दिल्ली से लेह-लद्दाख बाइक पर 1 (DELHI TO MANALI) |
Table of contents for Delhi Leh Bike Trip
- दिल्ली से लेह-लद्दाख बाइक पर 1 (DELHI TO MANALI)
- दिल्ली से लेह-लद्दाख बाइक पर भाग 2 (ROHTANG PASS TO BARALACHA LA/PASS)
- मोटर बाइक से दिल्ली से लेह-लद्धाख भाग 3 (SARCHU-PANG-TANGLANG LA)
मोटर बाईक से लाल किला से लेह-लद्दाख यात्रा सुनने में ही कठिन लगने वाला शब्द वास्तव में हकीकत में साकार हो गया। जब हम छ बन्दे तीन बाइक पर लाल किले से लेह तक घूम कर आये। लाल किले से लेह तक जाने वाले एक साल में 50 से ज्यादा सनकी(लोग) नहीं होते। लाल-किला से लेह की दूरी वाया मनाली लगभग 1025 किलोमीटर है। लाल-किला से लेह की दूरी वाया श्रीनगर लगभग 1425 किलोमीटर है। हमने दोनों मार्गो का प्रयोग किया।

बचपन से लम्बी दूरी की बाईक सवारी की बड़ी इच्छा थी। मैं पहले भी 7 बार दिल्ली से गंगोत्री बाईक पर जा चुका हूँ। दो बार बाईक से उतराखन्ड के चारों धाम जा चुका हूँ। ऐसी ही एक चार-धाम यात्रा में हम भू-स्खलन की वजह से चार दिन फंस गए थे। चार-धाम यात्रा फिर कभी होगी अभी तो सिर्फ लेह-लद्दाख यात्रा के बारे में विस्तार से पढ़िए।
3 जुलाई 2010 का दिन तय हुआ। सुबह के चार बजे, छ:बन्दे, तीन बाईक पर दिल्ली लोनी बोर्डर के बस डिपो पर मिलने की तय कर 3 जुलाई का इंतज़ार करने लगे। तीन में से एक बाईक महाराष्ट्र से आने वाली थी जो की नांदेड के पास एक गाँव है, कुरून्दा जिसका ताल्लुका है, बसमत और दिल्ली से दूरी है 1524 किलोमीटर के आसपास वाया इंदोर से। कुरून्दा से संतोष तिडके अपने एक और दोस्त गजानंद के साथ तय समय से दो दिन पहले ही एक जुलाई को लोनी-बोर्डर दिल्ली आ गए। दोनों ने 1524 की दूरी केवल दो दिन में तय की।
दो जुलाई को तीनो बाईक के छ: बन्दे, एक साथ मिले और यात्रा की तैयारी पूरी की। नांदेड से ही दो और दोस्त बाबूराव और कैलाश देशमुख का भी फ़ोन आया कि हम भी कल सुबह चल देंगे और आपको अमरनाथ में मिलेंगे।
3 जुलाई को सब सुबह 4 बजे, तय स्थान पर लोनी-बोर्डर बस डिपो के सामने आ पहुंचे। हमारी सवारी रोशनी होने तक दिल्ली को पीछे छोड़ चुकी थी। पानीपत, करनाल होते हुए सुबह के सवा आठ बजे हम अम्बाला के फ़्लाईओवर पर डेरा जमा चुके थे। कुछ देर आराम कर आगे का रास्ता पकड़ना शुरु किया। यही कही पर सबने लघु शंका भी किया जो की बड़ी जोर से लगा था, उससे भी छुटकारा पाया।
चंडीगढ़ तक पहुंचते ही जोरदार बारिश ने हमारा स्वागत किया। अपनी-अपनी बाईक किनारे लगा, हम लोग, अजी हम लोग क्या सड़क पर चलने वाले सब के सब लोग जिसे जहाँ जगह मिली, वो वहां घुस गया। पानी भी झमा-झम जो बरसा था बारिश ने हमारा एक घंटा जरुर बर्बाद किया।
बारिश से कुछ भीगते, कुछ बचते-बचाते हुए, हम छ बन्दे चंडीगढ की बडी-बडी सडको पर बिल्कुल राज्य-मार्गों की तरह तेजी से रोपड पहुँचे। यहाँ सबने दोपहर का खाना खाया। आगे बढते हुए बिलासपुर जा पहुंचे। रास्ते में चाय पीने वाले बन्दों ने चाय पी, जिस दुकान पर हमने चाय पी थी, ठीक उसी जगह बाये हाथ से एक मार्ग नैना देवी मंदिर की ओर जाता है, तथा यहां से दूरी है, मात्र 16 किलोमीट ही है, लेकिन नैना देवी को यही से नमस्कार कर लिया तथा फिर कभी आने की बोल कर हम नैना देवी मंदिर की ओर ना जा कर सीधे सुंदरनगर पहुंचे, यहां पर नदी का पानी रोक बांध बनाकर एक झील बनाई हुई है, जिससे बिजली बनाई जाती है, हम यहां रुके फोटो खीचें व आगे बढते हुए मंडी शहर जा पहुंचे।
मंडी पार करने पर एक रास्ता नदी का पुल बाये हाथ की ओर से पार करने पर पठानकोट की ओर जाता है। पठानकोट यहां से कुल 208 किलोमीटर की दूरी पर है। चंडीगढ से मंडी की दूरी 200 किलोमीटर की है। मंडी पार करने पर 15 किलोमीटर दूर पण्डोह नामक जगह आती है। यहां भी एक बांध है, जिसका नजारा बडा सुंदर है। बांध का नजारा देखने के बाद आगे बढे, 5-6 किलोमीटर आगे हणोगी माता का मंदिर आता है। हणोगी माता के मंदिर में रात में रुकने का अच्छा प्रबंध है, कमरा 150 में हाल में 20 रु का खर्च आता है। हम यहां 4 बजे पहुंच गये थे, इसलिए हमने माता को प्रणाम किया व आगे बढ गये। आखिरी बार जब हम यहाँ आये थे तो मनाली आते व जाते वक्त यही रुके थे।
हणोगी माता मंदिर से लगभग 6 किलोमीटर के बाद एक सुरंग आती है, जो कि पौने तीन किलोमीटर लम्बाई की है। सुरंग पार कर आगे एक रास्ता कुल्लू व एक रास्ता मणिकर्ण की ओर जाता है। मणिकर्ण हम पहले हो कर आये थे इसलिये हम कुल्लू होते हुए मनाली जाने वाले रास्ते पर चल दिए। कुल्लू से मनाली जाने के लिए नदी के दोनों तरफ रास्ते है, सीधे हाथ वाले रास्ते के नज़ारे बहुत खुबसूरत है, इसलिए हम सीधे हाथ वाले मार्ग से नज़ारे देखते हुए गये। मनाली से पहले एक धनुष आकार का पुल बड़ा शानदार है।
शाम सात बजे मनाली जा पहुंचे, अँधेरा होने वाला था। यही पर रात्रि विश्राम किया गया। हम मनाली में सरकारी आवास में रुके, जिसका डोरमेट्री किराया एक बेड का टैक्स सहित ११० रु था। ये हमारा पहला दिन था। सब काफी थके हुए थे, पूरे 525 किलोमीटर की छोटी सी यात्रा ही तो की थी।
नजदीक ही एक होटल में खाना खा कर वापस कमरे पर आ गये। रात में 10 बजे तक सब सो गये। सुबह 5 बजे जो उठना था।
अगले लेख में रोहतांग दर्रा व आगे के बारालाचा दर्रा की बर्फ़बारी में फ़ंसने की कहानी के बारे में


























Welcome aboard Sandeep. Seems like Leh is the toast of the season. I have driven to Manali side few times, and it is tiring even from the confines of a a/c car cabin. Doing it on a bike is really a big ticket thing. kudos.
Look forward to read the next part of your fab journey.
धन्यवाद,
my brother went there last summer on his bike with his school firends , it was amazing trip he told me…i was also scheduled to go with him..but had to cancel at last minute…i guess i was a big loser on this!!!
अब चले जाओ,
संदीप भाई ,
घुमाक्कर पे आपका स्वागत है | बहुत बढिया लेख लेह लदाख पर | आपके अगले लेख का इंतज़ार रहेगा |
साहिल
धन्यवाद, साहिल भाई
quite interesting
हमेशा रहेगा,
काफ़ी टाइम से आप के कॉमेंट्स घुमक्कड़ के लेखकों का उत्साह बड़ा रहे थे. आप के कॉमेंट जीतने इंट्रेस्टिंग थे उतना ही इंट्रेस्टिंग आप का लेख है. एक विनती है , आप फोटो के नीचे उनका नाम लिखना ना भूलें.
आप की अगले लेख का इंतज़ार रहेगा.
महेश जी, आपकी बात मानी
बड़े ही अच्छे विस्तार से आपने अपनी अब तक की यात्रा का वर्णन किया. अब आगे की कहानी का इंतज़ार है. पढने में काफी मज़ा आ रहा है. आगे जल्दी ही लिखियेगा.
आपकी चारधाम वाली यात्राओ के बारे में भी पढना चाहेंगे.
और फोटो थोडा और बड़े लगाइए, ताकि नज़ारे अच्छे से देख पाए.
विनय भाई फ़ोटो के बारे में मुझे अभी तक समझ नहीं आया है, कि ये छोटॆ बडे कैसे किये जाते है,
बहुत अच्छा लेख . खास कर के हिंदी में ऐसे लेख मैं अरसे से खोज रहा था. बहुत बहुत बधाई.
आपको जल्द ही एक और मिलेगा,
आपको जल्द ही गौमुख से केदारनाथ पैदल यात्रा पर ले जाऊंगा
जाट जी मय भी चलूगा अब की बार लेह
आप का भाई
धर्मेन्द्र सांगवान
me jane dhata hu per koie milta he nahi
ma bi 2011 ma leh ladakh bike trip kar ka aaya hu real adventure ma issa jayada khai nahi ha
agar biking ka shok ha or long drive ka to zindagi ma ek bar ya tour jarur karna
leh ma har banda respect bi bhot karta ha
एक ओर साथी मिलगया लेह जाने के लिये
आप का भाई धर्मेन्द्र सांगवान
अहमदाबाद
9327564674
जन्मदिन की हार्दिक शुभकामना
Fantastic tour, 15-20 years back pune-maharashtra me rahenevale Mr. Rajendra Khandelval and friends ,(Rajendra polioke shikar hai)enhone kineatic hondapar ye dellise leh safer ki thi
यार अगली बार जब भी अडवेंचर प्रोग्राम बनाओ तो हमें भी याद कर लेना
आप की यात्रा भी मेरी सोच की तरह है, मुझे भी बाइक से लंबी दुरी की यात्रा करना बहुत ही अच्छा लगता है, मेरे कुछ दोस्त इस बार चिरमिरी छत्तीसगढ़ से दिल्ली-मनाली-लेह-कारगिल-श्रीनगर-अमृतसर-दिल्ली-चिरमिरी की यात्रा पे ६ जुलाई को निकले है मेरा बहुत ही बड़ा दुर्भाग्य है जो मई चाह के भी इस यात्रा में सामिल नहीं हो सका….
आने वाले वर्ष में मेरी पूरी तयारी है इस चोटी पे पहुचने की चाहे जो भी हो जाये …….
१५ जून २०१३ को मेरी यात्रा तै है कोई भी अगर मेरे साथ जाने का इक्षुक हो तो संपर्क करे ………09406224633
CHIRIMIRI-CHHATTISGARH