author on Ghumakkar, Anything written in our mother tongue touches the heart and liked by everyone at first site.
Thanks.
Hello Mr. Mukesh,
Thanks for your comment and your advice. In Future I shall remember.
Vaise App Ne Bhi “Hello Ritesh” Ki Jagah “Hell Ritesh” Type kiya hua hain.
Thanks.
Hello Mr. Mahesh Ji.
Thanks for your comment. In Ambaji Temple, Photography strictly prohibited, so I have no any picture of Maa Ambaji Tample.
If you want to know more about Maa Amabaji Temple please visit Temple Website
http://www.ambajitemple.in
Thanks
Welcome aboard Ritesh.
Ghumakkar.com par आपका स्वागत है. मुझे आशा है कि हम भाग 2 जल्द ही padhenge.
Bahut Badhiya Ritesh Ji,
फ़ोटो देख, लेख पढ कर लग रहा है कि अब तो यहाँ हो ही आऊँ।
Welcome Ritesh.
Well narrated post, pics are equally good.
Prohibition of photography makes upset, but they have their own reasons.
Hello Vinay Ji……
Thanks for Your Comment…
Ritesh ji,
First of all thanks for u details facts of Maunt Abu & Udaipur.
Main abhi kuch dina phele hi (25-1-2012 to 1-2-2012) Maunt abu or Udaipur apni family kai sath ghum kar aiya hoon. Wahan par aap kia battey hue sare jagah maney deikh. Bahut acha laga. Aap ki di hue janarkari kai printout mery paas thi. Wahan per driver to main batta tha ki yahan per tood roock thi kahan gayee, Bahut badi ghanti thi kahan gayee, to driver to shock lagtha tha ki sir aap to pehly baar ayee hoo per aap ko yahan kai baree main sab kuch pata hai ! Aap ki wajah sai hi main maunt abu achey sai ghum saka ! Aap ka ek baar phir sai SUKRIYA !
धन्यवाद मनोज जी…
ये जानकर मुझे बहुत अच्छा लगा की मेरे लिखे हुए लेख आपके के काम आये और आपने उस जगह को बहुत अच्छी तरह से घूमा……
आगे भी नए नए लेख के माध्यम से मेरी ये कोशिश जारी रहेगी की मेरी द्वारा की गए यात्रा के अनुभव आप लोगो के साथ बाट सकू….
thanks