ऋषिकेश में रिवर राफ्टिंग

वैसे तो मेरा घुमने का ज्यादातर प्लान औचक ही बनता है परन्तु पिछले सप्ताह ही मैंने एक योजनाबद्ध ट्रिप बनाई | योजना का कारण यह था की मेरा कुछ व्यक्तिगत कार्य रूड़की में था और कई दिनों से घुमक्कड़ी कीड़ा काट रहा था | आठ दिन और दस रातों का एक स्थाई मध्यम गति का प्लान था जिसमे अहमदाबाद से दिल्ली, ऋषिकेश, चम्बा, धनोल्टी, देहरादून से वापस दिल्ली होते हुए अहमदाबाद की योजना थी | योजनानुसार आने जाने के लिए ट्रेन की टिकट ले ली गई और रुकने के लिए GMVNL के TRH बुक कर लिया गया |

ऐतिहासिक साबरमती स्टेशन से आश्रम एक्सप्रेस द्वारा दिल्ली के लिए सपत्नी रवानगी हुई | ट्रेन में बैठते ही मुझे ऐसा महसूस होता है रुकी हुई जिंदगी चल दी है और चलने का हल्का हल्का एहसास ट्रेन देती भी रहती है | मुझे ट्रेन के इस पालने में नींद भी बड़ी प्यारी आती है | येन केन प्रकारेण मैंने मिडिल बर्थ का जुगाड़ किया जिसके लिए कई लोगों से बड़े तमीज, अदब एवं धैर्य से वार्ता को अंजाम देना पड़ा | मिडिल बर्थ के अपने अलग फायदे है; इस पर आप लेटे लेटे बाहर देख सकते हैं और खिड़की से आती हुई हवा का आनन्द भी ले सकते है | अगर बाहर चाँद निकला हो तो हलकी दुधिया, सिल्वर जैसी रौशनी में नजरें भी डुबो सकते है | खिड़की के बाहर साथ साथ चलता चाँद और भी खूबसूरत लगता है | चाँद के साथ कुछ घंटे व्यतीत करने के बाद मुझे नीद आ गई और अगली सुबह खिड़की से उगते हुए सूरज को देखते हुए हुई | सुबह ग्यारह बजे पुरानी दिल्ली स्टेशन पर पहले से बुक किये रिटायरिंग रूम में गए जिसकी हालत अत्यंत दयनीय थी | हमारी आगे की यात्रा दिल्ली से रात की मसूरी एक्सप्रेस से हरिद्वार के लिए थी | दोपहर एक बजे हम दोनों ने अपने स्कूल के दोस्त और उसकी भावी हमसफ़र से मुलाकात की और साथ में सरोजनी नगर मार्केट से शादियों के मौसम को देखते हुए शौपिंग की | शाम को दिल्ली स्टेशन पर खाना खाने के बाद क्लोक रूम से सामान लेकर हम मसूरी एक्सप्रेस से आगे की यात्रा के लिए चल दिए | अगली सुबह सात बजे हम हरिद्वार स्टेशन पर थे |

हरिद्वार स्टेशन से बाहर का दृश्

हरिद्वार स्टेशन से बाहर का दृश्

मुझे आम यात्री की तरह आम सुविधाओं के साथ यात्रा ज्यादा आनंद दायक लगती है | हरिद्वार स्टेशन के बाहर ठेले पर चाय पीने के बाद हमने बस अड्डे से ऋषिकेश के लिए बस ले ली | हरिद्वार घुमने का मेरा कोई मन नहीं था क्युकी मैं धार्मिक व्यक्ति नहीं हूँ और न ही मंदिरों में भगवन के नाम पर होने वाले क्रियाकलापों को देख पाता हूँ | मंदिर मेरे लिए आर्किटेक्चर के हिसाब से ही देखने लायक होते हैं या फिर मूर्तिकला के लिए | मूर्तिकला में कॉर्पोरेट स्टाइल विदेशी ग्रुप इस्कॉन आजकल नए मानदंड स्थापित किये हुए है जिसके सामने अन्य मूर्तियाँ फीकी पड़ जाये | ऋषिकेश पहुंचकर हमने GMVNL-TRH(Tourist Rest House) में चेक इन किया |

TRH ऋषिकेश

TRH ऋषिकेश

जिस प्रकार मुझे घुमने का शौक है उसी प्रकार मेरी ‘बेटर हाफ’ के लिए लोकल फ़ूड टेस्ट करना एक मुख्य उद्द्येश्य है | ट्रिप के दौरान वो लोकल फ़ूड ही ढूढती हैं | TRH रेस्तरां में लोकल फ़ूड लिस्ट में कोई भी वस्तु उपलब्ध नहीं थी | पेट की आवश्यकता को देखते हुए हमने पूरी सब्जी खाया और बाहर रिवर राफ्टिंग के लिए पता करने निकले | पास में ही एक रिवर राफ्टिंग की बुकिंग की जिसने हमें एक बजे का समय दिया |

सेल्फी का एक और असफल प्रयास

सेल्फी का एक और असफल प्रयास

हमारे पास एक घंटे थे और इसमे हम लोकल फ़ूड ढूढने निकले | हर ढाबे, रेस्तौरेंट में वही पंजाबी, साउथ इन्डियन फ़ूड उपलब्ध थे | मुझे जानकार बड़ा अजीब लगा जब लोगों ने कहा की लोकल फ़ूड तो गाँवों में ही मिलेगा | ऐसा टूरिस्ट के डिमांड के कारण ही है लोग कही भी जायेंगे छोले भटुरे और इडली की ही मांग करेंगे | खैर यह व्यक्तिगत इच्छा है | फाइनली हमें कुछ मिला नहीं और हम एक बजे राफ्टिंग के लिए नियत स्थान पर पहुँच गये | राफ्टिंग के लिए 8 लोग थे | बाकियों से हम शुरू में अपरिचित थे परन्तु राफ्टिंग के दौरान बेसिक ज्ञान इकठ्ठा करने में सक्षम रहे |

छोरा गंगा किनारे वाला

छोरा गंगा किनारे वाला

राफ्ट पर लोगों में जोश

राफ्ट पर लोगों में जोश

‘जय गंगा मैया’ की ध्वनि के साथ हम लोग राफ्ट लेकर चल पड़े | राफ्टिंग में सर्वाधिक आनंद पर्वतों के बीच से बहती तेज नदी के बीच एक छोटे से राफ्ट से बड़े बड़े हरे-हरे पर्वतों को देख कर होता है | ऐसा लगता है मानो मनुष्य न जाने क्यों गर्व करता है प्रकृति के सामने उसकी कोई सत्ता नहीं है | बड़े बड़े खड़े पर्वत किसी साधना में लीन साधु की तरह लग रहे थे | उनके ऊपर उगे पेड़ झाड़ियाँ उनके बढ़ी हुई दाढ़ी की तरह और चोटियाँ सर के चोटी की तरह प्रतीत हो रही थी | यही शांत, सुखमय वातावरण मानसिक और आतंरिक रूप से संतुष्टि प्रदान करता है | अक्सर चारों ओर देखने में, मैं एक दो पल के लिए भूल भी जाता था; की राफ्टिंग कर रहा हूँ | होश तब आता जब हमारे कमांडर आगे आने वाले रैपिड के लिए आगाह करते | शिवपुरी से राम झुला तक लगभग 16km की राफ्टिंग में कुल नौ रैपिड आते हैं जिन्हें एक से लेकर 5 डिग्री तक चिन्हित किया गया है | आगे आने वाले रैपिड का नाम रोलर कोस्टर था जो 5 डिग्री का था इसमे राफ्ट बाहर से घूमकर अन्दर की ओर तेजी से आती है | हम सभी लोग तेज से चिल्लाये | उत्साह दिखाने के लिए सबके अपने अपने चिल्लाने के तरीके होते हैं | वैसे कमांडर ने रैपिड के बीच में शोर से मना किया था ताकि उसके द्वारा दिए गये कमांड को हम लोग सुन सके | लहरों पर राफ्ट ऊपर नीचे हो रही थी और ठन्डे पानी की बड़ी बड़ी बौछारें हमें भिगो रही थी | ऐसे ही ‘व्हर्लपूल रैपिड’ और ‘बैक टू सेंटर रैपिड’ भी काफी एडवेंचरस था जिसमे पानी का तेज भंवर बनता था जिससे राफ्ट को निकालने की जिम्मेवारी थी |

गंगा नदी के किनारे से लिया गया चित्र

गंगा नदी के किनारे से लिया गया चित्र

राम झूला के थोडा पहले राफ्ट एक जगह किनारे लगाईं जाती है जहाँ बंजी जंपिंग पॉइंट है और पर्वतों से निकलता एक झरना नदी में आकर मिलता है | हम सभी लोग वहां रुके | पत्नी जी ने बंजी जंपिंग के लिए मना कर दिया जिसे मैंने सहर्ष स्वीकार कर लिया | हम लोग झरने के बीच बैठे रहे | ठंडा पानी अन्तर्मन तक को भिगो रहा था | हमने एक दुसरे का हाथ पकडे, पहाड़ो के कठिन रास्तों पर चलकर झरने के एक ऐसे बिंदु तक पहुचे जहाँ दो लोगों के बैठने की जगह थी | वहां मैंने साधना मुद्रा में बैठकर ध्यान लगाने का झूठा प्रयत्न भी किया | अर्ध भाग जल में डूबा हुआ था, अगल बगल से जल बह रहा था और कानों में जल के हलचल की आवाज सुनाई दे रही थी | ऐसे में अपने बचपन की जीवन संगिनी के साथ मैं असीम सुख अनुभव कर रहा था | आप जल में हो और साथ में आपका प्रेम साक्षात हो तो जल से खेल न हो; ऐसा हो ही नहीं सकता | हमने एक दुसरे पर पानी फेंकना शुरू कर दिया | वैसे तो हम दोनों लोग पूरी तरह भीगे हुए थे पर हर बार के साथ पानी फेकने का उत्साह बढ़ता ही गया | वहां ढेर सारे ग्रुप थे जो फोटो खीचने खिचाने में ज्यादा व्यस्त थे | हम दोनों लोग फोटो से ज्यादा उस महत्वपूर्ण क्षण को जीने में ज्यादा यकीन रखते हैं | हमारी फोटो भी अन्य द्वारा सौहार्द स्वरुप ही ली गई होती है|

झरने के बीच जल से खेलते हम लोग

झरने के बीच जल से खेलते हम लोग

वहां से आगे हम अपनी राफ्ट लेकर आगे बढे | लोगों ने अपनी पोजीशन भी शिफ्ट की कुछ फ्रंट से पीछे आये और मैं फ्रंट पर आ गया | फ्रंट का अनुभव अलग होता है जिसमे और जिम्मेवारी का एहसास होता है और राफ्ट के सबसे आगे होने का नाते बौछारों से खेलने का और मौका मिलता है | बीच बीच में जय गंगा मैया का जयकारा स्वयमेव लग जाता था | आगे आकर एक जगह पर कमांडर ने राफ्ट से कूद कर नदी में उतरने का संकेत दिया | मैं भी पत्नी जी को थोडा मनाने के बाद जल में कूद गया | हम सेफ्टी बेल्ट बांधे हुए थे, सो डूबने का कोई डर नहीं था | मैंने स्वयं को पानी में खुला छोड़ दिया व जल की सतह पर आकर दोनों हाथ फैलाकर लेट आ गया और आखे मूँद ली | ऊपर सूरज पहाड़ों के बीच से ताक रहा था और नीचे गंगा का ठंडा जल बिस्तर बना हुआ था | मन जिस असीम आनंद में गोते खा रहा था मेरे लिए उसका वर्णन शब्दों में कर पाना मुश्किल है | राम झूला के नीचे से निकलते हुए हमारे कमांडर ने लेफ्ट को फॉरवर्ड और राईट को बैकवर्ड का कमांड दिया जिससे पूरी राफ्ट वही घुमने लगी और हमारी आखें के सामने से पर्वत नदी हरे पेड़ों का एक चलचित्र सा चलने लगा | राम झूला के नीचे से हम घूमते हुए निकले |

पहाड़ों के मध्य से निकलती गंगा नदी

पहाड़ों के मध्य से निकलती गंगा नदी

अक्सर लोगों को राफ्टिंग शुरू होने के थोड़े ही देर बाद ऐसा महसूस होने लगता है की वे एक कुशल राफ्टर हो चुके हैं और पूरी राफ्ट वे ही चला रहे हैं या उनका योगदान ही सबसे महत्वपूर्ण है | कुछ लोग तो अन्य को सिखाने भी लगते है की ऐसे करो, वैसे करो | परन्तु अंत में अपने कमांडर हरीश रावत से बात करने पर मुझे पता चला की सबसे पीछे बैठकर वही सबकुछ हैंडल कर रहा है | हम लोग तो बस महसूस कर रहे थे की राफ्ट हम चला रहे हैं |

कमांडर हरीश रावत के साथ

कमांडर हरीश रावत के साथ

लगभग 3 घंटे की राफ्टिंग के बाद हम लोग राम झुला पंहुचे | TRH राम झूले से 10 मिनट के वाल्किंग दूरी पर है | चुकी राफ्टिंग में हम भीग चुके थे सो हमने सबसे विदा ली और वापस अपने होटल के लिए रवाना हुए | होटल पहुचकर कपडे बदलकर आराम किया और होटल के अन्दर ही घुमे | सरकारी होने के कारण होटल बहुत स्पेसियस था तथा अन्दर एक बेहतर पार्क और ग्रीनरी थी | एक घंटे के बाद हम लोग पैदल चोटीवाला रेस्टोरेंट में रात्री भोजन के लिए निकले |

सड़क से गंगा का रात्रि दृश्य

सड़क से गंगा का रात्रि दृश्य

चाँद की उजली रोशनी में हम राम झुला से होते हुए गंगा नदी के उस पार चोटीवाला रेस्टोरेंट की पंहुचे | चोटीवाला रेस्टोरेंट ऋषिकेश का प्रसिद्द रेस्टोरेंट है | इसकी खासियत यही है की सुबह से शाम-रात तक इसके सामने छोटी लगाये मेक-अप किये हुए एक व्यक्ति बैठा रहता है जिसके साथ लोग फोटो लेने के लिए लाइन लगाये रहते हैं | हमने होटल में जाकर कढ़ाई पनीर और दाल फ्राई का आर्डर दिया क्युकी लोकल फ़ूड के नाम पर यहाँ भी बस मेन्यु में अंकित लिस्ट ही थी | हमने लोकल फ़ूड नहीं तो लोकल टेस्ट का ही आनंद उठाया और बाहर आकर चोटीवाले व्यक्ति के साथ एक फोटो ली |

चोटीवाला

चोटीवाला

मार्केट में घुमते टहलते हम लोग वापस होटल पंहुचे | थके होने के कारण जल्द ही हमें नींद आ गई | अगले दिन सुबह मुझे अपने व्यक्तिगत कार्य के लिए रूड़की जाना था | सुबह खा-पीकर हम उत्तराखंड परिवहन निगम की बस से रूड़की के लिए निकल लिए | कार्य सम्पादन के पश्चात् दोपहर का भोजन वहीँ किया और शाम में वापस ऋषिकेश के लिए बस पकड़ ली | चम्बा जाने के लिए बस ऋषिकेश से ही मिलती है | ऋषिकेश से आगे की सेवा गढ़वाल बस निगम द्वारा उपलब्ध कराया जाता है | चम्बा से धनोल्टी और देहरादून की यात्रा का विवरण अगले लेख में |

8 Comments

  • Uday Baxi says:

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  • Pravesh says:

    Very Good write up Shivam Ji.

    Rishikesh rafting is all-time favourite. I have also experienced the same many times.

    Keep travelling & keep writing.

    Waiting for your next post.

    Regds

  • Nandan Jha says:

    Rishikesh white-water rafting is quite a rage here (Delhi and around). I have been there a few times and we stayed at a riverside beach camp, that adds more cliche to this whole thing :-). Talking about the control, in one of our sojourns, the commander himself fell, hehe. Fortunately almost all of us (a part of group) have been to raft multiple times and within no time, everyone was acting as a commander. It was quite a chaos.

    From Ahmedabad, it would have been a long journey. Delhi-Rishikesh is pretty well connected by roads. Buses are a bit uncomfortable but good Volvos are plying so you could have reached Rishikesh the same night.

    Everytime I read about Rishikesh, I want to go again. Last I went was about an year back, in Nov 2014. There is a very quaint (and popular at the same time) cafe, called ‘Ganga Cafe’ right on the bank of river (on the other side, chotiwala side). The whole feel of this small town is very spiritual. Thank you Shivam for refreshing my memories. So on to Chamba now ?

    • Shivam Singh says:

      Forgot to mention nowadays camping is banned in shivpuri by National Green Tribunal (NGT) and i support it by heart. Camping creating major encroachment in the rivet bed which is a long term impact on environment.
      I had enjoyed camping+rafting few times during my college days in delhi.
      Chamba done Dhanaulti in the pipe.
      Thanks alot.

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